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ये 5 आदतें आपको नुकसान पहुंचाती हैं

काम में टालमटौल करना और अधिक नींद लेना आपको नुकसान पहुंचा सकता है। जानिए इससे कैसे निपटें, इससे पहले बात हाथ से निकल जाए?

हम जब खुद को हानि पहुंचाते हैं तो जरूरी नहीं कि शरीर को ही नुकसान हो, इंसान कई तरह से अपनी भावनाओं को भी हानि पहुंचाता है। ये आदतें इंसान को फिजिकली और मेंटली दोनों तरह नुकसान पहुंचाती हैं।



ऐसे समझें, कहीं आप खुद को नुकसान पहुंचाने के लिए इन आदतों का हिस्सा तो नहीं हैं -

1. टाल-मटोल
इसे आम भाषा में समझें तो यह काम करने का समय और लक्ष्य के बीच का हिस्सा होता है जिसमें देरी कि जाए तो टालमटोल करना कहलाता है। इसे नीचे दिए उदाहरण से समझ सकते हैं-

मैं : मेरा फिजिक्स का असाइनमेंट अधूरा है।
दिमाग: हम इसे लंच के बाद कर लेंगे।
मैं: लंच खत्म होते ही इसे पूरा कर लेंगे।
दिमाग: एक झपकी लेने के बाद इसे करते हैं।
मैं : डिनर के बाद करेंगे।
दिमाग : अभी इसे भूल जाते हैं।
मैँ : चेहरे पर कुटिल हंसी आती है

इससे कैसे निपटें
किसी ने सही कहा है कि अगर आप किसी काम को अगले 5 मिनट में कर सकते हैं तो उसे पूरा कर लेना चाहिए। अपने कामों की लिस्ट बनाएं और उसे जल्द से जल्द पूरा करने की कोशिश करें। इससे आपमें कम से कम अवसाद पनपेगा और चिंता कम होगी। साथ ही यह आपको संतुष्टि का अहसास कराएगा।

2- आराम से खाएं
अगर आधी रात खाना लेना आपकी आदत बन गई है तो संभलने की जरूरत है। जब भी आप कल होने वाले फुटबॉल मैच या एग्जाम के बारे में स्ट्रेस लेते हैं या अवसाद से घिरते हैं तो आपको कटोरे भरकर चीजें खाना अच्छा लगता है। ऐसी आदतें अपनाएं जो आपका ध्यान खाने की ओर से भटकाएं।

इससे कैसे निपटें: अगली बार जब ऐसा हो तो धीरे खाएं ताकि पूरी प्रोसेस स्लो हो जाए। अपनी हर बाइट का आनंद उठाएं। एक बार आप खाने की प्रक्रिया को धीमा करते हैं तो खाने की मात्रा घट जाएगी। ऐसी आदतों को रूटीन में शामिल करें जो खाने की ओर से ध्यान हटाए जैसे ऐसी स्थिति में गाना सुनने की आदत डालें।

 

3- जरूरत से ज्यादा नींद लेना
ये सभी जानते हैं कि झपकी या नींद लेने से एंजायटी दूर होती है लेकिन अधिक नींद लेने की आदत आपको मुश्किल में डाल सकती है। 9 घंटे से अधिक नींद लेना अधिक सोने की कैटेगरी में आता है जिस पर ध्यान देने की जरूरत है।

इससे कैसे निपटें : अधिक नींद लेने की स्थिति को हायरसोम्निया कहते हैं। ऐसे मामलों में आपको विशेषज्ञ की सलाह की जरूरत होती है। अगर ऐसा नहीं करते हैं तो एक कागज पर उन चीजों को लिखें जो आपको परेशान करती हैं। लिस्ट तैयार करने के बाद, कौन सा काम किस तारीख को करना है यह तय करें। आपको लगता है कि कोई काम पहले हो सकता है तो उससे ही शुरुआत करें। अपने अंदर के डर को निकालें और अगली सुबह से इसकी शुरुआत करें।

 

4- अपने इमोशंस को संभालें
गर्लफ्रेंड के साथ झगड़ा हुआ था या आपके टीचर में क्लास में सबसे सामने आपको डांट दिया था? इससे जुड़े इमोशंस को नजरअंदाज करें। ये दर्द पहुंचाते है और परेशान करते हैं। इसे दिमाग में दबाने पर आप कुछ समय के लिए अच्छा महसूस करते हैं लेकिन लंबे समय तक ऐसा नहीं हो पाता।

इससे कैसे निपटें : इमोशंस से निपटने के लिए इसका अनुभव होना जरूरी है। आपके दिमाग में दो बातें जरूरी आनी चाहिए, पहली, आपको कौन सी बात परेशान करती है? और आपके पास इसका क्या समाधान है। आप अपनी जिद को किनारे रखें और गर्लफ्रेंड से झगड़े के बारे में बात करें। समस्या को हल करने की पहल करें। यह आपकी मेच्योरिटी और स्ट्रेंथ को दिखाता है।

5- जरूरत से अधिक विनम्र होना
इंसान को कितना विनम्र होना चाहिए इसे समझने की जरूरत है। सामान्यतौर पर विनम्र होने और अधिक विनम्र होने में फर्क है। अगर आप डिबेट कॉम्पिटीशन में सबसे अंत में बोले थे, बास्केटबॉल मैच हार गए थे और इनके बारे में अधिक सोचकर अपने कॉन्फिडेंस को कम कर रहे हैं तो ये इशारा है आप जरूरत से ज्यादा नर्म हैं।

