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ख़ुद से सकारात्मक बातें करने की ताक़त

पारुल टांक टीनएजर्स से जुड़े मुद्दों पर बात कर रही हैं और उन्हें थैरेपी लेने के लिए भी प्रेरित कर रही हैं।

परिवार में एक डॉक्टर की कमी के कारण बड़ी त्रासदी का शिकार होना पड़ा, जिसने पारुल टांक को एमबीबीएस करने के लिए प्रेरित किया। डॉक्टर बनने की राह में उन्होंने मनोचिकित्सा को चुना और उनका लक्ष्य प्रैक्टिस को मूल्यों के साथ करना है। वे 15 साल पहले मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति को याद करती हैं तो कहती हैं कि पहले यह शब्द सिर्फ़ एक कलंक था। 15 साल बाद हम कम से कम इस बारे में बात तो कर रहे हैं।

फ़ोर्टिस हॉस्पिटल (मुलुंड), एशियन हार्ट इंस्टिट्यूट (बांद्रा कूर्ला कॉम्प्लेक्स) के संग काम करने और निजी तौर पर प्रैक्टिस करने के दौरान उन्होंने बहुत सारे टीनएजर्स के संग केस डील किए हैं। वह कहती हैं कि "उनमें से बहुत-से ऐसे होते हैं, जो इसलिए आते हैं, क्योंकि उन्हें उनके पेरेंट्स लेकर आते हैं।" इनमें से अधिकतर एंग्ज़ाइटी, डिप्रेशन, नशीले पदार्थों का प्रयोग, गु़स्सा, रिबेलियन आदि से सम्बंधित होते हैं।

वे एक 15 वर्षीय लड़की की कहानी साझा करती हैं, जिसने स्कूल में बुलीइंग का सामना किया। छेड़छाड़ की भी कुछ घटनाएं थीं, जिसकी वजह से वह टीनएजर लड़की लगभग डेढ़ साल तक स्कूल जाने से बचती रही। बुलीइंग की वजह से आत्मसम्मान में कमी और खु़द को कमतर आंकने की स्थिति पैदा हुई। इससे उसकी पढ़ाई के प्रदर्शन पर भी असर पड़ा।

टांक ने काउंसलिंग के दौरान उस लड़की को सकारात्मक होकर खु़द से बातें करने के लिए प्रेरित किया। "मैं कुछ नहीं कर सकती हूं" से वह "मैं क़ाबिल हूं," बोलना सीख गई है। उसे संतुलन की भावना हासिल करने और वापस स्कूल जाना शुरू करने में लगभग तीन महीने लग गए। उसने फिर अपनी परीक्षा दी। टांक अपनी काउंसलिंग में जिन तकनीकों का इस्तेमाल करती हैं, उनमें से कुछ कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी (सीबीटी), आरईबीटी और माइंडफु़लनेस हैं। 

क्या किसी टीनएजर को ट्रैक पर वापस लाने में मदद करना संतोषजनक था? "बहुत संतोषजनक", वो कहती हैं। "बहुत-से लोगों के पास एक अहा पल होता है। वो चाहते हैं कि थैरेपी के माध्यम से वह उन्हें जल्द से जल्द मिले।" फिर कुछ सोचकर वे कहती हैं, "अगर मैं किसी के जीवन में पहले की तुलना में बेहतर सुधार कर सकूं, तो मुझे अच्छा महसूस होता है।"

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Khubi Amin AhmedTeentalkindia Content Writer

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