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टीनएज में होने वाली एक्ने की समस्या से आसानी से निपटें

नेचुरल तरीके से एक्ने से निपटें

टीनएज में पिंपल्स या एक्ने की समस्या आम होती है। इस उम्र में हारमोन्स में कई बदलाव होते हैं। इस वजह से चेहरे में पिंपल्स उभर आते हैं। लेकिन इनकी वजह बच्चों का सेल्फकॉन्फिडेंस टूटने लगता है। घरेलू उपायों से इन्हें ठीक करने की कोशिशें की जाती हैं। लेकिन कम ही लोगों पर इनका असर होता है। क्या आप जानते हैं कि इस समस्या से नेचुरल तरीके से निपटा जा सकता है।  

टीनएज में पिंपल्स होने के कारण?

होर्मोन्स में होने वाले बदलाव होता है। इस वजह से स्किन में सीबम ऑइल बनने लगता है। ये सीबम ऑइल डेड स्किन के संपर्क में आता है और छिद्रों से पिंपल्स के रूप में बाहर आने लगता है। पिंपल्स या एक्ने गंभीर समस्या नहीं है। अगर पिंपल्स को छेड़ा ना जाए तो ये बिना दाग के आराम से गायब हो जाता है। लेकिन कभी-कभी ये बेहद डरावने हो जाते हैं। इनमें दर्द, सूजन के साथ इनफेक्शन हो जाता है। जिससे आपको परेशानी हो सकती है। 

पिंपल्स या एक्ने से निपटने के लिए जानते हैं कुछ आसान उपायों से आप इनसे निजात पा सकते हैं।

ऑइल फ्री फेस-वॉश से अपना फेस धोएं

एक अच्छी कंपनी का फेसवॉश खरीदें। ध्यान रहे ये फेसवॉश ऑइल फ्री हो। दिन में दो अपने फेस को वॉश करें। फेस वॉश करते वक्त स्किन बहुत ज्यादा रगड़ने से बचे। जब चहेरे को पोंछने के लिए तौलिए का इस्तेमाल करें तब भी इस बात का ध्यान रखें कि उसे स्किन पर रगड़े नहीं। इसके अलावा आप एक्सफोलिएशन वाला फेसवॉश भी इस्तेमाल कर सकते हैं। ये डेड स्किन को निकालने में मदद करता है। डेड स्किन में कमी आने से पिंपल्स में भी कमी आएगी। आप 5 प्रतिशत बेंजोल पीरोक्साइड युक्त फेस वॉश का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन इसे पहले हफ्ते में दिन में केवल एक बार ही लगाएं। एक हफ्ते के बाद इसे दिन में दो बार लगाया जा सकता है। इसे 6 हफ्तों तक इस्तेमाल करें। 

जिंक युक्त प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करें

अध्ययन से ये पता चला है कि जिंक और जिंक युक्त प्रोडक्ट एक्ने या पिंपल्स की समस्या को कम करते हैं। जिंक का इस्तेमाल स्किन से निकलने वाले ऑइल को कंट्रोल करता है। इसके अलावा स्किन की रेडनेस को भी कम करता है। आप चाहें तो जिंक सप्लीमेंट भी ले सकते हैं। लेकिन अगर आप पहले से ही हेल्दी डायट ले रहे हैं तो  जिंक सप्लीमेंट की जरूरत नहीं पड़ेगी। गेहूं के बीज, दलिया, तिल के बीज, पोल्ट्री उत्पाद, सी फूड और मांस के जरिए जिंक मिल सकता है।

विटामिन्स लें

एक अध्ययन में सामने आया है कि विटामिन की कमी से एक्ने या पिंपल्स की समस्या होती है। सही मात्रा में विटामिन्स लेने से पिंपल्स की समस्या कम हो सकती है। टीनएज में फल और सब्जियों के जरिए विटामिन ए की कमी को पूरा किया जा सकता है। 

शहद और दालचीनी का मास्क

अध्ययन में सामने आया है कि शहद और दाल-चीनी का मास्क पिंपल्स से राहत दिलाने में मदद कर सकता है। शहद और दाल-चीनी पॉउडर में ऐसे तत्व मौजूद हैं जो पिंपल्स को कम करने में मदद सकते हैं।

  • यहां जानिए कि फेस मास्क कैसे बनाना है?
  • एक छोटा चम्मच दाल-चीनी को एक छोटा चम्मच शहद में मिलाएं।
  • फेस धोएं, इस मास्क को चेहरे पर लगाएं।
  • 20 मिनट तक इसे चेहरे पर रहने दें और फिर धो लें।

टी-ट्री आइल

शोध बताते हैं कि चाय के पेड़ का तेल ( टी-ट्री ऑइल)  पिंपल्स को कम करने में मदद करता है।टी-ट्री ऑइल में मेलेलुका अल्टिफ़ोलिया या चाय के पेड़ की पत्तियों से आता है। एक अध्ययन में पाया गया कि 5% टोपिकल टी-ट्री ऑइल पिंपल्स को तीन महीने खत्म कर सकता है।

डेयरी प्रोडक्ट्स को अवाइड करें

टीनएज में होने वाले हारमोन्स बदलावों के बीच दूध या दूध से बने प्रोडक्ट्स पिंपल्स की समस्या को बढ़ा सकते हैं। डॉक्टर्स मानते हैं कि डेयरी उत्पाद कुछ लोगों में पिंपल्स की समस्या का कारण बनते हैं। इसलिए जैसे ही पिंपल्स दिखाई दें कम से कम एक महीने के लिए डेयरी प्रोडक्ट्स दूरी बना लें।  अगर डेयरी प्रोडक्ट्स से दूरी रखने से पिंपल्स में कमी आए तो लंबे वक्त के लिए डेयरी प्रोडक्ट्स छोड़ दें। 

