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बाहर खाने वालों के लिए ईटिंग डिसऑर्डर के ख़िलाफ़ जीतने का सीक्रेट

हमारी व्यस्त और तनावभरी लाइफ़स्टाइल ने कई सारी सेहत संबंधी समस्याओं का बढ़ा दिया है। यहां न्यूट्रिशनिस्ट पूजा भार्गव कुछ सलाह दे रही हैं, उससे ईटिंग डिसऑर्डर पर कैसे जीत मिलेगी, जानते हैं...

अगर कभी ऐसा वक्त आए, जब आप यह भूल जाएं कि खूबसूरती हर रूप और आकार में होती है, तब ख़ुद को याद दिलाएं कि, आप ख़ूबसूरत और अलग हैं। ईटिंग डिसऑर्डर की वजह से कुछ भी नकारात्मक सोचकर अपना ब्रेन वॉश न करें।

पढ़िए कि कैसे ईटिंग डिसऑर्डर से लड़ा जा सकता है? न्यूट्रिशनिस्ट और फ़िटनेस एक्सपर्ट पूजा भार्गव यहां बता रही हैं… 


 
टीन्स में होने वाले सामान्य ईटिंग डिसऑर्डर कौन-कौन से हैं? 
अचानक इस उम्र में एक परफेक्ट साइज़ टीनएजर्स के दिमाग में आ जाता है। आजकल मैं देखती हूं कि 13 साल के बच्चे भी अपने लुक को लेकर चिंतित दिखाई देते हैं। इन दिनों सोशल इमेज टीनएजर्स के लिए एक बड़ा मुद्दा है आप सभी सिर्फ अच्छे दिखना चाहते हो। आपकी ज़िंदगी में अच्छा महसूस करना क्यों प्राथमिकता नहीं है और क्यों सिर्फ गुड लुक ही आपके लिए सबसे ज़रूरी है?  

वैसे इसका कारण यह है कि इस स्टेज में टीनएजर्स में हार्मोन्स में बदलाव आने लगता है। इसलिए यह नेचरल है कि इस समय वे अपोजिट सेक्स के लिए अच्छा दिखना चाहते हैं। लेकिन यह देखकर दुख होता है कि, उनमें से बहुत से अनहेल्दी प्रैक्टिस और फे़ड डाइट्स का शिकार होने लगते हैं।   
 
टीनएज लड़कियों में एक अन्य ईटिंग डिसऑर्डर यह है कि, वे बाहर जाना, सोशलाइज होना और दोस्तों के साथ बाहर खाना चाहती हैं और उस खाने के बाद वो बैठकर उल्टियां करती हैं। इसे बुलिमिया नर्वोसा कहते हैं, इसमें टीनएजर्स ख़ुद से खाना बाहर निकालने की कोशिश करते हैं यानी उल्टियां करना चाहते हैं। खाने को ताकत लगाकर बाहर निकालने से डाइजेस्टिव एंजाइम डिस्टर्ब होते हैं, ये इंटेस्टाइन में कर रहे होते हैं और इस प्रोसेस में अधिक एसिड बनता है। इस तरह के डिसऑर्डर की वजह से बहुत जल्दी पीसीओएस यानी पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम हो सकता है, जो आजकल टीनएज लड़कियों में बहुत सामान्य है। 

थायराइड की समस्या, बालों का झड़ना, नाखून चबाना, ड्राई स्किन सभी फै़सी डाइट का ही नतीजा हैं। इन डाइट की वजह से कई ज़रूरी न्यूट्रिएंट्स शरीर में नहीं पहुंच पाते हैं। फ़ैंसी डाइट जैसे कि केटोजेनिक डाइट इस अहम उम्र में बच्चों को सिखाती हैं, कि आप सब कुछ नहीं खा सकते हैं। मैं इस बात पर ज़ोर देती हूं कि, आपको सब कुछ खाना चाहिए। कार्बोहाइड्रेट, फैट और मिनरल्स इन सभी को लेने के कारण हैं। ये सभी न्यूट्रिएंट्स के शरीर में अलग-अलग काम हैं, जो वे मिलकर पूरा करते हैं। इसलिए आप इनमें से किसी भी न्यूट्रिएंटस को नहीं छोड़ सकते हैं।  
      
