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टीनएज में होने वाली एक्ने की समस्या से आसानी से निपटें

नेचुरल तरीके से एक्ने से निपटें
Richa DubeyContent Writer

टीनएज में पिंपल्स या एक्ने की समस्या आम होती है। इस उम्र में हारमोन्स में कई बदलाव होते हैं। इस वजह से चेहरे में पिंपल्स उभर आते हैं। लेकिन इनकी वजह बच्चों का सेल्फकॉन्फिडेंस टूटने लगता है। घरेलू उपायों से इन्हें ठीक करने की कोशिशें की जाती हैं। लेकिन कम ही लोगों पर इनका असर होता है। क्या आप जानते हैं कि इस समस्या से नेचुरल तरीके से निपटा जा सकता है।  

टीनएज में पिंपल्स होने के कारण?

होर्मोन्स में होने वाले बदलाव होता है। इस वजह से स्किन में सीबम ऑइल बनने लगता है। ये सीबम ऑइल डेड स्किन के संपर्क में आता है और छिद्रों से पिंपल्स के रूप में बाहर आने लगता है। पिंपल्स या एक्ने गंभीर समस्या नहीं है। अगर पिंपल्स को छेड़ा ना जाए तो ये बिना दाग के आराम से गायब हो जाता है। लेकिन कभी-कभी ये बेहद डरावने हो जाते हैं। इनमें दर्द, सूजन के साथ इनफेक्शन हो जाता है। जिससे आपको परेशानी हो सकती है। 

पिंपल्स या एक्ने से निपटने के लिए जानते हैं कुछ आसान उपायों से आप इनसे निजात पा सकते हैं।

ऑइल फ्री फेस-वॉश से अपना फेस धोएं

एक अच्छी कंपनी का फेसवॉश खरीदें। ध्यान रहे ये फेसवॉश ऑइल फ्री हो। दिन में दो अपने फेस को वॉश करें। फेस वॉश करते वक्त स्किन बहुत ज्यादा रगड़ने से बचे। जब चहेरे को पोंछने के लिए तौलिए का इस्तेमाल करें तब भी इस बात का ध्यान रखें कि उसे स्किन पर रगड़े नहीं। इसके अलावा आप एक्सफोलिएशन वाला फेसवॉश भी इस्तेमाल कर सकते हैं। ये डेड स्किन को निकालने में मदद करता है। डेड स्किन में कमी आने से पिंपल्स में भी कमी आएगी। आप 5 प्रतिशत बेंजोल पीरोक्साइड युक्त फेस वॉश का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन इसे पहले हफ्ते में दिन में केवल एक बार ही लगाएं। एक हफ्ते के बाद इसे दिन में दो बार लगाया जा सकता है। इसे 6 हफ्तों तक इस्तेमाल करें। 

जिंक युक्त प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करें

अध्ययन से ये पता चला है कि जिंक और जिंक युक्त प्रोडक्ट एक्ने या पिंपल्स की समस्या को कम करते हैं। जिंक का इस्तेमाल स्किन से निकलने वाले ऑइल को कंट्रोल करता है। इसके अलावा स्किन की रेडनेस को भी कम करता है। आप चाहें तो जिंक सप्लीमेंट भी ले सकते हैं। लेकिन अगर आप पहले से ही हेल्दी डायट ले रहे हैं तो  जिंक सप्लीमेंट की जरूरत नहीं पड़ेगी। गेहूं के बीज, दलिया, तिल के बीज, पोल्ट्री उत्पाद, सी फूड और मांस के जरिए जिंक मिल सकता है।

विटामिन्स लें

एक अध्ययन में सामने आया है कि विटामिन की कमी से एक्ने या पिंपल्स की समस्या होती है। सही मात्रा में विटामिन्स लेने से पिंपल्स की समस्या कम हो सकती है। टीनएज में फल और सब्जियों के जरिए विटामिन ए की कमी को पूरा किया जा सकता है। 

