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टीनएजर्स में मोटापे की समस्या

वजन हमारी फिजिकल और मेंटल हेल्थ को प्रभावित करता है। जब बच्चे टीनएज में पहुंचते हैं तो यह उन्हें सबसे ज्यादा प्रभावित करता है क्योंकि इस उम्र में हर बच्चा खुद को स्वस्थ्य और खूबसूरत देखना पसंद करता है। क्या होता है जब टीनएजर्स में मोटापा बढ़ता है और कैसे

टीनएजर्स में मोटापे के कई कारण हो सकते हैं। उनमें से अधिकांश आनुवांशिक, कम शारीरिक गतिविधि और अनहेल्दी खाने के कारण मोटापे के शिकार होते हैं। या ये सभी चीजें एक साथ हों तो भी टीनएजर्स में मोटापे के मामले सामने आते हैं। कुछ टीनएजर्स हार्मोनल समस्याओं के कारण भी मोटे हो जाते हैं। हालांकि ऐसे मामले कम होते हैं।

टीनएजर्स में मोटापा उनके बड़े होने तक बना रहता है, इसलिए जब किशोर बड़े होते है तो उनमें से कई एडल्ट होने के बाद भी मोटे ही रहते हैं। इसके अलावा, किशोरावस्था के दौरान अपनाई जाने वाली आदतों को ताउम्र जारी रखना भी मोटापे का कारण बनता है। मोटापे के ढेरों दुष्परिणाम हैं। जैसे- दिल की बीमारी, मधुमेह, ऑस्टियोआर्थराइटिस, सामाजिक अलगाव और वहीं कुछ इसे आत्मसम्मान से भी जोड़ लेते हैं।

ऐसे में क्या करना चाहिए ये प्रश्न उठता है? सबसे पहले स्वीकार करें कि आप मोटे हैं। किसी अच्छे डॉक्टर से संपर्क करें और अपनी बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) को जानें। ये भी जानें की आपकी उम्र और ऊंचाई में आपका वजन कितना होना चाहिए। यदि किसी खास मेडिकल कंडिशन से जूझ रहे हैं तो डॉक्टर को बताएं और उससे पूछें कि अपने सही वजन तक पहुंचने के लिए आपको क्या करना चाहिए।

ये टिप्स आएंगे काम :

  • हेल्दी डाइट लें।
  • फास्ट फूड खाने से बचें, जब भी भूख लगे तो सब्जियां, फल और मेवे खाएं।
  • जो आपको पसंद हो वो फिजिकल एक्टिविटी अपनाएं, जैसे जुम्बा या बेली डांस।
  • परिवार के साथ एक्सरसाइज करें जिससे फिजिकल एक्टिविटी का फायदा सभी को मिल सके।
  • अपने परिवार को मुश्किल वक्त में आपका साथ देने के लिए कहें।
  • सबसे जरूरी मुश्किल हालातों में अपनी भावनाओं का खुद ख्याल रखें।


कुछ लोगों के लिए जंक फूड खाना और चॉकलेट खाना ही किशोरावस्था है। जबकि हकीकत ये है कि यही वो उम्र होती है जब हर बच्चा इस उम्र में खुद का विकास बेहतर ढंग से कर सकता है। यह उम्र शरीर में बड़े बदलाव की ओर ले जाती है। इसलिए, अगर सही सावधानी नहीं बरती जाए, तो किशोरावस्था मोटापे या खाने के अन्य विकारों को जन्म दे सकती है।

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जब आप अकेलापन या दु:खी महसूस करते हैं, तो अधिक खाते हैं

हमारी इनहाउस काउंसलर क्षितिजा सावंत के अनुसार, लो फ़ील करने और ओवरईटिंग के बीच सीधा संबंध है।
Nishtha JunejaTeentalkindia Content Writer

चिकन नगेट्स, कबाब, बर्गर, सोडा और फ्राइज़ तब तक मेरी पसंदीदा खाने की चीजें थी, जब तक कि वे मेरे लिए सबसे बुरा ख्वाब नहीं बन गईं। मैं हमेशा से संतुलित खाने का आदी था, मगर खाना कब मेरे लिए जुनून बन गया, मुझे पता ही नहीं चला। मैं एक इमोशनल ईटर बन गया, यानी ऐसा व्यक्ति जो भावनात्मक रूप से कमजोर होने पर अधिक खाता है। हर समय जब भी मैं उदास होता था, मैकडॉनल्ड्स जाकर बर्गर खा लेता था। मैं जब तक 9वी क्लास में था, तब तक खुश था, मगर उसके बाद चीजें बदलने लगीं। मेरा एकमात्र डर यही था कि मैं थोड़ा मोटा या कहूं थोड़ा हेल्दी था। मुझे मोटापे के कारण स्कूल में शर्मिंदगी महसूस होने लगी थी। लोग मुझे फै़टी और पिग कहकर बुलाने लगे। इसने न केवल मेरे आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाई बल्कि मेरे अंदर डायबिटीज़ के खतरे को भी बढ़ा दिया।

