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क्यों टीन्स को होती है डैड की ज़रूरत

हर साल जून महीने के तीसरे रविवार को फादर्स डे मनाया जाता है। इस अवसर पर हम टीन्स की ज़िंदगी में पिता की कीमत और उसके महत्व को याद कर कर रहे हैं….

पिता अपने बच्चों के व्यक्तित्व और चरित्र को बनाने वाले एक महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं। कोई इस बात को स्वीकार करे या नहीं, कोई टीनएजर भविष्य में कैसा एडल्ट्स बनता है, इसमें बहुत ज्यादा बदलाव सिर्फ पिता की भूमिका के कारण होता है। इस दौर में में जब पिता की भूमिका धीरे-धीरे धुंधली होती जा रही है, ऐसे में यह जानना ज़रूरी हो गया है कि पिता इतना मायने क्यों रखते हैं। 

डैड का होना बहुत मायने रखता हैं, यहां उनके होने के कुछ फायदे दे रहें : 

आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य पर असर : 

कई रिसर्चर ने निष्कर्ष निकाला है कि, जिन टीन्स के पिता उनकी ज़िंदगी में एक्टिवली इन्वॉल्व होते हैं उनमें बेहतर आत्मसम्मान होता है और डिप्रेशन से ग्रस्त होने की आशंका भी कम होती है। इसके अलावा, एक्टिव रहने वाले पिता हों तो टीन्स में सेल्फ इमेज के नकारात्मक बनने का खतरा भी कम होता है। इसके उलट, जिन टीनएजर को लापरवाह और सतर्क न रहने वाले पिता बड़ा करते हैं, उनमें डिप्रेशन और अन्य मेंटल हेल्थ डेवलप से जुड़ी समस्याओं के होने की आशंका अधिक होती है। 

रिलेशनशिप में बेहतर होते हैं :  जब एक टीन्स को अपने पिता से प्यार और अपनापन मिलता है और वह अपने पिता को परिवार के अन्य सदस्यों की भी परवाह करते हुए देखता है, ऐसे में जब वह बड़े होकर अपनी ज़िंदगी में भी रिश्तों में कई तरह की समस्याओं का सामना करता है। तब पिता की रिश्तों को निभाते समय  की छवि उसके सामने एक मॉडल के रूप में होती हैं और यह चीजें एक युवा के मन पर बहुत गहराई से अंकित हो जाती हैं। 

आस्था को आकार देते हैं : एक सामान्य ऑब्जर्वेशन यह है कि,  पिता ही होते हैं, जो एक टीनएजर को दुनिया देखने का नज़रिया और धार्मिक आस्था को आकार देते हैं। विडंबना यह है कि भले ही मां एक टीनएजर में धार्मिक और उसके समग्र दृष्टिकोण को लेकर चिंतित होती है, लेकिन पिता का व्यवहार और विचार ही है, जो कुछ मान्यताओं और मूल्यों के सार को पूरी तरह बदल देते हैं। 

वे लड़कों को दिखाते हैं ‘कैसे मनुष्य बनें’

जैसा कि कहा गया हैं, "एक लड़के को यदि सही आदमी से जोड़ दिया जाए तो वह शायद ही फिर कभी गलत हो।" लड़कों के लिए,  उनके पिता इस बात का प्राथमिक उदाहरण हैं कि, आदमी होने का क्या मतलब है। युवा लड़के अपने पिता से नैतिकता, देखभाल, जिम्मेदारी और काबिलियत सीखते हैं। इसके अलावा, एक टीनएजर लड़का अपने पिता का अन्य महिलाओं के साथ तालमेल देखता है, कि वह उनके साथ कैसा व्यवहार करते हैं, अपनी फिजिकल पावर का उपयोग महिलाओं को ट्रीट करने में करते हैं या नहीं।  बच्चों के साथ कैसे रिश्ते रखते हैं, अपने काम को कितना महत्व देते हैं और अपने फ्रेंड्स के साथ कैसी फ्रेंडशिप रखते हैं। ये ऑब्जर्वेशन तब टीनएजर के लिए एक तय विकल्प होते हैं कि, उन्हें कैसा पुरुष बनना है। 

