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टीन एब्यूज़ को समझिए डॉ. सीमा हिंगोरानी के साथ : 2 -क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट एवं ट्रॉमा एक्सपर्ट

टीन एब्यूज़ को समझिए डॉ. सीमा हिंगोरानी के साथ : 2 -क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट एवं ट्रॉमा एक्सपर्ट

खु़द के प्रति जागरुक रहने वाले टीन्स सशक्त होते हैं। जो युवा अपनी इमोशनल हेल्थ की समस्याओं को पहचानते हैं और उनसे खु़द निपटने में सक्षम होते हैं, उनके साथ कोई ग़लत व्यवहार नहीं कर सकता। अगर आप भी अपनी इमोशनल हेल्थ पर नियंत्रण रखना चाहते हैं तो डॉ. सीमा हिंगोरानी यहां कुछ सलाह दे रही हैं। आइए, उनके बारे में पढ़ते हैं :

-क्या निग्लेक्ट को एब्यूज़ माना जा सकता है? अगर किसी टीनएजर को उसके पैरेंट्स या किसी और के द्वारा ज़िंदगी के शुरुआती दौर में निग्लेक्ट किया जाता है, तो क्या यह उस टीनएजर के व्यवहार में दिखाई देगा?
-हां, इमोशनल निग्लेक्ट भी एब्यूज़ की श्रेणी में ही आता है। ज़्यादातर उपेक्षा के केस जो मैंने देखे हैं, उनमें कुछ ड्रग्स के शिकार होते हैं, कुछ स्मोकिंग या ड्रिंक करने लगते हैं। ये बच्चे या तो लोगों को धमकाने लगते हैं या फिर इन्हें आसपास के लोगों द्वारा धमकाने की आशंका अधिक होती है। इन निग्लेक्टेड बच्चों पर किसी का फ़ोकस नहीं होता है। ये या तो लोगों से बहुत अधिक जुड़ाव रखते हैं या खु़द में ही डूबे रहने वाले नार्सिसिस्ट पर्सनैलिटी डिसॉर्डर अपने अंदर डेवलप कर लेते हैं। ये सभी कॉम्प्लेक्स केस पीटीएसडी (पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर) के हैं। ये सभी बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसॉर्डर शुरुआती समय में होने वाली उपेक्षा की वजह से होते हैं। ये मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं भावनात्मक संतुष्टि की कमी और पैरेंट्स से सही केयर न मिलने की वजह से भी हो सकती हैं। 

-उन टीनएजर्स के लिए आपका क्या संदेश है, जो हॉस्टल्स में रह रहे हैं और साइकोलॉजिकल एब्यूज़ से ग्रसित हैं? 
-बोलिए। फिर से कहती हूं, बात करना ज़रूरी है। अपने पैरेंट्स से, किसी भरोसेमंद रिश्तेदार से या फिर किसी साइकोलॉजिस्ट से बात करें। आप जिससे भी बात करने में सहज हों, बस उससे बात करें। यह भी थैरेपी से ही सम्बंधित है। जब आप अपने थैरेपिस्ट से इलाज कराना शुरू करते हैं, तो इससे मदद मिलती है।

-लड़कों के लिए अपने दुख या फिर कड़वे अनुभवों के बारे में बात करना कितना आसान या कठिन होता है? 
-पुरुष बात नहीं करते। ज़्यादातर पुरुषों को कहा जाता है कि वे बात न करें और ऐसा इसलिए है क्योंकि उन्हें बताया गया है कि मर्द रोते नहीं हैं। टीनएजर लड़के जब यहां आकर बैठते हैं तो ऊपर और नीचे की ओर देखते रहते हैं मगर मेरी तरफ़ नहीं देखते। खुलकर बातें नहीं करते। हालांकि आज के टीनएजर लड़के कुछ साल पहले के लड़कों की तुलना में बेहतर हैं। लेकिन उनमें यह फिर भी है कि आप लड़के हैं, आप कमज़ोर नहीं हो सकते। क्योंकि आप कमज़ोर पड़ेंगे तो परिवार की देखभाल कौन करेगा? लड़कियों की तरह कमज़ोर और ओवरथिंकिंग करने वाले मत बनो, ये उनको कहा जाता है। यह अब इमोशनल एब्यूज़ ही है। यह वह दबाव है, जो पैट्रिआर्की लड़कों पर डालती है। जब कोई टीनएजर मेरे सामने आख़िर में टूट जाता है तो वो कहता है कि यह पहली बार है, जब उसने हक़ीक़त में अपनी भावनाओं को स्वीकार किया है और वे किसी महिला के सामने रोए हैं। यानी कि लड़के एक महिला के सामने रोने को लेकर शर्मिंदगी महसूस करते हैं। लड़कों को भी अपनी भावनाएं खुलकर व्यक्त करने का पूरा अधिकार होना चाहिए।

