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टीनएजर्स टीचर्स और पेरेंट्स से बहस क्यों करते हैं, ये हैं 5 कारण

काउंसलर क्षितिज सावंत के अनुसार, "टीनएजर होने के नाते रिबेल नेचर (विद्रोही) होना सामान्य बात है। लेकिन इसके परिणामों को समझना और उसके अनुसार फैसले लेना भी बहुत जरूरी है।

एक टीनएजर होना विद्रोही होने के समान है। इस उम्र में घर में बच्चों और पेरेंट्स के बीच तनाव रहता है जबकि स्कूल में बच्चे और टीचर के बीच भी यही माहौल बना रहता है।

क्या है विद्रोही होना?
सरल शब्दों में विद्रोही होने का मतलब है, जानबूझकर नियमों का विरोध करना।
जैसे आपके पेरेंट्स ने रात 8 बजे घर आने के लिए बोला है, लेकिन आप जानबूझकर रात 12 बजे घर पहुंच रहे हैं।
आपके टीचर ने आपको फिजिक्स का प्रोजेक्ट जल्दी खत्म करने के लिए बोला है लेकिन आपने जानबूझकर क्लास में इसे सबसे अंत में जमा किया।
दोनों घटनाओं में, रात 8 बजे समय पर घर आना और प्रोजेक्ट जल्दी जमा करना जैसी आदत आपको लम्बे समय तक सहायता कर सकती है।
साइकोलॉजी टुडे जर्नल में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, साइकोलॉजिस्ट कार्ल पिकहार्डट कहते हैं, "टीनएजर्स सोचते हैं कि विद्रोह करना आत्मनिर्भरता का कार्य है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। यह वास्तव में निर्भरता का कार्य है। रिबेल नेचर आपको अपने ही व्यवहार के अपोजिट बनाता है और जो लोग चाहते हैं आप उसका उल्टा करने लगते हैं।"

विद्रोह के दो रूप हो सकते हैं-
गैर-अनुरूपता का विद्रोह: जब आप अपने बाकी दोस्तों से अलग अपने बालों को काटने का विकल्प चुनते हैं।
गैर-अनुपालन का विद्रोह: जब आप एक इंजीनियर के बजाय एक कलाकार बनना चुनते हैं।

विद्रोही बनने की 5 स्टेज -
1. बच्चों की तरह ट्रीट होना नहीं पसंद (9 -12 ): एक किशोर इस उम्र में सोच लेता है कि उसे आगे क्या बनना है। टीचर्स का मजाक उड़ाना केवल अपने फ्रेंड्स ग्रुप में अच्छा लगता है लेकिन आपको उनकी जरुरत तब पड़ती है जब कोई कॉलेज एप्लिकेशन्स जमा करवाना हो। तब महसूस होता है कि उन्हें बुरा बोलना बहुत बड़ी गलती थी।

2. सोसाइटी द्वारा लगाए गए नियम (13-15)-  क्या घर कोई झगड़ा करने की जगह है? मैं अपना होमवर्क नहीं करूंगा. मैं टाइम पर नहीं आऊंगा। मैं ट्यूशन क्लास नहीं जाऊंगा। जो भी पेरेंट्स कहेंगे मैं वो बिल्कुल नहीं करूंगा। यह वह समय होता है जब सब चीज़ें उल्टा करना अच्छा लगता है। लेकिन याद रहे, दोस्त भले हमेशा साथ ना रहे, पेरेंट्स हमेशा साथ रहते हैं।

3. बचपन की निर्भरता से मुक्ति(16-18): मुक्त होने की इच्छा, लाइफ को खुद के हिसाब से जीने का रोमांच और अपने सपनों को पूरा करने का जज्बा सबमें होता है। इस उम्र में ऐसा लगता है कि पूरी दुनिया आपके कदमों में है। अपने पेरेंट्स का ध्यान रखें, वह आपके लिए हमेशा अच्छा ही सोचते हैं।

4. पैतृक अभिभावक अधिकार (19-23): यह वह चरण है जब आपने अपना कॉलेज पूरा कर लिया है और आपके पास नौकरी है। अपने लिए लड़ी गई सभी चीजों को आपने महसूस किया गया है। आखिरी चरण वह है जो आप करने के लिए तैयार हैं।

5. स्वीकृति: यह ऐसी स्टेज जहां एक युवा को पता चलता है कि उसे समाज द्वारा बनाए गए नियमों के अनुसार ही कार्य करना है। इस बात को स्वीकार करना ही युवावस्था की शुरुआत है।

अगर आप Teentalk India के काउंसलर से बात करना चाहते हैं, तो [email protected] पर ईमेल करें। आप रिलेशनशिप टैब में इसके बारे में अधिक पढ़ सकते हैं।