पिता को देखकर लड़कियां समझती हैं कि एक आदमी से क्या उम्मीद करें :

एक और पुरानी कहावत है, "लड़कियां अपने पिता से शादी करती हैं।" यानी वह अपने पति में अपने पिता को ही तलाशती हैं। युवा लड़कियां अपने पिता को देखकर यह सीखती हैं कि,  एक आदमी से उन्हें क्या उम्मीद करनी चाहिए। जैसा कि एक लड़की देखती है कि उसके पिता उसके और उसकी मां के साथ कैसा व्यवहार करते हैं। यह चीजें उसके दिमाग में पुरुषों को लेकर एक नज़रिये को विकसित करती हैं। इससे लड़कियां सीखती हैँ कि, एक आदमी में क्या देखा जाए। 

यहां कुछ चीजें हैं जो आप अपने डैड के साथ अपने बंधन को मजबूत करने के लिए कर  सकते हैं : 

उनके साथ रोजाना समय बिताएं। 

उन चीजों का पता करें, जो आपको और उन्हें दोनों को पसंद हो। 

यह जाहिर करें कि आप उनसे प्यार करते हैं। 

उनके साथ हमेशा जुड़े रहें।

उनसे सवाल पूछें और उनकी सलाह लें।

चाहे आप कितने भी बड़े हों,  आप हमेशा उनके बच्चे ही रहेंगे। इसलिए अपने आप को इस सोच में न उलझाएं कि आप उन्हें अपना प्यार दिखाने के लिए बहुत बूढ़े हो गए हैं। ये कोशिश करो और बाद में हमें धन्यवाद दो!

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एक टूटे हुए रिश्ते को जोड़ना

किसी भी रिश्ते में सब कुछ चमकता हुआ नहीं होता है, मगर दो लोग एक छत के नीचे ज़िंदगी जी सकते हैं…
Gousiya Teentalkindia Content Writer

कुछ लोगों की ज़िंदगी में रिश्ते ख़ुशी और जीवन की सार्थकता के सबसे बड़े स्रोतों में से हैं, तो कई बार यह लंबे समय तक होने वाले दुख और अफसोस का कारण हैं। जब दो लोग अलग-अलग जिंदगी, कल्चरल बैकग्राउंड और समसामयिक दबाव के कारण एक साथ आते हैं,  तो आप एक-दूसरे से टकराते हैं या फिर रिश्ते में लंबे वक्त तक आई दूरी के बाद अलग हो जाते हैं। 

अपने रिश्ते को सुधारने के लिए कुछ टिप्स :

लोगों के बारे में सोचें : रिश्ते के बारे में सोचने से ज्यादा आसान लोगों के बारे में सोचना है, ख़ासकर तब जब कौन सही या कौन गलत है। ऐसे में थैरेपी मंत्र यही है कि, लोगों की तुलना में सल्यूशन पैटर्न ज्यादा शक्तिशाली है। ऐसा करने का एक अच्छा तरीका लोगों के बारे में बात करने के बजाय समाधान के तरीके पर बात करना है। आपको अपने रिश्ते में चेंज एजेंट यानी बदलाव लाने वाला व्यक्ति बनना होगा जो निश्चित रूप से एक अच्छी और महत्वपूर्ण शुरुआत है।

तर्कसंगत व्यवहार करें : इस एक्शन में हमारे लिए ज़िम्मेदार होना ज़रूरी है। हमें किसी के साथ र्दुव्यवहार नहीं करना है और न ही किसी को नुकसान पहुंचाना है। यह आपकी समस्याओं के लिए जिम्मेदार होने के बारे में है जिसका अर्थ है कि, आपको दूसरों से अपेक्षा करने के बजाय समस्या से निपटने और रिश्ते को ठीक करने के लिए ख़ुद कदम उठाने की ज़रूरत है।  इसलिए कुछ भी पर्सनली नहीं लेना चाहिए।  इस बात को भी अच्छे से समझ लें कि दूसरा व्यक्ति अपने ढंग से अपने हिस्से की परेशानी को सहन कर रहा होगा। यह तर्कसंगत होने को लेकर है, इस समय एक समझदार एडल्ट्स की तरह व्यवहार करने की ज़रूरत है।  

