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स्पीच की घबराहट पर क़ाबू पाइए

क्या आप पब्लिक में बोलने से कतराते हैं, क्योंकि यह आपके लिए बहुत कठिन है? क्या आप नर्वस होने के कारण हाथ में आए मौक़े गंवा देते हैं? डोंट वरी, हमारे पास इस समस्या का इलाज है।

जीवन में कभी ना कभी हम सभी नर्वस हुए हैं और हम जानते हैं तब कैसा लगता है। इसके कुछ कॉमन सिम्पटम्स हैं, सांस लेने में कठिनाई होना, ऑकवर्ड फ़ील करना, हथेलियों में पसीना आना आदि। लेकिन क्या आपने ग़ौर किया कि अगर आप प्यार में होते हैं या बहुत लम्बे इंतज़ार के बाद कोई चीज़ ख़रीद रहे होते हैं, तब भी ऐसा ही होता है? क्योंकि ये सभी सिम्पटम्स आपको किसी इवेंट के लिए तैयार करने के लिए आपके शरीर का एक तरीक़ा होते हैं।

तब हमें नर्वसनेस से क्यों डरना चाहिए, जबकि हम सभी इसका सामना करते हैं? ये कुछ टिप्स पढ़कर आप अपनी घबराहट पर क़ाबू पा सकते हैं और अपनी चमक बिखेर सकते हैं।

गहरी सांस लीजिए
यह सुनने में चाहे जितना सरल लगता हो, लेकिन ये बहुत ज़रूरी चीज़ है। धीरे-धीरे गहरी सांस लेने और छोड़ने से हमारे शरीर को और ऑक्सीजन मिलती है और हमारी एंग्ज़ायटी कम होने लगती है। अपने फेफड़ों को ऑक्सीजन और माइंड को पॉज़िटिव थॉट्स से भर लीजिए। जब आप स्पॉटलाइट में हों तब ज़रूरत पड़ने पर रुकें और गहरी सांस लें। आप इंटेंशनल ब्रीदिंग की प्रैक्टिस भी कर सकते हैं ताकि आप यह नेचरली कर सकें और रिलैक्स रह सकें।

भीड़ में एक दोस्त
भीड़ में किसी फ्रेंडली चेहरे को पहचान लीजिए और उसे जताइए कि आप उसी से बात कर रहे हैं। स्टेज पर आने से पहले ही यह कर लीजिए। अगर ऑडियंस ने अच्छा बर्ताव किया और आपसे आई कॉन्टैक्ट बनाया तो यह आपके लिए अच्छा होगा। जो दोस्त यह दावा करता हो कि वह एक्शन-एडवेंचर मूवीज़ के दौरान भी सो जाता है, उसे भीड़ में मत खोजिए- हाई ओक्टेन कॉफ़ी ड्रिंकर की अभी ज़रूरत नहीं है।

अपनी स्क्रिप्ट बनाएं
अगर आप पढ़कर बोलेंगे तो कुछ जेस्चर्स के लिए सिम्बॉल बनाएं और उन्हें वहां लगा दें, जहां वो सबसे ज़्यादा प्रभावी होंगे। बोलते समय रुक-रुककर उनका इस्तेमाल करें। थोड़ा ठहरकर बोले गए शब्द हमेशा ऑडियंस पर असर करते हैं।

कम्फ़र्टेबल और रिलैक्स्ड नज़र आएं
जब आप रिलैक्स्ड नज़र आते हैं तो ऑडियंस भी रिलैक्स हो जाती है, और इससे आपको ही मदद मिलती है। यह फ़ीडबैक लूप बहुत ज़रूरी है। रिलैक्स्ड दिखने के लिए आप यह कर सकते हैं :

-अपने हाथों को रेस्ट पोज़िशन में रखें
-आईने में देखकर अपनी स्पीच की प्रैक्टिस करें। अपने हाथों को नेचरली मूव करने दें लेकिन यह भी देखें कि जब आपका ध्यान आपके हाथों पर नहीं रहता, तब वे किस दशा में होते हैं। 
-अपने हाथों को अपनी बॉडी के आगे बांधने से बचें
-अगर आप रिंग पहनते हैं तो उसे घुमाएं नहीं
-अगर आपको पॉइंटर या क्लिकर का इस्तेमाल करना है तो उसे पहले ही सेट कर लें

