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किसी अपने को खोने के दर्द की भरपाई कैसे करें

जो खुशबू वो अपने पीछे छोड़ कर गए थे वो भी मुझे बेहद कीमती लगती थी। 
Richa DubeyContent Writer

राइटर-जर्नालिस्ट खूबी अमीन अहमद ने किसी अपने को खोने के दर्द को बयां किया...

अपने नानाजी को खोने के बाद जब भी मैं अपने जीवन में हुए नुकसान के बारे में लिखने के लिए अकेले में बैठती हूं तो मैं ये तय नहीं कर पाती हूं कि मैंने अपने नानाजी, मेरे सबसे अच्छे दोस्त, अपने विश्वास, मेरे मार्गदर्शक या मेरे फिलोस्फर, इनमें से किस शख्स को मैंने अपने जीवन में खो दिया है। उनका मेरे जीवन से जाना एक नुकसान है जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती।

जब मेरे नानाजी की मृत्यु हुई तो मेरे परिवार में किसी में भी इतना साहस नहीं था कि उनकी मौत की खबर मुझे दे सके। उन्होंने मेरे घर आने का इंतजार किया और जब मैंने खुद अपनी आंखों से उन्हें देख लिया। उसके बाद उन्होंने एक सफेद चादर में लपेट दिया गया। उनके चेहरा बेहद शांत दिखाई दे रहा था। मैं बता नहीं सकती हूं कि उस वक्त मैं कैसा लग रहा था। मुझे कुछ भी महसूस होना बंद हो गया था। मैं बिल्कुल नील हो गई थी। मैं शायद उस वक्त रोई थी। मुझे ज्यादा कुछ याद नहीं है। मुझे दर्द नहीं महसूस हो रहा था पता नहीं क्यों। दरअसल मैं नानाजी की मौत को स्वीकार ही नहीं कर पा रही थी। 

मुझे याद है मैंने उनके सिर को अपने हाथों में रखा हुआ था, मैं उनको बार-बार कह रही थी कि मुझे अकेला छोड़ कर ना जाएं। मैं बेहद खुदगर्ज हो गई थी, क्योंकि मैं हमेशा उनके साथ रहती थी और मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि वो मुझसे मिले बिना ही चले गए। मैं उस दिन के बाद आए कई दिन मुझे याद नहीं है। क्योंकि कई दिनों तक नानाजी के पलंग पर सोती रहती थी। मैं उनके कंबल को ओढ़ कर सो जाती थी और उनकी खुशबू को जितनी ज्यादा देर तक को महसूस करना चाहती थी। 

एक सुबह जब में उठी तो मुझे बताया गया कि नानाजी को गए एक हफ्ता हो चुका है। मुझे याद दिलाया गया कि आप मेरी जॉब है और मुझे वापस लौटने की तैयारी करनी चाहिए। उसी वक्त मेरी एक रिश्तेदार ने मुझे शादी के लिए लड़कों से मुलाकात करने के लिए कहा। मुझे उस वक्त ये समझ ही नहीं आया कि मैं उन्हें क्या जवाब दूं और कैसे समझाऊं कि मैं उस वक्त किस दर्द से गुजर रही थी। 

उन्होंने समझाया कि ये दुख विनाशकारी हो सकती है। लेकिन दुख मिलने बड़े होने की निशानी है। ऐसा अब शायद जीवन में कई बार होगा कि हम अपने प्रिय लोगों को खोते जाएंगे, अंतत: हमें इसे स्वीकार करना चाहिए कि किसी जिंदगी से जाना कोई नहीं रोक सकता है। इसलिए हमे इसे स्वीकार करना सीखना चाहिए। वक्त सभी घाव भर देता है। इंसान को खुद को हर तरह हालात के लिए तैयार रखना चाहिए। ये आगे बढ़ने में मदद करता है। मुझे सभी लोग समझा रहे थे। मुझ पर दया दिखा रहे थे। मैं ये समझ पा रही थी कि वो मुझे इस दर्द से बाहर निकालना चाहती हैं। इसलिए मैंने उनको यही कहा कि मैं बस उन्हें खोना नहीं चाहती थी। 

मैं अब भी उन्हें खुद से दूर नहीं करना चाहती हूं और ना कभी कर पाऊंगी। मैं आगे भी उन्हें खुद से अलग नहीं कर पाऊंगी। मैं उन्हें अपने जीवन के उसूलों में जिंदा रखूंगी। मैं कुछ ऐसा करूंगी कि उन्हें गर्व महसूस करवा सकूं। मैं उन्हें अपने पास रख कर उनसे सकारात्मकता और प्रेरणा लेती रहूंगी। वो मेरे विश्वास का एक जरिया हैं और हमेशा रहेगा। वो मुझमें और मेरे नाम में जीवित हैं।  

