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मैग्ज़िमम एकेडमिक पोटेंशियल पाने के टिप्स

माया कृपलानी, जसलोक हॉस्पिटल में कंसल्टेंट सायकोलॉजिस्ट और फ़ैमेली थेरेपिस्ट

क्या कोई ऐसी चीज़ है, जो टीनएजर्स से एग्ज़ाम से पहले नहीं कहनी चाहिए?

माया : परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करने की नेचरल एंग्ज़ायटी होती है, ख़ासकर 10वीं और 12वीं, जिनके रिज़ल्ट आपके फ्यूचर को तय करने वाले होते हैं। ऐसे में दबाव होना तय है। इस तरह की सिचुएशन में, उनसे यह कहना कि परीक्षा अच्छे-से देना, बिल्कुल मददगार नहीं होगा। वास्तव में किसी टीनएजर को जब यह कहा जाता है कि उन पर दबाव है तो वह फिर दोगुना हो जाता है। इस तरह की स्थिति में पैरेंट्स की बड़ी ज़िम्मेदारी होती है। ज़रूरत है कि पैरेंट्स और टीनएजर्स साथ बैठें और एक सपोर्टिव डायलॉग हो। 

क्या आप विस्तार से बता सकती हैं कि टीन्स के साथ ‘सपोर्टिव डायलॉग' का क्या अर्थ होता है?
माया : कुछ प्रश्न जो पूछे जा सकते हैं : 
• क्या आप परेशान हैं?
• आपके हिसाब से सबसे बुरी चीज़ क्या हो सकती है?

टीनएजर के साथ बातचीत करने और उनके जवाबों को सुनने-समझने के बाद उनके साथ सहानुभूति रखें। उन्हें सुनें। उनका पॉइंट ऑफ़ व्यू, उनकी सीखने को लेकर आ रही परेशानियां, स्कूल की दूसरी चिंताएं और अन्य बातें जानने के बाद ही आप उनकी सही मायने में मदद कर पाएंगे।

क्या आप किसी ऐसी आदत का सुझाव दे सकते हैं, जिसे टीनएजर्स एग्ज़ाम में सक्सेस बढ़ाने के लिए एडॉप्ट कर पाएं?

माया : अक्सर, जब भी टीनएजर्स अपनी उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाते हैं तो वे ख़ुद को दोष देने लगते हैं। इसे ‘रुमिनेटिव थॉट पैटर्न' कहते हैं जिसमें वे अपनी धारणाओं को जैसे ‘मैं फ़ेलियर हूं', ख़ुद ही से बार-बार कहते हैं। इस पैटर्न को तोड़ने का तरीक़ा यह है कि एक नई थॉट प्रोसेस अपना ली जाए। यह नई थॉट प्रोसेस टीनएजर को फिर से मज़बूती प्रदान करने वाली होनी चाहिए कि वे फ़ेलियर नहीं हैं। वे अपनी फ़ीलिंग्स के बोझ तले न दब जाएं, इसमें पैरेंट्स एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

ऐसी कौन सी कॉमन चीज़ें हैं, जो टीनएजर्स को परेशान करती हैं?

माया : टीनएजर्स को बहुत-सी चीज़ें परेशान कर सकती हैं, जैसे :

•    मैं अपने दोस्त के जितना अच्छा नहीं हूं
•    फ़ेल होने का डर
•    अपने लक्ष्य तक न पहुंच पाने का डर

जब टीनएजर्स के एकेडमिक परफ़ार्मेंस की बात होती है तो क्या पैरेंट्स का एटीट्यूट मैटर करता है?

माया : टीनएजर्स को सुनने और सुनाने की ज़रूरत होती है, लेकिन कभी-कभी पैरेंट्स अपने बच्चों को लेकर अधिक चिंतित हो जाते हैं और उनसे बहुत सारी उम्मीदें पाल लेते हैं। कुछ चीज़ों को दिमाग़ में रखना ज़रूरी है :

•    किसी भी तरह की तुलना टीनएजर को निराश कर सकती है 
•    प्रिज़र्वेंस जैसी वैल्यूज़ सिखाना मददगार हो सकता है
•    पारिवारिक माहौल का भी फ़र्क़ पड़ता है। यदि घर में किसी तरह का झगड़ा होगा तो टीनएजर्स डिस्ट्रैक्ट हो सकते हैं। 
•    परिवार को टीन्स से उनके सपने, डर, महत्वाकाक्षाएं और साथ ही एकेडमिक गोल्स के बारे में बात करने की ज़रूरत है।
•    बच्चों को आभार व्यक्त करना और अनुशासन में रहना सिखाएं। 

पैरेंट्स और टीनएजर्स के बीच में बॉन्ड बनाने के क्या तरीक़े हो सकते हैं?