-टीनएजर्स को किसी भी तरह के ट्रॉमा के बाद के प्रभावों का सामना कैसे करना चाहिए और साथ ही साथ उन बदलाव से किस तरह निपटना चाहिए, जिनका सामना वो अक्सर करते हैं?  
-अगर एक बार का दर्दनाक अनुभव है तो परिवार का सहयोग और समय उसे ठीक कर सकता है, लेकिन अधिकांश गम्भीर एब्यूज़ के मामलों में मदद की आवश्यकता होती है, क्योंकि किसी भी प्रकार का एब्यूज़ साइकोलॉजिकल डिसॉर्डर के रूप में सामने आ सकता है। दूसरी बात, मैं यह सजेशन देती हूं कि ऐसे टीनएजर प्यूबिक और हार्मोनल चेंजेस के बारे में पढ़ते और जानकारी रखते हैं। इसलिए उन्हें पता होता है कि उनके साथ क्या हो रहा है। यह बात काफ़ी हद तक पैरेंट्स और उनकी एजुकेशन और एटिट्यूड पर निर्भर करती है। 

-देश के टीनएजर्स और पैरेंट्स के लिए मेंटल हेल्थ को लेकर आपका क्या संदेश है? 
-मैं ऐसा इसलिए नहीं कह रही हूं क्योंकि मैं एक साइकोलॉजिस्ट हूं, मगर मेरा संदेश टीन्स और पैरेंट्स के लिए यही है कि मानसिक तौर पर स्वस्थ और अच्छा रहना बेहद ज़रूरी है। यदि आपके पास स्वस्थ दिमाग़ है, तो सब कुछ आपके क़दमों में आ गिरेगा। पैरेंट‌्स के लिए मेरा मैसेज है कि बच्चों पर अपनी इनसिक्योरिटीज़ और डर को प्रोजेक्ट न करें। मैं बहुत-से पैरेंट्स से कहती हूं कि आपको ख़ुद मदद की ज़रूरत है, तभी आप अपने बच्चे को बेहतर तरीके़ से समझ सकते हैं। 

मेरे पास एक पैरेंट्स के मानसिक तौर पर टूटने से जुड़ी एक घटना है, जब उन्हें अहसास होता है कि वे क्या कर रहे हैं। मेरे पास एक क्लाइंट आया था, जो तब टूट गया जब उसने महसूस किया कि वह उसकी बेटी के साथ एब्यूज़ कर रहा है। वह अपनी बेटी को डस्टबिन में फेंका गया फ़ूड लाने और उसे खाने के लिए सिर्फ़ इसलिए कहता था क्योंकि वह उसे हम्बल बनाना चाहता था। यह सब इसलिए क्योंकि उसके साथ उसके पैरेंट्स ने भी ऐसा ही व्यवहार किया था। मुझे उन्हें यह अहसास दिलाना था कि ऐसा एक सामान्य व्यक्ति को नहीं करना चाहिए, इसलिए आपको ख़ुद थैरेपी की ज़रूरत है। लेकिन कुछ पैरेंट्स इन बातों की परवाह नहीं करते हैं क्योंकि हमारे देश में लोग नम्बर्स और आईआईटी और इंजीनियरिंग और मेडिकल पर इतना फ़ोकस करते हैं कि वे किसी और चीज़ पर ध्यान ही नहीं दे पाते हैं। वे चाहते हैं कि उनका बच्चा डॉक्टर या इंजीनियर बने ताकि वे पड़ोसियों और रिश्तेदारों को दिखा सकें। 

