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कील-मुंहासों से छुटकारा पाएं

डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. रश्मि शेट्‌टी के साथ हुई एक बातचीत, जिसमें उन्होंने पिम्पल्स से निजात पाने के लिए कुछ टिप्स और ट्रिक्स शेयर किए हैं।

मुंहासे क्या हैं?
हमारी त्वचा में कई ग्लैंड्स होते हैं, जिनमें से एक ऑयल ग्लैंड का नाम है सेबेसियस ग्लैंड। जो हमें रोमछिद्र (पोर) की तरह दिखाई देता है, वह इस ग्लैंड का मुंह होता है। यह ‘सीबम' नामक एक ऑयली चीज़ प्रोड्यूस करता है, जो रोमछिद्रों से बाहर निकलता है।

यदि सीबम बाहर न निकल पाए तो यह वाइट हेड बन जाता है। इसे क्लोस्ड कॉमेडॉनीस कहते हैं। यदि आपके रोमछिद्रों से तेल तो बाहर निकलता है, लेकिन गाढ़ा होने के कारण यह फंस जाता है तो फिर वह डेड सेल्स के साथ मिक्स हो जाता है। उसके अंदर का कंटेंट ऑक्सीडाइज़्ड हो जाता है। तब यह ब्लैक हेड या एक ओपन कॉमेडॉनीस बन जाता है।

यदि इनमें से कोई इन्फे़क्टेड हो जाए तो?
यदि इनमें से कोई इन्फे़क्टेड या इन्फ़्लेम्ड हो जाए, तो यह एक मुंहासा या एक पिम्पल बन जाता है। इसका रंग लाल हो जाता है और यदि यह इन्फे़क्टेड है तो इसमें पस भी भर जाता है। यह एक पूरी तरह से विकसित मुंहासा बन जाता है। इनमें से कुछ फट जाते हैं तो कुछ अंदर ही रह जाते हैं। यदि दो-तीन मुंहासे साथ में हों तो वे सिस्टिक भी हो सकते हैं।

क्या मुंहासे और पिम्पल एक ही चीज़ है?
मेरे पास बहुत से टीनएजर्स आते हैं और बताते हैं कि उन्हें मुंहासे नही, पिम्पल हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि मुंहासे और पिम्पल एक ही चीज़ है।

टीनएजर्स को पिम्पल्स कब होना शुरू हो जाते हैं?
13 वर्ष की उम्र से और जब भी आपके हार्मोन्स किसी बदलाव से गुज़रें।

मुंहासों के साथ और कौन से फ़ैक्टर जुड़े हुए हैं?
हेरिडिटरी इसमें एक बड़ा फ़ैक्टर है। दूसरी चीज़ें जैसे लाइफ़स्टाइल, डैंड्रफ़, शरीर का वज़न, ओवरी की फ़ंक्शनिंग आदि। ये सभी फ़ैक्टर मुंहासों के लिए ज़िम्मेदार होते हैं। 

यदि किसी टीनएजर को बहुत ज़्यादा मुंहासे हों तो उसे कैसा फ़ील होता है?
मैंने बहुतों को देखा है जो हिम्मत हार जाते हैं, जो कि आपको बिल्कुल नहीं करना चाहिए। मैं जानती हूं कि कहना आसान होता है और करना मुश्किल। सिर्फ़ एक या दो महीने पहले मेरी एक मां से मुलाक़ात हुई, जो इस बात पर रोने लगी कि उनकी बेटी को मुंहासे थे और हाल ही में विदेश के स्कूल से लौटी थी। उस लड़की का विश्वास टूट चुका था। मैं उस लड़की में ट्रॉमा देख सकती थी, जो कि उसकी मां के चेहरे पर भी था।

मुंहासों से परेशान होने पर एक टीनएजर को क्या करना चाहिए?
सबसे पहले यह याद रखिए कि आप इससे बाहर आ जाएंगे। दूसरा, एक डॉक्टर से मिलिए। लेकिन जब आप डॉक्टर के पास जाएं तो किसी भी तरह के जादू होने की उम्मीद न करें।

