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सपने से जुड़े कुछ फैक्ट्स

सिगमंड फ्रायड के अनुसार, सपने हमारे अंदर छुपे इमोशन्स और इच्छाएं होती हैं जो हमारे अनकॉन्शियस माइंड में रहती हैं।

सोते हुए जो कुछ हम बंद आंखों से देखते हैं वही सपना है। यह दो घंटे की नींद के दौरान भी देखा जा सकता है। ऐसी कई थ्योरी हैं जो सपनों के बारे में बताती हैं कि कैसे ये काम करते हैं। उनमें से सबसे कॉमन है सिग्मंड फ्रायड की थ्योरी जो सबसे ज्यादा इंसानों से कनेक्ट करती है। इसे सबसे ज्यादा लोग मानते हैं।

सिगमंड फ्रायड के अनुसार, सपने हमारे अंदर छुपे इमोशन्स और इच्छाएं होती हैं जो हमारे अनकॉन्शियस माइंड में रहती हैं। कुछ दूसरी थ्योरी स्पष्ट करती हैं कि सपने तब होते हैं जब मस्तिष्क कई तरह की जानकारियों को इकट्ठा करता है और किसी समस्या का समाधान करने के लिए उसे मेमोरी में तब्दील करता है।

हमारे जीवन का इम्पोर्टेंट हिस्सा हैं जो हमारे अंदर कई जिज्ञासाएं पैदा करते हैं। सपनों का नेचर अलग-अलग तरह का होता है, जैसे ये गुस्सा दिलाते हैं, हमारी असफलता से जुड़े हैं और खुशियों के बारे में बताते हैं। इसके अलावा अच्छे भविष्य का आइना दिखाते भी दिखाते हैं। ये हमें खुश रहने के लायक बनाते हैं। लेकिन इनमें से ज्यादातर सपने सुबह उठने पर याद नहीं रहते।

आइए सपने से जुड़े कुछ फैक्ट्स के बारे में जाने-

1. अक्सर हमारे सपनों में उनके चेहरे आते हैं जिन्हें हम जानते हैं। हमारा दिमाग सपने में नए चेहरे क्रिएट में असमर्थ होता है। आप उन सभी चेहरों को नहीं पहचान सकते जिन्हें आपने देखा है, लेकिन हो सकता है कि आप अपने जीवन उनसे कभी मिले हों।
2. ऐसा कहना थोड़ा अजीब है लेकिन जगे होने की अपेक्षा आपका दिमाग सोते समय ज्यादा एक्टिव होता है। आपका दिमाग आपकी समस्याएं सुलझाने में, उन्हें याद करने में मदद करता है और उठने पर वो सभी जानकारी एकत्र करके देता है जो आपने सपने में देखी थी।
3. पुरुष और महिलाएं दोनों ही अलग तरह के सपने देखते हैं। जैसे, पुरुष दूसरे पुरुषों के बारे में अधिक सपने देखते हैं बल्कि महिलाएं दोनों के सपने देखती हैं। पुरुषों के विपरीत महिलाएं ज्यादा लंबे सपने देखती हैं।
4. सपने अक्सर इस बात का प्रतीक होते हैं कि आपके जीवन में क्या हो चुका है या क्या हो सकता है। सपने अधूरी इच्छा, डर, विचार, इमोशन्स की ओर इशारा करते हैं।
5. सपने आपकी परेशानियों को खत्म भी कर सकते हैं और हो सके तो नए अंदाज में उनका हल भी निकाल सकते हैं।

सपनों को याद करने के लिए क्या करें-
1. रोज एक ही समय में सोना और उठना शुरु करें।
2. कम से कम 7 से 9 घंटे की अच्छी नींद लें।
3. अपनी एक सपनों की डायरी बनाएं जिसमें उठते ही जो सपना आपने देखा उसे लिखें।
4. आप सुबह अपने सपनों वॉइस रिकॉर्ड, ड्रा या स्केच भी कर सकते हैं।
5. अपने सपनों की डायरी को पूरे दिन अपने साथ रखें ताकि आप किसी भी समय कुछ भी याद कर सकें।
6. जब आप बिना किसी हलचल के उठें तब भी स्थिर रहें। इससे आपको अपने सपने को याद रखने पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलेगी।

सपनों को गहरी जड़ें, चिंताओं, विचारों, भावनाओं, इच्छाओं, बेचैनी और भय को समझने के लिए एक मार्ग माना जाता है। सपने सार्थक होते हैं और कभी-कभी हमारी नींद में या जागने के बाद भी परेशान करते हैं। अगर कोई चीज आपको सपने में परेशान करती दिख रही है, तो आप इसके बारे में किसी प्रोफेशनल से बात कर सकते हैं और उसके बारे में चर्चा कर सकते हैं। इसलिए अवेयर रहें, जिज्ञासु रहें और सपने देखते रहें!

