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जानिए कैसे इन 5 सुपरहीरो ने अपनी कमियों को खूबी बनाया

सुपरहीरो! क्या वाकई में ये कैरेक्टर्स आश्चर्यजनक हैं? जानिए ऐसे सुपरहीरो जिन्होंने अपनी पीड़ा को अपनी महाशक्तियों में बदल दिया...

 हर किसी का अपना एक फेवरेट सुपरहीरो होता है। लेकिन कभी सोचा है कि सुपरहीरोज को उनकी पावर कहां से मिलती है?

वे जीवन में बुरे लोगों से लड़ने का विकल्प चुनते हैं। वे बुरी आत्मा से लड़ते हैं। हमारे सुपरहीरोज में एक चीज समान है - वे अपनी सच्चाई लोगों से छुपाकर रखते थे। वे सभी अपनी भावनाओं और परेशानियों को छुपाकर रखते थे। उन्होंने अपनी कमजोरियों और नकारात्मकता को अपनी शक्ति में तब्दील किया।

हम आपको 5 सुपरहीरोज के बारे में बता रहे हैं जिन्होंने अपनी बुराइयों को अपनी ताकत बनाया

बैटमैन - ब्रूस वेन
यह हम सबका सबसे पसंदीदा इंसान है। ब्रूस वेन यानी बैटमैन काफी कम उम्र में अपने माता-पिता को खो देता है, उसे इस बात से काफी दुख पहुंचता है। वो इस दुख में डूबने की बजाए खुद को इस दर्द से बाहर निकालता है। वो अपने दुख और पीड़ा को न्यू यॉर्क शहर की बुराई से बचाकर कम करता है।
काउंसलर टिप - अगर आप गहरा दुख और दर्द महसूस कर रहे हैं तो इस समस्या से आसानी से बाहर निकला जा सकता है अगर आप खुद को इसकी अनुमति दें तो। आप अपनी जिंदगी के मकसद को ढूंढे और उसे पूरा करने की ओर आगे बढ़ें।
सुपरमैन - क्लार्क केंट
सुपरहीरोज की दुनिया में सुपरमैन की कहानी सबसे दिलचस्प है। क्रिप्टन ग्रह पर जन्मे, सुपरमैन को अपने परिवार और अपने ग्रह को छोड़कर पृथ्वी पर आना पड़ता है। उसे एक नई दुनिया में फिट होना पड़ता और बिना किसी मदद के वापस अपने घर जाने का रास्ता ढूंढना पड़ता है। भले ही वो अपनी सुपरपावर्स में कभी भी फिट नहीं बैठ पाया और हमेशा ही दो अलग-अलग दुनिया के बीच झूलता रहा। लेकिन अपने नए घर की बेहतरी के लिए शक्तियों का इस्तेमाल करना चुना और इनसे निपटना भी सीखा।
काउंसलर टिप - पूरी तरह से सुखी जीवन जैसी कोई चीज नहीं है। हमारे पास जो कुछ है, हम उससे सीखते हैं, तो कई असमानताओं के बीच हल निकालना सीख जाते हैं।

स्पाइडरमैन - पीटर पार्कर
स्पाइडरमैन ने काफी कम उम्र में अपने माता-पिता को खो दिया था। पार्कर अपने इस दुख के साथ जीना सीखते हैं। लेकिन कुछ लोग उनका मजाक उड़ाकर उन्हें दुख पहुंचाने की कोशिश करते हैं। पार्कर को साइंस में रुचि रहती है लेकिन वह एक शौकिया फोटोग्राफर के रूप में काम करते हैं। यहां भी उन्हें परेशान किया जाता है। लेकिन यहीं वो एक मजबूत इंसान बनता है। उसके सिद्धांत उसे और भी मजबूती देते हैं।
एक मकड़ी से काटे जाने और उसकी शक्तियों को हासिल करने के बाद अपनी शक्तियों का इस्तेमाल उसे परेशान करने वालों और बुरे लोगों के खिलाफ करता है।
काउंसलर टिप - इस बात को समझें कि जो लोग दूसरों को परेशान करते हैं असल में वो खुद इसका शिकार हो चुके हैं। ये वे लोग होते हैं जो किसी से सही ढंग से पेश नहीं आ सकते और ना ही अपनी परेशानियां किसी को बता सकते हैं। इसलिए ऐसे लोगों को माफ करना सीखें और अपनी जिंदगी को सकारात्मकता के साथ देखें। ये हर मुश्किल को आसान बना देगा।
वुल्वरिन - ह्यू जैकमैन
वुल्वरिन का जन्म कुछ अद्भुत शक्तियों के साथ हुआ है। उसके हाथों के पिछले हिस्से से लोहे के पंजे निलते हैं। सरकार उसे उसके पंजों के लिए परेशान करती है। वुल्वरिन को इन सबसे काफी दुख पहुंचता है। वह एक ऐसा व्यक्ति बनाता है जो दूसरों के दुख दूर करता है। सभी नकारात्मकता के बावजूद, वुल्वरिन दुनिया को बचाता है।
काउंसलर टिप - कभी-कभी, जो लोग अत्यधिक पीड़ित होते हैं, उन्हें पूरी तरह से ठीक होने के लिए खुद को अलग करना पड़ता है।