ऑनलाइन फ़ैशन ब्लॉगर्स से टिप्स लेने पर आपका क्या ख़्याल है?
आप लोग इंटरनेट पर जाते हैं और ब्लॉगर्स से टिप्स ले लेते हैं। इनमें से कुछ ब्लॉगर्स तो कॉलेज ग्रेजुएट भी नहीं हैं। उनकी सलाह मत लीजिए। ये चीज़ें स्थिति को और बिगाड़ देती हैं। 

आपको किस स्टेज में इसके इलाज की ज़रूरत होती है?
पहले दिन से ही आपको इसके इलाज की ज़रूरत होती है। बहुत से मुंहासे दाग़ छोड़ जाते हैं, मुंहासा भले ही चला जाए लेकिन उसका दाग़ रह जाता है। तब आप जीवनभर के लिए उसको लेकर परेशान रहते हैं और यहां तक कि सबसे अच्छे गैजेट्स भी उसे मिटा नहीं सकते। मैं आपको यही बताना चाह रही हूं कि इसे फ़िक्स करना आसान है। इसलिए जाइए और मदद लीजिए।

क्या एग्ज़ाम की टेंशन से भी मुंहासे हो सकते हैं?
किसी भी तरह की टेंशन से मुंहासे हो सकते हैं। किसी भी टेंशन की स्थिति में शरीर में हॉर्मोन स्रावित होने लगते हैं, जिससे स्ट्रेस से लड़ने में मदद मिलती है। ऐसे अधिकतर हॉर्मोन्स हेयरफ़ॉल और मुंहासे का कारण बनते हैं। 

ग़लत तरह का भोजन जैसे फ्रायड फ़ूड और मुंहासों के बीच क्या सम्बंध है?
फ्राय करने के लिए जिस तरह के तेल का उपयोग करते हैं, वह सेचुरेटेड है या अनसेचुरेटेड है, इस बात पर यह निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, यदि आप दालचीनी को चॉकलेट में डिप करते हैं तो यह एक घातक कॉम्बिनेशन होगा। शुगर और फ्रायड भी, ये कुछ ऐसी चीज़ है, जिसे आपको अवॉइड करना चाहिए। 

कई टीन्स यह शिक़ायत करते हैं कि मुंहासों के कारण वे अच्छी सेल्फ़ी नहीं ले पाते हैं! 
सवाल सेल्फ़ी का नहीं है। कैमरा और आपके चेहरे के बीच दूरी का है। पिम्पल्स वाला चेहरा लेकर सेल्फ़ी लेने पर आप फ़िश-फे़स की तरह दिखाई देते हैं, यानी आपकी नाक, होंठ और आंखें बड़ी दिखाई देंगी। यही कारण है कि आपका चेहरा बिगड़ा हुआ दिखाई देता है। आप जिस फ़ोन कैमरे से सेल्फ़ी लेते हैं, वह उस कैमरे से बहुत अलग होता है, जिससे मॉडल्स का फ़ोटोशूट किया जाता है। अपनी सेल्फ़ी को किसी एक्टर या मॉडल की प्रोफ़ेशनली खींची गई फ़ोटो से कम्पेयर न करें। इसलिए यदि आपके किसी दोस्त ने या पड़ोसी ने कोई अच्छी फ़ोटो पोस्ट की है तो उसके बारे में बुरा महसूस न करें। दूसरी बात कि हम सभी के जीवन में बुरे दिन आते हैं, आख़िरकार हम सभी इंसान हैं। तीसरी बात कि इसका स्ट्रेस न लें। कोई भी दो लोग एक जैसे नहीं होते हैं। आप कैसे यह उम्मीद कर सकते हैं कि दो लोगों की स्किन एक जैसी होगी? आप एक टीनएजर हैं, आपके सामने आपकी पूरी ज़िंदगी है। आप बहुत ख़ूबसूरत हैं। 