मैं तब भी खाने का शौकीन था। तंग करने वाले बच्चे मेरा लंच खा जाते और मेरे टिफिन बॉक्स को कहीं छिपाकर रख देते थे। मैं बाथरूम में जाता और रोने लगता था। एक बार जब मैंने उन्हें चुप रहने के लिए कहा, तो उन्होंने मेरे कंधे पर मारा। एक लात उन्होंने मेरी टांगों के बीच में मारी। इस वजह से मैं स्कूल जाने से नफरत करने लगा। 

मैं आखिर में तब टूट गया था, जब मुझे स्कूल की ग्रेजुएशन सेरेमनी में आमंत्रित नहीं किया गया था। मैं अनचाहा, अकेला और बेकार महसूस करता था। मैं कभी-कभी अपनी फीमेल फ्रेंड्स के लिए कपड़े चुनता था, लेकिन कुछ समय बाद मेरे मेल फ्रेंड्स मुझे इसके लिए फे़मिनाइन कहने लगे। उन्होंने कहा कि लड़के ऐसा नहीं करते। मैं जब 15 साल का था, तब भी मैंने खुद को मारने की कोशिश की, लेकिन मैं इसमें नाकामयाब हुआ। 

मेरी बेबसी को देखते हुए मेरे कज़िन ब्रदर ने मुझे एक काउंसलर से मिलवाया। मेरी एक साल से ज्यादा समय तक थैरेपी चली थी।

हमारी इन-हाउस काउंसलर क्षितिजा सावंत के अनुसार, लो फ़ील करने यानी खुद को दूसरों से कमतर महसूस करने और ओवर-ईटिंग के बीच गहरा रिश्ता होता है-

जब भी हम दर्द या मुसीबत का अनुभव करते हैं, तब अपने लिए कंफर्ट की तलाश करने लगते हैं। कई बार हमें यह कंफर्ट खाने के माध्यम से मिलता है, जो कि खासकर फैट और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है, क्योंकि इसके शांत प्रभाव का सीधा असर हमारे दिमाग पर होता है।
 
क्षितिजा ने बुलीइंग से निपटने के लिए भी कुछ टिप्स दिए हैं : 

1. ख़ुद के प्रति जागरूक हों : अपनी ताकत, अपनी कमजोरियों, अपने बारे में आपको पसंद है, क्या नहीं है, क्या आपके लिए जीवन में सबसे ज्यादा मायने रखता है और क्या नहीं, इन सभी को जानिए।

2. अपने लिए ख़ुद को स्वीकार करना सीखें : दूसरे आपको स्वीकार करें उससे पहले ख़ुद से प्यार करना सीखना ज़रूरी है। ज़िंदगी में कितनी भी कठिनाई क्यों न आए, ख़ुद पर भरोसा करना सीखिए। कुछ समय बाद, एक वक्त ऐसा आएगा, जब पूरी दुनिया यहां तक कि आपके दोस्त भी आप पर भरोसा करना सीख जाएंगे।

3. दृढ़ रहना सीखें :  ख़ुद के लिए और आप जिन पर भरोसा करते हैं उनके लिए खड़े हों। इसका मतलब है कि दोस्त या बुलीज़ के मामले में। दृढ़ होने पर शुरुआत में भले ही थोड़ी मुश्किल हो सकती है, लेकिन यदि इसी राह पर लंबे समय तक चले तो निश्चित ही फायदा होगा।  
4. नकारात्मकता से ऊपर उठें :  जो लोग आपको नीचे लाने की कोशिश करते हैं, उनकी सहमति लेने के बजाय, उस आदर्श जीवन की कल्पना करने की कोशिश करें, जिसे आप जीना चाहते हैं और उन लक्ष्यों की दिशा में काम करना शुरू करें। खुद के प्रति सच्चे रहें, बाहर जाएं, यात्रा करें, नए लोगों से मिलें और नए कार्यक्रम, नई एक्टिविटीज़ में हिस्सा लें। कौन जानता है, जिस ज़िंदगी को आप डिज़र्व करते हैं, वो दूसरी तरफ आपका इंतजार कर रही है मगर वह आपके कंफर्ट ज़ोन से बाहर है।  
 
हम यहां आपकी मदद करने के लिए हैं। अगर आप भी ऐसी किसी परिस्थिति का सामना कर रहे हैं, तो हमसे expert@teentalkindia.com पर संपर्क कर सकते हैं या होमपेज पर लाइव चैट ऑप्शन पर क्लिक करके टीनटॉक इंडिया एक्सपर्ट से बात कर सकते हैं।

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