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आप जैसा खाते हैं, वैसा दिखते हैं

फूड और मूड के लिए आसान गाइड
Richa DubeyContent Writer

आप जैसा खाते हैं वैसे ही हो जाते हैं। यह सच है। मैं ऐसा नहीं कह रही हूं कि अगर आपने दोपहर में पालक खाई तो सिर पर पालक उगने लगेगी। लेकिन इससे मिलने वाले मिनरल्स और आयरन आपके खून में पहुंचेंगे और इसके शरीर में इनकी कमी को पूरा करेंगे।
आप जो भी खाते हैं वो आपको बढ़ने में मदद करता है। आपको ऊर्जा देता है और बॉडी को स्ट्रॉन्ग बनाता है। इतना ही नहीं ये और भी बहुत कुछ करता है- जैसे आपकी मेंटल हेल्थ का ध्यान रखता है।

उस वक्त को याद करें जब आपको एक रिसर्च सब्मिट करनी थी लेकिन आप आखिरी वक्त तक ऐसा नहीं कर पाए थे। इस वजह से काफी तनाव महसूस करते हैं और तनाव दूर करने के लिए चॉकलेट खाते हैं या उल्टी करने का मन करता है। कुछ देर के लिए आप खुश हो जाते हैं। कई अध्ययन में ये सामने आया है कि तनाव और मीठे में गहरा नाता है। वहीं जब आप दुखी होते हैं जैसे ब्रेकअप हो गया या किसी और वजह से दुखी हों तो लोग अक्सर फास्ट फूड खाने लगते हैं। अध्ययन में ये भी देखा गया है कि दुख-दर्द में लोग कार्बोहाइड्रेट या फैटी चीजें खाने लगते हैं।
अगर आप पुरानी किसी याद को लेकर परेशान रहते हैं तो समझ जाइए कि आपका शरीर आपसे कुछ कहना चाहता है। हो सकता है कि शरीर आपके दिमाग से कह रहा है कि- 'मेरे भाई आपको ऊर्जा की जरूरत है ताकि तुम इस तनावपूर्ण स्थिति को पार कर सको।' क्योंकि चीनी और कार्बोहाइड्रेट दोनों ही तनाव से मिपटने में मदद करते हैं और ऊर्जा देते हैं।

 

यहां इसका एक और पहलू है कि ऐसा अस्थायी होता है। कुछ वक्त बाद ही आप फिर से तनाव महसूस करने लगते हैं। इसके अलवा आपका वजन भी काफी बढ़ जाता है। कुछ फूड आपको नुकसान पहुंचाते है तो वहीं कुछ आपकी सेहत भी बनाते हैं। कई रिसर्च में सामने आया है कि ऐसे कई खाद्य पदार्थ हैं जो आपके मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखते हैं। खासतौर पर डिप्रेशन जैसे हालातों में।

द साइंस ऑफ हैप्पीनेस
इसमें ट्रिप्टोफेन नाम एक अमीनो एसिड होता है। जब यह मस्तिष्क में प्रवेश करता है तो सेरोटोनिन नाम के एंजाइम को सिंथेसाइज (केमिकल रिएक्शन) करने में मदद करता है। बेहत तकनीकी दिखने वाली यह प्रक्रिया असल में काफी महत्वपूर्ण है। यह केमिकल आपकी मनोदशा को परिभाषित करता है। अधिक सेरेटोनिन का अर्थ है अधिक खुशी। कम का अर्थ है उदासी बढ़ना।
अनिवार्य रूप से सभी भोजन जो सेरोटोनिन को सिंथेसाइज करने में मदद करते हैं वो सुपर हीरो हैं। इस लिस्ट में सबसे पहले पायदान पर - कार्बोहाइड्रेट (कार्ब्स) हैं।

ज्यादातर लोग किसी एक्टर की तरह सिक्स पैक एब्स बनाने में लगे हुए हैं। ऐसे लोगों के लिए कार्ब्स दुश्मन है। हालांकि सभी तरह के कार्ब्स नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। रिसर्च में सामने आया है कि ट्रिप्टोफेन कार्ब्स की उपस्थिति में सेरोटोनिन को बेहतर करने में मदद करता है। जब भी आप दुखी होते हैं तो चीज पास्ता या फैट से भरी थाली खाने का मन करता है। दरअसल आपका शरीर आपके दिमाग के लिए उस कार्ब की मांग करता है जो आपको खुश रहने में मदद करता है।

इस लिस्ट में अगला नाम ओमेगा-3 का है। ओमेगा-3 फैटी एसिड वाले फूड में पाया जाता है। जैसे मछली और मेवे। ये सभी दिमाग को खुश रखने में मदद करते हैं।
आखिर में बारी आती है विटामिन-बी से भरपूर खाद्य पदार्थ की। खास कर बी-12 , रिसर्च में सामने आया है कि ये विटामिन सेरोटोनिन को सिंथेसाइज करने में मदद करते हैं। इसके लिए डाइट में होलग्रेन व्हीट, व्हाइट मीट और मछली शामिल करें। ये दिमाग को खुश रखने में मदद करता है।