टीनटॉक इंडिया जैसे प्लेटफ़ॉर्म क्या हैं?
हमारे समय में, इस तरह के प्लेटफ़ॉर्म नही थे। हमें सलाह देने के लिए सिर्फ़ मां, पापा या फिर कोई आंटी हुआ करती थीं। टीनटॉक इंडिया आपको एक्सपर्ट से पूछने का एक मौक़ा देती है। यह और भी सोफ़िस्टिकेटेड है, जहां आप जानते हैं कि आपके प्रश्न का जवाब कौन दे रहा है। यहां एक पूरी टीम है, जो सारी चीज़ों को एक साथ ला रही है और आप बिना डरे उनकी सलाह मान सकते हैं। जब आपके पास इस तरह का प्लेटफ़ार्म होता है तब आप जानते हैं कि आप उनकी सलाह पर भरोसा कर सकते हैं।

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एक्सपर्ट स्पीक : सुसाइडल थॉट्स से निपटने के टिप्स

वोवी भगवागर, ट्रॉमा वर्क पर स्पेशल फ़ोकस करने वाले सायकोथैरेपिस्ट
Ritika SrivastavaTeentalkindia Counsellor

क्या आप किसी ऐसे टीनएजर का एक्सपीरियंस हमसे शेयर कर सकते हैं, जिसे सुसाइडल थॉट्स आए हों?

मैंने ऐसे बहुत-से केस देखे हैं, जहां टीन्स ने कॉलेज से ड्रॉप ले लिया या विदेशों में पढ़ाई के दौरान एकेडमिक प्रेशर और कॉम्पीटिशन के कारण भारत लौट आए।

-वे एकेडमिक स्ट्रेस से जूझ नहीं पाते हैं।
-वे बहुत ज़्यादा पीयर प्रेशर भी फ़ेस करते हैं; किसी चीज़ में फ़िट न हो पाने की समस्या का भी।
-उन्हें लगता है कि उनके द्वारा चुनी गई एकेडमिक फ़ील्ड उनके लिए नहीं है।

टीन्स के कॉलेज छोड़ने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। लेकिन जब वे एक बार ऐसा कर लेते हैं तो उन्हें फिर से कॉलेज जाने में शर्म महसूस होती है। इससे उनमें एंग्ज़ायटी और डिप्रेशन हो सकता है। कुछ लक्षणों पर ध्यान दीजिए :

-उन्हें दिनभर आलस बना रहता है। बिस्तर से निकलने में मुश्किल पेश आती है।
-दोस्तों के साथ बाहर जाने जैसी नॉर्मल एक्टीविटीज़ के लिए थोड़ा-सा या बिल्कुल भी मन नहीं होता।
-अनियमित खान-पान।
-डिप्रेशन और एंग्ज़ायटी के कारण टीन्स सुसाइडल फ़ील कर सकते हैं।

डिप्रेशन के लक्षण क्या हैं?

1. इसकी शुरुआत धीरे-धीरे होती है। एक नेगेटिव थॉट-पैटर्न दिमाग़ में अपनी जड़ें जमा लेता है, जहां डिप्रेसिंग थॉट्स मौजूद रहते हैं। एक टीन अपने अतीत, वर्तमान और भविष्य को लेकर नेगेटिव हो सकता है।
2. बेचैनी और व्याकुलता।
3. बहुत कम या बहुत ज़्यादा सोना।
4. भूख न लगना या ओवर-ईटिंग। चिड़चिड़ा हो जाना।
5. ये लक्षण अपने आप कम नहीं होते; बल्कि समय के साथ और बदतर होते जाते हैं।

एंग्ज़ायटी के क्या लक्षण होते हैं?

1. मन का डर कई तरीक़ों से सामने आ सकता है। एक यह हो सकता है उन्हें परीक्षा न देने जाना हो या वो किसी दोस्त से मिलने न जाना चाहते हों।
2. पैनिक अटैक, चिपचिपे/पसीने भरे हाथ। उदाहरण के लिए, वो सिचुएशन्स को अप्रोच नहीं करना चाहते और नई सिचुएशन को अवॉइड करना शुरू कर देते हैं।
3. नींद में परेशानी।
4. मितली आना या बार-बार सिरदर्द करना।

