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लाइफ को इफेक्ट करने वाले 5 इमोशंस

फीलिंग्स आते और जाते रहते हैं। बुरी भावनाओं से आपको खुशी महसूस नहीं होगी और जब आप दुखी होंगे तो स्माइल नहीं कर सकते, आइए जानते हैं ऐ्स ही कुछ इमोशंस के बारे में-

जलन (Jealousy)

इ्स ‘ग्रीन-आई मॉन्सटर' भी कहा जाता है। आपके पास क्या है, यह उसको अप्प्रेसिअशन नहीं करता, और जो आपके पास नहीं है, उस पर फोक्स करने को मजबूर करता है। जैसे आपके दोस्त ने नया मोबाइल फोन खरीदा और आपको भी खरीदना था, लेकिन नहीं ले पाए तो आपको जलन महसूस होगी इससे बचने के लिए अपने फोक्स को कहीं और लगाए। इ्स बारे में जागरूक रहें कि आप कौन हैं, कहां से बिलॉन्ग करते हैं और आपके पास जो कुछ है उसके लिए थैंकफुल होना सीखें।

दोष देना (Blame)

अगर किसी ने आपसे कभी मिसबिहैव किया हो या किसी ऐसे काम का दोष आप पर लगाया गया हो, जो आपने नहीं किया तो इससे हर किसी को टेंशन हो सकती है। एक टाइम के बाद हमें अपनी गलतियों की जिम्मेदारी लेना सीखना होगा, ताकि दू्सरों पर दोष डालने से पहले से सोच सकें कि इससे उसके जीवन में कया परिवर्तन होगा। अपने लिए कुछ समय निकाले और मन को शांत रखने के लिए मैडिटेशन करें, अपने थॉट्स को नोट करें और उससे रीड भी करें। इससे आपको आगे क्या करना है इसके बारे में बहुत हद तक हेल्प मिल सकती है।

गुस्सा (Anger)

यह एक स्ट्रांग फीलिंग है जो अलग - अलग कारणों से हो सकती है हालांकि, यह सवाल करना जरूरी है कि कोई भी चीज से हमें गुस्सा या नाराजगी क्यों होती है? किसी पर या किसी स्तिथि पर नाराज होना तब तक ठीक है, जब तक उससे किसी को नुक्सान न हो,लेकिन चिल्लाना, दू्सरे व्यक्ति या फर्नीचर को मारना और गाली देना एक्सेपट नहीं लकया जा सकता है।

 

अटैचमेंट (Attachment)

अगर आपका अटैचमेंट अपने परिवार की तरह ही कुछ और लोगो से है, साथ ही कुछ दोसतों के साथ क्लोज्ड अटैचमेंट भी है तो ठीक है, लेकिन ज्यादातर लोगो और चीजों से लगाव रखने से परेशानी पैदा होने लगती हैं।पुरानी चीजों से दूर होने की कोशिश करनी चाहिए, क्यूंकि तभी आप नई चीजों को अपनी लाइफ में एंटर होने के लिए जगह दे पाएंगे।कभी-कभी पुराने रिश्तों को भुलाकर नए रिश्तों को समय देना बेहतर होता है।

पछतावा (Regret)

कुछ चीजें या घटनाएं हमारी प्लानिंग के हिसाब से नहीं होतीं जिससे हमें बहुत अफ़सोस होता है- जैसे आपने कभी किसी के लिए कुछ कहा होगा जिसका गलत मतलब निकला गया या आप पेपर में चीटिंग करते पकडे गए और ऐसा करने के लिए आपको भारीकीमत भी चुकानी पडी, क्या ये सब करने के बाद आपको पछतावा हुआ? जब चीजें प्लान के रूप में काम नहीं करती हैं, परेशानियों का सामना करना पडता है जिससे बाद में पछतावा होता है। इ्स एक्सपीरियंस से आपने कया सबक सीखा है, इ्सके बारे में सोचें, आपको क्या करना चाहिए, आपको क्या नहीं करना चाहिए इन सब बातों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ना चाहिए जिससे आगे कोई पछतावा न हो।

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क्या भरी सभा में लोगों के सामने स्पीच देने में आपको भी बेचैनी महसूस होती है? हम आपको बताएंगे कि इससे कैसे निपटना है, जानने के लिए पढ़िए!
Nishtha JunejaTeentalkindia Content Writer

क्या भरी सभा में लोगों के सामने स्पीच देने में आपको भी बेचैनी महसूस होती है, ख़ासकर अपने क्लासमेट्स के सामने?‌ क्या यह आपको नर्वस कर देता है? क्या आपको ऐसा महसूस होता है कि आप कुछ भी बोल नहीं पाएंगे?

सोशल फ़ोबिया क्या है?