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महात्मा गांधी से जुड़ी रोचक बातें

2 अक्टूबर 1869 को जन्मे महात्मा गांधी को भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का पितामह कहा जाता है। उन पर देश-विदेश में अध्ययन भी किया गया है। जानिए उनसे जुड़ी कुछ रोचक बातें

महात्मा गांधी भारतीय इतिहास की सशक्त आवाज थे और शांति का प्रतीक भी। उनकी अहिंसावादी सोच ने देश के लोगों को एकजुट किया। उनसे जुड़ी कई ऐसी बातें हैं जिन्हें बहुत कम लोग ही जानते हैं। जानते हैं उनके बारे में...


भारत में 2 अक्टूबर गांधी जयंती के नाम से मनाया जाता है, लेकिन पूरी दुनिया में उनके जन्मदिन को 'इंटरनेशनल नॉन वायलेंस डे' के नाम से जानती है।

जब गांधीजी 13 साल के थे तब उनकी शादी हो गई थी। उनकी पत्नी का नाम कस्तूरबा माखनजी कपाडिया था जो उनसे 1 साल बड़ी थीं। दोनों की शादी 62 सालों तक बनी रही।

महात्मा गांधी जब 16 वर्ष के थे तब उनके पहले बच्चे ने जन्म लिया था। कुछ दिनों बाद उस बच्चे की मृत्यु हो गई, लेकिन दोनों के ब्रह्मचर्य का व्रत लेने से पहले चार बेटे हुए।

यह महज एक संयोग ही है कि गांधीजी का जन्म शुक्रवार को हुआ था, भारत को आजादी भी शुक्रवार को मिली थी और उनकी हत्या शुक्रवार के दिन ही हुई थी।

गांधीजी और प्रसिद्ध लेखक लियो टॉलस्टॉय में अच्छी मित्रता थी। वे दोनों पत्र के माध्यम से बातचीत किया करते थे।

महात्मा गांधी ने लॉ कि पढाई लंदन से की थी और वह पूरे स्कूल में अपनी खराब हैंडराइटिंग के कारण चर्चा में रहते थे।

1930 में गांधीजी 'टाइम मैगजीन ऑफ थे ईयर' थे। वह इतने बड़े लेखक थे कि उनकी संग्रहित कृतियों में करीब 50,000 पृष्ठ हैं।  

महात्मा गांधीजी नोबल शांति पुरस्कार के लिए 5 बार नॉमिनेट हो चुके हैं।

गांधीजी ने 5 सालों तक सिर्फ फल, नट्स और बीज ही खाए लेकिन स्वास्थ्य बिगड़ जाने कि वजह से भोजन में अनाज शामिल किए। उन्होंने कहा था कि प्रत्येक व्यक्ति को अपना स्वयं का आहार ढूंढना चाहिए जो फायदा पहुंचाए। उन्होंने भोजन के साथ प्रयोग करने, परिणामों को देखने और अपने खाने के विकल्पों को तैयार करने में दशकों का समय बिताया। उन्होंने द मोरल बेसिस ऑफ़ वेजीटेरियनिज़्म नामक एक किताब भी लिखी थी।

गांधीजी ने शुरुआत में दूध और उससे तैयार होने वाले प्रोडक्ट्स को ना लेने कि प्रतिज्ञा ली थी। हालांकि स्वास्थ्य में गिरावट होने के कारण उन्होंने बकरी का दूध पीना शुरू किया था। कभी-कभी तो वे बकरी को साथ में लेकर घूमते थे जिससे उन्हें फ्रेश दूध मिल सके और गलती से भी उन्हें कोई गाय या भैंस का दूध ना दे दे।

गांधीजी वास्तव में एक दार्शनिक थे और भारत में कोई स्थापित सरकार नहीं चाहते थे। उन्होंने लगता था कि अगर सभी लोग अहिंसा के पथ पर चलने लगे तो स्व-शासन होगा।

जिस देश के खिलाफ उन्होंने भारत की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी, उसी ग्रेट ब्रिटेन ने उनकी मृत्यु के 21 साल बाद उन्हें सम्मानित करते हुए एक डाक टिकट जारी किया था ।

जब जवाहरलाल नेहरू स्वतंत्रता के जश्न का भाषण दे रहे थे उस समय गांधी जी उपस्थित नहीं थे।

महात्मा गांधी की शवयात्रा 8 किलोमीटर लंबी थी।

जिस कलश में महात्मा गांधी की अस्थियां रखी गई थीं, अब वह लॉस एंजिल्स, कैलिफोर्निया में स्थित है। 

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