माया : एक असरदार तरीक़ा तो यह है दिन में किसी भी समय का भोजन साथ मिलकर करें। जब आप सब साथ हों तो सिर्फ़ एकेडमिक्स ही नहीं, दूसरे विषयों पर भी टीनएजर्स से बात करने की कोशिश करें।

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इंटरनेट को सेफ्टी के साथ उपयोग करने के डॉ. अविनाश डिसूजा के टिप्स

डॉ. अविनाश डिसूजा कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट एंड कंसल्टेंट
Ritika SrivastavaTeentalkindia Counsellor


डॉ. अविनाश डिसूजा एक साइकोलॉजिस्ट हैं, जो टीनएजर्स के संग बड़े स्तर पर काम करते हैं और कई टीनएजर इशू को टेकल करने में मदद भी करते हैं। हमने डॉ. डिसूजा से संपर्क किया और पूछा कि वह इंटरनेट के इस्तेमाल और इसके नुकसान को स्पष्ट करते हुए इस पर कुछ रोशनी डालें। इंटरनेट को सुरक्षा के साथ उपयोग करने के बारे में वो क्या कहते हैं, यहां जानते हैं…

टीटी : एक व्यक्ति सुरक्षित रूप से कैसे इंटरनेट का उपयोग कर सकता है? 
अविनाश डिसूजा : इंटरनेट आज एक ज़रूरत है और मैं इंटरनेट से उतना ही प्यार करता हूं जितना आप करते हैं। इंटरनेट उपयोग करना सीखने का लक्ष्य यह होना चाहिए कि यह सिर्फ आपके लिए फायदेमंद हो और इसका कोई और उपयोग न हो। 
आप सोशल मीडिया पर लोगों के साथ चैट कर सकते हैं, फ़ोटो पोस्ट करने के लिए आप कुछ साइटों का उपयोग कर सकते हैं, लेकिन ऐसा करते समय बेहद सावधानी बरतना ज़रूरी है। 
अक्सर हमें सोशल मीडिया पर जितने दोस्त मिलते हैं हम उन सभी से प्यार करते हैं। मेरे सोशल मीडिया पर भले 800-1000 दोस्त हो सकते हैं, लेकिन उनमें से कितनों को मैं अपनी ज़िंदगी में पर्सनली जानता हूं और उनमें से कितने वास्तव में जानने लायक हैं। कभी-कभी अधिक फ्रेंड्स बनाने के चक्कर में हम अपने पास आने वाली हर फ्रेंड रिक्वेस्ट को एक्सेप्ट कर लेते हैं, हालांकि यह ज़रूरी है कि हम सोशल मीडिया पर फ्रेंड्स को बहुत सावधानी से चुनें, क्योंकि हम अपनी पर्सनल लाइफ को इस सो कॉल्ड "फ्रेंड सर्कल" के लिए खोल रहे हैं।

टीटी : इंटरनेट की लत क्या है और इसके बारे में क्या साफ किया जाए? 
अविनाश डिसूजा : कभी-कभी हम सोशल मीडिया को लेकर एडिक्टिव हो जाते हैं। हम अपने परिवार से भी दूर हो जाते हैं। हालात यह होते हैं कि हम सोशल मीडिया पर लोगों से बात करने में इतना व्यस्त हो जाते हैं कि अपने आसपास के लोगों की अनदेखी कर सकते हैं। 
इंटरनेट से हमें प्यार है क्योंकि इससे हम सीखते हैं, साझा करते हैं, आगे बढ़ते हैं - लेकिन हम इसमें अपना कीमती समय देते हैं, जो मायने रखता है। मैंने अपनी प्रेक्टिस में देखा है, जो टीनएजर हर दिन 4 घंटे या इससे ज़्यादा समय रोजाना इंटरनेट पर बिताते हैं, इस वजह से उनकी पर्सनल लाइफ में समस्याएं होती हैं। ऐसे में उनके पैरेंट्स और फ्रेंड्स से भी पर्सनल रिलेशन खराब हो जाते हैं। 
इसलिए यह ज़रूरी है कि आप टीन्स इंटरनेट का उपयोग अपने फायदे के लिए करें और ख़ुद को इसका एडिक्टेड होने की अनुमति न दें। 