शहद और दालचीनी का मास्क

अध्ययन में सामने आया है कि शहद और दाल-चीनी का मास्क पिंपल्स से राहत दिलाने में मदद कर सकता है। शहद और दाल-चीनी पॉउडर में ऐसे तत्व मौजूद हैं जो पिंपल्स को कम करने में मदद सकते हैं।

  • यहां जानिए कि फेस मास्क कैसे बनाना है?
  • एक छोटा चम्मच दाल-चीनी को एक छोटा चम्मच शहद में मिलाएं।
  • फेस धोएं, इस मास्क को चेहरे पर लगाएं।
  • 20 मिनट तक इसे चेहरे पर रहने दें और फिर धो लें।

टी-ट्री आइल

शोध बताते हैं कि चाय के पेड़ का तेल ( टी-ट्री ऑइल)  पिंपल्स को कम करने में मदद करता है।टी-ट्री ऑइल में मेलेलुका अल्टिफ़ोलिया या चाय के पेड़ की पत्तियों से आता है। एक अध्ययन में पाया गया कि 5% टोपिकल टी-ट्री ऑइल पिंपल्स को तीन महीने खत्म कर सकता है।

डेयरी प्रोडक्ट्स को अवाइड करें

टीनएज में होने वाले हारमोन्स बदलावों के बीच दूध या दूध से बने प्रोडक्ट्स पिंपल्स की समस्या को बढ़ा सकते हैं। डॉक्टर्स मानते हैं कि डेयरी उत्पाद कुछ लोगों में पिंपल्स की समस्या का कारण बनते हैं। इसलिए जैसे ही पिंपल्स दिखाई दें कम से कम एक महीने के लिए डेयरी प्रोडक्ट्स दूरी बना लें।  अगर डेयरी प्रोडक्ट्स से दूरी रखने से पिंपल्स में कमी आए तो लंबे वक्त के लिए डेयरी प्रोडक्ट्स छोड़ दें। 

तनाव का प्रबंधन करो

भावनात्मक और मानसिक तनाव के कारण पिंपल्स नहीं होते हैं लेकिन ये पहले से हो रही पिंपल्स की समस्या को बढ़ा सकते हैं। शोध बताते हैं कि शरीर में स्ट्रेस हारमोन्स कॉर्टिकोट्रोपिन-रिलीजिंग हार्मोन से वसामय ग्रंथियां प्रभावित हो सकती हैं। हार्मोन अतिरिक्त सीबम उत्पादन को जन्म दे सकता है, जिस वजह से पिंपल्स भढ़ने की संभावाना बढ़ जाती है।

व्यायाम

नियमित व्यायाम भी तनाव को कम करता है और हारमोन्स के बदलावों के असर को भी कम करता है। व्यायाम का टीनएज पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और यह पिंपल्स को कम करने में मदद करता है। 

पिंपल्स टीनएज बच्चों के स्ट्रेस का कारण हो सकते हैं। लेकिन उन्हें समझाना होगा कि ये बड़े होने की एक सामान्य सी प्रक्रिया है। कई वयस्कों ने अपने टीनएज में इस समस्या का सामना किया है। देखभाल, एक अच्छे आहार, और एक स्वस्थ जीवन शैली इस समस्या से आसानी से निपटा जा सकता है।

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प्री-मेंस्ट्रुअल सिंड्रोम क्या होता है ?

