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Good listeners are good communicators

Good communication skills are necessary for everyone at every phase in life be it personal or professional. And mastering to have good communication skills is a result of practice.

Everyone wants to become a good orator and why not, effective communicators are usually successful in life. And it is something unavoidable in any and everyone’s life. Be it that you are a student, or office goer conveying what you think is really essential. Also in your personal life if you are a good communicator then you can easily maintain strong interpersonal relations.

Also communication skills are needed to convey information and eliminate the source of confusion. As in the case of written words, there is a lack of emotions and expressions. And one can really not understand what the person is feeling or thinking. To become a good communicator it is necessary to keep few points in mind.
A good listener is usually a good communicator, as the person is good with facts. Listening smartly can make you gather a lot of information, store them and use them later. Along with being a good listener, if you are an effective presenter and a quick thinker, it is a superb ad on. So try to listen carefully.
Only words do not communicate what you feel or want to express. Eye contact, facial expressions, gestures, postures and body orientation, proximity, paralinguistic, humor are also considered as ways of non verbal communication. So be careful about all these attributes also, whenever you are meeting someone or trying to communicate.

The key to improving your communication skills is listening, reading and practicing as much as you can. This will not only build confidence in you to narrate well whatever you want to, but also constantly be a motivation to learn. 
If you are interested in writing, you can definitely use your writing skills also to practice what you have heard or read. Apart from all this if you find similar language speaking people and keep practicing. Do not hesitate, you are in the learning phase. Reading aloud is also very effective in improving communication skills. By reading loudly you can improve your pronunciation and vocabulary at a time

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इमोशंस को स्मार्टली हैंडल करें

हर व्यक्ति के लिए इमोशंस स्वाभाविक और महत्वपूर्ण होते हैं। इनसे समझदारी से निपटना जरूरी है।

क्या हैं इमोशंस


कोई परिस्थिति या दोस्त, परिवार, जीवनसाथी जैसे रिश्ते के कारण आने वाले विचार ही इमोशंस होते हैं। यह पॉजिटिव और नेगेटिव दोनों हो सकते हैं। क्या आप सोच रहे हैं कि इमोशंस कैसे नेगेटिव और पॉजिटिव हो सकते हैं? सही मायने में इमोशन खास तरह का एक औरा क्रिएट करता है जो बताता है यह किस तरह इमोशन है। कम शब्दों में कहें तो खुशियां, आनंद, जिज्ञासा, उत्साह, आभार और प्यार ऐसे इमोशंस हैं जो हमें पॉजिटिव फील कराते हैं। दुख, गुस्सा, अकेलापन, जलन, खुद की आलोचना और रिजेक्शन नेगेटिव इमोशंस हैं। इमोशंस हमारे जीवन का क्रिटिकल हिस्सा है लेकिन कई बार इसका सामना करना मुश्किल और दर्द देने वाला होता है।
इमोशंस को समझदारी से हैंडल करना न तो बहुत मुश्किल काम है और न ही कोई रॉकेट साइंस है। कोई भी इंसान समय के साथ पॉजिटव और नेगेटिव दोनों तरह के इमोशंस महसूस करता है।



तीन आसान स्टेप्स में जानिए कैसे नेगेटिव इमोशंस से निपटें

स्टेप-1 : इमोशंस की वजह समझें
आप कैसा महसूस करते हैं, इसे नजरअंदाज न करें। अपने इमोशंस को पहचानें और रिएक्ट करें। कुछ इमोशंस ऐसे होते हैं जो आपकी मसल्स में खिंचाव पैदा करते हैं। ऐसे में जरूरी है कि आप कैसे महसूस करते हैं इसके बारे में जागरुक हों। अपने इमोशंस को कभी नजरअंदाज न करें। इमोशंस सामने आने पर कैसे निपटना है, अगर यह समझ जाते हैं तो समझिए समस्या का आधा उपाय आपने खोज लिया। सभी इमोशंस आपके अंदर से ही आते हैं। इसलिए जरूरी है कि इसके लिए आप किसी और को जिम्मेदार न ठहराएं। खुद के लिए भी सख्त न बनें, खुद को समझें और विश्वास करें, इमोशंस नेचुरल होते हैं।

स्टेप- 2 : समझदारी से निर्णय लें
अपने इमोशंस से निपटते समय जब जान जाएं कि इस दौरान आप कैसा महसूस करते हैं तभी निर्णय लें कि कैसे रिएक्ट करना है। कभी-कभी रिएक्ट न करना सही होता है लेकिन कई बार रिएक्ट करना आपको अच्छा महसूस कराता है। ऐसा करते समय बस अपने दिमाग में व्यक्त करने का सबसे अच्छा तरीका चुने। यह आपकी पसंद है कि पश्चाताप करना चाहते हैं या जो हुआ है उसके बारे में भूल जाएं या इसके बारे में लिखें। इसके बाद भी कुछ लोग किसी घटना में फंस जाते हैं जो उनके लिए नुकसानदेह होता है। इससे सबक लें और अपना मूड बदलकर आगे बढ़ जाएं। इस मामले पर जितना ज्यादा सोंचेंगे उतना ही आपको बुरा महसूस होगा।

अगर आप ऐसा कर पाने में असमर्थ हैं तो अपने दोस्तों और फैमिली मेंबर्स से मदद ले सकते हैं। ऐसी चीजे करें जो आपको अच्छा और सकारात्मक महसूस कराएं। अपनी पसंद का कुछ भी कर सकते हैं जैसे सिंगिंग, राइटिंग, पेंटिंग, नॉवेल रीडिंग। कम शब्दों में कहें तो अपने बारे में पॉजिटिव माहौल बनाएं। अगर संभव हो तो रोजाना एक्सरसाइज करें, ऐसा करने से ब्रेन से नेचुरल केमिकल रिलीज होते हैं जो आपको पॉजिटिव बनाते हैं। ये पॉजिटिव इमोशंस को बढ़ाते हैं।



स्टेप-3 : अगर इमोशंस को हैंडल नहीं कर सकते तो मदद लें
कुछ परिस्थितियों में ऐसा होता है जब आप पूरी कोशिशाों के बाद भी इमोशंस पर काबू नहीं पा पाते। ऐसे मामलों में परेशान न हों और किसी प्रोफेशनल से मदद लें। आप काउंसलर से बात कर सकते हैं या थैरेपिस्ट से मदद ले सकते हैं। नेगेटिव इमोशंस से निपटना मुश्किल नहीं है, लेकिन कभी-कभी काउंसलर या थैरेपिस्ट के सपोर्ट की जरूरत होती है।

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