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पेरेंट्स को अपनी टीम में शामिल करने के पांच तरीके

साइकोथैरेपिस्ट शीना कालिया को पढ़िए, वे पेरेंट्स को हमारी टीम में शामिल करने के कोड को क्रेक करने में मदद कर रही हैं…
Khubi Amin AhmedTeentalkindia Content Writer

हम किसी भी चीज से लेकर हर चीज के लिए अपने पेरेंट्स को दोष देने लगते हैं, जो नाम उन्होंने हमें दिया है उससे लेकर हमें अपने अंदर जो अच्छा नहीं लगती है हर उस चीज के लिए। कुछ जगह पर हम सभी अपने पेरेंट्स को खराब समझते हैं। कई बार ऐसा भी वक्त आता है जब हम उन्हें डराते हैं और कई बार हम उन पर भरोसा करने से भी डरते हैं।

चलिए इसका सामना करके देखते हैं, पेरेंट्स दोनों तरह के हो सकते हैं – उन्हें एप्रोच करना मुश्किल हो सकता है और उन्हें हर चीज के लिए दोष देना भी आसान होता है, मगर यह क्या कोई तरीका है? हमारे शब्द हमेशा क्यों पेरेंट्स के खिलाफ होते हैं? हम और हमारे पेरेंट्स एक टीम में क्यों नहीं रह सकते हैं? क्या कुछ मुद्दों पर असहमत होने के लिए हम सहमत नहीं हो सकते हैं? 

1.   ईमानदारी से बातचीत करें :

जब कभी कोई बुरी ख़बर सुनानी हो जैसे कि रिजल्ट खराब आया है तो ऐसे में पेरेंट्स से बातचीत करना मुश्किल हो जाता है। या आपको कुछ ऐसी चीज के लिए परमीशन चाहिए जो आप जानते हैं कि मिलना कठिन है। ऐसे वक्त में सही समय और सही शब्दों के चुनाव के साथ-साथ आत्मविश्वास से अपन बात रखना ज्यादा ज़रूरी है। खुद को अपनी नाकामयाबी के साथ पेश न करें। आप कभी कामयाब होते हैं तो कभी नाकामयाब होते हैं। नाकामयाबी वह है जिससे हम कुछ सीख सकते हैं और पेरेंट्स ने भी वह दौर देखा है। इसलिए यदि आप पूरी जिम्मेदारी लेते हैं, तो  आप जैसा सोचते हैं उसकी तुलना में बात करना आसान हो जाता है।

आप ये कर सकते हैं :

कुछ एकसाथ सीखना शुरु करें। कोई लैंग्वेज क्लास या फिर स्पोर्ट्स एक साथ ज्वाइन कर लें। ऐसा कुछ जो किसी जेँडर विशेष के लिए न हो बल्कि जिसे पूरा परिवार एक साथ कर सकता और कुछ नया सीख सके। भले ही आप कितना भी अच्छा या बुरा परफॉर्म करे, एक-दूसरे की मदद करना सीख जाएंगे।

2अपनी लाइफ में हास्य को जगह दें : 

यदि आप डीडीएलजे मूवी के पूजा सीन जिसमें काजोल सुबह की प्रार्थना करके अपने पिता से परमीशन मांगती हैं, तो आप कोई गलती नहीं कर रहे हैं। हास्य की ताकत को कम मत समझिए। हर रिश्ते को ज़िंदा रखने के लिए हास्य महत्वपूर्ण है मगर हमें यह जानना ज़रूरी है कि कब हमें गंभीर होने की ज़रूरत होती है। हास्य के होने का मतलब यह कतई नहीं है कि आप लाइफ को लेकर कैजुअल एप्रोच ले सकते हैं। 

मौज-मस्ती यदि एक लिमिट में की जाए तो इससे किसी को ठेस नहीं पहुंचती है, लेकिन जहां ज़रूरी है वहां आप ज़िम्मेदारी लें। इससे न केवल आपके और आपके पेरेंट्स के रिश्ते को बेहतर बनाएगा बल्कि आप दोनों के अंदर सही भावनाएं भी आएंगी।

आप ये कर सकते हैं : 