इससे कैसे निपटें : जरूरत से अधिक विनम्र होने से खुद को बचाना है तो सबसे पहले अपनी और दूसरे की परफॉर्मेंस को अलग रखें। आपको अपने किए गए कामों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए दूसरों की नहीं। अगर आप खुद को जज करते हैं या लोगों के सामने ऐसा व्यक्त करते हैं तो ध्यान रखें कि आपकी ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है इस बात को याद रखें।
खुद से प्रॉमिस करें अब से ऐसा नहीं करेंगे।

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वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन डे - हर जिंदगी है जरूरी

आइए समझें और जानें सुसाइड कैसे रोका जा सकता है ।

10 सितम्बर वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेन्शन डे पर बात करते हैं इससे जुड़ी वो बातें जिन पर कभी चर्चा नहीं की जाती लेकिन जागरुक होने की जरूरत है। हर 40 सेकंड में एक इंसान अपना कीमती जीवन खो देता है। आइए समझें और जानें इसे कैसे रोका जा सकता है ।
किसी ने कहा है, ''अपना हाथ अपने दिल पर रखें, क्या आप इसे महसूस कर सकते हैं? यही उद्देश्य कहलाता है। आप एक कारण से जीवित हैं इसलिए कभी हार मत मानना।''



दुनियाभर में 10 सितंबर को सुसाइड प्रिवेंशन डे के रूप में मनाया जाता है। आज दुनियाभर के लोगों को एकजुट होकर समझने की जरूरत है कि सुसाइड को कैसे रोकें, अलग-अलग लोगों के लिए सुसाइड करने की वजहें अलग होती हैं ऐसा तब होता है जब वो नाउम्मीद हो जाते हैं और लगता है चीजों को वापस सुधारा नहीं जा सकता।
इस दिन ऐसी एक्टिवटीज कराकर लोगों को जोड़ने की जरूरत है जो सुसाइड रोकने के लिए लोगों में जागरूकता फैलाएं, लोगों को सुसाइड के बारे में शिक्षित करे और लोगों में सुसाइड पर चर्चा के डर को खत्म करें।  

आइए आत्महत्या से जुड़ें कुछ मिथकों को दूर करें उन्हें समझाएं और अलर्ट कर सकें

मिथक-  यह कहना गलत है कि जो लोग आत्महत्या के बारे में बात करते हैं वास्तव में वो ऐसा काम नहीं करेंगे। जो लोग आत्महत्या करते हैं वे बार-बार इसका कोई न कोई संदेश जरूर देते हैं। उन लोगों पर ध्यान देना चाहिए और नजर रखनी चाहिए। भले ही वो मजाक में कहें कि 'तुम्हें तब बुरा लगेगा जब मैं चला जाऊंगा' या फिर "मुझे कोई भी रास्ता नहीं दिख रहा"। इन सबका यही मतलब है कि वे लोग अंदर से बहुत दुखी हैं।

मिथक- जिसने भी खुद को मारने की कोशिश की वह जरूर पागल होगा। ज्यादातर लोग जो सुसाइड करते हैं मानसिक रूप से बीमार नहीं होते या किसी तरह की मानसिक बीमारी से जूझ रहे होते हैं। हो सकता है वो तनाव, बेचैनी, डर और डिप्रेशन से जूझ रहे हों।

मिथक-  आत्महत्या के बारे में बात करना किसी को ऐसा करने का आइडिया दे सकता है। वहीं, इसके उलट किसी ऐसे व्यक्ति के साथ आत्महत्या के बारे में बात करना जो इसके बारे में सोच सकता है, उन्हें यह बताने का एक सहायक तरीका होगा कि आप परवाह करते हैं और उनके स्वस्थ और जीवित रहने की उम्मीद करेंगे।

मिथक- जो लोग आत्महत्या करने के बारे में सोचते हैं या जो ऐसा करते हैं वो बहुत कमजोर होते हैं। नहीं, वे कमजोर नहीं होते हैं। वो बेहद कठिन और तनाव भरे समय से गुजर रहे होते हैं। उन्हें जरूरत होती है कोई आए और उन्हें इससे उबारे। कोई अगर जीवन खत्म करता है तो यह कोई आसान काम नहीं होता।

वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेन्शन डे हमारे लिए एक कारण बन गया है कि ऐसे लोगों को सपोर्ट करें जो जीवन सुसाइड के बारे में सोचते हैं उन्हें इससे निपटना सिखाएं और जागरूक करें। लोगों से इसके बारे में बात करें ताकि उन्हें सुसाइड की जिस भावना ने जकड़ रखा है उसे तोड़ा जा सके।

लिए एकसाथ होने और उन लोगों का समर्थन करने का एक कारण बन सकता है जो जीवन के किनारे पर हो सकते हैं। एक दूसरे और समुदाय के साथ इसके बारे में बात करना इस कलंक से दूर ले जा सकता है। यह चिंता का एक कारण है जिससे निपटा जा सकता है।

अगर आप इसे पढ़ रहे हैं, तो दूसरों की मदद के लिए अपने हाथ आगे बढ़ाएं। अपने शब्दों की मदद से, देखभाल करके, सहानुभूति दिखाकर, आशा जगाकर, विश्वास करके, प्रशंसा करके उनकी मदद करें। उनके आंसू पोछकर सपोर्ट दें। जो भी संकट की घड़ी में हो उसे अपना साथ देकर उसे खुश रखने का प्रयास करें।

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