लॉग इन करें
This site is not collecting any personalized information for ad serving or for personalization. We do not share any information/cookie data about the user with any third party.OK  NO

आप जैसा खाते हैं, वैसा दिखते हैं

फूड और मूड के लिए आसान गाइड

आप जैसा खाते हैं वैसे ही हो जाते हैं। यह सच है। मैं ऐसा नहीं कह रही हूं कि अगर आपने दोपहर में पालक खाई तो सिर पर पालक उगने लगेगी। लेकिन इससे मिलने वाले मिनरल्स और आयरन आपके खून में पहुंचेंगे और इसके शरीर में इनकी कमी को पूरा करेंगे।
आप जो भी खाते हैं वो आपको बढ़ने में मदद करता है। आपको ऊर्जा देता है और बॉडी को स्ट्रॉन्ग बनाता है। इतना ही नहीं ये और भी बहुत कुछ करता है- जैसे आपकी मेंटल हेल्थ का ध्यान रखता है।

उस वक्त को याद करें जब आपको एक रिसर्च सब्मिट करनी थी लेकिन आप आखिरी वक्त तक ऐसा नहीं कर पाए थे। इस वजह से काफी तनाव महसूस करते हैं और तनाव दूर करने के लिए चॉकलेट खाते हैं या उल्टी करने का मन करता है। कुछ देर के लिए आप खुश हो जाते हैं। कई अध्ययन में ये सामने आया है कि तनाव और मीठे में गहरा नाता है। वहीं जब आप दुखी होते हैं जैसे ब्रेकअप हो गया या किसी और वजह से दुखी हों तो लोग अक्सर फास्ट फूड खाने लगते हैं। अध्ययन में ये भी देखा गया है कि दुख-दर्द में लोग कार्बोहाइड्रेट या फैटी चीजें खाने लगते हैं।
अगर आप पुरानी किसी याद को लेकर परेशान रहते हैं तो समझ जाइए कि आपका शरीर आपसे कुछ कहना चाहता है। हो सकता है कि शरीर आपके दिमाग से कह रहा है कि- 'मेरे भाई आपको ऊर्जा की जरूरत है ताकि तुम इस तनावपूर्ण स्थिति को पार कर सको।' क्योंकि चीनी और कार्बोहाइड्रेट दोनों ही तनाव से मिपटने में मदद करते हैं और ऊर्जा देते हैं।
 

यहां इसका एक और पहलू है कि ऐसा अस्थायी होता है। कुछ वक्त बाद ही आप फिर से तनाव महसूस करने लगते हैं। इसके अलवा आपका वजन भी काफी बढ़ जाता है। कुछ फूड आपको नुकसान पहुंचाते है तो वहीं कुछ आपकी सेहत भी बनाते हैं। कई रिसर्च में सामने आया है कि ऐसे कई खाद्य पदार्थ हैं जो आपके मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखते हैं। खासतौर पर डिप्रेशन जैसे हालातों में।

द साइंस ऑफ हैप्पीनेस
इसमें ट्रिप्टोफेन नाम एक अमीनो एसिड होता है। जब यह मस्तिष्क में प्रवेश करता है तो सेरोटोनिन नाम के एंजाइम को सिंथेसाइज (केमिकल रिएक्शन) करने में मदद करता है। बेहत तकनीकी दिखने वाली यह प्रक्रिया असल में काफी महत्वपूर्ण है। यह केमिकल आपकी मनोदशा को परिभाषित करता है। अधिक सेरेटोनिन का अर्थ है अधिक खुशी। कम का अर्थ है उदासी बढ़ना।
अनिवार्य रूप से सभी भोजन जो सेरोटोनिन को सिंथेसाइज करने में मदद करते हैं वो सुपर हीरो हैं। इस लिस्ट में सबसे पहले पायदान पर - कार्बोहाइड्रेट (कार्ब्स) हैं।

ज्यादातर लोग किसी एक्टर की तरह सिक्स पैक एब्स बनाने में लगे हुए हैं। ऐसे लोगों के लिए कार्ब्स दुश्मन है। हालांकि सभी तरह के कार्ब्स नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। रिसर्च में सामने आया है कि ट्रिप्टोफेन कार्ब्स की उपस्थिति में सेरोटोनिन को बेहतर करने में मदद करता है। जब भी आप दुखी होते हैं तो चीज पास्ता या फैट से भरी थाली खाने का मन करता है। दरअसल आपका शरीर आपके दिमाग के लिए उस कार्ब की मांग करता है जो आपको खुश रहने में मदद करता है।