इसलिए मेरा सजेशन है कि पैरेंट्स अपने बच्चों की ज़रूरतों को अधिक गम्भीरता से लें। 

-क्या एब्यूज़ आत्महत्या की वजह बन सकता है? 
-एब्यूज़ के कारण आत्महत्या होने की आशंका सबसे अधिक होती है क्योंकि कोई भी वास्तव में ख़ुद को मारना नहीं चाहता है। आत्महत्या हमेशा मदद न मिलने पर ही की जाती है, जब किसी व्यक्ति को लगता है कि कोई उसे प्यार नहीं करता है, और कोई भी उसकी मदद नहीं करेगा, तब वह अपनी जान ले लेता है। आत्महत्या की कोशिश करने वाले अधिकांश लोगों ने मुझे बताया है कि वे सिर्फ़ लोगों को बताना चाहते थे कि मैं यहां हूं और क्या आप मुझे सुन सकते हैं? तो प्लीज़ ध्यान दें कि ट्रॉमा और एब्यूज़ दोनों हमारे जीवन में मौजूद हैं और टीन्स और पैरेंट्स दोनों के लिए मेरा संदेश यह है कि आप असहाय महसूस नहीं करें। हम आपकी मदद के लिए मौजूद हैं।
 
-हमारे देश में एब्यूज़ को लेकर क्या नज़रिया है? उसमें कहां भूल होती है?
-यह बेहद दु:ख की बात है कि हमने अपने टीन्स को अपनी भावनाओं को व्यक्त करना ही नहीं सिखाया है। यहां तक कि यदि कोई बच्चा अपने पैरेंट्स को बताए कि किसी व्यक्ति ने उसे सेक्शुअली एब्यूज़ किया है तो पैरेंट्स उसे ही चुप रहने के लिए कहेंगे, क्योकि उन्हें विरोध करने से डर लगता है। उन्हें इस बात का भी डर होता है कि अगर उनकी संतान कोई लड़की है तो कोई भी उससे शादी नहीं करेगा। यह नहीं होना चाहिए। 

मैं पैरेंट्स को कहती हूं कि यदि आप पुलिस से शिक़ायत नहीं करना चाहते हैं तो कम से कम उस रिश्तेदार के पास जाएं और उसका सामना तो करें। हमारे देश में टीन्स को ऐसे ट्रीट किया जाता है कि जैसे कि सब चीज़ें शादी होने का ही इंतज़ार कर रही हों। पैरेंट्स बच्चों से जुड़े एब्यूज़ के मामलों में कुछ करने को तैयार ही नहीं हैं। वे हमें कहते हैं कि आपके इस कमरे में ही कोई समाधान हो सकता है तो बता दीजिए। 

कभी-कभी मैंने पाया है कि कोई वन-टाइम असॉल्ट होता है, कभी किसी कुक या ड्राइवर के द्वारा और ये छोटे बच्चे होते हैं, इसलिए इस बारे में किसी से बात नहीं करते।

इसलिए एब्यूज़ से निपटने का एकमात्र तरीक़ा यह है कि आप इसे समझें कि आपको इसकी रिपोर्ट करनी ही है और इसके बारे में बात करनी है। आप जिस पर भरोसा करते हैं, उस तक पहुंचें, और इसके बारे में बात करें। यह जान लें कि गु़स्सा होना ठीक है और दु:खी होना भी ठीक है, लेकिन भावनाओं में एक बैंडविड्थ होती है और आपको उन्हें ओवरड्राइव में नहीं जाना चाहिए।
 

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टीन अब्यूज से जुड़ी हर ज़रूरी बात डॉ. सीमा हिंगोरानी - 1

मनोरोग एवंं ट्रॉमा एक्सपर्ट
Nishtha JunejaTeentalkindia Content Writer

अब्यूज यानी र्दुव्यवहार उतना भी असामान्य नहीं हैं कि उस पर भरोसा ही न हो। कुछ टीन्स एक तरह के अब्यूज़ के गवाह होते हैं, तो कुछ टीन्स दूसरे तरह के अब्यूज का शिकार होते हैं, मगर वे नहीं जानते कि ये अब्यूज है। ज्यादातर फिजिकल अब्यूज को नोटिस किया जाता है, जबकि मेंटल इमोशनल अब्यूज़ को अपमानजनक नहीं माना जाता है।

हमने डॉ. सीमा हिंगोरानी से इस मुद्दे पर कुछ रोशनी डालने के लिए कहा….

हमें अब्यूज के बारे में बताइए तथा टीनएजर कितने प्रकार के अब्यूज के शिकार होते हैं?