तनाव का प्रबंधन करो

भावनात्मक और मानसिक तनाव के कारण पिंपल्स नहीं होते हैं लेकिन ये पहले से हो रही पिंपल्स की समस्या को बढ़ा सकते हैं। शोध बताते हैं कि शरीर में स्ट्रेस हारमोन्स कॉर्टिकोट्रोपिन-रिलीजिंग हार्मोन से वसामय ग्रंथियां प्रभावित हो सकती हैं। हार्मोन अतिरिक्त सीबम उत्पादन को जन्म दे सकता है, जिस वजह से पिंपल्स भढ़ने की संभावाना बढ़ जाती है।

व्यायाम

नियमित व्यायाम भी तनाव को कम करता है और हारमोन्स के बदलावों के असर को भी कम करता है। व्यायाम का टीनएज पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और यह पिंपल्स को कम करने में मदद करता है। 

पिंपल्स टीनएज बच्चों के स्ट्रेस का कारण हो सकते हैं। लेकिन उन्हें समझाना होगा कि ये बड़े होने की एक सामान्य सी प्रक्रिया है। कई वयस्कों ने अपने टीनएज में इस समस्या का सामना किया है। देखभाल, एक अच्छे आहार, और एक स्वस्थ जीवन शैली इस समस्या से आसानी से निपटा जा सकता है।

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टीनएज में पीरियड्स को न बनने दे रूकावट

पीरियड्स में कुछ लड़कियों को काफी तकलीफ होती हैं, जानिये ऐसा क्यों होता है
Gousiya Teentalkindia Content Writer

पीरियड्स के मुश्किल दिन कुछ टीनएसर्ज लड़कियों के लिए तो मुश्किल नहीं होते लेकिन कुछ के लिए ये काफी तकलीफदेह साबित होते हैं। इन दिनों में तेज पेट दर्द, ऐंठन और कमर में दर्द जैसी समस्याओं से उन्हें गुजरना पड़ता है। हालांकि ये दर्द पीरियड्स के पहले 2 दिनों में ज्यादा रहता है। ये इतना तेज रहता है कि कई लड़कियों को स्कूल और जरूरी इवेंट्स छोड़ने पड़ते हैं।

मासिक दर्द और तकलीफ की वजह
इसकी वजह प्रोस्टाग्लैंडीन नाम का केमिकल होता है। पीरियड्स के दौरान ये केमिकल गर्भाशय की मांसपेशियों के संपर्क में आता है और इसी से दर्द उठता है।  

पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द को PMS (Premensrual syndrome) समझने की गलती नहीं करना चाहिए। पीएमएस पीरियड्स के कुछ दिन पहले से मिलने वाले संकेत होता है, जिसमें आमतौर पर चिड़चिड़ापन, सिरदर्द और जरूरत से ज्यादा खाना या मीठा खाना शामिल होता है। पीएमएस पीरियड्स शुरू होते ही ठीक भी हो जाता है। लेकिन मासिक दर्द इससे कहीं ज्यादा तकलीफदेह होता है। कई बार पहले दिन ये बदतर साबित होता है।

मासिक दर्द 2 तरह का होता है:
प्राइमरी: किशोरावस्था में जब लड़की को पहली बार पीरिएड्स होते हैं उस दौरान मासिक दर्द का सामना करना पड़ता है। ये समस्या आम होती है।
सेकेंडरी: पीरियड्स के दौरान दर्द होना कई बार आम नहीं होता है। कुछ मामलों में देरी से पीरियड्स का आना, अन्य स्वास्थ्य समस्याएं और संक्रमण की वजह से भी मासिक दर्द से गुजरना पड़ता है।

इन वजहों से दर्द की समस्या होती है

  • कम उम्र में माहवारी शुरू होना
  • लंबे वक्त तक माहवारी चलना और ज्यादा ब्लीडिंग होना
  • परिवार में किसी महिला को भी मासिक दर्द की समस्या रही हो (जेनेटिक)

हर टीनएजर लड़की में अलग-अलग होते हैं दर्द के लक्षण, जैसे-

  • पेट के निचले हिस्से में दर्द और ऐंठन
  • कमर में दर्द
  • पैरों में दर्द होना
  • जी मचलाना
  • उल्टी होना
  • दस्त होना
  • थकान महसूस होना
  • कमजोरी आना
  • चक्कर आना या बेहोशी छाना
  • सिरदर्द होना

मासिक दर्द से कैसे पाएं छुटकारा

  • हेल्दी डाइट लें
  • पूरी नींद लें
  • रोज व्ययाम करें
  • गर्म पानी के बैग से पेट के निचने हिस्से में सिंकाई करें
  • गुनगुने पानी से नहाए
  • एक्यूपंक्चर
  • पेट की निचले हिस्से की मसाज करना

अगर इनमें से किसी भी तरह समस्या कम नहीं होती है तो आइबूप्रोफेन दवा ली जा सकती है। लेकिन इसे भी डॉक्टरी सलाह के बाद ही लें। इसके अलावा, यह समझने के लिए कि आपके लिए सबसे अच्छा क्या काम करता है, पीएमएस के संकेतों को समझें और आपको कितनी बार मासिक दर्द का सामना करना होता है ये भी समझें। इसके लिए एक डायरी बनाएं और मासिक अवधि का ध्यान रखें। एक अवधि डायरी बना सकती हैं। इसके अलावा आजकल कई माहवारी के हिसाब-किताब के लिए कई ऐप्स भी उपलब्ध हैं जो माहवारी सायकल को मैनेज करने में मदद करते हैं। 

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