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5 चीज़ें जो ख़ुद से कहनी चाहिए

सोसायटी ने पुरुषों से पारम्परिक रूप से उम्मीदें पाल रखी हैं कि उन्हें एक निश्चित तरीक़े से बिहेव करना चाहिए, इसका अल्टरनेटिव जानने के लिए यह लेख पढ़िए।

सोसायटी को पुरुष और महिलाओं से एक स्पेसिफ़िक बिहेवियर की उम्मीद होती है। लड़के सुपरहीरोज़ के साथ खेलते हैं और लड़कियां बार्बी डॉल के साथ। पुरुषों को कमाकर लाना है और महिलाओं को घर सम्भालना है। पुरुषों से उम्मीद की जाती है कि वे स्ट्रॉन्ग, इंडिपेंडेंट, टफ़ और बहादुर हों, वहीं महिलाओं को कम्पैशनेट, काइंड, इमोशनल और जेंटल होना चाहिए। इन्हें मैस्क्यूलिन और फे़मिनिन लक्षण माना जाता है। आदर्श पुरुष और महिला की छवि को समय-समय पर पैरेंट्स, दोस्त-नातेदार और मीडिया द्वारा बढ़ावा दिया जाता है।

हां, बहुत से लोग इन परम्परागत अपेक्षाओं को पीछे छोड़कर आगे बढ़ रहे हैं लेकिन सोसायटी हमेशा उन्हें अपनाती नहीं है। इन जेंडर ‘ट्रेट्स' के साथ जीना बोझ के समान हो सकता है! कुछ मामलों में इसके कारण डिप्रेशन, एंग्ज़ाइटी हो सकती है और यहां तक कि व्यक्ति नशीले पदार्थों का सेवन भी कर सकता है। 

टीनटॉक के टीनएजर्स द्वारा शेयर की गई उनकी स्टोरीज़ पढ़िए। (पहचान छिपाने के लिए नाम बदल दिए गए हैं।)

यदि आप भी कभी इस तरह की सिचुएशन में रहे हैं या उसे महसूस किया है तो हर स्टोरी के आख़िर में दिए गए अफ़र्मेशन्स को पढ़िए, जिन्हें आप जितनी बार चाहें, ख़ुद से कह सकते हैं। यह वाकई में आपको आपके बारे में अच्छा फ़ील करवाएगा।

‘लड़के रोते नहीं'
मैं अपने दोस्तों के साथ स्कूल की एक ट्रैकिंग ट्रिप पर गया था। वह पहला मौक़ा था जब मैं घर से दूर गया था। मुझे मम्मी की याद आ रही थी लेकिन उनसे बात करने का वहां कोई ज़रिया नहीं था। मुझे बुरा और इमोशनल महसूस हो रहा था। हम लोग घनी पत्तियां छांटते हुए जंगली फूलों और तीखी झाड़ियों से आगे बढ़ रहे थे। हमें पूरे रास्ते पर कहीं-कहीं केकड़े, बिच्छू और मेंढक दिखाई दे रहे थे। हम लोग एक छिपकली को देख रहे थे जो हमारे टीचर के हाथ में थी। अचानक मैंने अपने सीधे पैर की पिंडली में दर्द महसूस किया। एक मधुमक्खी ने मुझे डंक मारा था। मुझे बहुत तेज़ दर्द हुआ और मैं रोने लगा। लेकिन मेरे दोस्तों ने कहा,‘चल यार, मधुमक्खी अब गई। और लड़के रोते नहीं हैं।' इसलिए मुझे ख़ुद पर कंट्रोल करना पड़ा। जब हम बेस कैम्प पहुंचे तो मैं कुछ पेड़ों के पीछे जाकर छुप गया और बहुत रोया… तब मुझे अच्छा फ़ील हुआ।

अफ़र्मेशन : मैं अपने इमोशंस और फ़ीलिंग्स को बाहर आने दूंगा भले ही कोई कुछ भी कहे।

‘एक मर्द की तरह बॉल हिट करो'
मेरी क्लास के सभी कूल लड़के क्रिकेट खेलते हैं। मेरे दोस्तों का साफ़ नियम है, यदि आप स्पोर्ट्स में अच्छे नहीं हैं, तो आप ‘मर्द' नहीं हैं। इसलिए इनमें शामिल होने के लिए मैंने क्रिकेट खेलने की कोशिश की। मैंने कड़ी मेहनत की जबकि मुझे यह बिल्कुल पसंद नहीं! मुझे डर लगता था कि मेरे दोस्त मेरा मज़ाक़ बनाएंगे और उससे भी बुरा कि वे मुझे अपने ग्रुप से बाहर निकाल देंगे! लेकिन मैं लगातार फ़ेल होता गया और वैसे भी उन्होंने मेरा मज़ाक़ बनाया। जब भी मैं कोई शॉट मिस करता तो लीडर सभी के सामने चिल्लाकर कहता था,‘क्या यार, एक बार तो बॉल को मर्द की तरह हिट करो!' मुझे लगा कि मेरी आइडेंटिटी ख़त्म हो रही है और मैं किसी काम का नहीं हूं जबतक मैंने उनके साथ खेलना बंद नहीं कर दिया। आज मैं पाता हूं वह समझदारी भरा फ़ैसला था।

