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रोना बुरी बात नहीं : कई मजबूत व्यक्ति भी रोते हैं

निष्ठा जुनेजा बताती हैं कि कैसे आपका रोना एक थैरेपी की तरह है।

जब वह मुझे छोड़कर चला गया तो लगा कि दुनिया ही खत्म हो गई। जैसे शीशा टूटने पर उसके कई टुकड़े हो जाते हैं ठीक वैसा ही मेरे दिल के साथ हुआ। दुनिया बेरंग लगने लगी। मैंने हंसना-बोलना छोड़ दिया। ये एकतरफा प्यार का मामला था। मैं उससे बहुत प्यार करती थी लेकिन वह मुझसे प्यार नहीं करता था।
जब वह चला गया, उसने मेरे साथ कोई गलत व्यव्हार नहीं किया। अब मुझे उससे कोई मतलब नहीं था। वह मेरे साथ नहीं था। उसने मेरी जिंदगी में तूफान ला दिया और फिर चला गया। वह अपने साथ मेरे दिल और आत्मा का एक हिस्सा भी ले गया। अजीब बात है कि मैं अब उस हिस्से को दोबारा पाना नहीं चाहती हूं। मैं चाहती थी कि ये ऐसे ही बना रहे। मैं उसे मुझसे प्यार ना करने के लिए दोषी नहीं मानती हूं।

जब वह गया तो उसने मेरे अंदर एक खालीपन छोड़ दिया। उसने मेरे अंदर एक सवाल छोड़ दिया कि क्या मैं खुद से प्यार करती हूं? मुझे इस सवाल का जवाब ढूंढने लंबा वक्त लगा। मैंने कई रातें यही सोचते हुए गुजारी की क्या मैं कभी खुद से प्यार कर पाऊंगी? कई रातें रोकर गुजारने के बाद मैंने यही निष्कर्श निकाला कि मुझे खुद से प्यार करने की जरूरत है। उसके बाद ही मैं किसी और से प्यार कर पाऊंगी। मैं एक मजबूत और संवेदनशील इंसान हूं। बावजूद इसके मुझे रोने पर कभी अफसोस नहीं हुआ। मैं अपने आंसुओं की वजह से ब्रेकअप के दर्द से उबर पाई। अपने आप ही मेरे आंसू निकल जाते थे और मैंने कभी उन्हें रोका नहीं। हर बार रोने के बाद मुझे हल्का महसूस होता था।
उसके छोड़ने के बाद, मैंने खुद को बेहतर महसूस कराने की कोशिश की जो आसान नहीं था। लेकिन जब आप पहला कदम उठाते हैं तो उसके बाद आप पीछे मुड़कर नहीं देख सकते। मैं लगभग हर रात रोती थी। उसका चेहरा मेरी आंखों के सामने हर वक्त रहता और उसे भुलाना या उस दर्द से बाहर आना मेरे लिए मुश्किल हो गया। मेरे लिए अपनी भावनाओं पर काबू रखना मुश्किल हो गया। मैं उन सभी चीजों के बारे में सोचती जो मैं उसके साथ करना चाहती थी। मैं सपने को साकार करने के लिए कल्पना करने लगी। लेकिन जैसे ही एहसास हुआ कि यह मेरी कल्पनाभर है और ये कभी सच नहीं हो सकती तो मैं और ज्यादा रोती। मैं अपने दिमाग में उन पलों को दोहराने लगी जो मैंने उसके साथ बिताए थे। मैं हर 2 मिनट में उसके कॉल का इंतजार करती। लेकिन कभी फोन नहीं आया। मैंने उसका इंतजार किया। लेकिन वह मुझे कभी नहीं मिला, मैं और थोड़ा रोई।
जब वो चला गया तो मेरे दोस्तों ने मुझे आगे बढ़ने की सलाह दी। मैं अब किसी और शख्स से नहीं मिलना चाहती थी। हर कोई मेरी मदद करने की कोशिश कर रहा था। लेकिन उनकी सहानुभूति और सुझावों ने हालात और खराब कर दिए।
जब वह चला गया, तो मुझे रोने से केवल सांत्वना मिली। मैं बस खुद के साथ बैठकर रोना चाहती थी। मैं अपने बिस्तर पर लेटी रहती और रोती रहती थी। मेरे आंसू एक तरह से थैरेपी का काम कर रहे थे। मेरे आंसुओं ने मुझे कमजोर इंसान बनाने के बजाय एक मजबूत इंसान बना दिया जो फिर से प्यार करने से डरता नहीं है।
उसने मुझे छोड़ कर अभिभूत, कमजोर, खोया हुआ और भ्रमित सा महसूस कराया। लेकिन मैंने एक बार फिर खुद को पाया।

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सुपरहीरो! क्या वाकई में ये कैरेक्टर्स आश्चर्यजनक हैं? जानिए ऐसे सुपरहीरो जिन्होंने अपनी पीड़ा को अपनी महाशक्तियों में बदल दिया...

 हर किसी का अपना एक फेवरेट सुपरहीरो होता है। लेकिन कभी सोचा है कि सुपरहीरोज को उनकी पावर कहां से मिलती है?

