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चिंतित व्यक्ति से कभी नहीं कहनी चाहिए ये बातें

यहां हम चाहते हैं कि आपको एंग्जाइटी से जूझ रहे व्यक्ति से कौन सी बातें नहीं कहना चाहिए।

एक स्टडी के अनुसार 7 में से एक भारतीय डिप्रेशन और एंग्जाइटी से पीड़ित है। इसलिए यह संभव है कि आप किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हो जो एंग्जाइटी से पीड़ित है। ऐसे में कई बार चांस होता है कि आप अपने उस फ्रेंड, फैमिली मेंबर, कलिग या नेबर को सपोर्ट और हेल्प करना चाहते हैं।  

आप सभी को बहुत सी ऐसी बातें पता होती हैं, जो आप उनसे कह सकते हैं या कर सकते हैं जब उन पर एंग्जाइटी अटैक हुआ हो या फिर वो किसी डिफिकल्ट सिचुएशन से गुजर रहे हों। लेकिन यहां हम चाहते हैं कि आपको एंग्जाइटी से जूझ रहे व्यक्ति से कौन सी बातें नहीं कहना चाहिए। उनकी लिस्ट यहां दी गई है :

  • इट्स ओके, काम डाउन : जब हम किसी से कहते हैं कि शांत हो जाओ या काम डाउन तो व्यक्ति एंग्जाइटी एक्सपीरियंस करता है, यह हमेशा मदद नहीं करता है। अगर वे कर सकते तो, ऐसा कर चुके होते। इसके बजाय आइडियल बात जो कही जा सकती है, “मैं आपको सुन रहा हूं।”
  • सब कुछ आपके दिमाग में है, चिंता की कोई बात नहीं है : यदि आप यह सेंटेन्स किसी ऐसे व्यक्ति से कहते हो जो एंग्जाइटी का शिकार हो तो यह बहुत गलत है। ये वो चीजें हैं जिससे उनकी चिंता बढ़ सकती है और इसलिए यह रिस्पॉन्स गलत है। हो सकता है कि यह चीजें आपके लिए उतनी ही इंर्पोटेंट न हों जितनी उनके लिए हों। सिर्फ उनकी प्रॉब्लम को सुनिए और उनके साथ फिजिकल एन्वायरमेन्ट में कनेक्ट होने की कोशिश करें। आप उनके साथ एक वॉक पर जा सकते हैं।  
  • मुझे भी प्रॉब्लम है : हर व्यक्ति एक-दूसरे से अलग है और उनके इमोशन भी अलग हैं। हम सभी प्रत्येक सिचुएशन का सामना अलग-अलग ढंग से करते हैं। एक प्रॉबलम जो मेरे लिए प्रॉब्लम हो, हो सकता है कि आपके लिए प्रॉब्लम न हो।   इसलिए यह सेंटेन्स सही नहीं है।    
  • यह कोई बड़ी बात नहीं है, जैसे कि आप बना रहे हो :  जब कोई व्यक्ति कुछ चीजों को लेकर चिंतित होता है, तो वो जानता है कि वो जिन बातों को लेकर सोच रहा है उनमें से ज्यादातर तर्कविहीन हैं, मगर उसके बावजूद वो परेशान होता है। यह उनके लिए बड़ी बात है। उनकी फीलिंग्स को अनदेखा करने के बजाय उनके तर्कों को इस समय मान्यता दें
  • आप पॉजीटिव ढंग से क्यों नहीं सोच सकते हो :  कोई भी व्यक्ति परेशान या चिंतित होने का चुनाव नहीं करता है। यह भी किसी अन्य फिजिकल बीमारी की तरह है। इस सिचुएशन में किसी व्यक्ति से पॉजीटिव ढंग से सोचने की कहना इंसेसिटिव है। ऐसे में यदि आप अपने फ्रेंड को सपोर्ट कर सकते हैं, तो इससे उसकी मदद होगी, भले ही आप यह न समझ सकें कि आपका फ्रेंड क्या कर रहा है। यदि वो देखेंगे कि लोग उनके लिए हैं, तो उन्हें उम्मीद की किरण दिखाई देगी।

 

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ऑब्सेसिव थिंकिंग को कैसे रोकिए?‌

यदि आप उन व्यक्तियों मे से एक हो जो ओवर थिंकिंग की वजह से निगेटिव विचारों से घिरे रहते हो या नींद डिस्टर्ब होती है, तो आप इस सिचुएशन से बाहर आने के लिए इन टिप्स फॉलो कर सकते हैं।
Snigdha Teentalkindia Counsellor

क्या आप उन लोगों में से एक हो जो निगेटिव थिंग्स सोचते हो?