कम्फर्ट फूड
इसके बाद लिस्ट में ऐसे फूड आते हैं जो आपको आपको खुश रखते हैं। लेकिन इसका कारण साइंस से जुड़ा नहीं है बल्कि आपकी मेमोरी से जुड़ा है। मां के हाथ की बनी सादी खिचड़ी। त्योहारों की याद दिलाते बेसन के लड्डू। सड़क किनारे मिलने वाली चाय रोड ट्रिप की यादें ताजा करती है। हर इंसान का अपना एक फूड मोमेंट है जो उसे किसी खास पल की याद दिलाता है। वहीं, लोग परिवार या दोस्तों के साथ भोजन के पलों का भी लोग खूब आनंद लेते हैं।

भोजन और आपके मन की स्थिति का भी खास कनेक्शन है।
खाना हमारे मूड को कैसे प्रभावित करता है एक सिंपल कारण है। नो फूड = नो एनर्जी = खराब मूड। इसलिए तय करें कि नियमित रूप से खाना खाएं और स्वस्थ रहें।

 

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टीनएजर्स में मोटापे की समस्या

वजन हमारी फिजिकल और मेंटल हेल्थ को प्रभावित करता है। जब बच्चे टीनएज में पहुंचते हैं तो यह उन्हें सबसे ज्यादा प्रभावित करता है क्योंकि इस उम्र में हर बच्चा खुद को स्वस्थ्य और खूबसूरत देखना पसंद करता है। क्या होता है जब टीनएजर्स में मोटापा बढ़ता है और कैसे वे उससे निपटना भी चाहते हैं, इसे समझना जरूरी है ।
Richa DubeyContent Writer

टीनएजर्स में मोटापे के कई कारण हो सकते हैं। उनमें से अधिकांश आनुवांशिक, कम शारीरिक गतिविधि और अनहेल्दी खाने के कारण मोटापे के शिकार होते हैं। या ये सभी चीजें एक साथ हों तो भी टीनएजर्स में मोटापे के मामले सामने आते हैं। कुछ टीनएजर्स हार्मोनल समस्याओं के कारण भी मोटे हो जाते हैं। हालांकि ऐसे मामले कम होते हैं।

टीनएजर्स में मोटापा उनके बड़े होने तक बना रहता है, इसलिए जब किशोर बड़े होते है तो उनमें से कई एडल्ट होने के बाद भी मोटे ही रहते हैं। इसके अलावा, किशोरावस्था के दौरान अपनाई जाने वाली आदतों को ताउम्र जारी रखना भी मोटापे का कारण बनता है। मोटापे के ढेरों दुष्परिणाम हैं। जैसे- दिल की बीमारी, मधुमेह, ऑस्टियोआर्थराइटिस, सामाजिक अलगाव और वहीं कुछ इसे आत्मसम्मान से भी जोड़ लेते हैं।

ऐसे में क्या करना चाहिए ये प्रश्न उठता है? सबसे पहले स्वीकार करें कि आप मोटे हैं। किसी अच्छे डॉक्टर से संपर्क करें और अपनी बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) को जानें। ये भी जानें की आपकी उम्र और ऊंचाई में आपका वजन कितना होना चाहिए। यदि किसी खास मेडिकल कंडिशन से जूझ रहे हैं तो डॉक्टर को बताएं और उससे पूछें कि अपने सही वजन तक पहुंचने के लिए आपको क्या करना चाहिए।

ये टिप्स आएंगे काम :

  • हेल्दी डाइट लें।
  • फास्ट फूड खाने से बचें, जब भी भूख लगे तो सब्जियां, फल और मेवे खाएं।
  • जो आपको पसंद हो वो फिजिकल एक्टिविटी अपनाएं, जैसे जुम्बा या बेली डांस।
  • परिवार के साथ एक्सरसाइज करें जिससे फिजिकल एक्टिविटी का फायदा सभी को मिल सके।
  • अपने परिवार को मुश्किल वक्त में आपका साथ देने के लिए कहें।
  • सबसे जरूरी मुश्किल हालातों में अपनी भावनाओं का खुद ख्याल रखें।


कुछ लोगों के लिए जंक फूड खाना और चॉकलेट खाना ही किशोरावस्था है। जबकि हकीकत ये है कि यही वो उम्र होती है जब हर बच्चा इस उम्र में खुद का विकास बेहतर ढंग से कर सकता है। यह उम्र शरीर में बड़े बदलाव की ओर ले जाती है। इसलिए, अगर सही सावधानी नहीं बरती जाए, तो किशोरावस्था मोटापे या खाने के अन्य विकारों को जन्म दे सकती है।

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