मैंने अपने क्लीनिक में ऐसे कई टीन्स को देखा है, जो विभिन्न तरह के अब्यूज से पीड़ित होते हैं। एक फिजिकल अब्यूज़, दूसरा हाई इमोशनल अब्यूज़ और सेक्शुयल अब्यूज़ होता है।

ये टीनएज में अब्यूज़ के मुख्य प्रकार हैं मगर यहां मुझे आपको बताना होगा कि इनमें कहीं कोई शिकायत नहीं करता है। बल्कि बहुत ज्यादा केस के बारे में जब हम ट्रॉमा मॉडल के हिसाब से जांच-पड़ताल करते हैं, उसके बाद यह स्थिति सामने आती है।

कुछ टीन्स ज़रूर शिकायत करते हैं जैसे मैं खुद को मारना चाहता हूं, मैं जीना नहीं चाहता हूं, मैं कॉलेज नहीं जाना चाहता हूं, ड्रग्स लेना, अल्कोहल लेना यह सभी अब्यूज़ के शिकार होने के संकते हैं। अधिकांश समय बिस्तर पर बिताना, बिस्तर से उठने का मन न होना और कॅरियर बनाने की कोई चाह न होना ट्रॉमा और दुख के संकेत हैं और इस सबका पता हमें तभी चलता है कि जब हम इसकी गहराई में जाकर देखते हैं।

इमोशनल अब्यूज क्या होता है? टीन्स को इमोशनली अब्यूज़ कौन कर सकता है?

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि बहुत सारे केस में मेंटल या इमोशनल अब्यूज़ पेरेंट्स ही करते हैं। ज्वाइंट फैमिली में अंकल, कई बार दादा-दादी, कई बार पेरेंट्स भी करते हैं इमोशनल अब्यूज़ को अब्यूज़ की तरह नहीं समझा जाता है और बहुत से लोग इसे लेकर जागरूक भी नहीं हैं।

इसलिए बहुत सारे टीन्स यही सोचते हैं कि ये परिवार को ट्रीट करने का तरीका है। अपमानजनक शब्दों जैसे तुम स्लट हो, बदतमीज महिला हो, तुम कचरा हो, तुम स्टुपिड हो, तुम मूर्ख हो ये सभी इमोशनल अब्यूज़ की श्रेणी में आते हैं। बहुत छोटी उम्र से इन शब्दों को लगातार सुनने के कारण बच्चे इन्हें सुनने के आदि हो जाते हैं। अब्युसिव स्टेटमेंट जैसे, तुम पढ़ाई नहीं कर रहे हो, तुम बड़े होकर चपरासी ही बनोगे। तुम बड़े होकर झाड़ूवाला (स्वीपरबनोगे। कुछ बच्चे इस तरह के स्टेटमेंट को सुनकर बड़े होते हैं, जैसे “तुम बदसूरत दिखते होकितनी काली हो गई हैतुम कितने कालो हो।”  मेरे पास एक केस आया था जिसमें पेरेंट्स ने अपने टीनएज बेटे को कहा था कि, तुम जाकर मर क्यों नहीं जाते हो? वह दिन मेरी ज़िंदगी का सबसे ख़ुशी का दिन होगा। तुम बिल्डिंग से कूद क्यों नहीं जाते हो। यह सभी गंभीर इमोशनल अब्यूज़ हैं।

आप कैसे जानोगे कि एक बच्चा इमोशनल अब्यूज से पीड़ित है? क्या आप इमोशनल अब्यूज़ के किसी केस के बारे में बताएंगी, जो आपने डील किया हो?

यह दुखद है, लेकिन एक ट्रॉमा एक्सपर्ट होने के नाते मैँ जब टीन्स का इंटरव्यू लेती हूं, तो वह जहां से आते हैं, उन्हें वापस उन यादों में लेकर जाना मेरा काम है। मेरा काम उनकी तकलीफ भरी यादों के बारे में जानना है। मेरे टीन्स के लिए वहां पहुंचना आसान नहीं होता है। ऐसे में जासूसों की तरह मुझे इधर-उधर उन्हें टटोलना होता है।  

और यह बहुत दुखद है कि कि मेरे टीन क्लाइंट्स यहां बैठे होते हैं, वह पूरी तरह भावशून्य हो जाते हैं। वे नहीं जानते कि क्या कहना चाहिए। वे खुद को हारा हुआ महसूस करते हैं। मैं