टीनटॉक एक्सपर्ट क्षितिजा सावंत के अनुसार,‘यह सोशल फ़ोबिया है, जब ‘गड़बड़ हो जाने' का डर बढ़ जाता है या अकारण ही सोशल सिचुएशन में शामिल उम्मीदें होने लगती है। कभी-कभी, यह इतना अधिक बढ़ जाता है कि व्यक्ति यह विश्वास करना शुरू कर देता है कि वह बेहोश हो जाएगा/जाएगी, मर जाएगा/जाएगी या ख़ुद को बहुत अधिक शर्मिंदा कर लेगा/लेगी, भले ही उसे प्रूव करने का कोई सबूत मौजूद न हो।'

सामाजिक परिस्थितियों में लगातार घबराहट और चिंता का यह अहसास सोशल फ़ोबिया हो सकता है। यह किसी भी समय पर, किसी भी कार्यक्रम के दौरान हो सकता है। जिन लोगों को सोशल फ़ोबिया है, उन्हें उन परिस्थितियों का सामना करने में बड़ी कठिनाई होती है, जिसमें वे बहुत असहज महूसस करते हैं। इसके कारण वे बहुत अधिक चिंताग्रस्त भी हो सकते हैं।

कैसे पहचानें यदि आप आपको सोशल फ़ोबिया है?

यदि आप एक निर्धारित समयावधि के लिए इन इन परिस्थितियों में बहुत ज़्यादा घबराहट महसूस करते हैं:

अपने सहपाठियों के सामने भाषण देने में
डिबेट करने में
रेस्त्रां में दूसरों के सामने खाने में
अपनी राय सामने न रख पाना
किसी को ‘न' नहीं कह पाना

लक्षण क्या हैं?
शारीरिक लक्षणों में शामिल है: कंपकंपी, पसीना आना, जी मिचलाना और आवाज़ लड़खड़ना।
सायकोलॉजिकल लक्षणों में शामिल हैं : इतनी एंग्जायटी होना कि दूसरे लोगों का ध्यान शारीरिक लक्षणों पर चला जाए।
इस बारे में बहुत अधिक सोचना कि दूसरे क्या सोचेंगे।
जिन लोगों को सोशल फ़ोबिया है वो लोग इस असहज स्थिति को जितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी छोड़ देते हैं। 
यह व्यक्ति की जीवनशैली और लोगों के साथ रिश्तों को प्रभावित करता है।


टीनटॉक एक्सपर्ट क्षितिजा सावंत द्वारा सोशल फ़ोबिया से निपटने के 5 टिप्स

1. ख़ुद से सकारात्मक बातें करना बहुत प्रभावी है। रोज़ाना, सोने से पहले और सुबह उठते ही सबसे पहले कम से कम कुछ बार ख़ुद से कुछ अफ़र्मेशन्स कहें। उदाहरण के लिए, आप ख़ुद से कह सकते हैं,‘दिन-ब-दिन, मैं बेहतर होता जा रहा हूं।' या ‘मैं यह करूंगा, मैं यह कर सकता हूं, मैं मज़बूत हूं।' इसे रोज़ाना करने की कोशिश कीजिए और गुज़रते समय के साथ चीज़ें वाकई में ठीक होंगी। 

2. एक पावर पोज़ दें (जोकि एक सुपरहीरो की तरह खड़ होना है)
हार्वर्ड सायकोलॉजिस्ट एमी कडी के अनुसार, भले ही आप अपना 2 मिनट का समय निकालकर एक पावर पोज़ दें या अकेले में जैसे आपके बेडरूम या कोई भी परफ़ॉर्मेंस से पहले स्टेज के पीछे एक सुपरहीरो की तरह खड़े हो जाएं, तो यह आपको ख़ुद के बारे में अच्छा फ़ील करने में मददगार होगा।

3. अपना सर्वश्रेष्ठ देने पर ध्यान दीजिए, न कि लोग क्या कहेंगे (या लोग मेरे बारे में क्या सोचेंगे)

4. स्टेज पर जाने से पहले या कोई भी नेटवर्किंग इवेंट से पहले अभ्यास करें। आप किसी भरोसेमंद दोस्त, कोई परिवार का व्यक्ति या आईने के सामने जो भी आप बोलने वाले हैं उसका अभ्यास कर सकते हैं। जितना ज़्यादा अभ्यास होगा, आप उतने बेहतर निखरकर सामने आएंगे।

5.‘इसमें सबसे बुरी चीज़ क्या हो सकती है?' जो लोग सोशल इंटरेक्शन से डरते हैं, वो लोग ये कर सकते हैं: कार्यक्रम में कम से कम 3 अनजान लोगों से बात करने की कोशिश कीजिए। कुछ लोग रूचि दिखाएंगे और कुछ लोग कोई रूचि नहीं दिखाएंगे। आपको रिजेक्शन से डरने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि सबसे बुरा यह ही हो सकता है कि कोई आपको मना कर देगा और आप उस जगह वापिस आ जाएंगे जहां आप कार्यक्रम में शामिल होने से पूर्व थे। इससे ज़्यादा बुरा कुछ नहीं हो सकता! याद रखिए, आपने अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की और सारे प्रयास किए, यह आपके लिए अच्छा है!

यदि आपका कोई प्रश्न है, तो आप टीनटॉक इंडिया एक्पर्ट को इस ईमेल पते  expert@teentalkindia.com पर भेज सकते हैं।

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