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क्या वर्क फ्रॉम होम हमारी फ़िज़िकल और मेंटल हेल्थ के लिए नुक़सानदेह है?

'वर्क फ्रॉम होम' के कॉन्सेप्ट के साथ सभी सहज नहीं हैं। कुछ के लिए यह अनेक फ़िज़िकल और मेंटल समस्याओं का कारण बन रहा है। आइए, उन समस्याओं को समझें, जिनका कोविड-19 लॉकडाउन के कारण अनेक लोगों को सामना करना पड़ रहा है।

वर्क फ्रॉम होम कल्चर अभी तक इंडिया के लिए बहुत जानी-पहचानी नहीं थी। लेकिन कोविड-19 और उसके कारण हुए लॉकडाउन के बाद एम्प्लाईज़ के पास इसके सिवा कोई ऑप्शन ही नहीं बचा। पर अब उन्हें अपनी मेंटल और फ़िज़िकल हेल्थ के सम्बंध में अनेक समस्याएं पेश आ रही हैं। ऐसी रिसर्च सामने आई हैं, जो बतलाती हैं कि वर्क फ्रॉम होम के कारण कर्मचारियों को अकेलेपन, अलग-थलग हो जाने के अहसास, मानसिक तनाव, थकान, खानपान की बुरी आदतों और शरीर में होने वाले अनेक प्रकार के दर्द का सामना करना पड़ रहा है।

अमेरिकन साइकोलॉजी एसोसिएशन यानी एपीए के मुताबिक़ इस तरह के सोशल आइसोलेशन से लोगों में डिप्रेशन आ सकता है, उनकी नींद प्रभावित हो सकती है, उनके दिल की सेहत बिगड़ सकती है और उनके अपने सोचने-समझने के तरीक़ों पर इसका बुरा असर पड़ सकता है।

चलिए, एक-एक कर इन समस्याओं पर नज़र डालते हैं-

काम और जीवन के बीच संतुलन गड़बड़ाना
मौजूदा हालात में अनेक लोगों को वर्क फ्रॉम होम के कारण मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। जिनका घर-परिवार है, उनके लिए घर और कार्यालय की ज़िम्मेदारियों के बीच एक बैलेंस बना पाना मुश्किल साबित हो रहा है। जो लोग अकेले रहते हैं, वो ख़ुद को सबसे अलग-थलग महसूस कर रहे हैं। ऐसे भी प्रोफ़ेशनल्स हैं, जो अपने साथियों और मैनेजर्स से बात करने के बाद ही प्रोडक्टिव हो पाते हैं। लेकिन मौजूदा हालात से ना केवल उनके प्रदर्शन पर असर पड़ रहा है, बल्कि उनकी मेंटल और इमोशनल स्थिति भी इससे बिगड़ रही है। पर्सनल और प्रोफ़ेशनल के बीच जो सीमारेखा होती है, वो अब सभी के लिए धुंधला चुकी है।

अनियमित नींद 
जैसे ही काम और जीवन का बैलेंस गड़बड़ाता है, तनाव उभरकर सामने आ जाता है। कई कम्पनियां आज भी अपने एम्प्लाईज़ से बहुत सारे काम की उम्मीद लगाए हुए हैं और इससे उनका जीना मुहाल कर दिया है। उनके सोने-जागने का समय गड़बड़ा गया है। कई लोग दिमाग़ी रूप से थके हो जाने के बावजूद पूरी नींद नहीं ले पाने की शिक़ायत कर रहे हैं।

फ़िज़िकल एक्टिविटी कम और अनहेल्दी ईटिंग ज़्यादा
लोगों को काम के बीच में ब्रेक लेने की आदत होती है। वे कुछ देर के लिए टहलने चले जाते हैं, या वर्कआउट करते हैं। अब जब वो सब चीज़ें अचानक रुक गई हैं तो उनके लिए ठीक से काम कर पाना मुश्किल साबित हो रहा है। चूंकि तनाव और भूख के हार्मोन्स का सीधा ताल्लुक़ होता है, इसलिए अब लोग पहले से ज़्यादा अनहेल्दी फ़ूड खा रहे हैं, जो आसानी से मिल जा रहा है, उसी से काम चला रहे हैं, इससे भी उनकी जीवनशैली बिगड़ रही है और तनाव बढ़ रहा है।

वर्क फ्रॉम होम में फ़िट कैसे रहें?