एक पेरेंट्स मेरे सामने अपनी बेटी से अपशब्दों का इस्तेमाल कर रहे थे। मैं मां से बात करने की कोशिश कर रही थी, क्योंकि बच्ची आत्महत्या करने की कोशिश कर चुकी थी और पेरेंट्स अपनी बेटी के बारे में कह रहे थे, “यह लड़की है, वह कॉल गर्ल है। इसलिए कुछ केस में पेरेंट्स ही अब्यूज करते हैं। यह अब इमोशनल अब्यूज है।

आप फिजिकल अब्यूज को कैसे परिभाषित करोगे? आप ऐसा क्यों सोचते हो कि पेरेंट्स बच्चों को फिजिकली अब्युज करते हैं?

 मारना-पीटना, फिजिकल अब्युज ही है। बच्चों को कई कारणों से फिजिकली अब्युज करते हैं जैसे एग्जाम में 20 में से 13 नंबर आने पर। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पेरेंट्स खुद मेंटल डिसॉर्डर से ग्रस्त होते हैँ और अपने स्वभाव के कारण वही बर्ताव वह अपने बच्चों के संग करते हैं। पेरेंट्स खुद अपने पेरेंट्स से पिटते हैं, इसलिए वह ऐसा करना सही समझते हैं। यह परिवार में एक मानसिक बीमारी की विरासत है, जिसे ट्रीट नहीं किया गया तो बनी रहेगी।

हमें सेक्शुयल अब्यूज के बारे में बताइए? पीड़ित पर इसका किस तरह का असर हो सकता है?

सेक्शुयल अब्यूज वह है जिससे कई आदमी और औरत गुज़रते हैं। बहुत सारे टीन्स सेक्शुयल अब्यूज़ के शिकार होते हैं, लेकिन उसकी रिपोर्ट कई वजहों से नहीं करते हैं। लोग इस तरह के लक्षणों के साथ आते हैं कि मैं उसे ठीक से देखा नहीं पाया था या मेरी आंखें नहीं है। मुझे पीठ में दर्द होता मगर डॉक्टर कहते हैं कि सब कुछ ठीक है। ये सभी फिजिकल संकेत दुख और ट्रॉमा के हैं।

ये बच्चे सेक्शुयली अब्यूज के 4-5 साल की उम्र में शिकार हो जाते हैं और तब उन्हें चुप रहने के लिए कहा गया था, क्योंकि यब सब परिवार में हुआ था।   

अब्यूज पीड़ित में आपको किस तरह के लक्षण दिखाई दे सकते हैं? आप किसी टीन को क्या सुझाव देंगे जिससे वह यह समझ सके कि वह अब्यूज विक्टिम है?

ख़ुद से ही जागरूक रहने वाली टीन क्लाइंट्स खुद में ये लक्षण देख सकते हैं।

ट्रॉमा के संकेत में यादें, बचपन की यादों या फ्लैशबैक में कोई ट्रॉमेटिक एक्सपीरियंस, सेक्शुयल ट्रॉमा का बचपन का कोई अनुभव ये लक्षण फिजिकली दिखाई दे सकते हैं। जैसे ही उस पल की यादें आती हैं, आपको बॉडी में पेट दर्द, बॉडी पर रैशेज नज़र आने लगते हैं। कुछ टीन्स में डिप्रेशन के संकेत नज़र आने लगते हैँ वे रोना शुरु कर देते हैं या आत्महत्या के बारे में सोचने लगते हैं। यह ट्रॉमेटिक डिप्रेशन होता है। इस सबका मतलब यह है कि आपके साथ कोई दर्दनाक याद है, जो आपको परेशान कर रही है। तकनीकी भाषा में हम इसे ट्रॉमा प्रोसेसिंग कहते हैं। इसे उन यादों पर काम करना कहते हैं, जिन पर काम नहीं किया गया है और आपके अंदर दफन हैं।

इसलिए ये सब क्लाइंट के साथ इमोशनल बॉन्डिंग पर निर्भर करता है, मैं अपने सेल्फ-अवेयर टीन क्लाइंट्स को कहती हूं, कि जब आपको यह लक्षण महसूस होते हैं, तो आपकी बॉडी बताने की कोशिश करते हैं। ये दर्द कहां से आ रहे हैं और आप क्या महसूस करे हैं।