इस लिस्ट में अगला नाम ओमेगा-3 का है। ओमेगा-3 फैटी एसिड वाले फूड में पाया जाता है। जैसे मछली और मेवे। ये सभी दिमाग को खुश रखने में मदद करते हैं।
आखिर में बारी आती है विटामिन-बी से भरपूर खाद्य पदार्थ की। खास कर बी-12 , रिसर्च में सामने आया है कि ये विटामिन सेरोटोनिन को सिंथेसाइज करने में मदद करते हैं। इसके लिए डाइट में होलग्रेन व्हीट, व्हाइट मीट और मछली शामिल करें। ये दिमाग को खुश रखने में मदद करता है।

कम्फर्ट फूड
इसके बाद लिस्ट में ऐसे फूड आते हैं जो आपको आपको खुश रखते हैं। लेकिन इसका कारण साइंस से जुड़ा नहीं है बल्कि आपकी मेमोरी से जुड़ा है। मां के हाथ की बनी सादी खिचड़ी। त्योहारों की याद दिलाते बेसन के लड्डू। सड़क किनारे मिलने वाली चाय रोड ट्रिप की यादें ताजा करती है। हर इंसान का अपना एक फूड मोमेंट है जो उसे किसी खास पल की याद दिलाता है। वहीं, लोग परिवार या दोस्तों के साथ भोजन के पलों का भी लोग खूब आनंद लेते हैं।

भोजन और आपके मन की स्थिति का भी खास कनेक्शन है।
खाना हमारे मूड को कैसे प्रभावित करता है एक सिंपल कारण है। नो फूड = नो एनर्जी = खराब मूड। इसलिए तय करें कि नियमित रूप से खाना खाएं और स्वस्थ रहें।

यदि आपके पास भी हमसे शेयर करने के लिए कोई कहानी है तो हमें यहां , ईमेल करें

यदि आपके पास कोई सवाल हैं, तो हमें यहां , ईमेल करें

आप क्लिक करके काउंसलर से भी बात कर सकते हैं टीनटॉक एक्सपर्ट चैट.

Comments

अगली कहानी


5 वीयर्ड सिम्पटम्स, जो बताते हैं कि आपको न्यूट्रिशनल डेफ़िशिएंसी हैक्या आपको इनमें से कोई वीयर्ड सिम्पटम्स हैं...

क्या आपको इनमें से कोई वीयर्ड सिम्पटम्स हैं...
Ritika SrivastavaTeentalkindia Counsellor

क्या आपकी कभी-कभी अजीबोग़रीब क्रैविंग्स होती हैं? क्या आप अपने में स्ट्रेंज बिहेवियर पैटर्न्स और सिम्पटम्स पाते हैं। अगर आप ध्यान से सुनें तो पाएंगे कि आपका शरीर आपसे कुछ कहना चाह रहा है।

हर अजीब क्रैविंग और सिम्पटम के पीछे कोई ना कोई बात होती है। आपकी बॉडी उसके ज़रिये आपको बताना चाहती है कि आपको न्यूट्रिशनल डेफ़िशिएंसी हो सकती है। यह आपकी बॉडी का तरीक़ा है, आपको यह बतलाने का कि आपको अब किस चीज़ की दरकार है।

पहले-पहल यह समझना कठिन लग सकता है कि आपको न्यूट्रिशनल डेफ़िशिएंसी हो सकती है, क्योंकि आप तो समय-समय पर कुछ ना कुछ खाते ही रहते हैं। अगर आपने खाना भी खाया है और बीच-बीच में स्नैक्स भी लेते रहे हैं तो यह कैसे हो सकता है कि आपको डेफ़िशिएंसी हो? जवाब है एम्प्टी कैलरीज़ की वजह से।

यानी बहुत मुमकिन है, आप ऐसा खाना खा रहे हों, जो कि न्यूट्रिशन के लेवल पर ज़ीरो है। और चूंकि आपको यह नहीं मालूम, इसलिए आप अनजाने ही अपने सिस्टम को सभी हेल्दी न्यूट्रिएंट्स से महरूम रख रहे हैं। जहां इन सिम्पटम्स पर ग़ौर करें, जो आपके भीतर की डेफ़िशिएंसी की ओर इशारा करते हैं और यह भी बताते हैं कि आपको कौन-से न्यूट्रिएंट्स की ज़रूरत है।

चॉक खाने की क्रैविंग
अगर आपको चॉक चबाने की अनकंट्रोलेबल क्रैविंग हो रही है या आपका दिल कर रहा है कि दीवार पर पुते चूने को खुरजकर खा जाएं तो इसका मतलब है कि आपको कैल्शियम डेफ़िशिएंसी है। और कैल्शियम के सोर्स के लिए आपमें क्रैविंग जगाकर आपकी बॉडी आपको यह बताना चाह रही है कि आपको उसकी ज़रूरत है।