एनोरेक्सिया एक और ईटिंग डिसऑर्डर है, जो भूखे रहने और लिक्विड डाइट लेने का नतीजा है, जो कई तरह के कॉम्प्लिकेशन को पैदा करता है। 
 
ईटिंग डिसऑर्डर की समस्या को बढ़ाने के क्या कारण हैँ?
इसका एक बड़ा कारण बॉडी इमेज को लेकर जुनून है। इस उम्र में साइकोलॉजिकल चेंज बहुत मायने रखते हैं। दोस्तों का दबाव भी बहुत ज्यादा होता है। बच्चे सोशल मीडिया और सोशल मीडिया पर मौजूद स्टार्स और मॉडल को भी फॉलो करते हैं। ऐसे में वे सेलेब्रिटी के फिगर को देखकर इस विचार को अपना लेते हैं कि, टीन्स के लिए परफेक्ट बॉडी कैसी होनी चाहिए और इसके हिसाब से शरीर के लिए गलत लक्ष्य बना लेते हैं।   

एक और अन्य कारण साइकोलॉजिकल इशू हैं। किसी अपने को खोने का असर हमारे खाने, ज़िंदगी को कैसे हम जीते हैं और जिंदगी के प्रति हमारा क्या नज़रिया है, इस पर पड़ सकता है। इसके साथ ही ब्रेकअप और रिजेक्शन भी इन दिनों बच्चों में बहुत जल्दी होने लगा है। 
 
कभी-कभी एडल्ट भी बहुत ज्यादा किसी चीज़ से प्रभावित हो सकते हैं। मेरे पास एक केस आया था, जिसमें एक बेटी अपने लुक को लेकर ख़ुश नहीं थी और वह अपना वजन 10 से 12 किलो कम कर चुकी थी। यहां तक कि मैंने उसे बताया भी कि, यह उसका आइडियल वजन है और अब उसे और कम नहीं करना चाहिए। इसके बावजूद मुझे पता चला कि उसकी मां उसे किसी खास कार्यक्रम में पतली दिखने के लिए प्रोत्साहित करती रहीं।

इन दिनों हर जगह आधी-अधूरी जानकारी मिल रही है। पेरेंट्स भी टुकड़ों में जानकारी लेते हैं और अपनी अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए बच्चे पर दबाव डालते हैं। यहां तक ​​कि वो तब भी अपने बच्चे को सपोर्ट करते हैं, जब उन्हें पता होता है कि ये नासमझी भरी, अनहेल्दी प्रेक्टिस है। 

ईटिंग डिसऑर्डर को पहचानने के क्या संकेत हैं?  
पोषण के आधार पर, यदि आप खुद को या किसी फ्रेंड को भूखा रहते हुए देखते हैं या इसके बारे में बात करने से बचते हैं, तो समस्या हो सकती है। यदि आपकी इम्युनिटी कमजोर है और आप बार-बार बीमार पड़ जाते हैं, यदि आपको बार-बार सर्दी होती है या जलन होती है या मूड स्विंग हो रहा है, तो ये ईटिंग डिसऑर्डर के लक्षण हो सकते हैं। यदि आप लोगों से ज्यादा बात नहीं कर रहे हैं और खुद के साथ ही समय बिता रहे हैं, तो ये संकेत हैं कि आप ध्यान दें और खुद को बताएं कि कोई समस्या हो सकती है। यदि आप काइली जेनर या किसी अन्य एक्स-वाय-जे़ड मॉडल को फॉलो करते हुए खुद को पाते हैं और सोशल मीडिया पर आने वाले हर ट्रेंड पर खुद को निहारते हैं, तो ये संकेत हैं कि आपको इस चेतावनी को समझना चाहिए। 