कई क्लाइंट्स चिंताग्रस्त रहते हैं, तो कुछ छाती या गले में दर्द महसूस करते हैं। कुछ लोगों को जब भी चिंता होती है उन्हें बुखार आता है, कुछ लोगों की नाक से खून बहना शुरु हो जाता है, कुछ को हिंसात्मक सपने आते हें जिसमें आप किसी को मार देते हैं या कोई आपको मार देता है। बिना किसी कारण के चिंता या घबराहट होना ये संकेत कुछ नहीं कहते हैं। रिपोर्ट भी सामान्य आती है, तो यह सिर्फ शरीर पर चोट है।

जो टीन्स क्लीनिकली डिप्रेस होते हैं, मैं उनकी मेमोरी की बात नहीं कर रही हूं। अगर मैं चोट से जुड़ी यादों को छूती हूं, तो सबकुछ अचानक से टूट जाएगा। इसलिए ये जागरूक क्लाइंट्स नहीं है। ये वे क्लाइंट्स हैं, जो ख़ुद को चोट पहुंचा सकते हैं। जो किसी से अब्यूज़ होने के बाद आत्महत्या के बारे में सोचने लगते हैं हैं और इस स्थिति तक आ जाते हैं।

इसका मतलब है कि ऐसे मामलों में ट्रॉमेटिक मैमोरी काम नहीं करती है। इसलिए यहां सिर्फ अब्यूज क्लाइंट्स की नज़र ही होती है।

टीन्स को अब्यूज़ को कैसे हैंडल करना चाहिए? वे इसकी रिपोर्ट कैसे कर सकते हैं? टीनएजर्स के लिए इसका सामना करने का सही तरीका क्या हो सकता है?

हमें अपने टीनएजर को ऐसा सशक्त बनाने और हिम्मतवाला बनाने की ज़रूरत है, अपनी भावनाओं के बारे में बोल सकें और आपके साथ जो हुआ उसके बारे में बता सकें। अपना आत्मविश्वास बढ़ाएं और अपने फ्रेंड्स से बात करें। यदि आप अकेले किसी बड़े से एप्रोच करने में डर रहे हैं, तो अपने किसी भरोसेंद फ्रेंड / रिलेटिव के साथ अपने पेरेंट्स के पास जाएं और उन्हें बताएं कि आप अब्यूज़ नहीं सहन करेंगे। (चाहे वह किसी भी तरह का हो)। इसलिए ख़ुद को कमरे में बंद करके रोने ओर दुखी होने के बजाय अपने लिए खड़े हों। उठें और इस बारे में बात करें। उससे कहें जिस पर आप भरोसा कर सकते हैं, रिलेटिव, पेरेंट्स, कजिन जिस किसी पर भी भरोसा कर सकें कि वह अपराधी को सजा दिलाने में मदद करेगा।   

ऑनलाइन फोरम पर जाएं और अन्य टीन्स से बात करें कि उन्होंने अपराधी से कैसे निपटा।

ऑनलाइन काउंसलर की तलाश करिए और उन लोगों तक पहुंचिए जो आपकी मदद कर सकते हैं। फिजिकली और मेंटली कमजोर न पड़ें और सोचिए कि सिर्फ इसलिए बुरे तरीके से ट्रीट नहीं किया जा सकता है, क्योंकि आपकी मां ने आपके साथ बुरा किया था। पुरानी जनरेशन ने किसी के साथ बुरा व्यवहार किया था, इसलिए वह भी बुरे व्यवहार की विरासत को आगे बढ़ाए यह सही नहीं है। अपने पेरेंट्स के खिलाफ खड़े हों, यदि उन्होंने आपसे चुप रहने के लिए कहा है। उनसे कहें कि आप किसी भी वजह से चुप रहे हों मगर मैं नहीं रहूंगा।

मेरे पास एक क्लाइंट आया था वह अब्यूज से पीड़ित था और उसे इस बारे में चुप रहने के लिए कहा गया था। मगर उसने साफ-साफ अपनी फैमिली से कह दिया था कि, यदि यह नहीं रुका, तो मैं पुलिस में शिकायत करूंगा। और इसने उसके पक्ष में काम किया।

इसलिए अब्यूज को रोकने के लिए टीन्स का सशक्त होना ज़रूरी है।

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