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नई स्किल्स नहीं सीखीं तो क्या हुआ

ये ज़रूरी तो नहीं कि आप हर क़िस्म की होड़ में शरीक़ हों, लॉकडाउन के दौरान अपनी तरह से जीना भी कम नहीं

इंसानों की आदत है कि वो हमेशा अपने किसी न किसी काम में व्यस्त रखते हैं और प्रोडक्टिव बने रहना चाहते हैं। अब जब इस महामारी ने हमारे रोज़मर्रा के जीवन को रोक दिया है, तब यह एक नियम बन गया है कि हमें इस समय में कुछ नया करना चाहिए या किसी हुनर में महारत हासिल करनी चाहिए।

वैसे तो यह आपका ही फ़ैसला होना चाहिए कि आप क्या चाहते हैं और अपने जीवन को किस तरह चलाना चाहते हैं? फिर भी, यह महामारी कोई कॉम्पीटिशन नहीं है, जो आपको हर चीज़ में भाग लेना ही है।

यदि आपका कुछ करने का मन नहीं है, तो भेड़चाल में शामिल मत होइए। ख़ुद से एक चीज़ पूछिए: ऐसी चीज़ों के लिए ख़ुद को परेशान क्यों करना, जिससे हमें कोई ख़ुशी या उम्मीद नहीं मिल रही है?

ऐसे समय में आपको अलग-थलग महसूस क्यों नहीं करना चाहिए, इसका जवाब यहां है-

  • इस चुनौतीपूर्ण समय में, किसी भी उपलब्धि से अधिक महत्त्वपूर्ण है आपका मानसिक स्वास्थ्य। अपनी गति से आगे बढ़ना पूरी तरह से जायज़ है।
  • कोई नई स्किल सीखना, अपनी पुरानी हॉबी पर फिर से काम करना या सारे समय प्रोडक्टिव बने रहना इस लॉकडाउन का मक़सद नहीं है। यदि ये सब आपको ख़ुशी नहीं देता है तो आपको इन सबसे दूर रहने का पूरा हक़ है। 
  • एक अच्छा पोर्टफोलियो तैयार करने या लॉकडाउन की टु-डु लिस्ट पूरी करने के बजाय आपको ज़िंदादिल और सुकून से रहने की कोशिश करना चाहिए। यह लॉकडाउन कोई दिखावे की चीज़ नहीं है।
  • अगर आप कुछ भी महसूस नहीं कर पा रहे हैं तो इट्स ओके। इस भागदौड़ से कुछ समय आराम लेने में भी बुराई नहीं है। पहले अपने को आप जैसे हैं, वैसे ही क़बूल कीजिए, बाक़ी चीज़ें बाद में भी की जा सकती हैं।
  • यदि इस लॉकडाउन के बाद आपके पास एक भी नई स्किल नहीं होगी, तो भी आप कुछ हार नहीं जाएंगे। याद रखिए आपको अपने पर फ़ोकस करने की ज़रूरत थी और आपने अपना बेस्ट दिया है।
  • यदि आप असहाय महसूस करते हैं और रोना चाहते हैं, यदि आप अच्छा महसूस नहीं करते हैं तो इस अहसास को भी अपनाना होगा। याद रखिए अपने को स्वीकार करना एक अच्छी आदत है।

कोविड-19 ने आपको अपने घर में बंद कर दिया है तो भी आपको स्वयं को लगातार व्यस्त रखने की कोई ज़रूरत नहीं है। कुछ न करना भी अपनी वेल-बीइंग को बढ़ावा देना है।

घर पर बंद रहना आपको अपने आप ख़ाली समय, ऊर्जा, फ़ोकस और प्रेरणा से नहीं भर देगा। घर पर सबकुछ अपने बूते करते हुए इस महामारी में बचे रहने के लिए भी बहुत हिम्मत चाहिए।

और हमारा यक़ीन कीजिए, आप अकेले नहीं हैं। 

यदि सोशल मीडिया पर इस तरह की अपडेट्स देखकर कि अपने समय को नई एक्टिविटीज़ से भर लीजिए, आपको किसी तरह का दबाव महसूस होता है, और आप इसे सहन नहीं कर सकते, तो आपको निराश महसूस नहीं करना चाहिए। 

दूसरों के बनाए नियमों पर आप सारे काम नहीं कर सकते हैं। आपने समय का आनंद लीजिए। अपनी अलमारी, दराज़, स्टडी टेबल को फिर से जमाने की ज़रूरत नहीं है। दरअसल, अचानक हुआ कोई भी बदलाव आपकी मानसिक स्थिति पर असर कर सकता है। साथ ही, कुछ समय के लिए ठीक न रहना भी ठीक है। यदि आपको अपने लिए समय चाहिए, यदि आप चुप रहना चाहते हैं, तो उन पलों का आनंद लीजिए। अपनी सेहत पर ध्यान दीजिए। अब जब हम बाहरी, भटकाने वाली चीज़ों से दूर हैं, तब तो हमें पहले से अधिक ख़ुद पर ध्यान केंद्रित करने की ज़रूरत है।

अपने ग़ुस्से और नाराज़गी को कंट्रोल करने की कोशिश मत कीजिए, उसे बहने दीजिए, और देखिए यह आपको किस दिशा में ले जाता है। अपने साथ बिताए इस समय के लिए आपको कभी पछतावा नहीं होगा।

और चूंकि आप अपने मन के मालिक हैं तो वही बने रहिए।

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Diva Teentalkindia Content Writer

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