बुलीइंग, बॉडी शेमिंग और फैट टॉक ईटिंग डिसऑर्डर से कैसे संबंधित हैं? इसके लिए कोई कैसे खड़ा होता है? 
यहां पहली बात यह है कि, टीनएजर खुद से पूछे कि, वह अपने बारे में सच में कैसा महसूस करता/करती है? क्या आपको वाकई लगता है कि, आप मोटे या पतले हो? और यह पूरी तरह सिर्फ आप पर निर्भर करता है कि, आप अपने बारे में कैसा महसूस करते हो? इसी के आधार पर आपको अपने आगे के कार्य की रूप रेखा तय करनी चाहिए। यदि आपको लगता है कि, मैं पूरी तरह ठीक हूं, तो आप जहां हैं, वहीं रहें। 

मेरे पास एक केस आया था, जिसमें बच्चा ज़िद कर रहा था, कि वह ठीक है। उसने कहा कि, मैं इस वजन के साथ बिलकुल ठीक हूं, इसलिए मुझे मेरी ज़िंदगी जीने दो और मैंने भी उसके पेरेंट्स को यही कहा कि, उसे उसके हाल पर रहने दीजिए। मैंने उसकी मां को कहा कि वह अपने खाना पकाने के तरीके में कुछ बदलाव करें और बच्चे को कुछ समय फिजिकल एक्टिविटी में इन्वेस्ट करने के लिए प्रोत्साहित करें। इससे अचानक कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा, लेकिन थोड़ा अंतर ज़रूर आएगा और फिर अगर आप वजन कम करने के नेचरल और हेल्दी तरीकों से जुड़े रहते हैं, तो इन छोटे-छोटे बदलाव से बड़े अंतर आते हैं। ऐसे में आखिरकार बच्चा हेल्दी तरीके से अपना वजन कम कर लेगा बिना यह महसूस करे कि उसके साथ कुछ गलत है। 

मगर यदि कोई बच्चा मुझे बताए कि मुझे लगता है कि मैं मोटा हूं तो मैं उस बच्चे को न्यूट्रिशन को लेकर सही विकल्प के बारे में जानकारी दूंगी और उसे सही खाने और एक्सरसाइज के सही विकल्प के बारे में बताऊंगी। 

बॉडी शेमिंग के बारे में यदि बात करें तो, मैं बच्चे को इस बारे में अपने किसी फ्रेंड या भरोसमेंद व्यक्ति से बात करने के लिए कहूंगी। नहीं तो मैं उसे आइने में देखकर ख़ुद से बात करने की सलाह दूंगी। अपनी भावनाओं को दबाना सही नहीं है। बॉडी शेमिंग एक ऐसी चीज है, जो वास्तव में आपको नीचे ला सकती है और इसका आपके मनोबल पर भी नकारात्मक असर हो सकता है। इसलिए यदि आप किसी से इस बारे में बात करने में शर्माते हैं तो एक आइने से बातचीत करें। आइने से बात करके अपनी भावनाओं को बाहर आने दें। यह निश्चित तौर आपकी मदद करता है।
 
अगला लाइन ऑफ एक्शन ये होगा कि आप अपने लिए एक विज़न बनाएं और उसे किसी डायरी में लिख लीजिए कि, आप आज से क्या चाहते हैं और उसे तेज़ आवाज में ख़ुद के लिए पढ़िए। यह तब करें जब आप ख़ुद चाहते हैं कि, आप वास्तव में यह लिखें कि मैं स्वस्थ हूं, मैं फिट हूं। यह अभ्यास आपको अपने सकारात्मक वाइब्स के माध्यम से अंदर से सकारात्मकता को मजबूत करेगा।