ड्रेस फ़ॉर सक्सेस
यह पता लगाएं कि ऑडियंस क्या पहनने वाली है। और फिर ऐसा कोई आउटफ़िट चुनें, जो उस चलन में सबसे उम्दा हो। अगर आप किसी जगह पर सबसे वेल ड्रेस्ड पर्सन हैं तो इससे फ़ायदा ही होता है, लेकिन ज़रूरत से ज़्यादा ताम-झाम भी नहीं कर बैठें, जैसे ब्रेसलेट या स्विंगी नेकलेस पहनना। हर वो चीज़ जो बजती या चमकती है, उसे पहनने से पहले दो बार सोचें।

उम्मीद है इससे आपको अपनी फ़्यूचर की स्पीचेस और प्रज़ेंटेशंस में मदद मिलेगी। अगर इस समस्या से निपटने का आपका अपना कोई ख़ास तरीक़ा है तो उसे कमेंट सेक्शन में बतलाएं।
 

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टीनएजर्स में पैनिक डिसऑर्डर की समस्या

पैनिक डिसऑर्डर जैसी समस्या आमतौर पर टीनएज के अंतिम पड़ाव में शुरू होती है। इसलिए समय से पहले ही इसके लक्षणें को समझना जरूरी है।
Gousiya Teentalkindia Content Writer

हर 75 में से एक इंसान पेनिक डिसऑर्डर को गंभीर समस्या के रूप में देखता है। आमतौर पर यह समस्या टीनएज (किशोरवस्था) के अंतिम पड़ाव या युवावस्था की शुरुआत में दिखाई देती है। हालांकि यह क्यों होती है, इसके कारण अब तक स्पष्ट नहीं हो पाए हैं। लेकिन हमारे जीवन में हो रहे तनावपूर्ण बदलाव और पैनिक डिसऑर्डर का गहरा संबंध है। ऐसे कई प्रमाण भी पाए गए हैं जिससे ये कहा जा सकता है कि पैनिक डिसऑर्डर जैसी समस्या 'जीन्स' के कारण भी हो सकती है। इसलिए अगर परिवार में पहले भी किसी को यह बीमारी हो चुकी है तो सतर्क रहें। ऐसी स्थिति में इसके होने की आशंका और भी बढ़ जाती है, खासकर जब आपकी लाइफ ज़्यादा तनावपूर्ण होती है।

पैनिक अटैक के मामले अक्सर अचानक डर के बढ़ने के कारण सामने आते हैं, जो बिना किसी चेतावनी के इंसान को प्रभावित करते हैं और कारण भी स्पष्ट नहीं होता। पैनिक अटैक के लक्षण है-

  • धड़कने तेज हो जाना
  • सांस लेने में दिक्कत होना, ऐसा लगना जैसे हवा कम हो रही है
  • लकवा हो जाने का डर
  • मितली, सिर दर्द, चक्कर आना
  • कांपना और पसीना आना
  • घुटन होना, सीने में दर्द होना
  • अचानक से गर्मी या अचानक ठंड लगना
  • पैर की उंगलियों में झुनझुनी होना
  • पागल हो जाने या मर जाने का डर लगना

याद रखें कि पैनिक अटैक के दौरान ऊपर दिए गए चार या इससे अधिक लक्षण दिख सकते हैं। ये लक्षण तेजी से दिखते हैं और 10 मिनट में नजर आ सकते हैं।

पैनिक अटैक का असर लम्बे समय तक रहता है। अटैक के घंटों बाद भी घबराहट और चिंता बनी रहती है। किसी भी टीनएजर्स के लिए पैनिक अटैक जैसी समस्या का सामना करना मुश्किल और डरावना साबित हो सकता है।

अगर इसका इलाज नहीं किया जाए तो यह जीवन में नकारात्मक असर छोड़ता है। यह स्कूल, सम्बंधों और आत्मसम्मान के लिए समस्या पैदा कर सकता है। कोई टीनएजर पैनिक डिसऑर्डर से जूझ रहा है इसका पता केवल क्वालिफाइड प्रोफेशनल ही लगा सकता है। एक डॉक्टर ही पैनिक डिसऑर्डर के कारणों की पहचान कर सकता है और बता सकता है कि इसका कारण डिप्रेशन या कोई दूसरी घटना तो नहीं है।

पैनिक डिसऑर्डर का इलाज संभव है और कई बेहतर थैरेपी भी अवेलेबेल हैं। एक बार इलाज के बाद, पैनिक डिसऑर्डर किसी भी स्थायी जटिलताओं का कारण नहीं बनता है। इसलिए, यदि आपको लगता है कि आपके आसपास कोई ऐसा व्यक्ति है जो ऊपर बताए गए लक्षणों से जूझ रहा है तो उसका पेशेवर विशेषज्ञ से इलाज कराएं। आप चैट या ईमेल (expert@teentalkindia.com) के माध्यम से हमारे एक्सपर्ट से बात कर सकते हैं।

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