इसे फ़िक्स करने के लिए-
केले, दूध और पनीर, सी-फ़ूड, नट्स और हरी सब्ज़ियां खाएं, जो कैल्शियम से भरपूर होती हैं। समय-समय पर ग्रीन सैलेड भी खाते रहें।

मिट्‌टी खाने की इच्छा
यह सुनने में भले अजीब लगे, लेकिन जिन लोगों को यह क्रैविंग होती है, वे किसी भी क़ीमत पर मिट्‌टी कुरेदकर खा जाना चाहते हैं। इसका यह मतलब है कि वो एनीमिया या आयरन डेफ़िशिएंसी से जूझ रहे होते हैं।

इसे फ़िक्स करने के लिए-
सी-फ़ूड, रेड मीट, बीन्स, सीरियल्स और डार्क ग्रीन वेजिटेबल्स खाइए। ये सभी आयरन का अच्छा सोर्स होते हैं। अगर आप वेजिटेरियन हैं तो सोयाबीन, टमाटर, अलसी और मसूर की दाल खाइए।

आपके हाथ या दूसरे अंग सुन्न पड़ जाते हैं या झनझनाते हैं
अगर आपके हाथ या दूसरे अंग सुन्न पड़ जाते हैं या उनमें झुरझुरी होती है तो बहुत सम्भव है कि आपको विटामिन बी-12 या विटामिन डी की डेफ़िशिएंसी है। ऐसे में हम आपको सजेस्ट करेंगे कि आप अपना टेस्ट करवाएं और अगर सच में ऐसा है तो उसकी भरपाई करें।

इसे फ़िक्स करने के लिए-
विटामिन डेफ़िशिएंसीज़ का कारण सूर्य की रोशनी की कमी, वीगन डाइट्स, स्ट्रेस और अनहेल्दी लाइफ़स्टाइल होती हैं। ऐसे में सीरियल्स, मशरूम्स, सी-फ़ूड, अंडे, बीफ़, चीज़, कॉड लिवर ऑइल्स का सेवन करना ज़रूरी है।

बर्फ़ चबाने की इच्छा
ये भी सुनने में अजीब ही लगेगा, लेकिन बर्फ़ खाने की इच्छा होना भी आयरन डेफ़िशिएंसी का संकेत है। इससे आप थकान भी महसूस करते हैं। बर्फ़ खाने की इच्छा इसलिए होती है, क्योंकि इससे मेंटल एनर्जी को बूस्ट मिलता है।

इसे फ़िक्स करने के लिए-
बर्फ़ खाने के बजाय वो तमाम चीज़ें अपने भोजन में शामिल करें, जिससे आपकी बॉडी में आयरन का लेवल बढ़ता है, जैसे रेड मीट, बीन्स, दालें, संतरे का ज्यूस, घोंघा, योगर्ट, सोया आदि।

आपके नाख़ून या बाल टूट रहे हैं 
अगर आपके बाल टूट रहे हैं तो आपको अपने शैम्पू के इनग्रेडिएंट्स को चेक करने की ज़रूरत है, लेकिन इससे ज़्यादा ज़रूरी यह है कि आप समझें यह एक क़िस्म की प्रोटीन डेफ़िशिएंसी है। नाख़ूनों की टूट-फूट के लिए आपको आयरन की कमी को ज़िम्मेदार ठहराना चाहिए

इसे फ़िक्स करने के लिए-
आयरन डेफ़िशिएंसी को फ़िक्स करने के लिए आपको सी-फ़ूड, रेड मीट, बीन्स, ड्राइड फ़ूड्स, सीरियल्स और डार्क ग्रीन वेजिटेबल्स लेना चाहिए। प्रोटीन डेफ़िशिएंसी के लिए ब्रॅकली, चिकन, ओट्स, बादाम, अंडे और दूध से बनी चीज़ें खाइए।

यदि आपके पास भी हमसे शेयर करने के लिए कोई कहानी है तो हमें यहां , ईमेल करें

यदि आपके पास कोई सवाल हैं, तो हमें यहां , ईमेल करें.

आप क्लिक करके काउंसलर से भी बात कर सकते हैं टीनटॉक एक्सपर्ट चैट.

टिप्पणियाँ

कॉपीराइट टीनटॉक 2018-2019
डिस्क्लेमर : टीनटॉकइंडिया आपातकालीन सेवाएं नहीं प्रदान करता है और न ही यह किसी तरह की आपदा में हस्तक्षेप करने वाला कोई केंद्र है। अगर आप या आपका कोई मित्र या परिचित गहरे अवसाद के दौर से गुज़र रहा है, या उसके मन में आत्महत्या या स्वयं को नुक़सान पहुंचाने वाले विचार आ रहे हैं तो कृपया निकटस्थ अस्पताल या आपातकालीन/आपदा प्रबंधन सेवा केंद्र या हेल्पलाइन से सम्पर्क करें।