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Richa DubeyContent Writer

मैं एक बेहद शांत स्वभाव का स्टूडेंट था। स्कूल में हमेशा अव्वल आता था। हमेशा एक अच्छा छात्र रहा, मेरे माता-पिता मुझे पर गर्व करते थे। लेकिन जैसे ही मैंने इंजीनियरिंग में दाखिला लिया मेरे अंदर कई बदलाव आने लगे। कॉलेज के पहले साल में मेरे ग्रेड्स काफी गिर गए। इतना ही नहीं मैं कई सब्जेक्ट्स में फेल होने लगा। मेरी एकेडमिक परफॉर्मेंस में काफी बदलाव आने लगा। दरअसल, मुझे पॉर्न फिल्में देखने की लत लग गई थी। मैं हर रात पॉर्न साइट्स पर सर्फिंग करने लगा। मुझे इसकी बहुत बुरी लत लग गई। लाख कोशिशों के बाद भी मैं इस लत से खुद को आजाद नहीं करवा पा रहा था। मैं पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पा रहा था। मैं काफी विचलित महसूस कर रहा था।
मेरी साइकोलॉजिस्ट ने उस तनाव से मुझे आजाद कराया। ये एक भावनात्मक स्थिति थी जो कुछ लोगों में तब होती है जब वो किसी सदमे से गुजरते हैं। मेरी साइकोलॉजिस्ट ने एक साल पहले हुई मेरे परिवार के साथ एक घटना के जरिए मेरी मनोदशा के बारे में पता लगाया।
एक सुबह मैं उठा तो मुझे पता चला कि मेरा भाई संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान में फोटोग्राफी करने गया था लेकिन वो वहां से कभी नहीं लौटा। कुछ दिनों बाद हमें उसी उद्यान में उसका कंकाल मिला। लेकिन राष्ट्रीय उद्यान के किसी भी शख्स ने हमारी मदद नहीं की। उन्होंने इस बात को मानने से भी इनकार कर दिया कि मेरे भाई पर किसी जानवर ने अटैक किया। इस हादसे ने मेरे परिवार को पूरी तरह से तोड़ दिया।


भाई की इस तरह की मौत ने मुझे पूरी तरह से तोड़ दिया। जब 18 साल का हुआ तो मुझे एहसास हुआ कि मैं इसे समझने में असफल हो रहा हूं। मैं किसी को भी ये बता नहीं पा रहा था कि मेरी भाई की मौत के बाद मैं क्या महसूस कर रहा हूं। मेरी साइकोलॉजिस्ट ने मुझे बताया कि मै जिस चीज से जूझ रहा हूं वो पोस्ट ट्रॉमेटिक डिसऑर्डर डिप्रेशन है। मैंने खुद को समेट लिया और मैंने खुद को बाहरी दुनिया से काट लिया था और पॉर्न की लत में पड़ गया।
क्लोजर- ये एक कठिन शब्द है। यह यादों से भरा कमरा नहीं है कि आप दरवाजे को बंद कर सकते हैं, और बंद हो सकते हैं। क्लोजर के साथ यह बात जुड़ी है कि आपको अपना नुकसान स्वीकार करना होगा, अपना दुख व्यक्त करना होगा और इससे मजबूते से निपटना होगा।
मेरी काउंसलर ने मुझे 5 चीजों के बारे में बताया था।
1 जिस प्रियजन को आपने खोया है, उसे एक पत्र लिखें। उन सभी चीजों को व्यक्त करें, जो अनसुनी रह गई थीं, उन भावनाओं को बाहर निकाल दें जो अंदर बंद हैं।
2 गेस्टाल्ट थैरेपी का हिस्सा बनाया। इस थैरेपी में एक कुर्सी का प्रयोग किया जाता है। इस अभ्यास में आप यह कल्पना करते हैं कि खोया हुआ व्यक्ति आपके सामने एक खाली कुर्सी पर बैठा है। अब आप उसे ये बता सकते हैं कि आप उससे कितना प्यार करते हैं।
3 आप खुद को एक पत्र भी लिख सकते हैं। अपने आप को लिखना और ये बताना है कि आखिर हुआ क्या। इस बारे में खुद शांत भी रखें।
4 प्रेरणादायक कहानियों को पढ़ना / लोकप्रिय लोग कैसे सफल हुए हैं, अपने आप को यह बताने का एक और तरीका है कि क्या हुआ और आगे बढ़ना चाहिए।
5 अपने खोए हुए प्यार को याद करते हुए, उनकी याद को एक परिवार के रूप में सम्मानित करें और जो गलतियां की गई थीं, उनसे सीखना आगे बढ़ने का एक और तरीका है। इसे बाहर निकलने की कोशिश करें या इसे किसी भी तरह से लिखें, दु:ख को स्वीकार करें ताकि इसे से छुटकारा पा सकें।

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