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सुसाइड के पीछे सायकोलॉजी

क्यों आपके दोस्त, बच्चे, पैरेंट, पति/पत्नी, या भाई-बहन अपनी जान दे देते हैं? भले ही इसका कारण बताता हुआ एक नोट मिल भी जाए, लेकिन लम्बे समय तक रहने वाले सवाल आमतौर पर बने रहते हैं।

क्या संभावित कारण हो सकता है कि एक व्यक्ति इतना दु:खी हो जाता है कि वह मर जाना चाहता है? वे इस तरह क्यों महसूस करते हैं? एक व्यक्ति की आत्महत्या अक्सर कई लोगों को आश्चर्य में छोड़ देती है। लोग निम्नलिखित कारणों से अपनी ज़िंदगी ख़त्म करने की कोशिश करते हैं:

1. वे डिप्रेशन में होते हैं: गम्भीर डिप्रेशन के साथ बहुत ज़्यादा दु:ख, और साथ ही साथ यह बिलीफ़ भी आता है कि इससे बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं है।

2. वे इम्पल्सिव होते हैं: अक्सर ड्रग्स और अल्कोहल से इसे जोड़ा जाता है। कुछ लोग अपने जीवन को ख़त्म करने की इम्पल्सिव कोशिश करते हैं। एक बार मन शांत होने पर, ये लोग आमतौर पर बहुत ज़्यादा शर्म महसूस करते हैं।

3. मरने की फिलॉसफ़िकल इच्छा होना : कुछ लोगों के लिए सुसाइड करने का डिसीजन एक तर्कपूर्ण फ़ैसले पर आधारित होता है, अक्सर ये किसी दर्दनाक बीमारी के कारण सुसाइड के लिए मोटिवेट होते हैं जिसमें बचने की कोई उम्मीद नहीं होती है।

4. उन्होंने कोई ग़लती की होती है: यह आजकल की एक ट्रेजिक घटना है, जिसमें आसानी से यंग बच्चे फंस जाते हैं।

ऊपर दिए गए इशू से निपटने के लिए ज़रूरी सायकोलॉजिकल इंटरवेंशन यहां दिया गया है : 

एक काउंसलर से मिलें : केवल एक क्वालिफ़ाइड मेंटल हेल्थ प्रोफ़ेशनल आपको यह सलाह और डायग्नोसिस दे सकता है जिसकी आपको यह पता लगाने में ज़रूरत होगी कि आपके साथ क्या हो रहा है और इसे कैसे ठीक किया जाए। मदद लेने में बिल्कुल भी शर्म की बात नहीं है, इसलिए आज और अभी मदद लें, इससे पहले की चीज़ें बिगड़ जाएं।

दोस्तों से बात करें : अपने दोस्तों से अपनी फ़ीलिंग्स को लेकर ईमानदार रहें। यदि आप डाउन फ़ील कर रहे हैं, तो उन्हें यह बताएं। यदि आपको बात करने के लिए किसी की ज़रूरत है तो उन्हें यह भी बताएं।

सपोर्ट ग्रुप्स जॉइन करें : ऐसे कई ग्रुप्स हैं ऑनलाइन और ऑफ़लाइन मौजूद हैं जो इस तरह की सिचुएशन से गुज़र चुके लोगों की कहानी बताकर आपकी मदद कर सकते हैं।

दवाइयां उसी तरह लें जिस तरह बताई गई हैं : यदि आपको दवाइयां दी गई हैं, तो उन्हें उसी प्रकार लें जैसा आपको बताया गया है। उन्हें सिर्फ़ इसलिए बंद न कर दें क्योंकि आपको ‘अच्छा फ़ील' हो रहा है। इसका उल्टा प्रभाव भी हो सकता है जो आपके केस को और गम्भीर बना सकता है।

सुसाइड क़रीबी लोगों के जीवन पर जो घाव छोड़ जाता है वो अक्सर गहरे और लम्बे समय के लिए होते हैं। सुसाइड को समझना बहुत मुश्किल हो सकता है। कभी-कभी इसे समझने का कोई रास्ता नहीं सूझता- वह व्यक्ति जो सुसाइड कर लेता है उसे बहुत गहरा दु:ख होता है जिसे एक्सप्लेन नहीं किया जा सकता, यहां तक कि उन्हें भी नहीं। हालांकि, यह समझने की कोशिश करना कि ऐसी कौन सी चीज़ है जो किसी को इस तरह का क़दम उठाने के लिए मजबूर कर देती है, दूसरों की मदद कर सकता है।

