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माता-पिता को कैसे बताएं कि आप एक ट्रांसजेंडर हैं?

ट्रांसजेंडर के तौर पर खुद की नई पहचान बनाना मुश्किल हो सकता है। यहां हम आपको कुछ टिप्स बता रहे हैं जिन्हें अपनाकर आप ऐसे हालात का सामना आसानी से कर सकते हैं।

कई लोग अपनी सेक्सुअलिटी और सैक्सुअल इंट्रेस्ट के बारे में नहीं जान पाते हैं। वहीं, कुछ लोगों को अपनी सेक्सुएलिटी के बारे में काफी देर से पता चलता है और जब इसका पता चलता है तो सबसे बड़ी मुश्किल आती है माता-पिता और परिवार को इसकी जानकारी देने में। ट्रांसजेंडर होना और इस सच्चाई के साथ लोगों के सवालों सामना करना बेहद कठिन हो सकता है। ट्रांसजेंडर के तौर पर खुद की नई पहचान बनाना मुश्किल हो सकता है। यहां हम आपको कुछ टिप्स बता रहे हैं जिन्हें अपनाकर आप ऐसे हालात का सामना आसानी से कर सकते हैं।

कैसे बताएं कि आप कौन हैं ?
जब आपको इस बात का अहसास हो जाए आप एक ट्रांसजेडर हैं तो लोगों को भी इस बारे में बताएं। उन्हें बताएं कि वो आपको लड़के की तरह पुकारे या लड़की की तरह आपसे व्यवहार करें। इससे उन्हें आपके जेंडर के बारे में मालूम होगा। साथ ही उन्हें इस बात की भी जानकारी होगी कि आप अपने जेंडर के साथ खुश हैं और ये आपका निर्णय है। ये आप पर निर्भर करता है कि लोगों को इस बारे में कैसे बताएंगे। अलग-अलग वक्त पर इसकी जानकारी आप परिवार और दोस्तों को दे सकते हैं। वहीं, आप चाहे तो कुछ लोगों को इस बारे जानकारी देने का विचार छोड़ सकते हैं क्योंकि गैरजरूरी लोगों को यह मालूम हो ऐसा जरूरी नहीं है।

गे, लेस्बियन, बायसैक्सुअल और ट्रांसजेंडर होने में अंतर होता है। गे और लेस्बियन जैसे शब्द आज बेहद आम हैं लोगों को समझ आते हैं लेकिन ट्रांसजेंडर शब्द कुछ लोगों के लिए नया हो सकता है, खासतौर पर माता-पिता के लिए।

माता-पिता को कैसे बताएं?
अपने माता-पिता के सामने आने से पहले, कुछ बातें जान लीजिए। पहले ट्रांसजेंडर से जुड़ें अपने माता-पिता के धार्मिक विश्वासों और विचारों के बारे में सोचें। इससे आपको अंदाजा होगा कि वे इस पर क्या और कैसी प्रतिक्रिया देंगे। माता-पिता इस बारे में नकारात्मक प्रतिक्रियां ही देंगे, यह समझने के बाद भी उन्हें ये बताने के लिए तैयार हैं तो कुछ बातों को समझें ताकि उन्हें आसानी से समझा सकें।

  • इस तथ्य को स्वीकार करें कि आपके माता-पिता शुरू में परेशान हो सकते हैं।
  • उनकी राय समझते हैं लेकिन उन्हें ये भी बताए कि आप भी अपने जीवन के एक अहम दौर से से गुजर रहे हैं।
  • जब वे अन्य चीजों में व्यस्त हों तो उनसे बात करने की कोशिश न करें।
  • इससे पहले कि आप वास्तव में उनसे बात करें, अभ्यास करें। अपनी बात कहने से पहले जानिए कि आप किन शब्दों में उन्हें समझाएंगे।
  • उस वक्त को याद करें जब इस बात का अहसास हुआ था कि आप औरों से अलग हैं और खुद से अपनी सेक्सुअलिटी को लेकर सवाल करना शुरू किया था।  
  • उन्हें आपके जरिए दी गई जानकारी को स्वीकार करने का समय दें। शुरूआती झटके से उबरने के बाद वे आपके लिए सबसे ज्यादा सहायक बन सकते हैं।
  • उन्हें उस बारे में बताएं जब आपने सबसे पहले खुद से अपनी सैक्सुअलिटी के बारे में सवाल किया था।

अगर आप अब भी अपनी सेक्शुअलिटी के बारे में उलझन में हैं या इस सच्चाई का आप सामना नहीं कर पा रहे हैं तो हमारे विशेषज्ञ मदद के लिए मौजूद हैं। आप हमारे साथ सुबह 11 से रात 8 बजे के बीच चैट कर सकते हैं या expert@teentalkindia.com पर हमें ईमेल लिख सकते हैं।

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रजामंदी या सहमति का क्या मतलब होता है?

