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खाने की बर्बादी कैसे रोकें टीनएजर्स ?

टीनएजर्स का योगदान इसलिए जरूरी है क्योंकि वे देश का भविष्य हैं।

हर साल 16 अक्टूबर को वर्ल्ड हेल्थ डे मनाया जाता है। इस दिन यूनाइटेड नेशन्स फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन की स्थापना हुई थी। इस दिन वर्ल्ड फूड मनाने की घोषणा गई। इस प्रोग्राम में दुनिया के भर के लोग शामिल होते हैं। इसका मकसद दुनिया से भुखमरी मिटाना है। अब सवाल ये आता है कि वर्ल्ड फूड डे पर टीनएजर्स को क्या करना चाहिए?
जहां एक तरफ पर्याप्त मात्रा में अनाज उगाया जा रहा है। वहीं, दूसरी तरफ हर 9 में से एक इंसान भूखा सोता है। टीनएजर्स में फास्ट फूड का चलन बढ़ा है। दुख की बात है कि खाने के बर्बादी से कैसे बचा जाए? जानिए टीनएजर्स के लिए वो टिप्स जिनकी मदद से वर्ल्ड फूड डे पर वे अपना योगदान दे सकते हैं। उनका योगदान इसलिए जरूरी है क्योंकि वे देश का भविष्य हैं।  

कैसे रोके खाने की बर्बादी

घर का खाना खाएं

अगर आप घर पर बना खाते हैं तो आपकी मां को बचा हुआ खाना फेंकना नहीं पड़ेगा। इस बात को समझिए कि कई लोग भूखे सोते हैं।

अधिक खाना ऑर्डर करने से बचें
टीनएज बच्चे बाहर का खाना ज्यादा पसंद करते हैं, इसी के साथ ही उन्हें खाने में वैराइटी भी काफी पसंद आती है। ऐसे में अगर आप बाहर जाकर खाना खा रहे हैं तो जितनी आपको भूख हो उतना ही ऑर्डर करें।

बचा खाने फेंकने की जगह दान करें
घर पर खाना बच गया है तो इसे फेंकने की बजाए दान कर दें। आपके घर में काम करने वाले हेल्पर्स या मंदिरों और सड़कों पर बैठे भिखारियों को दान में दें।

जरूरत से ज्यादा खाने से बचें
टीनएज उम्र में बच्चों को अच्छी डाइट लेनी चाहिए। ये उनकी बॉडी और ब्रेन दोनों की ग्रोथ के लिए बेहतर होती है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं की आप जरूरत से ज्यादा खाने लगें। आपको जितनी भूख हो उतना ही खाएं। जरूरत से ज्यादा खाने से मोटापे की समस्या हो सकती है। इसलिए भूख के मुताबिक ही खाना खाएं।

जागरूकता फैलाएं
टीनएजर्स में बात करने की अच्छी श्रमता होती है। उनके पास कई साधन और वक्त भी ज्यादा होता है। फ्रेंड सर्कल भी काफी बड़ा होता है। इसलिए आप अपनी बात आसानी से ज्यादा लोगों तक पहुंचा सकते हैं। अपने परिवार और दोस्तों से खाना के बचत को लेकर बात करें। लोगों को ये समझाएं कि खाना न फेकें और बचत करें। 

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टीनएजर्स के लिए जरूरी है क्रिएटिव स्किल्स

