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टीनएजर्स में पैनिक डिसऑर्डर की समस्या

पैनिक डिसऑर्डर जैसी समस्या आमतौर पर टीनएज के अंतिम पड़ाव में शुरू होती है। इसलिए समय से पहले ही इसके लक्षणें को समझना जरूरी है।

हर 75 में से एक इंसान पेनिक डिसऑर्डर को गंभीर समस्या के रूप में देखता है। आमतौर पर यह समस्या टीनएज (किशोरवस्था) के अंतिम पड़ाव या युवावस्था की शुरुआत में दिखाई देती है। हालांकि यह क्यों होती है, इसके कारण अब तक स्पष्ट नहीं हो पाए हैं। लेकिन हमारे जीवन में हो रहे तनावपूर्ण बदलाव और पैनिक डिसऑर्डर का गहरा संबंध है। ऐसे कई प्रमाण भी पाए गए हैं जिससे ये कहा जा सकता है कि पैनिक डिसऑर्डर जैसी समस्या 'जीन्स' के कारण भी हो सकती है। इसलिए अगर परिवार में पहले भी किसी को यह बीमारी हो चुकी है तो सतर्क रहें। ऐसी स्थिति में इसके होने की आशंका और भी बढ़ जाती है, खासकर जब आपकी लाइफ ज़्यादा तनावपूर्ण होती है।

पैनिक अटैक के मामले अक्सर अचानक डर के बढ़ने के कारण सामने आते हैं, जो बिना किसी चेतावनी के इंसान को प्रभावित करते हैं और कारण भी स्पष्ट नहीं होता। पैनिक अटैक के लक्षण है-

  • धड़कने तेज हो जाना
  • सांस लेने में दिक्कत होना, ऐसा लगना जैसे हवा कम हो रही है
  • लकवा हो जाने का डर
  • मितली, सिर दर्द, चक्कर आना
  • कांपना और पसीना आना
  • घुटन होना, सीने में दर्द होना
  • अचानक से गर्मी या अचानक ठंड लगना
  • पैर की उंगलियों में झुनझुनी होना
  • पागल हो जाने या मर जाने का डर लगना

याद रखें कि पैनिक अटैक के दौरान ऊपर दिए गए चार या इससे अधिक लक्षण दिख सकते हैं। ये लक्षण तेजी से दिखते हैं और 10 मिनट में नजर आ सकते हैं।

पैनिक अटैक का असर लम्बे समय तक रहता है। अटैक के घंटों बाद भी घबराहट और चिंता बनी रहती है। किसी भी टीनएजर्स के लिए पैनिक अटैक जैसी समस्या का सामना करना मुश्किल और डरावना साबित हो सकता है।

अगर इसका इलाज नहीं किया जाए तो यह जीवन में नकारात्मक असर छोड़ता है। यह स्कूल, सम्बंधों और आत्मसम्मान के लिए समस्या पैदा कर सकता है। कोई टीनएजर पैनिक डिसऑर्डर से जूझ रहा है इसका पता केवल क्वालिफाइड प्रोफेशनल ही लगा सकता है। एक डॉक्टर ही पैनिक डिसऑर्डर के कारणों की पहचान कर सकता है और बता सकता है कि इसका कारण डिप्रेशन या कोई दूसरी घटना तो नहीं है।

पैनिक डिसऑर्डर का इलाज संभव है और कई बेहतर थैरेपी भी अवेलेबेल हैं। एक बार इलाज के बाद, पैनिक डिसऑर्डर किसी भी स्थायी जटिलताओं का कारण नहीं बनता है। इसलिए, यदि आपको लगता है कि आपके आसपास कोई ऐसा व्यक्ति है जो ऊपर बताए गए लक्षणों से जूझ रहा है तो उसका पेशेवर विशेषज्ञ से इलाज कराएं। आप चैट या ईमेल (expert@teentalkindia.com) के माध्यम से हमारे एक्सपर्ट से बात कर सकते हैं।

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इको-एंग्ज़ाइटी का सामना करना

रेन रेन गो अवे, कन अगेन अनॉदर डे... हाल के दिनों में हुई भारी बारिश के बाद हममें से बहुतों को यह नर्सरी राइम फिर याद आ गई होगी
Gousiya Teentalkindia Content Writer