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एक पत्र पैरेंट्स के लिए

एक पत्र पैरेंट्स के लिए
Nishtha JunejaTeentalkindia Content Writer

मुझे लगता है कि यह पत्र आपको कई तरह से परेशान कर सकता है, लेकिन मुझे महसूस हुआ कि अपनी भावनाओं को लिखकर बताना ही बेहतर होगा, क्योंकि यह मेरे लिए आसान है।

मैं हर समय अकेला महसूस करता हूं। मेरा एक हिस्सा हमेशा दु:खी रहता है। धीरे-धीरे और लगातार अकेले रहने का अहसास मुझे अच्छा लगने लगा है, लेकिन अकेले रहना किसे पसंद है?  शायद कभी-कभी हर कोई अपनी ज़िंदगी में पर्सनल स्पेस चाहता है, लेकिन लोगों के बिल्कुल भी न रहने पर वह कैसे जियेगा।

मुझे दर्द महसूस होता है। दर्द की ग़हराई को वही व्यक्ति समझ सकता है, जिसने कभी दर्द का अनुभव किया हो। उसके अलावा कोई भी व्यक्ति इस अनुभव को नहीं समझ सकता है। यह सच है कि जब आपको किसी व्यक्ति की आपके साथ खड़ा रहने की ज़रूरत होती है, तब वो वहां नहीं होता है।

मैं खु़द को हेल्पलेस महसूस कर रहा हूं। मैं अपनी ज़िंदगी में पीछे मुड़कर देखता हूं और खु़द से पूछता हूं, मेरी ज़िंदगी में कितने खु़शी के पल हैं, जो मुझे याद हैं? मेरे दिमाग़ में कुछ भी नहीं आता। दुख, पीड़ा, अफ़सोस, कष्ट और दर्द ने मेरे दिमाग़ को इस कदर घेरा हुआ है कि खु़शी की एक नन्ही किरण भी उसमें प्रवेश नहीं कर पाती है। मेरा सिर्फ दिल धड़कता है, दर्द से दिल दुखता है। हर सांस मुझे याद दिलाती है कि मैं इतना बदनसीब हूं कि मैं अभी तक ज़िंदा हूं।   

दर्द मेरे दिल में बस गया है। जब ज़िंदगी ने बदलाव का रास्ता दिखाया तो दूसरों ने रोक दिया। जब कोई रिजेक्ट करता है तो उम्मीद मर जाती है। अंधेरा रोशनी का पीछा करता है, लेकिन अंधेरा यदि रोशनी को ढंक दे तो क्या होगा? क्या होगा अगर कोई बस इसलिए ज़िंदा है क्योंकि वह मर नहीं सकता है?

भावना के बड़े आवेग ख़ासकर नफ़रत के मेरे अंदर घूमते हैं, मैं अच्छा महसूस नहीं कर रहा हूं। मैं यहां नहीं हूं। केवल इसलिए कि मैं सांस ले रहा हूं, इसका मतलब यह नहीं है कि मैं जी रहा हूं। मैं मुस्कराता हूं तो इसका मतलब यह नहीं है कि मैं ख़ुश हूं। मेरा दिल धड़कता है तो इसका मतलब यह नहीं है कि मैं जीवित हूं।

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डिस्क्लेमर : टीनटॉकइंडिया आपातकालीन सेवाएं नहीं प्रदान करता है और न ही यह किसी तरह की आपदा में हस्तक्षेप करने वाला कोई केंद्र है। अगर आप या आपका कोई मित्र या परिचित गहरे अवसाद के दौर से गुज़र रहा है, या उसके मन में आत्महत्या या स्वयं को नुक़सान पहुंचाने वाले विचार आ रहे हैं तो कृपया निकटस्थ अस्पताल या आपातकालीन/आपदा प्रबंधन सेवा केंद्र या हेल्पलाइन से सम्पर्क करें।