क्रिएटिव सोच हो तो कई तरह की प्रॉब्लम्स को आसानी से सॉल्व किया जा सकता है।

खुद को दुनिया में आगे बढ़ने के लिए तैयार करना आसान नहीं है। दुनिया में कई बदलाव, नई तकनीक और नए तौर-तरीके अपनाए जा रहे हैं। हम स्कूल में जो कुछ सीखते हैं वो समय के साथ पुराने हो जाते हैं। यही वजह है कि बच्चों, टीनएजर्स और युवाओं को आजकल नई स्किल्स सीखने पर फोकस करना चाहिए। समय के साथ हो रहे बदलावों को स्वीकार करना चाहिए। ऐसी ही सबसे जरूरी स्किल है क्रिएटिव सोच। यह आपको नई चीजें खोजने में मदद करती हैं। चुनौतियों से लड़ना और नई तरह से समाधान निकालना भी सिखाती है। हमें परंपरागत तरीके से सोचने का तरीका बदलने की जरूरत है ताकि आप क्रिएटिव सोच रख सकें। किसी खास समस्या का क्रिएटिव सॉल्यूशन निकाल सकें। इसकी शुरुआत आपके अनुभवों से होती है जिसे समय के साथ सीखते हैं। 21वीं सदी में इनोवेटिव तरीके से सोचना, प्रॉब्लम को सॉल्व करना एक जरूरी स्किल बन गई है।

टीनटॉक इंडिया एक्सपर्ट से जानिए कैसे क्रिएटिव सोच डेवलप की जाए...

ब्रेनस्टॉर्मिंग : किसी चीज के बारे में सोचें और दिमाग में आने वाले विचारों को समझें लेकिन इनमें उसे अपनाएं जो अलग और नया हो। विचारों के इस पूल में एक ऐसा आइडिया चुनिए जो अलग हो और समस्या का समाधान कर सकता हो। किसी समस्या का समाधान करने के लिए ब्रेनस्टॉर्मिंग बेहतर विकल्प है। दिमाग में जितने ज्यादा आइडिया आएंगे, समाधान की दर उतनी ही तेजी से बढ़ेगी।

माइंड मैपिंग : माइंड मैपिंग की मदद से छोटी-छोटी चीजों को जोड़ा जाता है। ब्रेनस्टॉर्मिंग की मदद से नए आइडिया जनरेट होते हैं और माइंड मैपिंग की मदद से उन्हें आपस में व्यस्थित तरीके से जोड़कर समाधान निकाला जाता है। ब्रेनस्टॉर्मिंग से निकले आइडिया को माइंड मैपिंग से जोड़ना चाहिए। यह एक्सरसाइज दिमाग के दोनों हिस्सों में करना चाहिए। यह आपको सोचने पर मजबूर करेगी और स्किल को बढ़ाने के लिए प्रेरित करेगी।

रीफ्रेमिंग : रीफ्रेमिंग का मतलब होता है चीजों को व्यवस्थित करना। आप पहले समस्या और स्थितियों को समझें। इसके बाद अनूठे तरीके से समाधान निकालने की कोशिश करें। आप जिस बारे में सोच रहे हैं उसकी एनालिसिस करें और बड़े स्तर पर समझें। उसमें कितने मौके हैं और कौन सी बाधाएं हैं, इसे जानें। इनदिनों ज्यादातर प्रोफेशनल्स यही प्रक्रिया को अपना रहे हैं।

दूर की सोच : क्रिएटिव स्किल को डेवलप करने का यह तरीका आपको ट्रेंड करेगा ताकि आप भविष्य की तस्वीर आज ही देख सकें। इसकी शुरुआत आज की स्थिति से करें। इस तरह आप वर्तमान और भविष्य के बीच एक कनेक्शन को जोड़ पाएंगे। आपमें क्रिएटिविटी बढ़ेगी। नए विचार और समाधान आएंगे जो आपको भविष्य के लक्ष्य तक पहुंचने में मदद करेंगे।

क्रिएटिव सोच की जरूरत सिर्फ आर्टिस्ट और म्यूजिशियंस जैसे क्रिएटिव लोगों को ही नहीं है। हर इंसान इसका फायदा उठा सकता है। दूसरों से हटकर सोचने के बड़े फायदे हैं। यह आपको अपना विचार रखने में मदद करेगी। अगर आप सफल बनना चाहते हैं तो क्रिएटिव सोच रखना जरूरी है। चाहें बात समस्या का समाधान की हो या गंभीर तरीके से सोचने की।

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