अफ़र्मेशन : इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि लोग क्या कहते हैं। सबसे ज़्यादा मैटर यह बात करती है कि मैं इस पर किस तरह रियेक्ट और बिलीव करता हूं।

‘क्या मर्द बन पाओगे?'
मुझे अपने सीनियर पर क्रश था, लेकिन इतनी हिम्मत नहीं थी कि उससे अपने दिल की बात कह पाऊं। मैं अपने दोस्तों को अपनी फ़ीलिंग्स के बारे में बताता था। वे लोग शुरुआत में सपोर्टिव थे लेकिन बाद में मेरा मज़ाक़ बनाने लगे। वो मुझे ‘सिसी' भी कहते थे क्योंकि मैं अपनी फ़ीलिंग्स को लेकर इमोशनल हो जाता था। वे मुझसे लगातार कहते थे,‘मर्द बन और उससे बात कर' या ‘तू एक लूज़र है, जा जाकर उससे पूछ'। सिचुएशन तब मेरे हाथ से निकल गई जब मेरे दोस्तों में से किसी एक ने उसे एक नोट दे दिया, और कहा कि वह मैंने भेजा है। नोट में यह लिखा था कि मैं उसके साथ सोना चाहता हूं। उसने मुझसे बात की और मैं निर्दोष साबित हुआ। यह बहुत शर्मनाक था लेकिन उसने इसे ग्रेसफ़ुली हैंडल किया। लड़कियों से बात करना हमेशा से मेरे लिए परेशानी का सबब रहा है। लेकिन इस घटना के बाद, मैंने सीखा कि यदि आप लोगों से सम्मान से बात करते हैं तो वे भी आपको सम्मान देते हैं।

अफ़र्मेशन : मैं हमेशा दूसरों की और ख़ुद की इज़्ज़त करूंगा।

‘तुम्हारे अंदर मर्दानगी नहीं है'
लम्बे समय तक मैं इस बात से जुड़ा रहा कि एक मर्द होने का अर्थ है कि मैं कितनी मात्रा में अल्कोहल ले सकता हूं। मेरे दोस्त और मैं लगातार स्मोक करते थे क्योंकि हमें लगता था कि यह बहुत कूल है और इससे हमें फ़ीमेल अटेंशन मिलेगा। मैं थोड़ा बहुत इस बारे में जानता था कि लगातार स्मोकिंग और ड्रिंकिंग मुझे धीरे-धीरे मौत के मुंह में ले जा रही है। जब भी हम शराब पीने जाते थे, हम इस पर गर्व करते थे कि कौन कितनी शराब पी सकता है। बॉटल्स की संख्या हमारी मर्दानगी तय करती थी। एक बार शराब पीने के बाद, जब मैं घर आया तो देखा कि मेरे पिता शराब पीकर मां को पीट रहे थे। मैंने उन्हें रोकने की कोशिश की लेकिन मैं ज़्यादा कुछ नहीं कर पाया क्योंकि मैं भी बहुत नशे में था। यह घटना मुझे आज भी डराती है। मैंने तय किया मैं उतनी नहीं पीऊंगा। जब हम फिर से शराब पीने गए, मैं थोड़ी बीयर पीने के बाद रुक गया। मैं अपने दोस्तों को अपने पिता के बारे में नहीं बता सकता था, बस मैंने उनसे इतना कहा कि मैं अब और ड्रिंक नहीं करना चाहता। वो लोग मुझे, ‘नामर्द' कहने लगे। कुछ समय बाद मैंने उन लोगों का साथ छोड़ दिया।

अफ़र्मेशन : अपनी चॉइस और डिसीज़न के लिए मैं पूरी तरह से फ्री हूं।

‘लड़के घर का काम नहीं करते'
मेरा पालन-पोषण मां ने किया है। मैं कुछ महीनों का ही था जब मेरे पिता ने मुझे और मेरी मां को छोड़ दिया। तबसे मुझे उनसे नफ़रत है। पहले मैं अपना फ्रस्ट्रेशन स्कूल में छोटे लड़कों को पीटकर दूर करता था। धीरे-धीरे मैं स्पोर्ट्स में एकांत ढूंढने लगा। चूंकि मेरे तीन छोटे भाई-बहन थे और हमारी केयर करने के लिए एक सिंगल मदर, इसलिए मैं मां की मदद छोटे-मोटे काम में करवाया करता था जैसे बर्तन धोना, बॉटल भरना और किराने का सामान ख़रीदना। मेरे कुछ दोस्त यह सोचते थे कि लड़के को यह सब नहीं करना चाहिए। वे सभी फ़ुटबॉल टीम का हिस्सा थे। वो लोग मुझे यह सब करने के लिए मना करते रहे और बात इतनी बढ़ गई कि मैंने उनमें से एक की धुनाई कर दी। लड़ाई बढ़ गई और नतीजतन मुझे स्कूल बदलना पड़ा। तब भी, मुझे अपनी मां की मदद करने में कोई बुराई दिखाई नहीं देती क्योंकि मैं उनकी केयर करता हूं।

