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अकेले ख़ुश रहकर कैसे एक सकारात्मक जीवन जिएं

अकेले जीना शायद दु:खद और निराशाजनक प्रतीत हो सकता है, किंतु ज़रूरी नहीं कि ऐसा हो। अकेले रहने के दौरान सकारात्मक अनुभव के लिए यहां कुछ तरीक़े दिए गए हैं
Snigdha Teentalkindia Counsellor

मनुष्य मिलना-जुलना पसंद करता है। हमारा जीवन इस बात के इर्दगिर्द घूमता है कि समाज में हम लोगों के साथ किस तरह व्यवहार करते हैं। इसका अर्थ यह है कि हम कहीं न कहीं दूसरे लोगों पर निर्भर रहते हैं। जब हम ख़ुश होते हैं तब भी ये लोग हमारे साथ होते हैं और तब भी, जब हम दु:खी होते हैं। ये जीवन के अच्छे और बुरे समय में समान रूप से हमारे साथ होते हैं। 

इसी से हम यह भी मान बैठते हैं कि दोस्तों और परिवार के साथ होना ज़रूरी है, और अकेले रहना ठीक नहीं है। लेकिन क्या वाक़ई में ऐसा है? बेशक नहीं। कोई व्यक्ति अपना जीवन अकेले भी बिता सकता है और वह भी बहुत ख़ुश रहते हुए। वो हर चीज़ में आत्मनिर्भर हो सकता है और संतुष्टि का अनुभव कर सकता है।

जब आप इस तरह के जीवन के बारे में सोचते हैं तो बेशक यह ज़िंदगी बहुत अलग महसूस होती है। हालांकि, यदि आप इस तरह से ज़िंदगी जीने के बारे में सोच रहे हैं, तो इन चंद बातों से ख़ुद को इसके लिए तैयार कर सकते हैं। 

अकेला यानी लोनली नहीं :
हालांकि, आप सोच रहे होंगे कि अकेला (अलोन) होना और लोनली होना एक ही बात है, किंतु, इनके अलग-अलग अर्थ हैं। यदि व्यक्ति आत्मनिर्भर है तो उसे अकेला कहेंगे। वही दूसरी ओर, लोनली वह व्यक्ति है, जिसे अकेलेपन से तकलीफ़ होती है। वो यह महसूस करता है कि उसे छोड़ दिया गया है या समाज से बाहर कर दिया गया है। लेकिन यदि आप अकेले रहने को सकारात्मक रूप से लें- तो आप अकेले ख़ुश रहना सीख जाएंगे।

ख़ुद से प्यार करें
यहां यह समझना ज़रूरी है कि जैसे आप हैं, उस तरह से आपको इस संसार में सभी बिना किसी ढोंग या दिखावे के पसंद नहीं करेंगे। हालांकि, कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं होगा, जो आपको आपसे अधिक प्यार कर सकता हो।

बेकार की उम्मीदें ना रखें
अकेले रहने से आपको तभी तकलीफ़ होगी, जब आप किसी से यह उम्मीद करेंगे कि वह किसी काम को आपकी तरह से करे। जब वैसा नहीं होगा तो इससे आपको हताशा हो सकती है। किंतु यदि आप बेकार की उम्मीदें पालें ही नहीं तो नकारात्मक हुए बिना भी आत्मनिर्भर महसूस करेंगे।

सकारात्मकता के साथ अकेले रहना सीखें
अकेले जीना आसान नहीं है, लेकिन यदि आपके पास वो तमाम चीज़ें हैं, जो आपको ख़ुश रखती हैं तो यह कहीं आसान हो जाता है। ख़ुशी ही सकारात्मकता है। आप चाहें तो जिसमें आपका दिल रमता है, वह काम करें, जैसे कि संगीत, नृत्य या आर्ट और क्राफ्ट, या पैदल घूमने और लम्बी सैर पर जाने जैसी कोई आसान चीज़ करें। आप इन चीज़ों के साथ ख़ुशी महसूस करते हुए एक सकारात्मक सोच लेकर जी सकते हैं।
 

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