आज पर फोकस करें : जब आप किसी रिश्ते की वजह से तनावग्रस्त होते हैँ, तो उस वक्त आप पहले आपके साथ हुए सारे अन्याय और र्दुव्यवहार के बारे में सोचना शुरू कर देते हैं, आपके पास इसे लेकर हर तरह की दलील और सबूत होते हैं। जबकि ऐसा करने आपको बेकार की बहस करने के लिए ऊर्जा मिलती है, लेकिन ऐसे में समस्या का कोई हल नहीं निकलेगा और ये सब आपको और नीचे खींचेगा। इसलिए ऐसी स्थिति में बीते कल में देखने के बजाय आज जो समस्या है उसे ठीक करें। 

बड़ा सोचिए :  अपने पार्टनर / फ्रेंड या रिश्तेदार से सोच-समझकर दोबारा जुड़ने के लिए प्यार भरी भावनाओं के साथ् अपनी ज़िंदगी में उनके लिए कुछ जगह बनाएं, भले ही हाल ही में हुई बातचीत के बाद नाराजगी या दूरी आ गई हो। उस व्यक्ति के अंदर के अच्छे गुणों के बारे में सोचें जिनकी वजह से आप सच में उनकी ओर आकर्षित होते हैं। 

व्यवहार में बदलाव : व्यवहार में परिवर्तन लाकर आप अपनी ख़ुद की स्थिति में बदलाव ला सकते हैं, क्योंकि अपनी भावनाओं और यहां तक कि अपने मन में चल रहे विचारों के विपरीत व्यवहार करने से हम वास्तव में अपनी स्थिति में काफी कुछ बदलाव कर सकते हैं और यह सब व्यवहार में बदलाव से ही संभव है। ऐसा करके आप ख़ुद को भावनात्मक दलदल से बाहर निकालते हैं और यह एक अच्छा उपाय है। इसलिए अपने साथी को दिन में 5 बार गले लगाएं। भले ही आपको ऐसा करना अच्छा लग रहा हो या नहीं, फिर भी करें और देखें कि क्या इससे घर में भावनात्मक माहौल में बदलाव नहीं आता है। 

एक एडल्ट बनें : अच्छे फैसले बुरे अनुभव और बीते वक्त में लिए गए गलत फैसलों के बाद ही ले पाते हैं। ज़िंदगी और रिश्तों को बैलेंस करना एक्सपेरिमेंट और एलिमिनेशन की एक लंबी प्रक्रिया है।

 

 कुछ करके देखिए :  अच्छे मन और पूरे दिमाग से सोचिए कि क्या किया जा सकता है, तालमेल बैठाकर फिर से कोशिश करें। ड्रामा, एक-दूसरे के साथ किसी भी तरह का खेल खेलने और मैनिप्यूलेट करने से बचें। अपने बारे में सोचें, कि आप समस्या को ठीक करने के लिए क्या कर सकते हैं। सहानुभूति, ख़ुद में कुछ बदलाव करके, प्यार और अपनेपन से रिश्ते को ठीक करें। आप अपने प्रियजनों के करीब आकर उन्हें बताएं कि, वे आपके लिए वे क्या मायने रखते हैं और आप उनकी कितनी परवाह करते हैं। आपको यह सब एक साथ करने की ज़रूरत नहीं है; इसके बजाय, देखें कि इनमें से कौन सा विचार आपका ध्यान पहले आकर्षित करता है। शुरुआत छोटे कदम से करें। ख़ुद पर ध्यान दें। एक बदलाव ही दूसरे बदलाव की वजह बनता है। 

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