अफ़र्मेशन: मैं कम्पेशनेट हूं और यह एक अच्छा गुण है।

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कैसे अपने दोस्त को न कहें

आपके दोस्त क्लास बंक करने के लिए या ड्रिंक करने के लिए कहते हैं तो उन्हें कुछ खास तरीके से मना किया जा सकता है।
Nishtha JunejaTeentalkindia Content Writer

कई बार दोस्तों के फोर्स करने पर हम ऐसी स्थिति में पहुंच जाते हैं जहां नहीं होना चाहिए। अगर आप भी ऐसी स्थिति से गुजरे हैं तो अब उन्हें न कहने की आदत डालें। जब आपके दोस्त क्लास बंक करने के लिए या ड्रिंक करने के लिए कहते हैं तो उन्हें कुछ खास तरीके से मना किया जा सकता है।

स्मार्टली हैंडल करें : जब दोस्त क्लास बंक करने के लिए कहें तो आप उनसे कहें कि मुझे अल्जेबरा के समीकरण समझने हैं।

एक जर्नलिस्ट की तरह रहें: जब वो आपसे सिगरेट पीने के लिए कहते हैं तो उनसे सवाल करें कि 'आप क्यों स्मोकिंग करते हैं?' या पूछें 'आपकी सांसों से मरी हुई मछली की बदबू आ रही है और क्या आप इसके साथ खुश हैं'।

पेरेंट्स का हवाला दें: मैं इस उम्र में ब्वॉयफ्रेंड के साथ घूमने जाउं, यह मेरे मां को पसंद नहीं या मैं किसी तरह का हेयरकट करवाउंगी तो मेरे पापा सजा देंगे। दोस्तों को इस तरह के एक्सक्यूज दें।

बडी सिस्टम को अपनाएं : ऐसे दोस्त भी बनाएं जिनकी पसंद-नापसंद आप जैसी हो। ऐसे में अगर आप वेजीटेरियन हैं और दूसरे दोस्त चिकन खाने के लिए दबाव बनाते हैं तो वह दोस्त आपका सपोर्ट करेगा। इस तरह आप एक-दूसरे का सपोर्ट कर पाएंगे।

नो का मतलब आप जानते हैं : दोस्तों का न कहते हुए सीरियस रहें ऐसा आपके चेहरे से भी लगना चाहिए। आपके कोई दोस्त टीचर के कमरे से क्वेश्चन पेपर चुराने को कहता है तो सीधे न कहें।

न कहना सीखें : आप इंट्रेस्टेड नहीं है तो सीधे न कहें। उदाहरण के लिए ऐसे समझें, आपके कुछ दोस्त फिल्म देखने के लिए जा रहे हैं और दूसरे दोस्तों ने आपको क्रिकेट खेलने के लिए बुलाया है तो एक ग्रुप को मना कर सकते हैं।

न कहने का पॉजिटिव तरीका सीखें : अगर आपके दोस्त आपको स्मोकिंग करने के लिए कहते हैं तो उन्हें कह सकते हैं कि मुझे अपना ब्रेन पसंद हैं मैं उसकी कोशिकाओं को डैमेज नहीं पहुंचाना चाहता।

महान शख्सियत के विचार रखें: न करने के लिए किसी बड़ी शख्सियत के विचारों का प्रयोग भी किया जा सकता है। जैसे वारेन बफेट कहते हैं, सफल और वाकई में सफल इंसानों में फर्क होता है कि असल जिंदगी में सफल होने वाले लोगों को हर चीज के लिए न कहने की आदत होती है।

मैं यूनिक हूं : अगर आपके दोस्त आपका भी हेयरस्टाइल उनके जैसा रखने के लिए कहते हैं तो उनसे कहें आप पहले से यूनिक हैं, यूनिक लोग ही ट्रेंड शुरू करते हैं किसी को फॉलो नहीं करते।
 

नया तरीका ढूंढें : ऐसी कल्पना करें और उन्हें मना करने का कोई नया प्लान बनाएं। अगर आप ड्रामा करने में माहिर हैं तो सही समय आने पर अपनी उस खूबी का इस्तेमाल भी करें। 

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