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ज़िंदगी में संतुष्टि हासिल करने के लिए क्या कर सकते हैं युवा

यदि आप ख़ुशी, संतुष्टि, आनंद और आंतरिक शांति का अनुभव करना चाहते हैं, तो इसके लिए ज़रूरी है कि आप अपने ज़ुनून और ज़िंदगी के उद्देश्य को सीखें।

अभी आप अपनी ज़िंदगी से कितना संतुष्ट हैं? आप अपनी ज़िंदगी में ख़ुद की संतुष्टि में सुधार कैसे कर सकते हैं? ये सवाल अक्सर आपके दिमाग में आते हैं, क्या ऐसा नहीं है? हम अक्सर ख़ुशी को भाग्य या परिस्थिति का कारण मानते हैं। कुछ लोग हैप्पी ब्रेन के साथ पैदा होते हैं और कुछ की ज़िंदगी में समस्याओं नहीं होती और प्यारा परिवार होता है। प्रकृति द्वारा ज़िंदगी की संतुष्टि एक व्यक्तिपरक पैमाना है। इस उद्देश्य को पहचानने, सम्मान देने और स्वीकार करने का काम ज्यादातर सबसे कामयाब लोग ही करते हैं। ऐसे लोग यह समझने के लिए समय लेते हैं कि वह क्या कर रहे हैं और उसके बाद वह फिर ज़ुनून और उत्साह के साथ आगे बढ़ते हैं।

आप भी अपनी ज़िंदगी में अधिक संतुष्ट हासिल कर सकते हैं :

सेहतभरी ज़िंदगी : हेल्दी लाइफस्टाइल के लिए एक्सरसाइज़, सही डाइट, स्मोकिंग जैसे हानिकारक एक्सपोज़र से बचकर शारीरिक रूप से सेहतमंद रहें। हेल्दी रहने का अच्छा असर आपके मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ेगा।

एजुकेटेड हों : ज़िंदगी सार्थक सीखने और समझने से ही होती है। नौकरी लगने के बाद भी आपका एजुकेशन नहीं रुकना चाहिए। किसी ने किसी डिस्टेंस एजुकेशन कोर्स में एडमीशन लें, ऑनलाइन लर्निंग पोर्टल के सर्टिफिकेट कोर्स या फिर ऑनलाइन ख़ुद से भी पढ़ सकते हैं।

सोशल सपोर्ट : फ्रेंड्स से लेकर फैमिली, पार्टनर, कोवर्कर, कम्युनिटी ग्रुप या हेल्थ केअर प्रोफेशनल्स हर सोशल सपोर्ट युवा के लिए अलग हो सकता है। परंपरागत तौर पर अधिक करीबी रिश्ता पार्टनर या क्लोज फ्रेंड्स से होता है, इसलिए उनका बहुत ज्यादा प्रभाव लाइफ सेटिस्फेक्शन को सुधारने में होता है।

कोई हॉबी विकसित करना : यह वह है जिसे आप बनाते हैं। इसके नतीजे से आपको संतुष्टि मिलेगी।  यदि आप अपने लिए कोई हॉबी खोजने में स्ट्रगल कर रहे हैं, तो कई चीजों को एक्सप्लोर करें। दूसरे शब्दों में कहूं तो कई अलग-अलग हॉबी के साथ प्रयोग करें, जब तक आप उनमें से किसी एक को नहीं पा लेते।

सकारात्मक रहिए : यदि आप ज़िंदगी में संतुष्टि चाहते हैं, तो सकारात्मक सोचिए भले ही नतीजा कुछ भी हो। आज और अभी में जियें, आपके पास जो भी है उसे सराहें और दूसरों से अपनी तुलना करना बंद करें। इस बात पर ध्यान दें कि आपको ख़ुद में क्या अच्छा लगता है, या आप किस चीज़ में अच्छे हैं उस पर ध्यान दें।

ज़िंदगी की संतुष्टि मानसिक, पूरी ज़िंदगी के संपूर्ण मूल्यांकन और सबसे बड़े संकेत खुशी, स्वस्थ रहने और सकारात्मक सोच है। हम सभी अपने-अपने मन की जिम्मेदारी ले सकते हैं। मगर कम से कम आपको यह पता होना चाहिए कि आप खुश नहीं हो, भले ही परिस्थितियां कैसी भी हों, उनमें बदलाव के लिए आप अपने दिमाग में बदलाव कर सकते हैं।

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एंगर मैनेजमेंट के पांच तरीक़े

क्या आपको बहुत जल्दी ग़ुस्सा आ जाता है और क्यों? क्या कभी आपको ऐसा भी लगता है कि आप सुबह उठते से ही ग़ुस्से में होते हैं?
Gousiya Teentalkindia Content Writer

इस तरह की सिचुएशंस पर हमारा रिस्पॉन्स ही तय करता है कि हम कौन हैं और दूसरे हमें कैसे देखते हैं। हमारे ग़ुस्से की बहुत सारी वजहें हो सकती हैं। कई बार तो इसका कारण हमारे शरीर में आ रहे बदलाव भी होते हैं। हम सब जानते हैं कि हॉर्मोन्स के कारण मूड स्विंग्स और कंफ़्यूज़्ड इमोशंस हो सकते हैं। या शायद हमें स्ट्रेस के कारण ग़ुस्सा आ सकता है। जो लोग बहुत प्रेशर में आते हैं, उन्हें जल्दी ग़ुस्सा आता है। या शायद यह आपकी शख़्सियत का एक पहलू भी हो सकता है कि हो सकता है आप भावुक क़िस्म के व्यक्ति हों और अपनी भावनाओं को इम्पलसिव तरीक़े से व्यक्त करते हों, या आप आसानी से टेम्पर लूज़ कर देते हों। एक और कारण यह भी हो सकता है कि ज़िंदगी में किन लोगों को हम रोल मॉडल मानते हैं। शायद आपने अपने परिवार में दूसरे लोगों को ग़ुस्से में तमतमाते हुए देखा हो।