क्या आप ईटिंग डिसऑर्डर को लेकर कुछ मिथ्स को तोड़ सकते हैं? 
भूखा रहना पहला मिथ है। मैं उन लड़कियों को देखती हूं, जो ख़ुद को स्लिम रखने के लिए सिर्फ खाना नहीं चाहतीं। तो भूखा रहना एक बड़ा फिटनेस मिथ है। यह आपके इंसुलिन के लेवल को कम करता है, जो आपकी सोच में निराशा भर देता है। एनर्जी लेवल को कम कर देता है, पोषक तत्वों को ऑब्जर्व करने में बाधा डालता है और इससे शरीर में ज्यादातर विटामिन की कमी हो जाती है। इससे आपके शरीर में फैट जमा होने लगता है, भले ही आप अपना वजन कम कर लें, लेकिन दोबारा फिर वजन तेजी से बढ़ जाएगा। 

फ़ेड डाइट एक और फिटनेस ट्रेंड है, जो वास्तव में एक मिथ है। सामान्य बैलेंस डाइट लेते रहिए उस हिसाब से जिसकी हमने प्रिंसिपल ऑफ ईटिंग राइट में चर्चा की थी। 

तीसरा मिथक मैं जिम के ट्रेंड को कहूंगी। आप में से कुछ लोग जिम में एक्सरसाइज और डांस क्लासेस करते हैं, जबकि कुछ अपने डिवाइस, स्क्रीन, टैबलेट और फोन पर ही चिपके रहते हैं। इसलिए सुनिश्चित करें कि आप समय निकालकर बाहर खेलने के लिए जाएं। शाम को पार्क में घूमने जाएं और टीवी या मोबाइल स्क्रीन के सामने बैठने के बजाय वॉक या जॉगिंग करें। बस जितना हो सके एक्टिव रहिए।

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5 वीयर्ड सिम्पटम्स, जो बताते हैं कि आपको न्यूट्रिशनल डेफ़िशिएंसी हैक्या आपको इनमें से कोई वीयर्ड सिम्पटम्स हैं...

क्या आपको इनमें से कोई वीयर्ड सिम्पटम्स हैं...
Ritika SrivastavaTeentalkindia Counsellor

क्या आपकी कभी-कभी अजीबोग़रीब क्रैविंग्स होती हैं? क्या आप अपने में स्ट्रेंज बिहेवियर पैटर्न्स और सिम्पटम्स पाते हैं। अगर आप ध्यान से सुनें तो पाएंगे कि आपका शरीर आपसे कुछ कहना चाह रहा है।

हर अजीब क्रैविंग और सिम्पटम के पीछे कोई ना कोई बात होती है। आपकी बॉडी उसके ज़रिये आपको बताना चाहती है कि आपको न्यूट्रिशनल डेफ़िशिएंसी हो सकती है। यह आपकी बॉडी का तरीक़ा है, आपको यह बतलाने का कि आपको अब किस चीज़ की दरकार है।

पहले-पहल यह समझना कठिन लग सकता है कि आपको न्यूट्रिशनल डेफ़िशिएंसी हो सकती है, क्योंकि आप तो समय-समय पर कुछ ना कुछ खाते ही रहते हैं। अगर आपने खाना भी खाया है और बीच-बीच में स्नैक्स भी लेते रहे हैं तो यह कैसे हो सकता है कि आपको डेफ़िशिएंसी हो? जवाब है एम्प्टी कैलरीज़ की वजह से।

यानी बहुत मुमकिन है, आप ऐसा खाना खा रहे हों, जो कि न्यूट्रिशन के लेवल पर ज़ीरो है। और चूंकि आपको यह नहीं मालूम, इसलिए आप अनजाने ही अपने सिस्टम को सभी हेल्दी न्यूट्रिएंट्स से महरूम रख रहे हैं। जहां इन सिम्पटम्स पर ग़ौर करें, जो आपके भीतर की डेफ़िशिएंसी की ओर इशारा करते हैं और यह भी बताते हैं कि आपको कौन-से न्यूट्रिएंट्स की ज़रूरत है।

चॉक खाने की क्रैविंग
अगर आपको चॉक चबाने की अनकंट्रोलेबल क्रैविंग हो रही है या आपका दिल कर रहा है कि दीवार पर पुते चूने को खुरजकर खा जाएं तो इसका मतलब है कि आपको कैल्शियम डेफ़िशिएंसी है। और कैल्शियम के सोर्स के लिए आपमें क्रैविंग जगाकर आपकी बॉडी आपको यह बताना चाह रही है कि आपको उसकी ज़रूरत है।