हल्क - ब्रूस बैनर
हल्क एक प्यारा सा हरे रंग का इंसान है लेकिन गुस्सेवाला भी है। जब वह बच्चा था तो उसे परेशान किया जाता था। हल्क अपने शराबी पिता के जरिए काफी प्रताड़ित किया जाता था। उसके पिता उसके साथ मार-पीट करते थे। इसी का नतीजा था कि हल्क गुस्से वाला शख्स बन गया। हल्क ने अपने गुस्से को बुरे लोगों पर निकालना शुरू किया। उसे इसका इस्तेमाल लोगों की भलाई के लिए करना शुरू किया।
काउंसलर टिप - दुर्व्यवहार के अप्रिय अनुभव से सीखें। हालांकि अंत में गुस्सा या परेशान होना स्वाभाविक है, आप उन भावनाओं का आकलन करते हैं जो आपके जीवन की गुणवत्ता को निर्धारित करती हैं।

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किसी अपने को खोने के दर्द की भरपाई कैसे करें

जो खुशबू वो अपने पीछे छोड़ कर गए थे वो भी मुझे बेहद कीमती लगती थी।
Nishtha JunejaTeentalkindia Content Writer

राइटर-जर्नालिस्ट खूबी अमीन अहमद ने किसी अपने को खोने के दर्द को बयां किया...

अपने नानाजी को खोने के बाद जब भी मैं अपने जीवन में हुए नुकसान के बारे में लिखने के लिए अकेले में बैठती हूं तो मैं ये तय नहीं कर पाती हूं कि मैंने अपने नानाजी, मेरे सबसे अच्छे दोस्त, अपने विश्वास, मेरे मार्गदर्शक या मेरे फिलोस्फर, इनमें से किस शख्स को मैंने अपने जीवन में खो दिया है। उनका मेरे जीवन से जाना एक नुकसान है जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती।

जब मेरे नानाजी की मृत्यु हुई तो मेरे परिवार में किसी में भी इतना साहस नहीं था कि उनकी मौत की खबर मुझे दे सके। उन्होंने मेरे घर आने का इंतजार किया और जब मैंने खुद अपनी आंखों से उन्हें देख लिया। उसके बाद उन्होंने एक सफेद चादर में लपेट दिया गया। उनके चेहरा बेहद शांत दिखाई दे रहा था। मैं बता नहीं सकती हूं कि उस वक्त मैं कैसा लग रहा था। मुझे कुछ भी महसूस होना बंद हो गया था। मैं बिल्कुल नील हो गई थी। मैं शायद उस वक्त रोई थी। मुझे ज्यादा कुछ याद नहीं है। मुझे दर्द नहीं महसूस हो रहा था पता नहीं क्यों। दरअसल मैं नानाजी की मौत को स्वीकार ही नहीं कर पा रही थी। 

मुझे याद है मैंने उनके सिर को अपने हाथों में रखा हुआ था, मैं उनको बार-बार कह रही थी कि मुझे अकेला छोड़ कर ना जाएं। मैं बेहद खुदगर्ज हो गई थी, क्योंकि मैं हमेशा उनके साथ रहती थी और मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि वो मुझसे मिले बिना ही चले गए। मैं उस दिन के बाद आए कई दिन मुझे याद नहीं है। क्योंकि कई दिनों तक नानाजी के पलंग पर सोती रहती थी। मैं उनके कंबल को ओढ़ कर सो जाती थी और उनकी खुशबू को जितनी ज्यादा देर तक को महसूस करना चाहती थी। 

एक सुबह जब में उठी तो मुझे बताया गया कि नानाजी को गए एक हफ्ता हो चुका है। मुझे याद दिलाया गया कि आप मेरी जॉब है और मुझे वापस लौटने की तैयारी करनी चाहिए। उसी वक्त मेरी एक रिश्तेदार ने मुझे शादी के लिए लड़कों से मुलाकात करने के लिए कहा। मुझे उस वक्त ये समझ ही नहीं आया कि मैं उन्हें क्या जवाब दूं और कैसे समझाऊं कि मैं उस वक्त किस दर्द से गुजर रही थी। 

उन्होंने समझाया कि ये दुख विनाशकारी हो सकती है। लेकिन दुख मिलने बड़े होने की निशानी है। ऐसा अब शायद जीवन में कई बार होगा कि हम अपने प्रिय लोगों को खोते जाएंगे, अंतत: हमें इसे स्वीकार करना चाहिए कि किसी जिंदगी से जाना कोई नहीं रोक सकता है। इसलिए हमे इसे स्वीकार करना सीखना चाहिए। वक्त सभी घाव भर देता है। इंसान को खुद को हर तरह हालात के लिए तैयार रखना चाहिए। ये आगे बढ़ने में मदद करता है। मुझे सभी लोग समझा रहे थे। मुझ पर दया दिखा रहे थे। मैं ये समझ पा रही थी कि वो मुझे इस दर्द से बाहर निकालना चाहती हैं। इसलिए मैंने उनको यही कहा कि मैं बस उन्हें खोना नहीं चाहती थी। 

मैं अब भी उन्हें खुद से दूर नहीं करना चाहती हूं और ना कभी कर पाऊंगी। मैं आगे भी उन्हें खुद से अलग नहीं कर पाऊंगी। मैं उन्हें अपने जीवन के उसूलों में जिंदा रखूंगी। मैं कुछ ऐसा करूंगी कि उन्हें गर्व महसूस करवा सकूं। मैं उन्हें अपने पास रख कर उनसे सकारात्मकता और प्रेरणा लेती रहूंगी। वो मेरे विश्वास का एक जरिया हैं और हमेशा रहेगा। वो मुझमें और मेरे नाम में जीवित हैं।  

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