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शरीर में कैसे काम करते हैं हार्मोन्स

हार्मोन्स ऐसे केमिकल्स होते हैं जो हमारी बॉडी को बढ़ने और विकसित करने में मदद करते हैं। ये शरीर में मौजूद एंडोक्राइन सिस्टम से रिलीज होते हैं। हर एक हार्मोन का अपना खास काम होता है।

हार्मोन्स हमारी बॉडी का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। हम अलग-अलग स्थितियों में कैसा व्यवहार करते हैं और किस तरह महसूस करते हैं यह हार्मोन ही तय करता है। यह हमारी गतिविधियों के मुताबिक घट या बढ़ सकता है। जानिए हार्मोन्स किस तरह हमारी बॉडी में काम करते हैं-

हार्मोन्स ऐसे केमिकल्स होते हैं जो हमारी बॉडी को बढ़ने और विकसित करने में मदद करते हैं। ये शरीर में मौजूद एंडोक्राइन सिस्टम से रिलीज होते हैं। हर एक हार्मोन का अपना खास काम होता है। ये व्यक्ति के मूड, व्यवहार, भावनाओं को भी प्रभावित करते हैं।

यहां ऐसे ही कुछ हार्मोन्स के बारे में बताया गया है जो हमारे मूड और इमोशंस को प्रभावित करते हैं-

डोपामाइन - यह हार्मोन दिमाग में मौजूद हाइपोथैलेमस से रिलीज होता है। इसका काम है, किसी चीज पर फोकस रखना, ध्यान रखना, मेमोरी, जिज्ञासा, जागरूकता, खुशी जैसे इमोशंस को कंट्रोल करना। अगर शरीर में इसकी मात्रा कम हो जाए तो डिप्रेशन, गुस्सा, स्वभाव में अचानक से बदलाव, भूख जैसे लक्षण दिखते हैं।

सेरोटोनिन -  यह खुशियों का हार्मोन माना जाता है। सेरोटोनिन गुस्सा, मूड, मेमोरी, इन सभी को बैलेंस करके रखता है जिसकी वजह से इंसान खुश रहता है और रिलैक्स फील करता है। इस हार्मोन की कमी से डिप्रेशन, चिंता, दुख, कम भूख लगना जैसे लक्षण दिखते हैं।

ऑक्सीटोसिन - यह हार्मोन सोशल बिहेवियर, सेक्शुअल रिप्रोडक्शन जैसी फीलिंग्स बढ़ाता है। ऑक्सीटोसिन संतोष, शांति, सुरक्षा की भावना को बढ़ाने में मदद करता है और चिंता को कम करता है। यह तनाव और खतरे से भी बचाता है। यह काफी हद तक सहानुभूति और आकर्षण की भावनाओं से जुड़ा है।

एंडॉर्फिन्स  -  यह हार्मोन तनाव, उर और दर्द की प्रतिक्रिया के रूप में रिलीज होते हैं। ये दर्द से राहत देते हैं और खुशी का कारण बनते हैं।

एड्रेनलिन : यह हार्मोन शरीर में तब रिलीज होता है जब हम स्ट्रेस में होते हैं। ऐसी स्थिति में धड़कने बढ़ जाती हैं। यह हर्मोन शरीर में ऊर्जा का स्तर बढ़ाकर धड़कनों को नियंत्रित करने में मदद करता है।

जो चार हार्मोन हमारी बॉडी को फिजिकल और साइकोलॉजिकल स्ट्रांग रखने के लिए बहुत जरुरी हैं वो हैं - डोपामाइन, सेरोटोनिन, ऑक्सीटोसिन और एंडॉर्फिन्स। कुछ ऐसे तरीके भी होते हैं जिनसे बॉडी में इनकी मात्रा बढ़ाई जा सकती है। जैसे- 30 मिनट रोज एक्सरसाइज करना और हंसना, इससे एंडॉर्फिन्स की मात्रा बढ़ती है। डोपामाइन आमतौर पर तब रिलीज होता है जब हम खुश होते हैं और हमारे काम की घर पर या ऑफिस में तारीफ की जाती है। सेरोटोनिन तब ज्यादा रिलीज होता है जब हम अपना काम दूसरों से शेयर करते है, दूसरों की मदद करते हैं, उनकी बातें सुनते हैं और अच्छा व्यवहार रखते हैं। और अंत में ऑक्सीटोसिन बॉडी में जब रिलीज होता है जब हम किसी दूसरे इंसान के ज्यादा नजदीक होते हैं। जैसे हाथ मिलाना, गले लगाना, कंधे पर हाथ रखना आदि।

हार्मोन्स हमारे शरीर और अंदरूनी कार्यशैली का बेहद जरूरी हिस्सा हैं। ये भावनाओं, मनोदशा, व्यवहार के संदर्भ में हमारे द्वारा महसूस की जाने वाली और अनुभव कराने वाली ऐसी कई चीजों का ध्यान रखते हैं। इन बदलावों के बारे में हमेशा जागरूक रहें कि हमारी दिनभर की एक्टिवटी के आधार पर ये घट या बढ़ सकते हैं।

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शिफ्टिंग के दौरान कैसे करें स्ट्रेस कम

स्टूडेंट हॉस्टल में रहें या फिर पेइंग गेस्ट की तरह रह रहे हों, यह जगह हमारे लिए बेहद अहम होती है। बात जब शिफ्टिंग की आती है तब कई चीजों से सामना होता है।