वे जीवन में बुरे लोगों से लड़ने का विकल्प चुनते हैं। वे बुरी आत्मा से लड़ते हैं। हमारे सुपरहीरोज में एक चीज समान है - वे अपनी सच्चाई लोगों से छुपाकर रखते थे। वे सभी अपनी भावनाओं और परेशानियों को छुपाकर रखते थे। उन्होंने अपनी कमजोरियों और नकारात्मकता को अपनी शक्ति में तब्दील किया।

हम आपको 5 सुपरहीरोज के बारे में बता रहे हैं जिन्होंने अपनी बुराइयों को अपनी ताकत बनाया

बैटमैन - ब्रूस वेन
यह हम सबका सबसे पसंदीदा इंसान है। ब्रूस वेन यानी बैटमैन काफी कम उम्र में अपने माता-पिता को खो देता है, उसे इस बात से काफी दुख पहुंचता है। वो इस दुख में डूबने की बजाए खुद को इस दर्द से बाहर निकालता है। वो अपने दुख और पीड़ा को न्यू यॉर्क शहर की बुराई से बचाकर कम करता है।
काउंसलर टिप - अगर आप गहरा दुख और दर्द महसूस कर रहे हैं तो इस समस्या से आसानी से बाहर निकला जा सकता है अगर आप खुद को इसकी अनुमति दें तो। आप अपनी जिंदगी के मकसद को ढूंढे और उसे पूरा करने की ओर आगे बढ़ें।
सुपरमैन - क्लार्क केंट
सुपरहीरोज की दुनिया में सुपरमैन की कहानी सबसे दिलचस्प है। क्रिप्टन ग्रह पर जन्मे, सुपरमैन को अपने परिवार और अपने ग्रह को छोड़कर पृथ्वी पर आना पड़ता है। उसे एक नई दुनिया में फिट होना पड़ता और बिना किसी मदद के वापस अपने घर जाने का रास्ता ढूंढना पड़ता है। भले ही वो अपनी सुपरपावर्स में कभी भी फिट नहीं बैठ पाया और हमेशा ही दो अलग-अलग दुनिया के बीच झूलता रहा। लेकिन अपने नए घर की बेहतरी के लिए शक्तियों का इस्तेमाल करना चुना और इनसे निपटना भी सीखा।
काउंसलर टिप - पूरी तरह से सुखी जीवन जैसी कोई चीज नहीं है। हमारे पास जो कुछ है, हम उससे सीखते हैं, तो कई असमानताओं के बीच हल निकालना सीख जाते हैं।

स्पाइडरमैन - पीटर पार्कर
स्पाइडरमैन ने काफी कम उम्र में अपने माता-पिता को खो दिया था। पार्कर अपने इस दुख के साथ जीना सीखते हैं। लेकिन कुछ लोग उनका मजाक उड़ाकर उन्हें दुख पहुंचाने की कोशिश करते हैं। पार्कर को साइंस में रुचि रहती है लेकिन वह एक शौकिया फोटोग्राफर के रूप में काम करते हैं। यहां भी उन्हें परेशान किया जाता है। लेकिन यहीं वो एक मजबूत इंसान बनता है। उसके सिद्धांत उसे और भी मजबूती देते हैं।
एक मकड़ी से काटे जाने और उसकी शक्तियों को हासिल करने के बाद अपनी शक्तियों का इस्तेमाल उसे परेशान करने वालों और बुरे लोगों के खिलाफ करता है।
काउंसलर टिप - इस बात को समझें कि जो लोग दूसरों को परेशान करते हैं असल में वो खुद इसका शिकार हो चुके हैं। ये वे लोग होते हैं जो किसी से सही ढंग से पेश नहीं आ सकते और ना ही अपनी परेशानियां किसी को बता सकते हैं। इसलिए ऐसे लोगों को माफ करना सीखें और अपनी जिंदगी को सकारात्मकता के साथ देखें। ये हर मुश्किल को आसान बना देगा।
वुल्वरिन - ह्यू जैकमैन
वुल्वरिन का जन्म कुछ अद्भुत शक्तियों के साथ हुआ है। उसके हाथों के पिछले हिस्से से लोहे के पंजे निलते हैं। सरकार उसे उसके पंजों के लिए परेशान करती है। वुल्वरिन को इन सबसे काफी दुख पहुंचता है। वह एक ऐसा व्यक्ति बनाता है जो दूसरों के दुख दूर करता है। सभी नकारात्मकता के बावजूद, वुल्वरिन दुनिया को बचाता है।
काउंसलर टिप - कभी-कभी, जो लोग अत्यधिक पीड़ित होते हैं, उन्हें पूरी तरह से ठीक होने के लिए खुद को अलग करना पड़ता है।

हल्क - ब्रूस बैनर
हल्क एक प्यारा सा हरे रंग का इंसान है लेकिन गुस्सेवाला भी है। जब वह बच्चा था तो उसे परेशान किया जाता था। हल्क अपने शराबी पिता के जरिए काफी प्रताड़ित किया जाता था। उसके पिता उसके साथ मार-पीट करते थे। इसी का नतीजा था कि हल्क गुस्से वाला शख्स बन गया। हल्क ने अपने गुस्से को बुरे लोगों पर निकालना शुरू किया। उसे इसका इस्तेमाल लोगों की भलाई के लिए करना शुरू किया।
काउंसलर टिप - दुर्व्यवहार के अप्रिय अनुभव से सीखें। हालांकि अंत में गुस्सा या परेशान होना स्वाभाविक है, आप उन भावनाओं का आकलन करते हैं जो आपके जीवन की गुणवत्ता को निर्धारित करती हैं।

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