अभी तक हममें से बहुतेरे बारिश से तंग आ चुके होंगे। चूंकि इस साल पूरी दुनिया में नाटकीय क्लाइमेटिक चेंजेस हुए हैं, इसलिए इको-एंग्ज़ाइटी नामक एक और चिंता उभरकर सामने आ गई है। वैसे तो यह चिंता नई नहीं है, किंतु इको-एंग्ज़ाइटी यह टर्म ज़रूर नया है। इसके इस्तेमाल उन चिंता, फ़िक्र, निराशा, दु:ख को जतलाने के लिए किया जाता है, जिन्हें हम पर्यावरण सम्बंधी बदलावों के कारण महसूस करते हैं।

हाल में जब आपने सुना कि अमेज़ॉन के जंगलों में भयानक आग लग गई है तो क्या आप रुआंसे हुए? क्या 'प्लास्टिक या मरीन लाइफ़' का सवाल आपको परेशान करता है? या क्या यह आपकी चिंता के दायरे में है कि बहुत जल्द धरती पर सबके लिए पर्याप्त पानी नहीं रह जाएगा? अगर इन सवालों पर आपका जवाब हां है, तो आप उन लोगों में से एक हो सकते हैं, जो इको-एंग्ज़ाइटी से जूझ रहे हैं। इको-एंग्ज़ाइटी अब एक हक़ीक़त बन चुकी है और कुछ मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक यह आपको बहुत तनाव में डाल सकती है।

लेकिन हर चिंता की तरह इसका भी सामना किया जा सकता है। इस तरह से :

स्वीकार
क्लाइमेट चेंज से जूझने के लिए यह सबसे मुश्किल स्टेप हो सकती है। अगर आप इको-एंग्ज़ाइटी को अपने से दूर रखना चाहते हैं तो आपको पॉज़िटिव और निगेटिव दोनों भावनाओं के साथ जीना सीखना होगा और इस बात को समझना होगा कि हर चीज़ सीधी-सरल नहीं होती। जब आप दिन-ब-दिन क़रीब आते जा रहे क्लाइमेटिक प्रलय के बारे में सोचकर बहुत हैरान होने लगें, तब उसको बिना शिक़ायत स्वीकार कर लेने से आप बेहतर अनुभव कर सकते हैं।

नया नज़रिया
ठीक जैसे आपको बुरी बातों को स्वीकार करना होता है, उसी तरह अच्छी बातों का स्वागत भी करना होता है। जब आपके सामने यह तस्वीर साफ़ हो कि चीज़ें कितनी अनूठी हो सकती हैं तब लोगों से बातें करके उन्हें गाइड करना भी पहले से ज़्यादा सरल हो जाता है। ऐसा इसलिए होता है कि तब आपके पास एक बेहतर नज़रिया होता है कि आपकी लड़ाई किससे है। हमारा आने वाला कल कितना अद्भुत हो सकता है, इस बारे में सोचें या लिखें, और विस्तार से उसका वर्णन करने की कोशिश करें।

सपोर्ट सिस्टम
किसी बात को लेकर बहुत परेशान हो जाने पर हम अकेला भी महसूस कर सकते हैं। इस स्थिति से बचने का सबसे अच्छा तरीक़ा है अपने जैसे लोगों के किसी ग्रुप को खोजना। याद रखें कि आप अकेले नहीं हैं। आज की तारीख़ में दुनिया में ऐसे असंख्य लोग, समूह और संस्थाएं हैं, जो क्लाइमेट चेंज की दिशा में काम कर रहे हैं।

कर दिखाएं
शुरुआती चिंताओं से उबरने के बाद आपको काम पर जुट जाना चाहिए। इन फ़ीलिंग्स का सामना करने का इकलौता कारगर उपाय तो यही है कि हम ख़ुद कुछ बदलाव करके दिखाएं। यह रातोंरात नहीं होगा, और इसका यह भी मतलब नहीं है कि पूरी दुनिया की ज़िम्मेदारी आप ही के ऊपर है।

एंग्ज़ाइटी इससे भी पैदा हो सकती है कि आप अपने को परफ़ेक्ट मानें और यह समझें कि आप कभी कोई ग़लती कर ही नहीं सकते। और यह कि अगर आपने कोई भूल की तो दुनिया का अंत हो जाएगा, जिसके ज़िम्मेदार आप ही होंगे।

वैसे कुछ कर दिखाने के लिए ये चीज़ें बहुत हैं :

-कम से कम एयर ट्रैवल करना
-शाकाहारी भोजन लेना
-ज़ीरो-वेस्ट लाइफ़स्टाइल का पालन करना 
-मिनिमलिज़्म की प्रैक्टिस करना
-एक एक्टिविस्ट बनना
-स्थानीय प्रशासन के साथ इनवॉल्व होना

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