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8 कारणों की वजह से लोग आपको क्रिटिसाइज करते हैं

हम सभी निंदा या बुराई के शिकार होते हैं, तो हमें गुस्सा, शर्मिंदगी, अयोग्यता और अक्षमता महसूस कर सकते हैं।

बुराई या निंदा होना आम लेकिन दर्दनाक अनुभव है। ऐसा होने पर डर, शर्म या गुस्सा आ सकता है और आपके अंदर असुरक्षा की भावना जन्म ले सकती है। निश्चित ही सभी आलोचक नकारात्मक अनुभव नहीं देते हैँ, सकारात्मक आलोचना यानी पॉजीटिव क्रिटिसिज्म आपको सोचने और आगे बढ़ने में मदद करता है। यह समझना ज़रूरी है कि लोगों को बुराई या निंदा करने के लिए क्या उकसाता है। यदि उनके कारण मान्य हैं या इसके उलट केवल अपनी शिकायत, अपमानित या ताकत दिखाने की स्ट्रेटजी से ऐसा कर रहे हैं।

लोग आपकी बुराई या निंदा इसलिए करते हैं क्योंकि :

  • वे आपकी कुछ क्वालिटी से खतरा महसूस करते हैं और बुराई करने के तरीके को वह अपने बचाव के लिए इस्तेमाल करते हैं। ये लोग हीन भावना महसूस करते हैं और हमला करके आपको भी ख़ुद की तरह नीचे लाने की कोशिश करते हैं।
     
  • वे किसी भी स्थिति में हर पल ख़ुद को जिम्मेदार महसूस करते हैं और जब उन्हें लगता है कि उनका कंट्रोल खो रहा है, तो उन्हें डर लगता है। ऐसी स्थिति में वे आपकी बुराई करना शुरु करती है, ताकि आपकी भावनाओं पर कंट्रोल कर सकें, क्योंकि उन्हें लगता है कि जब आंसू बहेंगे तो वो आपको कंट्रोल कर लेंगे।
     
  • वे आपसे कुछ लेना चाहते हैँ :  वे आपकी दूसरों के सामने बुराई करते हैं, ये साबित करने के लिए कि वे काम और फ्रेंड्स दोनों के मामले में आपसे बेहतर हैं। इस केस में वो ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि वो आपको दुश्मन या कॉम्प्टीटर मानते हैं।  
     
  • वे आपका अटेंशन और समर्थन पाने की कोशिश करते हैं मगर उनमें सोशल और इमोशनल स्किल की कमी होती हैं।इसलिए इसे ख़ुलकर कहने में सक्षम नहीं होते हैं, इसलिए वे कंप्लेन करते हुए या रोते हुए ख़त्म होते हैं। फैक्ट यह है कि जब लोग सोचते हैं कि वे हर क्षेत्र में कुशल हैं, तो अक्सर दूसरों को क्रिटिसाइज करते हैं कि वे अपनी पोजीशन को बनाए रखने और तारीफ करवाने के लिए करते हैं।
     
  • वे अपने डर और असुरक्षा को प्रोजेक्ट करते हैं : वास्तव में, जब लोग अपनी कुछ खासियत को स्वीकार नहीं करते हैं और उन्हें दूसरों में पहचानते हैं, तो उनमें एक गहरी अस्वीकृति की भावना जन्म लेती है और वे क्रिटिसिज्म करना शुरु कर देते हैं।
     
  • वे निराश महसूस करते हैं क्योंकि उन्होंने अपनी आवश्यकताओं और विचारों को अधिक खुलकर बताने की कोशिश की है, लेकिन आप ध्यान नहीं दे रहे हैं और ऐसे में वे अपना गुस्सा बुराई करके निकालते हैं।

शक्तिशाली महसूस करने की आवश्यकता है, भले ही इसका मतलब यह है कि आप पर हावी होने और इसे हासिल करने के लिए, वे बुराई को हथियार के इस्तेमाल करते हैं। ताकि आपको चोट पहुंचा सकें। बुराई करने या बेवजह की निंदा का जवाब देने का तरीका काफी हद तक स्थिति और इसके कारणों पर निर्भर करता है। यदि संभव हो तो जवाब न देना ही बेहतर है, क्योंकि बुराई या निंदा पर फीडबैक  देने से केवल दूसरे व्यक्ति को आप पर हाबी होने और आपको कंट्रोल करने की इच्छा पूरी हो सकेगी। इन केस में उन पर कोई ध्यान नहीं देना सबसे अच्छा है, क्योंकि खुद का बचाव करने की कोशिश केवल बुरा करेगी। इसलिए, चाहे तो आप ऐसा कर सकते हैं, बहाना है कि कुछ भी नहीं हुआ है। जब आपको क्रिटिसाइज करने वाला व्यक्ति आपके लिए महत्वपूर्ण है, तो यह आवश्यक है कि आप ध्यान दें और उसे यह बताएं कि आप उससे प्यार करते हैं और उसका सम्मान करते हैं, भले ही आप उस राय से सहमत न हों। आप उस व्यक्ति को भी इशारा कर सकते हैं कि आप उसके विचारों और प्रयासों का सम्मान करते हैं, लेकिन हमेशा अपनी आज़ादी और निर्णय लेने के अधिकार आपके पास हैं।