टीटी : ऑनलाइन चैटिंग और प्रामाणिक जानकारी साझा करने के बारे में आपके क्या विचार हैँ? 
अविनाश डिसूजा : जब आप चैटिंग के लिए इंटरनेट का उपयोग करते हैं, तो यह जानना ज़रूरी है कि आप किसके साथ चैट कर रहे हैं। अक्सर हम ऑनलाइन मिलने वाली जानकारी पर आंख बंद करके भरोसा करते हैं। यह जानकारी सेहत के बारे में हो सकती है, दोस्तों के बारे में, ऐसे लोगों के बारे में जिनके बारे में हम कम जानते हैं।
नेट पर आपको जो जानकारी मिली है, उसे डबल चेक करना ज़रूरी है, क्योंकि यह फेक हो सकती है। यह चेक करना ज़रूरी है कि क्या उस जानकारी का सोर्स प्रामाणिक है और केवल तभी उस जानकारी का उपयोग करें।
यह तब भी ज़रूरी है, जब आप किसी के साथ ऑनलाइन चैट कर रहे हैं और आप उन्हें पूरी तरह से नहीं जानते हैं। केवल उन सूचनाओं पर विश्वास न करें जो आपसे चैट कर रहा व्यक्ति ख़ुद देता है। 
सुनिश्चित करें कि आप पर्सनल इन्फॉर्मेशन साझा नहीं करें जैसे कि आप कहां रहते हैं, आपके पैरेंट्स क्या करते हैं, आपके फ्रेंड्स कौन हैं, आपके क्रेडिट कार्ड की डिटेल क्या है, क्योंकि कोई व्यक्ति इस जानकारी का दुरुपयोग कर सकता है और आपको बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है।

टीटी : इंटरनेट का अच्छा पक्ष बताइए? 
अविनाश डिसूजा : इंटरनेट पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी के साथ सावधान रहना महत्वपूर्ण है, लेकिन साथ ही, प्लीज़ इंटरनेट का उपयोग नॉलेज प्राप्त करने के लिए करें। यह ज़रूरी है कि आप विभिन्न संस्कृतियों, विभिन्न देशों और भारत के विभिन्न पहलुओं के बारे में सीखें। आपको अपने नॉलेज को बढ़ाने और अपने कॅरियर को बनाने के लिए इंटरनेट का उपयोग करना चाहिए।

टीटी : आपको ऑनलाइन रिलेशनशिप से क्या मिल रहा है? 
अविनाश डिसूजा : इन दिनों, सब कुछ ऑनलाइन उपलब्ध है। ऐसा हो सकता है कि आप किसी ऐसे व्यक्ति को पसंद करें जिसे आप ऑनलाइन मिले थे। यह पसंद भी प्यार में बदल सकती है और रिश्ता आगे बढ़ सकता है। लेकिन यह भी उतना ही ज़रूरी है कि आप उन रिश्तों से बहुत अधिक भावनात्मक रूप से प्रभावित नहीं होते हैं, जितने आप असली ज़िंदगी में वास्तविक अर्थ के साथ होते हैं।  
यदि आप किसी से ऑनलाइन प्यार करना चाहते हैं, तो सुनिश्चित करें कि आप उनसे व्यक्तिगत रूप से मिल चुके हैं। यह ज़रूरी है कि आप ऑनलाइन सावधानी रखें ताकि आप कभी भी ऑनलाइन एब्यूज का शिकार न हों। 
मेरे पास पहले ऐसे कई केस आए हैं जिनमें टीन्स ने मुझे बताया है कि वे किसी को ऑनलाइन पसंद करना शुरू कर देते हैं और यह सब तब तक ठीक रहता है जब तक कि दूसरा व्यक्ति उनका पीछा करना शुरू न कर दे और उनकी तस्वीरों का इस्तेमाल कर उन्हें ब्लैकमेल न करे। मैंने अक्सर देखा है कि इन ऑनलाइन जन्मे रिश्तों का अंत दुखद होता है। 
मैं जनरलाइज नहीं करना चाहूंगा; मुझे यकीन है कि कुछ अच्छे रिश्ते हैं जो इंटरनेट पर मिल सकते हैं, लेकिन मैं नहीं चाहता कि आप टीन्स को चोट पहुंचे। 
इसलिए मेरा सुझाव है कि आप इसे सुरक्षित रखें। उन लोगों पर ही भरोसा करें जिनसे आप मिल चुके हैं। 

उम्मीद है कि आपको इन टिप्स से इंटरनेट को सुरक्षित ढंग से इस्तेमाल करने मे मदद मिलेगी और आप नेविगेशन के माध्यम से वर्ल्ड वाइड वेब को चलाकर इसके फायदे ले सकेंगे।

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