क्या आपको ऐसा महसूस होता है कि आपके ब्रेन ने ज़िंदगी में मिले निगेटिव एक्सपीरियंस में खुद को जकड़ लिया है?

क्या आपको ऐसा लगता है कि आप अपने ही दिमाग में कैद हो गए हैं?

यदि इन सभी स्टेटमेंट्स का जवाब हां है, तो ये आर्टिकल आपके लिए ही है।

ऑब्सेसिव थिंकिंग जिसे जुनूनी सोच या बहुत ज्यादा सोचना भी कहते हैं। बुरे विचारों और इमेज पर कंट्रोल नहीं कर पाना होता है। ब्रेन इमेजिंग स्टडी संकेत करती है कि ऑब्सेसिंग थिंकिंग न्यूरोलॉजिकल डिस्फंक्शन से संबंधित है। अनजाने कारणों की वजह से यह लगातार होने लगता है। कुछ लोग जहां ऑब्सेसिंग को पहली बार महसूस करते हैं तो कुछ लोगों में इसके मल्टीपल एपिसोड होते हैं, समय के साथ स्थिति में भी खास बदलाव आते हैँ। 

चिंता में कमी करने के लिए यहां पांच टिप्स दिए गए हैं, जिन्हें आप फॉलो कर सकते हैँ :

1 अवेयरनेस बढ़ाना : 
पहला कदम आपके लिए यह है कि अपने बिहेवियर या थिंकिंग के प्रति अवेयर हो जाएं। अगली बार जब भी आप खुद को इस स्थिति में पकड़ें, तो खुद से तेज आवाज में स्टॉप कहिए।

2 नाम दें :
जब भी हम खुद को निगेटिव थिंकिंग से घिरा हुआ पाते हैं, निश्चित ही हमें डर लगता है। निगेटिव थिंकिंग और इसके पीछे के कारणों को लिखिए। जिस पल आप ऐसा करोगे, तो आप अपने इमोशन पर कंट्रोल कर सकोगे।

3 प्रेक्टिस माइंडफुलनेस :
माइंडफुलनेस एक्सरसाइज या मेडिटेशन करने से दिमाग को शांति मिलती है और आप अपनी प्रजेंट सिचुएशन पर फोकस करते हो। मेडिटेशन और मेडिटेशन शुरु करने के बारे में अधिक जानने के लिए आप इस लिंक पर क्लिक कर सकते हो।
https://www.teentalkindia.com/explore/general/importance-of-meditation-for-youth

4  एक्सेप्टेंस यानी स्वीकारना : 
एक बार अपने एंग्जाइटी के सोर्स के बारे में सोचिए। ऐसे कौन से इमोशन हैं जो आप महसूस करते हो। बिना किसी गिल्ट के खुद को महसूस करने की परमीशन दें। जैसे आप महसूस करते हैं, उसे एक्सेप्ट करें। ख़ुद से पूछिए कि आप क्या अपने बीते कल को बदल सकते हो? यदि आपका जवाब नहीं है, तब आपके लिए बेस्ट होगा कि आप इसे एक्सेप्ट करें। गहरी सांस लें और कुछ ऐसा करें जिसे करने से आपको खुशी मिले। यदि जवाब हां है, तो पहचान करें कि आप क्या कर सकते हो।

5 चिंता से ब्रेक लेने के लिए एक शेड्यूल बनाएं : 
ख़ुद पर दया करें और याद रखें कि आपको यह सब एक बार में नहीं करना है - ऐसा महसूस नहीं करना चाहिए कि यदि आप डरे हुए या चिंतित विचार रखते हैं तो आप कामयाब नहीं हुए हैं। जब आप बहुत सारे निगेटिव विचारों को महसूस करते हैं, तो अपने आप को दिन में 15-20 मिनट का ब्रेक दें, जहां आप बैठें और उन सभी चीजों को छोड़ दें, जिनके बारे में आप चिंतित हैं। यह आपको हेल्दी बाउंड्री बनाने में मदद करेगा।

यदि आप ये सब करने के बावजूद अपने निगेटिव थॉट्स पर कंट्रोल नहीं कर पा रहे हैं, तो थैरेपी लें और प्रोफेशनल एडवाइज आपके लिए हमेशा मददगार होगी।  

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