किसी को भी बुराई या निंदा करने में मजा नहीं आता है, लेकिन यह मानवीय अनुभव का हिस्सा है। अन्य लोगों की समस्याओं को लेकर बहुत अधिक जवाबदेह होने और खुद का बचाव करने के बजाय बीच का रास्ता अपनाना बेहतर है।

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अच्छे लिसनर्स अच्छे कम्युनिकेटर्स होते हैं

लाइफ के हर फेज में अच्छा कम्युनिकेशन होना बहुत जरूरी है, फिर चाहे प्रोफेशनल हो या पर्सनल लाइफ। प्रैक्टिस से ही कम्युनिकेशन स्किल को बेहतर बनाया जा सकता है।
Richa DubeyTeentalkindia Content Writer

जीवन में हर कोई अच्छा स्पीकर बनना चाहता है और हो भी क्यों ना, क्योंकि प्रभावी स्पीकर्स ही जीवन में सफल होते हैं। फिर चाहे आप एक स्टूडेंट हों या कर्मचारी, किसी भी रिश्ते में अपनी छाप छोड़नी है तो सबके सामने बात रखने के लिए अच्छे कम्युनिकेशन की जरूरत पड़ती ही है। यह स्किल हमारी पर्सनल लाइफ में अच्छे रिलेशन के लिए भी काफी मददगार साबित होती है।

अच्छी कम्युनिकेशन स्किल होना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि यह जानकारी बढ़ाने के साथ-साथ गलतफहमी भी दूर करती है। वैसे तो जानकारी शब्दों में लिखकर भी दूसरे तक पहुंचाई जा सकती है लेकिन उसमें इमोशंस और एक्सप्रेशंस की कमी रहती है। केवल पढ़कर ही किसी की सोच और उसके भावों को नहीं पहचाना जा सकता। इस वजह से अच्छा कम्युनिकेटर होना बहुत जरूरी होता है।
इसके लिए आपको कुछ प्वॉइंट्स ध्यान में रखने होंगे। 

अच्छा कम्युनिकेटर वही है जो सबसे पहले एक अच्छा श्रोता है। जो बातों को ध्यान से सुनता है। ध्यान से सुनने की खासियत यह है कि आपके पास काफी जानकारी हो जाती है जिसकी मदद से प्रभावशाली तरीके से अपनी बात दूसरों के सामने आसानी से रख सकते हैं। इससे आपकी सोचने की क्षमता में भी विकास होता है।
जो आप सोच रहे हैं और व्यक्त करना चाहते हैं उसके लिए केवल शब्द ही जरूरी नहीं होते। आई कॉन्टेक्ट, चेहरे के भाव, हावभाव, पॉश्चर और बॉडी लैंग्वेज, निकटता, भाषाविज्ञान, हास्य भी नॉन-वर्बल कम्युनिकेशन का हिस्सा होता है। इसलिए अगर आप किसी के साथ मीटिंग कर रहे हैं या किसी को कुछ समझाने की कोशिश कर रहे तो इन बातों का ध्यान रखें।

कम्युनिकेशन स्किल को बेहतर बनाने के लिए जरूरी है सुनना, पढ़ना और प्रयास करते रहना। यही एक अच्छे स्पीकर की कुंजी है। इससे आपका आत्मविश्वास और बढ़ेगा और आप बिना किसी डर के खुलकर अपनी बात लोगों के सामने रख पाएंगे। ऐसा करके आप सीखने के लिए मोटिवेट भी होंगे।

अगर आपको लिखने का शौक है तो आप बेशक अपनी लिखने की प्रतिभा को सुनकर और पढ़कर अच्छा बना सकते हैं। इन सबके अलावा अगर आपको आपकी भाषा बोलने वाले लोग मिलते हैं तो आप इसे और निखार सकते हैं। अगर आप चीजों को सीख रहे हैँ तो कभी भी संकोच न करें। तेज आवाज में रीडिंग करने से भी आपकी कम्युनिकेशन स्किल बेहतर बनती है। इसके साथ ही एक ही समय में शब्दों का उच्चारण बेहतर होता है और शब्दों का ज्ञान भी बढ़ता है।

आप किसी भी चीज का अभ्यास कर रह होते हैं तो संकोच बिल्कुल न करें क्योंकि आप सीखने के चरण में हैं। कम्युनिकेशन को बेहतर बनाने के लिए जोर से बोलकर पढ़ना भी बहुत प्रभावी होता है। जोर से पढ़ने से आप एक समय में अपने उच्चारण और शब्दावली में सुधार कर सकते हैं। इससे भी आपकी कम्युनिकेशन स्किल में सुधार होता है।

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