इसे फ़िक्स करने के लिए-
केले, दूध और पनीर, सी-फ़ूड, नट्स और हरी सब्ज़ियां खाएं, जो कैल्शियम से भरपूर होती हैं। समय-समय पर ग्रीन सैलेड भी खाते रहें।

मिट्‌टी खाने की इच्छा
यह सुनने में भले अजीब लगे, लेकिन जिन लोगों को यह क्रैविंग होती है, वे किसी भी क़ीमत पर मिट्‌टी कुरेदकर खा जाना चाहते हैं। इसका यह मतलब है कि वो एनीमिया या आयरन डेफ़िशिएंसी से जूझ रहे होते हैं।

इसे फ़िक्स करने के लिए-
सी-फ़ूड, रेड मीट, बीन्स, सीरियल्स और डार्क ग्रीन वेजिटेबल्स खाइए। ये सभी आयरन का अच्छा सोर्स होते हैं। अगर आप वेजिटेरियन हैं तो सोयाबीन, टमाटर, अलसी और मसूर की दाल खाइए।

आपके हाथ या दूसरे अंग सुन्न पड़ जाते हैं या झनझनाते हैं
अगर आपके हाथ या दूसरे अंग सुन्न पड़ जाते हैं या उनमें झुरझुरी होती है तो बहुत सम्भव है कि आपको विटामिन बी-12 या विटामिन डी की डेफ़िशिएंसी है। ऐसे में हम आपको सजेस्ट करेंगे कि आप अपना टेस्ट करवाएं और अगर सच में ऐसा है तो उसकी भरपाई करें।

इसे फ़िक्स करने के लिए-
विटामिन डेफ़िशिएंसीज़ का कारण सूर्य की रोशनी की कमी, वीगन डाइट्स, स्ट्रेस और अनहेल्दी लाइफ़स्टाइल होती हैं। ऐसे में सीरियल्स, मशरूम्स, सी-फ़ूड, अंडे, बीफ़, चीज़, कॉड लिवर ऑइल्स का सेवन करना ज़रूरी है।

बर्फ़ चबाने की इच्छा
ये भी सुनने में अजीब ही लगेगा, लेकिन बर्फ़ खाने की इच्छा होना भी आयरन डेफ़िशिएंसी का संकेत है। इससे आप थकान भी महसूस करते हैं। बर्फ़ खाने की इच्छा इसलिए होती है, क्योंकि इससे मेंटल एनर्जी को बूस्ट मिलता है।

इसे फ़िक्स करने के लिए-
बर्फ़ खाने के बजाय वो तमाम चीज़ें अपने भोजन में शामिल करें, जिससे आपकी बॉडी में आयरन का लेवल बढ़ता है, जैसे रेड मीट, बीन्स, दालें, संतरे का ज्यूस, घोंघा, योगर्ट, सोया आदि।

आपके नाख़ून या बाल टूट रहे हैं 
अगर आपके बाल टूट रहे हैं तो आपको अपने शैम्पू के इनग्रेडिएंट्स को चेक करने की ज़रूरत है, लेकिन इससे ज़्यादा ज़रूरी यह है कि आप समझें यह एक क़िस्म की प्रोटीन डेफ़िशिएंसी है। नाख़ूनों की टूट-फूट के लिए आपको आयरन की कमी को ज़िम्मेदार ठहराना चाहिए

इसे फ़िक्स करने के लिए-
आयरन डेफ़िशिएंसी को फ़िक्स करने के लिए आपको सी-फ़ूड, रेड मीट, बीन्स, ड्राइड फ़ूड्स, सीरियल्स और डार्क ग्रीन वेजिटेबल्स लेना चाहिए। प्रोटीन डेफ़िशिएंसी के लिए ब्रॅकली, चिकन, ओट्स, बादाम, अंडे और दूध से बनी चीज़ें खाइए।

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