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सोशल एंग्ज़ायटी का सामना करने के लिए धीमी सांस लें

अगर आप लोगों के बीच घबराहट और बेचैनी अनुभव करते हैं तो यह सोशल एंग्ज़ायटी का लक्षण है

लोगों के बीच आकर्षका केंद्र बनने और नकारात्मक प्रतिक्रिया पाने का डर सोशल फ़ोबिया कहलाता है। सामान्यतया, इसके कारण कोई व्यक्ति किन्हीं परिस्थितियों से कतराने लगता है, जैसे कि जॉब इंटरव्यू, सोशल गेदरिंग्स और दूसरों के सामने लिखने, बोलने या भोजन करने जैसी एक्टिविटीज़। जिन टीन्स को सोशल फ़ोबिया होता है, वो हमेशा कुछ एम्बैरेसिंग कर बैठने के डर में जीते हैं। 


सोशल फ़ोबिया से ग्रस्त व्यक्ति को इन हालात से डर लगता है :
-दूसरों के सामने बोलना
-फ़ैमिली फ़ंक्शंस या पार्टीज़ में जाना
-अजनबियों से बातें करना
-दूसरों के सामने खाना, पीना या मोबाइल यूज़ करना
-पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन या पब्लिक टॉयलेट्स का इस्तेमाल करना
-क़तार में इंतज़ार करना

सोशल फ़ोबिया के फ़िज़िकल लक्षण : 
-शर्माना
-कांपना या थरथराना
-दिल की धड़कनें बढ़ जाना
-पसीने छूटना
-दिमाग़ का ब्लैंक हो जाना
-आवाज़ लड़खड़ाना
-कंसंट्रेशन में दिक़्क़त आना
-टॉयलेट जाने की ज़रूरत महसूस करना
-सांसों की गति बढ़ जाना
-चक्कर आना
-मितली आना
-कहीं भाग जाने की इच्छा होना 

सोशल एंग्ज़ायटी का सामना करने के लिए स्लो ब्रीदिंग की प्रैक्टिस कैसे करें 

जैसे ही आप घबराहट या बेचैनी से भर जाते हैं, आपकी सांसों की गति अपने आप बढ़ जाती है। ऐसे में अगर आप सांसों की गति पर नियंत्रण करना सीख जाएं तो ना केवल घबराहट से बच सकेंगे, बल्कि अपने दिमाग़ को भी फ़ोकस्ड रख पाएंगे।

1. अपनी सांसों को एक मिनट तक गिनिए (एक सांस भीतर और एक बाहर को एक गिनें)

2. फिर किसी घड़ी के सामने आराम से बैठ जाइए या दूसरे हाथ में घड़ी ले लीजिए और अपने माइंड को सांसों पर फ़ोकस कीजिए

3. केवल नाक से सांस लें

4. छाती के बजाय पेट से सांस लें और अपने पेट को जितना हो सके, रिलैक्स छोड़ दीजिए

5. अब तीन सेकंड के लिए सांस अंदर और तीन सेकंड के लिए बाहर करें। हर बार सांस छोड़ें तो ख़ुद से रिलैक्स होने को कहें और अपनी मसल्स को तनावमुक्त कर दीजिए- आपके कंधों को गिर जाने दीजिए, चेहरे को ढीला छोड़ दीजिए

6. इस 6 सेकंड की साइकिल में पांच मिनट तक सांसें लेते रहें

7. अंत में फिर से एक मिनट के लिए सांसें गिनिए और इसे लिख डालिए

8. सामान्यतया एक व्यक्ति हर मिनट 10 से 12 सांसें लेता है। सोशल फ़ोबिया से ग्रस्त लोगों की सांस लेने की गति इससे निरंतर तेज़ रहती है। कुछ ऐसे भी हो सकते हैं, जो केवल घबराहट महसूस करने पर तेज़ सांसें लेने लगते हैं। इन दोनों ही स्थितियों में धीमी सांसें लेना फ़ायदेमंद हो सकता है।

