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सेक्सटिंग के बारे में आपको क्या जानना चाहिए

सेक्सटिंग उन लोगों के लिए ख़तरनाक हो सकती है, जो इसके नतीजों के बारे में नहीं जानते हैं

इंटरनेट, पोर्टेबल डिवाइस और सोशल मीडिया के आने के साथ हमारी कल्चर और सोसायटी में कई सारे सेक्शुअल चेंजेस हुए हैं। सेक्स-कंटेंट का एक्सचेंज भारत में अधिक चलन में आ गया है। ऐसा ही एक ट्रेंड है 'सेक्सटिंग' का। हालांकि, यह जानना ज़रूरी है कि यह एक ग़लती है और इससे आपकी ज़िंदगी और प्रतिष्ठा दांव पर लग सकती है।


‘सेक्सटिंग’ क्या है?
स्मार्टफोन, कम्प्यूटर, लैपटॉप या अन्य डिजिटल डिवाइस के माध्यम से सेक्शुअली एक्सप्लिसिट मैसेज या फोटो सेंड, रिसीव या फ़ॉरवर्ड करना सेक्सटिंग है। टीनएजर्स में यह पापुलर है और 25 से 30 फ़ीसदी ने माना है कि वे सेक्सटिंग करते हैं।

यह कैसे होती है? 
जैसे ही आपको क्यूपिड का तीर लगा और आपके लव-इंट्रेस्ट ने भी आपमें इंट्रेस्ट दिखाना शुरू कर दिया, तो यह शुरू हो जाती है। आप फे़सबुक पर उनसे दोस्ती करने की कोशिश करते हैं। इंस्टाग्राम को फ़ॉलो करते हैं और वह कब कहां होते हैं, इसका पता आपको होता है। धीरे-धीरे आप दोनों के बीच बातचीत शुरू होती है और आप फोन पर भी एक-दूसरे से बात करना शुरू कर देते हैं। कई बार देर रात तक घंटों बातें करते हैं। चूंकि आप दोनों ही टीन्स हैं और आप दोनों के ही हार्मोन तेज़ी से एक्टिव हो रहे हैं, आप एक-दूसरे के प्रति सेक्शुअली आकर्षित होने लगते हैं और तस्वीरें भेजना शुरू करते हैं। यह शुरुआत क्यूट, जस्ट आउट ऑफ बेड, अ हेअरकट, गॉट ए शेव जैसी तस्वीरों के साथ होती है, लेकिन धीरे-धीरे स्थिति वहां पहुंच जाती है, जहां उसे नहीं जाना चाहिए था।

सेक्सटिंग के साथ आने वाली कुछ समस्याएं ये हैं :

शर्मिंदगी : शुरुआत में भले ही यह फ़न और प्लेज़र जैसा लगे मगर भविष्य में ये पल शर्मिंदगी दे सकते हैं।

अपमान : अगर पिक्चर सोशल मीडिया पर वायरल हो जाती है, तो उसका नतीजा सोसायटी में रेपुटेशन ख़राब होने के रूप में मिलेगा, फिर चाहे वह लड़का हो या लड़की। 

नियंत्रण से बाहर : सोशल मीडिया के सबसे बड़े नुक़सान में से एक ये है कि आप एक बार जब कुछ भेज देते हैं, तो फिर  आप अपने उस एक्शन को रोक नहीं सकते हैं। साइबरस्पेस में भेजी हुई कोई भी चीज़ कभी भी हमेशा के लिए वहां से नहीं हटेगी।

बदला लेना : आपका एक्स आपसे बदला लेने का भी सोच सकता है, और बदला लेने के कई उपाय खोज सकता है। 

जबरन वसूली : ब्लैकमेलर कम्युनिकेशन और इमेज के अपने पास होने का फायदा उठा सकता है और इसके बदले में आपको कोई समझौता करने को मजबूर कर सकता है।

अच्छे अवसर खोना : अधिकांश कंपनियां और विश्वविद्यालय एक कैंडिडेट को एडमिट करने से पहले उसके बैकग्राउंड को चेक करते हैं। वे जो कुछ भी ऑनलाइन पाते हैं, वह आसानी से उनके निर्णय को बदल सकता है।

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एलजीबीटीक्यू क्या है?

हाल के दिनों में टर्म एलजीबीटीक्यू हमारे देश में पॉपुलर हो गया है। इससे उन टीनएजर्स के मन में कई सवाल भी उठने लगे हैं, जो इससे परिचित नहीं हैं। अगर आपके भी यही सवाल हैं तो इसे पढ़ डालिए।
Gousiya Teentalkindia Content Writer

सबसे पहले तो एलजीबीटीक्यू का फ़ुल फ़ॉर्म समझते हैं :

L : लेस्बियन 
G : गे 
B : बायसेक्शुअल 
T : ट्रांसजेंडर 
Q : क्वीर 

यानी एलजीबीटीक्यू में इन कैटेगरीज़ के लोग आते हैं।

साइंस कहता है कि जेंडर केवल दो होते हैं- मेल एंड फ़ीमेल। हो सकता है यह आपको अजीब लगे, और ऐसा लगना सही भी है। 

अगर आप अपने आसपास किसी गे-कपल को देखते हैं तो आप पाएंगे कि उनमें से एक थोड़ा-सा फ़ेमिनिन होगा। क्या इसका यह मतलब नहीं है कि वो दोनों अलग-अलग सेक्शुअल कंस्ट्रक्ट्स के हैं? और अगर ऐसा है, तब तो यह एक अलग ही जेंडर माना जाना चाहिए।

आपने ऐसी औरतें भी देखी होंगी, जो पुरुषों की तरह कपड़े पहनती हैं, फिर भी उनका सेक्शुअल ओरिएंटेशन पुरुषों के प्रति ही होता है। इसी प्रकार ऐसे भी पुरुष हैं, जो थोड़े फ़ेमिनिन भले हों, लेकिन लड़कियों की ओर आकर्षित होते हैं। वास्तव में जब हम सेक्शुअलिटी, ओरिएंटेशन और इंट्रेस्ट्स के दायरे में वैरिएशंस की कोई कमी नहीं है।

हाल ही में एक रिसर्च ने बताया है कि मनुष्यों में कम से 63 जेंडर्स होते हैं। लेकिन यह एक कभी ना ख़त्म होने वाला विषय है और इस पर बहस होती रहेगी। ना केवल रिसर्चर्स और साइंटिस्ट्स इस पर कंफ़्यूज़्ड हैं, बल्कि हम भी यही सोचते हैं कि जिन लोगों की सेक्शुअलिटी थोड़ी अजीब है, उनमें किसी तरह की कोई भूल है। हम चीज़ों को दो खांचों में ही बांटकर देखते हैं, इससे हमारा नज़रिया प्रभावित हो जाता है।

इसलिए अब समय आ गया है कि हम इस बात को समझें कि वो लोग ना तो समाज की भूल हैं ना प्रकृति की। हमें ह्यूमन जेंडर, सेक्स और सेक्शुअल डायवर्सिटी को बेहतर ढंग से समझने की कोशिश करना होगी, और डिफ्रेंट जेंडर्स के बारे में अपने नज़रिये में सुधार लाना होगा।

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