मूविंग इन या मूविंग आउट, दोनों ही स्ट्रेस में डाल देते हैं। फिर चाहें आप एक अपार्टमेंट से दूसरे अपार्टमेंट शिफ्ट हो रहे हों या फिर एक शहर से दूसरी शहर। मुश्किलें तो आती ही हैं और इससे स्ट्रेस भी बढ़ जाता है।

स्टूडेंट हॉस्टल में रहें या फिर पेइंग गेस्ट की तरह रह रहे हों, यह जगह हमारे लिए बेहद अहम होती है। जिन जगहों पर हम रहते हें वो हमारे जीवन का एक हिस्सा बन जाता है और हम कंफर्टेबल महसूस करते हैं। लेकिन बात जब शिफ्टिंग की आती है तब कई चीजों से सामना होता है। सामान पैक करना फिर नयी जगह पहुंचकर उन्हें अनपैक करके नई जगह पर वापस रखना, यह पूरा काम काफी मुश्किलों से भरा हुआ रहता है। पुराने घर की सभी यादें स्टूडेंट्स को भावुक बना देती हैं जिससे स्ट्रेस लेवल और भी बढ़ जाता है।


शिफ्टिंग हमारे लिए लाइफ का एक एक्साइटिंग और लर्निंग एक्सपीरियंस साबित हो सकता है। इसके लिए हमारी ओर से भी प्रयास होने जरूरी हैं। यहां उनमें कुछ बताए जा रहे हैं-

सही एटीट्यूड
अगर शिफ्ट होना आपकी चॉइस नहीं है तो यह स्वाभाविक है की आपको बुरा लगेगा और इस डिसिशन से आप बिलकुल खुश नहीं होंगे। लेकिन आपको शिफ्ट होना है और आपके पास कोई चॉइस नहीं है तो क्यों ना इस काम को ख़ुशी- ख़ुशी किया जाए। सोचिए कि आपको नए लोग मिलेंगे, नई जगहों को जानेंगे, नई कैंटीन, नया अनुभव और नई चीजें। यह सब कुछ लाइफ को बेहतर बनाने में मदद करेगा।

नई जगहों को खोजना
नयी जगह पर शिफ्ट होना थोड़ा डरावना हो सकता है क्योंकि आप उस जगह को पहले से नहीं जानते। लेकिन उस जगह पर घूमना, वहां की दुकानें, एटीएम, रेस्तरां आपको उस जगह से फ्रेंडली बना सकते हैं। इसके बाद आप उस जगह से बिलकुल अनजान नहीं रहेंगे।

प्लानिंग सबसे ज़्यादा जरुरी है
बहुत से लोग पैकिंग के समय हार मान लेते हैं लेकिन इस मुश्किल को आसान करने के कुछ टिप्स अपना सकते हैं।

- शिफ्ट होने से पहले अपने पास कुछ बॉक्स इकट्ठा करें या फिर अपने पास कुछ खाली बक्से रखें।
- अपना सामान व्यवस्थित करें। बिखरा हुआ सामान आपके दिमाग में नकारात्मकता लाता है। इसलिए जो सामान आपके काम का नहीं उसे हटाएं। चाहें तो डोनेट करें या रिसाइकल करें।
- एक जैसी चीज़ें एक ही बॉक्स में रखें जिससे अनपैक करने में मुश्किल ना आए। जैसे केबल्स, चार्जर एक बॉक्स में, बुक्स, कीमती चीजें, आदि इन सबके लिए अलग-अलग बॉक्स बनाएं।
- शिफ्ट होने से पहले, जिस नई जगह पर आप शिफ्ट हो रहे हैं उसे अच्छी तरह से देख लें और कहां क्या रखना है पहले से ही सोच लें। इससे आपको सामान अनपैक करने में ज्यादा मुश्किल नहीं आएगी।

पैकर्स और मूवर्स
अगर आप एक से दूसरे शहर में शिफ्ट कर रहे हैं तो पैकर्स और मूवर्स से कॉन्टेक्ट करें। ये आपकी चीज़ें सावधानी से और अच्छी तरह से शिफ्ट करने में मदद करेंगे। अगर शहर के अंदर ही शिफ्ट कर रहे हैं तो दोस्तों की मदद ले सकते हैं।

इमोशनल सपोर्ट लें
शिफ्ट होने से पहले इमोशनल होना स्वाभाविक है। इसलिए दुखी बिलकुल मत हों और ऐसे समय में अपने दोस्तों और परिवार का सहारा लें। वे आपको इमोशनली सपोर्ट देंगे जिससे आप इस समस्या को भी आसानी से हल कर लेंगे। ऐसे समय में खुद को सबसे अलग बिलकुल भी मत करिए।

रूटीन सेट करें
पुरानी जगह से नई जगह शिफ्ट होने में आपका रूटीन बिगड़ जाता है क्योंकि सामान को अनपैक करना, सही जगह उसे रखना यह सब आपका समय बहुत लेता है। इसलिए नई जगह पर नया रूटीन बनाकर उसे फॉलो करने की कोशिश करें।

यह बात हमेशा याद रखें कि जीवन में जो चीज़ कांस्टेंट है वो है बदलाव। बदलाव आते रहेंगे इसलिए जरुरी है कि हम इस बात को अपनाएं और इसी के साथ अपना जीवन खुशहाली से जिएं। हो सकता है जिसे आप अंत समझ रहे हों वो जीवन की नई शुरुआत साबित हो।

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