अगर आप किसी के साथ रिलेशनशिप हैं तो सहमति या रजामंदी क्या मायने रखती है।
Gousiya Teentalkindia Content Writer

रजामंदी या सहमति को लेकर बहुत ज्यादा बात नहीं की जाती है। केवल एक कथन 'नो मीन्स नो' के जरिए जाहिर किया गया। लेकिन इसे लेकर भी कई धारणाएं बना ली गईं हैं। आइए जानते हैं कि अगर आप किसी के साथ रिलेशनशिप हैं तो सहमति या रजामंदी क्या मायने रखती है।

अपने पार्टनर के साथ किसी भी तरह की शारीरिक गति-विधि को लेकर रजामंदी का शब्द का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। दोनों पार्टनर्स का शारीरिक गतिविधि को लेकर सहज होना, उस बारे में बात करते वक्त सहज महसूस करना और दोनों ही मानसिक रूप से उस गतिविधि के लिए तैयार हों।  गलत ना समझते हों। ये गतिविधियां टच करना, किस करना, यौन संबंध या कुछ और भी हो सकता है। जो भी गतिविधि हो रही हो उसमें दोनों पार्टनर्स की रजामंदी शामिल होना जरूरी होता है। 

रजामंदी का ये मतलब बिलकुल नहीं होता है कि 'ना' कहने की या 'हां' कहने की जिम्मेदारी किसी एक ही हो। दोनों की हां और ना मायने रखती है।शारीरिक गतिविधि के दौरान अगर दोनों में कोई एक भी रजामंदी नहीं दे रहा है या यू कहें कि सीधा-सीधा ना कह रहा है। बावजूद इसके दूसरा पार्टनर उस पर दबाव बना रहा है तो इसे यौन शोषण कहा जाता है। 

रजामंदी लेने के लिए कई लोग खासकर टीनएज इसमें असहज महसूस कर सकते हैं। लेकिन शारीरिक गतिविधियों के दौरान रजामंदी लेना बेहद जरूरी होता है। क्योंकि अगर सहमति के साथ आगे बढ़ेंगे तो उस पल को आप अच्छे से जी पाएंगे। साथ ही आप एक दूसरे से इस बारे बेहतर ढंग से बात भी कर पाएंगे। रिश्ते को लेकर वो ज्यादा सकारात्मक सोच भी रख सकेंगे। 

कभी अचानक आप या आपका पार्टनर ऐसे हालात में खुद को फंसा हुआ पाएं तो रजामंदी कैसे मांगे?

  • क्या तुम सहज महसूस कर रही हो या कर रहे हो?
  • क्या ये ठीक है?
  • क्या ये नहीं करना है?
  • क्या इसे आगे बढ़ाना है?

रजामंदी किसे कहते हैं?

  • हर कदम पर बात करें
  • ये समझें की आपका पार्टनर कब ना कह रहा है और जब वो ना कह रहा हो तो उसका मतलब हां वहीं है। क्योंकि रजामंदी या हां हमेशा ही साफ और खुशी से भरी होती है। अगर आपका पार्टनर कुछ नहीं कह रहा है तो इसका ये मतलब नहीं है कि वो राजी है। आपकी पार्टनर की खामोशी का मतलब ना ही समझें। 
  • ये जरूरी नहीं कि ना केवल लड़की ही कहे और लड़का ही हमेशा पहला कदम बढ़ाए। इस धारणा को तोड़ें। शुरुआत कोई भी कर सकता है और ना कहने का अधिकार भी दोनों को बराबर का होता है। 

क्या हर बार रजामंदी जरूरी होती है?

हां, एक अच्छे रिलेशनशिप में हर बार हां की रजामंदी होना जरूरी होता है। हर बार दोनों का राजी होना जरूरी होता है। अपने रिश्ते को बनाए रखने के लिए ये जरूरी है कि आप हर बार एक-दूसरे का सम्मान करते हुए रजामंदी लें। क्योंकि ये जरूरी नहीं है कि अगर आपके पार्टनर ने एक बार किसी भी चीज के लिए सहमति जता दी है तो इसका ये मतलब नहीं होता है कि हर बार वो इसके लिए तैयार हो। ये मायने नहीं रखता है कि आपने पहले कितनी बार ये किया है। चाहे ये पहली बार हो या 100वीं बार लेकिन हर बार पार्टनर से रजामंदी लेना जरूरी होता है। क्योंकि हर का खुद के शरीर पर अधिकार होता है और ये उस पर निर्भर करता है कि वो अपने शरीर के साथ क्या करना चाहता है। हर बार वो उसके लिए तैयार है या नहीं ये केवल वो ही तय कर सकता है।

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