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टीनएज लड़कों में नाइटफॉल

टीनएज लड़कों में होने वाले आम बदलावों में से एक है नाइटफॉल

टीनएज लड़कों में अक्सर ही स्वप्न दोष की समस्या होती है। आप एक सुबह उठते हैं और आपको चादर गंदी नजर आती है। दरअसल ये समस्या बड़े होने की निशानी होती है। ये ठीक वैसी ही होती है जैसी दाढ़ी-मूंछ आना।

नाइटफॉल /स्वप्न दोष क्या है?

नाइटफॉल जिसे "निशाचर उत्सर्जन" के रूप में भी जाना जाता है, तब होता है जब आप अपनी नींद के दौरान स्खलन करते हैं। हालांकि ये टीनएज के साथ-साथ कुछ युवा और अधेड़ उम्र के लोगों में होता है।

नाइटफॉल /स्वप्न दोष के पीछे क्या कारण है?

नाइटफॉल ज्यादातर उस वक्त होता है जब आप यौन उत्तेजित करने वाला सपना देख रहे होते हैं। सपने के दौरान नींद में शरीर वीर्य स्खलन (इरक्शन) हो जाता है। नींद के REM (रैपिड आई मूवमेंट) इस चरण के दौरान ही इरेक्शन का अनुभव होता है। इसके इस दौरान अगर आप यौन उत्तेजना महसूस करेंगे तब भी इरेक्शन होने की संभावना रहती है।  

आपको इस दौरान परेशानी होगी। हो सकता है सुबह उठने के बाद ये अनुभव आपको परेशान कर सकता है। इसके अलावा आप उलझन महसूस करेंगे। लेकिन यकीन मानिए ये एक सामान्य बात है और इसपर शर्मिंदा होने जैसी कोई बात नहीं है। 

क्या मैं नाइटफॉल /स्वप्न दोष को होने से रोक सकता हूं?

कई लोग इस बारे में सोचते हैं कि स्वप्न दोष को कैसे रोका जाए? लेकिन ये जान लें की इसके लिए कोई सिद्ध रणनीति नहीं है। अपनी चादरों को बदलने या बाद में साफ करने के दौरान शर्मनाक या कष्टप्रद हो सकता है, ध्यान रखें कि स्वप्न दोष बड़े होने के एक सामान्य निशानी है।

यदि आप एक स्वप्न दोष के बारे में असहज महसूस कर रहे हैं, तो किसी बड़े से इस बारे में बात करें जिस पर आप भरोसा करते हैं - जैसे माता-पिता, एक स्कूल परामर्शदाता, आपका स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता। इसके बारे में बात करना सबसे अच्छा तरीका है जिससे आप अपने विकास के इस प्राकृतिक हिस्से के बारे में अधिक सहज महसूस कर सकते हैं।

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प्री-मेंस्ट्रुअल सिंड्रोम क्या होता है ?

पीएमएस को समझने के लिए एक डायरी बनाइए
Gousiya Teentalkindia Content Writer

पीरियड्स किसी भी लड़की की जिंदगी में बिन-बुलाए मेहमान होते हैं। इसी तरह प्री-मेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (पीएमएस) भी होते हैं। ये किस तरह के होंगे कोई नहीं जानता है। इसलिए इन्हें समझने के लिए एक डायरी बनाएं, जिससे आप इनसे लड़ सकें। 

पीरियड्स एक प्राकृतिक बदलाव और प्रक्रिया है जिससे हर लड़की को गुजरना पड़ता है। इसी तरह पीएमएस भी आम प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन ये थोड़ी समस्या पैदा कर सकते हैं। ये कई तरह के बदलाव लेकर आता है, जो अलग-अलग तरह के हो सकते हैं। पीएमएस के प्रभाव पीरियड्स आने के 1 से 2 हफ्ते पहले नजर आने लगते हैं। पीरिड्स शुरू होने के साथ ही ये पीएमएस का असर खत्म हो जाता है। इसकी वजह से पीरियड्स के दौरान शरीर में कई बदलाव होते हैं।

सबसे पहले पीएमएस के लक्षण को पहचानें:

शरीरिक संकेत: स्तनों में खिचाव महसूस होना, पेट में ढीलापन, पेट और सिर में दर्द रहना, पैरों में सूजन, पिंपल्स और कॉन्सटीपेशन्स की समस्या

भावनात्मक संकेत: मूड स्विंग, गुस्सा आना, डिप्रेशन, जी मचलाना, सोने में दिक्कत होना या नींद ना आना

व्यवहारिक संकेत: एकाग्रता में कमी, थकान होना, चीजों को रख कर भूल जाना

पीएमएस को समझने के बाद इससे निपटने के बारे में सोचना चाहिए। अगर ये पूरी तरह से ठीक ना भी हुए तो भी कुछ टिप्स की मदद से समस्याओं को कम किया जा सकता है।

  • रोजाना 30 मिनट की एक्सरसाइज करें।
  • हेल्दी डाइट लें, जैसे फल, हरी सब्ज़ियां और अनाज खाएं
  • ज्यादा नमक, शराब और कैफिन के सेवन से बचें
  • स्मोकिंग ना करें 
  • अच्छी नींद लें
  • तनाव कम लें और अपने मूड का ख्याल रखें। जल्दी चिड़चिड़ाने की स्थिति में खुद को संभाले।
  • दर्द होने पर अच्छी दवा ही लें, जैसे आईब्रूफिन। लेकिन ये दवाएं डॉक्टर से सलाह के बाद ही लें। 

मानसिक दबाव और परेशानी से निपटने के लिए काउंसलर से मिलें। अच्छा काउंसलर आपको कई चुनौतियों से उबरने में मदद कर सकता है। अगर आपने अपने पीएमएस लक्षणों को लेकर नोट्स बनाएं हैं तो इन्हें डॉक्टर या काउंसलर के पास ले जाना ना भूलें। आपके नोट्स के जरिए वो बेहतर तरीके से आपकी मदद कर सकते हैं।  

पीरियड्स के दौरान साफ-सफाई का खास ख्याल रखना चाहिए। यहां कुछ खास टिप्स आपको बताएं जा रहे हैं...

  • रोज नहाएं
  • साफ और धुली हुए अंडर-वेयर ही पहनें।
  • पीरिड्स के दौरान इनफेक्शन से बचने के लिए अच्छी क्वालिटी के पैड का इस्तेमाल करें। 6 घंटे में पैड बदलें, टैम्पॉन्स का इस्तेमाल करती है तो इसे हर 2 घंटे में बदलें।
  • अपनी वजाइनल पर साबुन का इस्तेमाल ना करें। इसके बजाएं गुनगुने पानी या जेंटल वॉश से सफाई करें। इससे इनफेक्शन का खतरा काफी कम हो जाता है।
  • पैड और टैम्पॉन बदलने के बाद अपने हाथ गर्म पानी से धोएं। 
  • पैड और टैम्पॉन टॉयलेट में फ्लश ना करें।
  • लूज और आरामदायक कपड़े पहनें। जीन्स जैसे तंग कपड़े ना पहनें। लूज कपड़े पहनने से हवा का बहाव पसीने और रैशिंग जैसी समस्या से बचाता है। 

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