ये लक्षण लम्बे समय तक बने रहते हैं।

टीनएजर्स को सुसाइडल थॉट्स को बचाने के उपाय :

1. उनकी परेशानी समझें : टीनएजर से बात करें और उनके डिप्रेशन या एंग्ज़ायटी की गहराई जानने की कोशिश करें।
2. टेस्ट करवाएं : कई टेस्ट करवाएं, जिसमें ब्लड टेस्ट भी शामिल है।
3. सायकियाट्रिस्ट की मदद : यदि टीन ने कुछ दिनों से कुछ नहीं खाया है, बहुत सारा वज़न घट गया है और वे लगातार रोने लगे हैं तो उन्हें सायकियाट्रिस्ट के पास रैफर करना।
4. थैरेपी- इसमें अपनी लाइफ़स्टाइल बदलने के लिए एक्टीविटीज़ को शेड्यूल करना शामिल है।
5. थिंकिंग पैटर्न- नेगेटिव थॉट्स पर काम करना ज़रूरी है। आप नेगेटिव थॉट्स को दूर कर सकते हैं। हमारा दिमाग़ नेगेटिव और पॉज़िटिव डाटा को बैलेंस कर सकता है। हालांकि, एक डिप्रेस्ड व्यक्ति का दिमाग़ नकारात्मक विचारों की ओर ही जाता है और पॉज़िटिव चीज़ों को नकार देता है।

मैंने नेगेटिव थिंकिंग को रैशनल बनाने की कोशिश की है। जैसे : मैंने 95 प्रतिशत स्कोर नहीं किया है और मैं अपनी उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी हूं, लेकिन मैंने 80 प्रतिशत स्कोर किया है और अंग्रेज़ी में टॉप किया है। इस तरह मैं उन्हें पॉज़िटिव डाटा देखने में मदद करती हूं।

एंटी-डिप्रेसैंट्स के क्या कोई साइड-इफ़ेक्टस हैं?
इसके साइड इफ़ेक्ट से अधिक बेनेफ़िट्स हैं। दवाइयां कभी भी एडिक्टिव नहीं बन सकतीं। ऐसा नहीं होगा कि आपने अभी गोली ली और आपको तत्काल आराम मिल जाएगा। एंटी-डिप्रेसैंट्स को सिस्टम में सेटल होने में 4-6 हफ़्तों का समय लगता है। एडिक्टिव चीज़ें आपको तत्काल रिज़ल्ट देती हैं। एंटी डिप्रेसैंट्स ब्लड स्ट्रीम तक पहुंचती है और समय लेती हैं। साथ ही कोई भी बिना प्रिस्क्रिप्शन के यह दवाई नहीं देता है।

अपने डिप्रेस्ड बच्चों की मदद के लिए पैरेंट्स क्या कर सकते हैं?
बहुत पढ़े-लिखे पैरेंट्स भी कभी-कभी यह समझ नहीं पाते हैं कि उनके बच्चे किस चीज़ से गुज़र रहे हैं। पैरेंट्स की ओर से कॉमन रिस्पॉन्स रहते हैं कि, ‘पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे रहे हो, इसलिए यह हो रहा है।' वो अधिक सहानुभूति रखकर अपने बच्चों की मदद कर सकते हैं। उन्हें इस बात को स्वीकारना चाहिए कि डिप्रेशन और एंग्ज़ायटी असल समस्याएं हैं, जिनके लिए प्रोफ़ेशनल मदद की ज़रूरत होती है।

हम सभी मेंटल हेल्थ के स्टिग्मा से मुक़ाबला कैसे कर सकते हैं?
जागरूकता और शिक्षा इस मेंटल हेल्थ के स्टिग्मा से मुक़ाबला करने के तरीक़े हैं। टीनएजर्स इंटरनेट पर बहुत कुछ पढ़ते रहते हैं, जिनमें से बहुत-सी चीज़ों का कोई अर्थ नहीं होता है। टीनटॉकइंडिया एक ऐसी वेबसाइट है, जो सारे इशूज़ कवर करती है और वेल-रिसर्च्ड कंटेंट उपलब्ध करवाती है।

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