पीएमएस को समझने के लिए एक डायरी बनाइए
Richa DubeyContent Writer

पीरियड्स किसी भी लड़की की जिंदगी में बिन-बुलाए मेहमान होते हैं। इसी तरह प्री-मेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (पीएमएस) भी होते हैं। ये किस तरह के होंगे कोई नहीं जानता है। इसलिए इन्हें समझने के लिए एक डायरी बनाएं, जिससे आप इनसे लड़ सकें। 

पीरियड्स एक प्राकृतिक बदलाव और प्रक्रिया है जिससे हर लड़की को गुजरना पड़ता है। इसी तरह पीएमएस भी आम प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन ये थोड़ी समस्या पैदा कर सकते हैं। ये कई तरह के बदलाव लेकर आता है, जो अलग-अलग तरह के हो सकते हैं। पीएमएस के प्रभाव पीरियड्स आने के 1 से 2 हफ्ते पहले नजर आने लगते हैं। पीरिड्स शुरू होने के साथ ही ये पीएमएस का असर खत्म हो जाता है। इसकी वजह से पीरियड्स के दौरान शरीर में कई बदलाव होते हैं।

सबसे पहले पीएमएस के लक्षण को पहचानें:

शरीरिक संकेत: स्तनों में खिचाव महसूस होना, पेट में ढीलापन, पेट और सिर में दर्द रहना, पैरों में सूजन, पिंपल्स और कॉन्सटीपेशन्स की समस्या

भावनात्मक संकेत: मूड स्विंग, गुस्सा आना, डिप्रेशन, जी मचलाना, सोने में दिक्कत होना या नींद ना आना

व्यवहारिक संकेत: एकाग्रता में कमी, थकान होना, चीजों को रख कर भूल जाना

पीएमएस को समझने के बाद इससे निपटने के बारे में सोचना चाहिए। अगर ये पूरी तरह से ठीक ना भी हुए तो भी कुछ टिप्स की मदद से समस्याओं को कम किया जा सकता है।

  • रोजाना 30 मिनट की एक्सरसाइज करें।
  • हेल्दी डाइट लें, जैसे फल, हरी सब्ज़ियां और अनाज खाएं
  • ज्यादा नमक, शराब और कैफिन के सेवन से बचें
  • स्मोकिंग ना करें 
  • अच्छी नींद लें
  • तनाव कम लें और अपने मूड का ख्याल रखें। जल्दी चिड़चिड़ाने की स्थिति में खुद को संभाले।
  • दर्द होने पर अच्छी दवा ही लें, जैसे आईब्रूफिन। लेकिन ये दवाएं डॉक्टर से सलाह के बाद ही लें। 

मानसिक दबाव और परेशानी से निपटने के लिए काउंसलर से मिलें। अच्छा काउंसलर आपको कई चुनौतियों से उबरने में मदद कर सकता है। अगर आपने अपने पीएमएस लक्षणों को लेकर नोट्स बनाएं हैं तो इन्हें डॉक्टर या काउंसलर के पास ले जाना ना भूलें। आपके नोट्स के जरिए वो बेहतर तरीके से आपकी मदद कर सकते हैं।  

पीरियड्स के दौरान साफ-सफाई का खास ख्याल रखना चाहिए। यहां कुछ खास टिप्स आपको बताएं जा रहे हैं...

  • रोज नहाएं
  • साफ और धुली हुए अंडर-वेयर ही पहनें।
  • पीरिड्स के दौरान इनफेक्शन से बचने के लिए अच्छी क्वालिटी के पैड का इस्तेमाल करें। 6 घंटे में पैड बदलें, टैम्पॉन्स का इस्तेमाल करती है तो इसे हर 2 घंटे में बदलें।
  • अपनी वजाइनल पर साबुन का इस्तेमाल ना करें। इसके बजाएं गुनगुने पानी या जेंटल वॉश से सफाई करें। इससे इनफेक्शन का खतरा काफी कम हो जाता है।
  • पैड और टैम्पॉन बदलने के बाद अपने हाथ गर्म पानी से धोएं। 
  • पैड और टैम्पॉन टॉयलेट में फ्लश ना करें।
  • लूज और आरामदायक कपड़े पहनें। जीन्स जैसे तंग कपड़े ना पहनें। लूज कपड़े पहनने से हवा का बहाव पसीने और रैशिंग जैसी समस्या से बचाता है। 

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