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इमोशंस को स्मार्टली हैंडल करें

हर व्यक्ति के लिए इमोशंस स्वाभाविक और महत्वपूर्ण होते हैं। इनसे समझदारी से निपटना जरूरी है।
Richa DubeyTeentalkindia Content Writer

क्या हैं इमोशंस? 

कोई परिस्थिति या दोस्त, परिवार, जीवनसाथी जैसे रिश्ते के कारण आने वाले विचार ही इमोशंस होते हैं। यह पॉजिटिव और नेगेटिव दोनों हो सकते हैं। क्या आप सोच रहे हैं कि इमोशंस कैसे नेगेटिव और पॉजिटिव हो सकते हैं? सही मायने में इमोशन खास तरह का एक औरा क्रिएट करता है जो बताता है यह किस तरह इमोशन है। कम शब्दों में कहें तो खुशियां, आनंद, जिज्ञासा, उत्साह, आभार और प्यार ऐसे इमोशंस हैं जो हमें पॉजिटिव फील कराते हैं। दुख, गुस्सा, अकेलापन, जलन, खुद की आलोचना और रिजेक्शन नेगेटिव इमोशंस हैं। इमोशंस हमारे जीवन का क्रिटिकल हिस्सा है लेकिन कई बार इसका सामना करना मुश्किल और दर्द देने वाला होता है।
इमोशंस को समझदारी से हैंडल करना न तो बहुत मुश्किल काम है और न ही कोई रॉकेट साइंस है। कोई भी इंसान समय के साथ पॉजिटव और नेगेटिव दोनों तरह के इमोशंस महसूस करता है।

तीन आसान स्टेप्स में जानिए कैसे नेगेटिव इमोशंस से निपटें

स्टेप-1 : इमोशंस की वजह समझें
आप कैसा महसूस करते हैं, इसे नजरअंदाज न करें। अपने इमोशंस को पहचानें और रिएक्ट करें। कुछ इमोशंस ऐसे होते हैं जो आपकी मसल्स में खिंचाव पैदा करते हैं। ऐसे में जरूरी है कि आप कैसे महसूस करते हैं इसके बारे में जागरुक हों। अपने इमोशंस को कभी नजरअंदाज न करें। इमोशंस सामने आने पर कैसे निपटना है, अगर यह समझ जाते हैं तो समझिए समस्या का आधा उपाय आपने खोज लिया। सभी इमोशंस आपके अंदर से ही आते हैं। इसलिए जरूरी है कि इसके लिए आप किसी और को जिम्मेदार न ठहराएं। खुद के लिए भी सख्त न बनें, खुद को समझें और विश्वास करें, इमोशंस नेचुरल होते हैं।

स्टेप- 2 : समझदारी से निर्णय लें
अपने इमोशंस से निपटते समय जब जान जाएं कि इस दौरान आप कैसा महसूस करते हैं तभी निर्णय लें कि कैसे रिएक्ट करना है। कभी-कभी रिएक्ट न करना सही होता है लेकिन कई बार रिएक्ट करना आपको अच्छा महसूस कराता है। ऐसा करते समय बस अपने दिमाग में व्यक्त करने का सबसे अच्छा तरीका चुने। यह आपकी पसंद है कि पश्चाताप करना चाहते हैं या जो हुआ है उसके बारे में भूल जाएं या इसके बारे में लिखें। इसके बाद भी कुछ लोग किसी घटना में फंस जाते हैं जो उनके लिए नुकसानदेह होता है। इससे सबक लें और अपना मूड बदलकर आगे बढ़ जाएं। इस मामले पर जितना ज्यादा सोंचेंगे उतना ही आपको बुरा महसूस होगा।

अगर आप ऐसा कर पाने में असमर्थ हैं तो अपने दोस्तों और फैमिली मेंबर्स से मदद ले सकते हैं। ऐसी चीजे करें जो आपको अच्छा और सकारात्मक महसूस कराएं। अपनी पसंद का कुछ भी कर सकते हैं जैसे सिंगिंग, राइटिंग, पेंटिंग, नॉवेल रीडिंग। कम शब्दों में कहें तो अपने बारे में पॉजिटिव माहौल बनाएं। अगर संभव हो तो रोजाना एक्सरसाइज करें, ऐसा करने से ब्रेन से नेचुरल केमिकल रिलीज होते हैं जो आपको पॉजिटिव बनाते हैं। ये पॉजिटिव इमोशंस को बढ़ाते हैं।

स्टेप-3 : अगर इमोशंस को हैंडल नहीं कर सकते तो मदद लें
कुछ परिस्थितियों में ऐसा होता है जब आप पूरी कोशिशाों के बाद भी इमोशंस पर काबू नहीं पा पाते। ऐसे मामलों में परेशान न हों और किसी प्रोफेशनल से मदद लें। आप काउंसलर से बात कर सकते हैं या थैरेपिस्ट से मदद ले सकते हैं। नेगेटिव इमोशंस से निपटना मुश्किल नहीं है, लेकिन कभी-कभी काउंसलर या थैरेपिस्ट के सपोर्ट की जरूरत होती है।

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