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इमोशंस को स्मार्टली हैंडल करें

हर व्यक्ति के लिए इमोशंस स्वाभाविक और महत्वपूर्ण होते हैं। इनसे समझदारी से निपटना जरूरी है।

क्या हैं इमोशंस


कोई परिस्थिति या दोस्त, परिवार, जीवनसाथी जैसे रिश्ते के कारण आने वाले विचार ही इमोशंस होते हैं। यह पॉजिटिव और नेगेटिव दोनों हो सकते हैं। क्या आप सोच रहे हैं कि इमोशंस कैसे नेगेटिव और पॉजिटिव हो सकते हैं? सही मायने में इमोशन खास तरह का एक औरा क्रिएट करता है जो बताता है यह किस तरह इमोशन है। कम शब्दों में कहें तो खुशियां, आनंद, जिज्ञासा, उत्साह, आभार और प्यार ऐसे इमोशंस हैं जो हमें पॉजिटिव फील कराते हैं। दुख, गुस्सा, अकेलापन, जलन, खुद की आलोचना और रिजेक्शन नेगेटिव इमोशंस हैं। इमोशंस हमारे जीवन का क्रिटिकल हिस्सा है लेकिन कई बार इसका सामना करना मुश्किल और दर्द देने वाला होता है।
इमोशंस को समझदारी से हैंडल करना न तो बहुत मुश्किल काम है और न ही कोई रॉकेट साइंस है। कोई भी इंसान समय के साथ पॉजिटव और नेगेटिव दोनों तरह के इमोशंस महसूस करता है।



तीन आसान स्टेप्स में जानिए कैसे नेगेटिव इमोशंस से निपटें

स्टेप-1 : इमोशंस की वजह समझें
आप कैसा महसूस करते हैं, इसे नजरअंदाज न करें। अपने इमोशंस को पहचानें और रिएक्ट करें। कुछ इमोशंस ऐसे होते हैं जो आपकी मसल्स में खिंचाव पैदा करते हैं। ऐसे में जरूरी है कि आप कैसे महसूस करते हैं इसके बारे में जागरुक हों। अपने इमोशंस को कभी नजरअंदाज न करें। इमोशंस सामने आने पर कैसे निपटना है, अगर यह समझ जाते हैं तो समझिए समस्या का आधा उपाय आपने खोज लिया। सभी इमोशंस आपके अंदर से ही आते हैं। इसलिए जरूरी है कि इसके लिए आप किसी और को जिम्मेदार न ठहराएं। खुद के लिए भी सख्त न बनें, खुद को समझें और विश्वास करें, इमोशंस नेचुरल होते हैं।

स्टेप- 2 : समझदारी से निर्णय लें
अपने इमोशंस से निपटते समय जब जान जाएं कि इस दौरान आप कैसा महसूस करते हैं तभी निर्णय लें कि कैसे रिएक्ट करना है। कभी-कभी रिएक्ट न करना सही होता है लेकिन कई बार रिएक्ट करना आपको अच्छा महसूस कराता है। ऐसा करते समय बस अपने दिमाग में व्यक्त करने का सबसे अच्छा तरीका चुने। यह आपकी पसंद है कि पश्चाताप करना चाहते हैं या जो हुआ है उसके बारे में भूल जाएं या इसके बारे में लिखें। इसके बाद भी कुछ लोग किसी घटना में फंस जाते हैं जो उनके लिए नुकसानदेह होता है। इससे सबक लें और अपना मूड बदलकर आगे बढ़ जाएं। इस मामले पर जितना ज्यादा सोंचेंगे उतना ही आपको बुरा महसूस होगा।

अगर आप ऐसा कर पाने में असमर्थ हैं तो अपने दोस्तों और फैमिली मेंबर्स से मदद ले सकते हैं। ऐसी चीजे करें जो आपको अच्छा और सकारात्मक महसूस कराएं। अपनी पसंद का कुछ भी कर सकते हैं जैसे सिंगिंग, राइटिंग, पेंटिंग, नॉवेल रीडिंग। कम शब्दों में कहें तो अपने बारे में पॉजिटिव माहौल बनाएं। अगर संभव हो तो रोजाना एक्सरसाइज करें, ऐसा करने से ब्रेन से नेचुरल केमिकल रिलीज होते हैं जो आपको पॉजिटिव बनाते हैं। ये पॉजिटिव इमोशंस को बढ़ाते हैं।



स्टेप-3 : अगर इमोशंस को हैंडल नहीं कर सकते तो मदद लें
कुछ परिस्थितियों में ऐसा होता है जब आप पूरी कोशिशाों के बाद भी इमोशंस पर काबू नहीं पा पाते। ऐसे मामलों में परेशान न हों और किसी प्रोफेशनल से मदद लें। आप काउंसलर से बात कर सकते हैं या थैरेपिस्ट से मदद ले सकते हैं। नेगेटिव इमोशंस से निपटना मुश्किल नहीं है, लेकिन कभी-कभी काउंसलर या थैरेपिस्ट के सपोर्ट की जरूरत होती है।

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Hormones – Inner Workings of our Bodies

Hormones are an important part of our bodies which determine how we feel and behave in different situations. These can be increased or decreased with the help of activities. Let's find our what these hormones are what they do.

Hormones are chemicals which basically help the body to grow and develop effectively. These are released from the endocrine system present in the body. Each hormone has a function to serve. These also have the function of affecting a person’s mood, behavior, emotions and likewise.

Here are some hormones which affect our mood and emotions.

  1. Dopamine – This hormone is released in the hypothalamus region of the brain. It is associated with focus, attention, memory, alertness, drive, muscle control, happiness and vigilance. Low amount of dopamine may cause depression, impulsivity, mood swings, cravings, loss of satisfaction and interest in activities and likewise.

  2. Serotonin – this is considered to be the happiness hormone. Serotonin regulates aggression, thinking, mood, and memory. A balance of serotonin can result in relaxation and uplifted mood. Lack of serotonin can cause low mood, lack of willingness, poor appetite, anxiety, depression and likewise.

  3. Oxytocin – This hormone works to enable social behavior, sexual reproduction, it ignites feelings of contentment, calmness, security and reduces anxiety. It also protects against stress and danger. It is largely associated with the feelings of lve, empathy and attraction.

  4. Endorphins – These are released as a response to stress, fear and pain. They relieve pain and cause pleasure.

  5. Adrenaline – This hormone is released in a stressful situation when it increases heart rate, helps respond quickly and increases energy in the body.

 

Ecstasy pills royalty-free stock photoThe four main hormones which are necessary for physical and psychological well-being are dopamine, serotonin, oxytocin and endorphins. There are some ways of increasing the release of these in your body. For example, exercising for 30 minutes, and laughing everyday can increase enough endorphins. Dopamine is normally released when we are acknowledged for our accomplishments at work or at home which makes us happy. Serotonin releases when we do things for others like sharing information, helping them, being kind, listening to someone vent and likewise. Finally, oxytocin can be released when we make any kind of close contact with other humans. For example, shaking their hand, hugging them, their arm around our shoulders and likewise.

Hormones are an integral part of our body and inner workings. They take care of so many different things we feel and experience in terms of emotions, mood, behaviour and so on. Being aware of changes in any of these can be helpful to either increase or decrease their amount being released through activities.

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