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व्यवस्था के हिसाब से होना क्यों महत्वपूर्ण है?

क्या आप हर दिन इस माइंडसेट के साथ उठते हो कि आप किसी भी स्थिति को हैंडल करने के लिए तैयार हो? या फिर अचानक होने वाली घटनाओं के अनुभव या उन्हें छोड़ देने के कारण चिंतित महसूस करते हो?
Ritika SrivastavaTeentalkindia Counsellor

व्यवस्था के हिसाब से होने यानी एडॉप्ट करने का लक्षण बताता है कि आप बदलाव को कैसे लेते हैं। जो लोग बहुत जल्दी ख़ुद को चीजों के हिसाब से ढाल लेते हैँ उन्हें फ्लेक्सिबल या धारा के साथ चलने वाला कहा जाता है।  जबकि हम नेचुरली एडाप्टेबल हो सकते हैं या नहीं, ये हम सतर्क होकर अपने आइडिया और एक्सपेक्टेशन में फ्लेक्सिबल होने के आधार पर तय कर सकते हैं। समय के साथ, यह हमारे नज़रिये को बदल देता है जो हमें नेचुरली उन परिस्थितियों से तालमेल बैठाने में बेहतर बना देगा जिनका हम सामना करेंगे।

व्यवस्था के अनुरुप होने के कई प्लस प्वाइंट हैं। यदि आपको लगता है कि और अनुकूलित होने की ज़रूरत है या फिर आपको बताया गया है कि आपको अधिक फ्लेक्सिबल होने की ज़रूरत है। इस बात को समझिए कि इससे आपको कई फायदे होंगे मगर इसके लिए थोड़ी प्रेक्टिस की ज़रूरत हो सकती है।

आपको खुद पर भरोसा होता है और मुश्किलों से लड़ने की असाधारण क्षमता होती है। व्यवस्था के हिसाब से होने का टैलेंट व्यक्ति के काम और व्यवहार दोनों में होता है, और दोनों का होना ज़रूरी है। व्यवस्था के हिसाब से बेहतर होना सीखने के टिप्स यहां आपको दिए जा रहे हैं :

1. कोई व्यक्ति जो व्यवस्था के हिसाब से चलता है, नए विचारों के सपंर्क में है, तो ऐसे में चीजों को सिर्फ इसलिए करने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि वह हमेशा ऐसे ही की जाती हैं। वे बदलाव को स्वीकार करने में सक्षम होते हैं और यदि चीजें प्लान के हिसाब से नहीं होती हैं, तो भी डरते नहीं है।

2. जो लोग सामने आकर व्यवस्था के हिसाब से चलते हैं। उन्हें अपने दोस्तों से सम्मान मिलता है ओर अपने आसपास के लोगों को किसी भी तरह के बदलाव को अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं। जब आप मजबूत होते हैं, तब लोग आप पर अधिक भरेसा करते हैं। उन्हें इस बात का अहसास होता है कि आप किसी भी नई परिस्थिति में भी कितने अच्छे से काम करते हैं। कोई भी उस व्यक्ति की परवाह नहीं करता है, जो कुछ नहीं करता है मगर हर समय घबराता है।

3. इमेजिन करें कि यदि आपके पढ़ाई में खराब परफॉर्मेंस या किसी अन्य वजह से खराब नंबर आते हैं, तो आपका पहला कदम क्या होगा? क्या आप पढ़ाई छोड़ दोगे, या फिर आप अपनी स्थिति में सुधार के लिए क्या कर सकते हो इस बारे में सोचोगे? एडॉप्टेबल या अनुकूल होने का मतलब है कि अपनी गलतियों को लेकर चिंता करने में कम समय लगाना चुनौतीयों का सामना करने में तनाव कम होता है।

4. टीनटॉक इंडिया के एक्सपर्ट मानते हैं कि अनुकूल होने के कई फायदे हैं सबसे महत्वपूर्ण है ख़ुशी बढ़ जाती है, हम लगातार साइकोलॉजिकल ख़तरों से मिलते हैं। 
कुछ लोग आत्महत्या कर लेते हैं, हमें निराशा होती है, कमजोर और कुछ चुनौतीयों का सामना करते हैं। ऐसे में चीजों को देखिए और सीखिए। ज़िंदगी को संतुष्ट करने की काबिलियत और अच्छे रिलेशिनशिप ये सच में अनुकूलन की योग्यता पर निर्भर करता है। 

5. बुरी चीजें हम सभी के साथ होती हैं, लेकिन यदि आप मुसीबत में छलांग लगाते हैं, तो इसे कभी ख़त्म न होने दें, इससे आप अपने विचारों और उम्मीदों को वर्तमान स्थिति के हिसाब से एडजस्ट कर लेते हैं। "क्या हो सकता है"  के बजाय,  व्यवस्था के हिसाब से या फ्लेक्सिबल होना बेहतर है।

6. बात किसी सिचुएशन की हो या प्रोजेक्ट की यदि प्लानिंग नहीं हो तो मुश्किल हो सकता है, खासकर तब जब नुकसान बड़ा हो या फिर डेडलाइन खत्म हो जाए। अगर आप में अनुकूलन क्षमता होती है तो आप हर काम का अच्छा पक्ष देखना जानते है। इससे अपने फोकस को रीसेट और रीफ्रेम कर पाते हैं और एक बार फिर एक कदम पीछे करके कम जजमेंटल होकर सिर्फ अपने उद्देश्य पर ध्यान केन्द्रित करके चीजों को देखना होता है। यदि आपको सकारात्मकता की पहचान करना कठिन लगता है, तो इस बात को ध्यान में रखकर शुरू करें कि आप क्या सीखते हैं जब चीजें शेड्यूल नहीं की जाती है। इस एक्सरसाइज को ज़रूरी हिस्से के रूप में अपनी मूल्यांकन करने की स्ट्रेटजी शामिल करें।

एक मशहूर चीनी कहावत है, "बुद्धिमान खुद को परिस्थितियों के अनुसार ढाल लेता है, क्योंकि पानी खुद को घड़े में ढाल लेता है।" व्यवस्था के अनुकूल होने का मतलब है कि आप अपनी परिस्थितियों के हिसाब से खुद को बदल सकते हैं। इसका मतलब यह है कि अपनी परिस्थितियों को ठीक करने की कोशिश करने में कम समय दें, हो सकता है वे काम करें या नहीं और अपना अधिकांश समय अपने एटीट्यूड और एक्सपेक्टेशन को रेगुलेट करता है। यह एक आजीवन चलने वाली प्रोसेस है, और जितनी जल्दी आप अपने जीवन को बेहतर बनाने की कोशिश करना शुरू करते हैं, उतना ही बेहतर होगा। बदलाव करते रहें और  इस तरह से अपनी मन: स्थिति को बदलना आसान लग सकता है, लेकिन आपको हिम्मत वाला, साहसी बनना होगा।

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