9. शुरू में तो आपको रिलैक्स होने पर ही प्रैक्टिस करना होगा, बाद में आप तनाव में होने पर भी इसकी प्रैक्टिस कर सकते हैं। हर नई स्किल की तरह, स्लो ब्रीदिंग में भी समय और रेगुलर प्रैक्टिस की ज़रूरत होती है। दिन में कम से कम चार बार इसकी प्रैक्टिस करनी चाहिए।

कोशिश कीजिए और हमसे रिज़ल्ट्स शेयर कीजिए। अगर आपको कोई और फ़ोबिया हो तो हमारे एक्सपर्ट्स से शेयर कीजिए, वो ख़ुशी-ख़ुशी आपकी मदद करेंगे। आप expert@teentalkindia.com पर एक्सपर्ट से चैट कर सकते हैं या ईमेल लिख सकते हैं।

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Gousiya Teentalkindia Content Writer

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आप भी अपनी ज़िंदगी में अधिक संतुष्ट हासिल कर सकते हैं :

सेहतभरी ज़िंदगी : हेल्दी लाइफस्टाइल के लिए एक्सरसाइज़, सही डाइट, स्मोकिंग जैसे हानिकारक एक्सपोज़र से बचकर शारीरिक रूप से सेहतमंद रहें। हेल्दी रहने का अच्छा असर आपके मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ेगा।

एजुकेटेड हों : ज़िंदगी सार्थक सीखने और समझने से ही होती है। नौकरी लगने के बाद भी आपका एजुकेशन नहीं रुकना चाहिए। किसी ने किसी डिस्टेंस एजुकेशन कोर्स में एडमीशन लें, ऑनलाइन लर्निंग पोर्टल के सर्टिफिकेट कोर्स या फिर ऑनलाइन ख़ुद से भी पढ़ सकते हैं।

सोशल सपोर्ट : फ्रेंड्स से लेकर फैमिली, पार्टनर, कोवर्कर, कम्युनिटी ग्रुप या हेल्थ केअर प्रोफेशनल्स हर सोशल सपोर्ट युवा के लिए अलग हो सकता है। परंपरागत तौर पर अधिक करीबी रिश्ता पार्टनर या क्लोज फ्रेंड्स से होता है, इसलिए उनका बहुत ज्यादा प्रभाव लाइफ सेटिस्फेक्शन को सुधारने में होता है।

कोई हॉबी विकसित करना : यह वह है जिसे आप बनाते हैं। इसके नतीजे से आपको संतुष्टि मिलेगी।  यदि आप अपने लिए कोई हॉबी खोजने में स्ट्रगल कर रहे हैं, तो कई चीजों को एक्सप्लोर करें। दूसरे शब्दों में कहूं तो कई अलग-अलग हॉबी के साथ प्रयोग करें, जब तक आप उनमें से किसी एक को नहीं पा लेते।

सकारात्मक रहिए : यदि आप ज़िंदगी में संतुष्टि चाहते हैं, तो सकारात्मक सोचिए भले ही नतीजा कुछ भी हो। आज और अभी में जियें, आपके पास जो भी है उसे सराहें और दूसरों से अपनी तुलना करना बंद करें। इस बात पर ध्यान दें कि आपको ख़ुद में क्या अच्छा लगता है, या आप किस चीज़ में अच्छे हैं उस पर ध्यान दें।

ज़िंदगी की संतुष्टि मानसिक, पूरी ज़िंदगी के संपूर्ण मूल्यांकन और सबसे बड़े संकेत खुशी, स्वस्थ रहने और सकारात्मक सोच है। हम सभी अपने-अपने मन की जिम्मेदारी ले सकते हैं। मगर कम से कम आपको यह पता होना चाहिए कि आप खुश नहीं हो, भले ही परिस्थितियां कैसी भी हों, उनमें बदलाव के लिए आप अपने दिमाग में बदलाव कर सकते हैं।

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