जो भी वजह हो, एक बात तो तय है- आपको ग़ुस्सा बहुत आता है। सभी को आता है और इसलिए इसमें बुरा महसूस करने जैसा कुछ नहीं है। लेकिन महत्व इस बात का है कि हम अपने एंगर को कैसे मैनेज करते हैं। इसके पांच तरीक़े हैं। हर स्टेप में आपको ख़ुद से कुछ सवाल करने होंगे और फिर अपने जवाबों को चुनना होगा।

इस उदाहरण को लें : आप अपने दोस्तों के साथ बाहर जा रहे हैं कि तभी आपकी मॉम ने आपको अपना रूम साफ़ करने या घर पर ही रहने को बोल दिया। और अब आपको बहुत ग़ुस्सा आ गया है।

1) प्रॉब्लम को आइडेंटिफ़ाई कीजिए : पता लगाएं कि आपको ग़ुस्सा किस बात पर आया है और क्यों। इसे शब्दों में कहें या लिखें कि आप इस बात से अपसेट हो गए हैं।

ख़ुद से पूछें : मैं ग़ुस्से में क्यों हूं? आप इसे अपने मन में भी कर सकते हैं या ज़ोर से बोलकर भी। लेकिन जवाब को स्पष्ट और साफ़ रखें।

2) जवाब देने से पहले सम्भावित समाधानों के बारे में सोचें : यही वो जगह है, जहां आप एक मिनट रुककर अपने ग़ुस्से को मैनेज करने के लिए ख़ुद को समय देते हैं। और यहीं पर आप इस बारे में सोचते हैं कि रिएक्ट कैसे किया जाए- लेकिन रिएक्ट किए बिना।

ख़ुद से पूछें : मैं क्या कर सकता हूं? कम से कम तीन बातों के बारे में सोचें। उदाहरण के लिए, इस स्थिति में आप सोच सकते हैं कि :

(ए) मैं मॉम पर चिल्ला सकता हूं और अपना ग़ुस्सा ज़ाहिर कर सकता हूं।

(बी) मैं अपना रूम साफ़ करने के बाद कह सकता हूं कि क्या अब मैं बाहर जाऊं।

(सी) मैं बिना बताए चुपचाप बाहर जा सकता हूं।

3) हर सॉल्यूशन के नतीजे के बारे में सोचें : यहां आप इस बारे में सोचते हैं कि अगर आप इन सभी सिचुएशंस पर अलग-अलग रिएक्ट करते हैं तो क्या हो सकता है।

ख़ुद से पूछें : हर ऑप्शन का क्या नतीजा होगा? उदाहरण के लिए :

(ए) मां पर चिल्लाने से समस्याएं और बढ़ेंगी, यह भी हो सकता है कि आपको घर में बंद कर दिया जाए।

(बी) रूम साफ़ करने में समय लगता है और आप लेट हो सकते हैं। लेकिन रूम साफ़ करने के बाद दोस्तों के साथ बाहर जाने पर फिर आपको उसके बारे में चिंता करने की ज़रूरत नहीं होगी।

(सी) बिना बताए चुपचाप बाहर चला जाना प्रैक्टिकल नहीं होगी। वैसे भी यह सम्भव नहीं है कि आप कई घंटों तक बाहर रहें और किसी को पता ही ना चले। फिर जब आप पकड़े जाएंगे तो क्या होगा, इस बारे में तो बात ही ना करें।

4) एक फ़ैसला लें : आपको तीनों में से किसी एक विकल्प को चुनने का फ़ैसला लेना ही होता है। अच्छे से सोचें और जो फ़ैसला आपको सबसे असरदार लगता है, उसी को चुनें।

ख़ुद से पूछें : मेरे लिए सबसे अच्छी चॉइस क्या होगी? लेकिन जब तक आप इस बारे में अच्छे से सोचेंगे, तब तक मां पर चिल्लाने का समय जा चुका होगा और बिना बताए बाहर जाना बहुत रिस्की होगा। तो ए और सी अच्छे ऑप्शंस नहीं कहे जा सके। बी ही सबसे अच्छी चॉइस मानी जा सकती है। 

एक बार फ़ैसला कर लेने के बाद उस पर काम करना शुरू करना होगा।

5) अपनी प्रोग्रेस जांचें : सिचुएशन ओवर होने के बाद भी कुछ समय बैठकर सोचें कि जो हुआ वो कैसा रहा।

ख़ुद से पूछें : आपने यह कैसे किया? क्या वही हुआ, जो सोचा था? अगर नहीं तो क्यों नहीं? क्या मैं अपने फ़ैसले से संतुष्ट हूं? सिचुएशन पूरी होने के बाद चीज़ों पर एक बार सोचना ज़रूरी होता है। इससे आप अपने बारे में जानेंगे और यह भी समझेंगे अलग-अलग सिचुएशंस में कौन-सी प्रॉब्लम-सॉल्विंग एप्रोच आपके लिए सबसे अच्छी है।

अगर आपके द्वारा लिया गया फ़ैसला आपके लिए अच्छा साबित होता है तो स्वयं की पीठ थपथपाइए। और अगर नहीं होता है तो ऊपर की पांचों स्टेप्स को पढ़िए और पता लगाने की कोशिश कीजिए कि यह क्यों नहीं हुआ।

जब आप शांत हों तब इस बारे में कुछ कहना बहुत सरल होता है, लेकिन जब आप ग़ुस्से में हों तब यह मुश्किल है। इसलिए इसकी प्रैक्टिस लगातार करते रहें। 
 

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