नाइट में एक साथ कोई मूवी देखने का प्लान बनाएं। यह कोई पॉपुलर मूवी हो सकती है, जिसे सब एक साथ देख सकें या फिर कोई मूड अच्छा करने वाली कॉमेडी फिल्म देख सकते हैं। यदि आप चाहे हैं तो फैमिली के हर मेंबर की पसंद के हिसाब से हर सप्ताह मूवी चुन सकते हैं।

3. पेरेंट्स के रोज के काम में कुछ मदद करें :  

पेरेंट्स के रोज के कामकाज में उनकी मदद करने से आपकी उनसे बॉन्डिंग बेहतर होगी। इससे यह भी दिखाता है कि आप जिम्मेदार हैं और काम में उनके साथ हैं। पेरेंट्स की मदद लगातार करते रहें और ऐसा नहीं कि सिर्फ तब जब आपको उनकी रूरत हो। एक ऐसा शेड्यूल बनाएं जो आपको और आपके पेरेंट्स को सूट करे और आप उस समय का उपयोग उनके साथ काम में हाथ बंटाने के लिए उपयोग करें। यह बहुत सरल सा जैसे सब्जी काटना या फिर कार धोना भी हो सकता है, इससे न सिर्फ आप एक काम करना सीखेंगे बल्कि आप अपनी फ्रेंडशिप को मजबूत बनाने के लिए कुछ क्वालिटी टाइम भी दे सकेंगे।

आप ये कर सकते हैं :

खाना पकाने, कपड़े धोने या फिर गार्डनिंग का काम मिलकर कर सकते हैं। सिर्फ इस बात का ख्याल रखें कि आप एक साथ और एक यूनिट के रूप में काम करें। यह वीकेंड एक्टिविटी हो सकती है जो बॉन्डिंग बेहतर करेगी।

4.  पेरेंट्स को शामिल करें :

पेरेंट्स के साथ बाहर कहीं जाना उनके दिल तक पहुंचने और उन्हें अपनी टीम में शामिल करने का बेहतर तरीका हो सकता है। वे आपको प्यार करते हैं और अगर आप उन्हें अपने साथ इन्वाल्व करते हो तो वे भी आपके साथ होंगे। अपने पेरेंट्स और अपने बीच की उन दीवारों को तोड़ने की कोशिश करें जो समय और उम्र की वजह से आप दोनों के बीच हैं।

आपको आश्चर्य होगा कि आप उनके अनुभवों और सलाह से कितना कुछ हासिल कर सकते हैं।

आप ये कर सकते हैं : 

एक साथ टहलने जाएं (मैं हमेशा एक साथ जाने के लिए नहीं कह रहा हूं)। साथ में चलने से शांत प्रभाव पड़ सकता है और आपके रिश्ते का एक सुंदर पक्ष सामने आ सकता है। इसे एक आवश्यक प्रेक्टिस समझिए।

5.  उनके नजरिये को समझिए :  

यदि आप अपने पेरेंट्स के कायदे-कानून के सामने खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं, तो ऐसे में कठोरता से रिएक्ट करने से पहले ज़रा एक बार सोचिए। आपके पेरेंट्स की विचार प्रक्रिया और उनके विश्वास एक अलग स्थिति और अलग दौर से आते हैं। हालांकि यह मुश्किल लगता है फिर भी अपने पेरेंट्स को जज करने से पहले धैर्य रखकर उनके नजरिये को समझने की कोशिश करें। चीजों को उनके नज़रिये से देखने से आपके लिए उनके साथ मतभेदों को सुलझाना आसान होगा। जिस पल आप उनकी भावनाओं को समझने की कोशिश करेंगे आप देखेंगे आपकी समस्या अपने आप आधी हल हो जाएगी।

आप ये कर सकते हैं 

आप एक फैमिली बुक क्लब शुरु कर सकते हैं। आप सभी एक-एक बुक चुनिए (लाइब्रेरी में कई सारी किताबें, ईबुक शामिल कर सकते हैं) और उसे सप्ताह भर में पढ़िए। हर सप्ताह आप सभी एक साथ उन किताबों, उनके प्लॉट, कैरेक्टर के बारे में चर्चा कर सकते हैं। इससे आपको एक-दूसरे के ज़िंदगी को लेकर नजरिये को समझने में मदद मिलेगी। 

 

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