-अपने वर्कस्पेस को अलग करें और इसे अपनी पर्सनल लाइफ़ में दख़ल नहीं देने दें
-अपना एक रूटीन बनाएं और उसका पालन करें
-टाइम ट्रैकिंग एप्स का इस्तेमाल करें और अपने वर्किंग टाइम में उन्हें फ़ॉलो करें
-हेल्दी फ़ूड खाएं, अपने साथ कुछ ड्रायफ्रूट्स रखें और लगातार पानी पीते रहें
-हर घंटे में तीन मिनट का ब्रेक लें और स्ट्रेचेस वग़ैरा करते रहें
-समय पर अपना काम ख़त्म करने की कोशिश करें और अगले दिन तक लैपटॉप को बंद ही रखें
-अपने कलीग्स से रोज़ाना बात करते रहें
-साथ ही एक्सरसाइज़, मेडिटेशन और सेल्फ़-केयर की दूसरी चीज़ें भी करते रहें
-कई घंटों तक काम करने के बाद डिजिटल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखें और रिलैक्स होने की कोशिश करें

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कोविड-19 के दौरान टीनएजर्स की मेंटल हेल्थ

टीनएजर होना, टीनएज की समस्याओं का सामना करना, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना, लॉकडाउन में रहना, एग्ज़ाम्स का कैंसल हो जाना, घर में क़ैद रहना- इस सबसे जूझना आसान नहीं है। ये सच है कि हममें से बहुतेरे आज घर पर रहकर बेचैनी का अनुभव कर रहे हैं। लेकिन जब हम अपनी फ़िज़िकल हेल्थ का ध्यान रखने के लिए ये सब कर रहे हैं, तब मेंटल हेल्थ के बारे में सोचना भी ज़रूरी हो जाता है। आइए देखते हैं हम इसे कैसे कर सकते हैं।
Snigdha Teentalkindia Counsellor

टीनएज एक नाज़ुक और चुनौती भरा समय है। सभी टीनएजर्स पहले ही अपनी बहुत सारी समस्याओं से जूझ रहे होते हैं और अब कोरोनावायरस के कारण उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। आजकल हमारा हरेक दिन कोविड-19 से प्रभावित दुनियाभर के लोगों की ख़बरों से शुरू और ख़त्म होता है। एग्ज़ाम्स की तारीख़ें आगे बढ़ रही हैं, इवेंट्स कैंसल हो रहे हैं। हम सभी घरों में क़ैद हैं, सेल्फ़-आइसोलेशन में जी रहे हैं और लॉकडाउन का पालन कर रहे हैं। लेकिन इसके सिवा हमारे पास कोई और रास्ता भी नहीं है।

हां, ये एक मुश्किल समय है। टीनएजर्स तो ऐसे में ख़ुद को और मुसीबत में महसूस कर सकते हैं। ऐसे में उनके लिए अपनी मेंटल हेल्थ का ध्यान रखना ज़रूरी हो जाता है। हमारे टीनटॉकइंडिया एक्सपर्ट इसके लिए आपसे कुछ टिप्स शेयर करना चाहते हैं।

  • बेचैनी तो होगी ही

दुनिया में जो कुछ हो रहा है, उसमें केवल आप ही अकेले नहीं हैं, जिसे सबसे अलग रहकर जीना पड़ रहा है। लेकिन क्या आपको पता है, ऐसे मौक़ों पर बेचैनी महसूस करना इतना भी बुरा नहीं है। रिसर्चरों ने पाया है कि जिन लोगों को मुश्किल हालात में बेचैनी महसूस होती है, वो चुनौती का सामना करने के लिए दूसरों की तुलना में अधिक तैयार रहते हैं, क्योंकि उनके दिमाग़ चुनौतियों से जूझने के लिए ख़ुद को तैयार रखते हैं। इसी तनाव के कारण आप हाथ धोना, मास्क पहनना, अपने चेहरे को नहीं छूना, घर पर रहना जैसी सावधानिया बरतते हैं।

फिर भी अगर आपको सर्दी, खांसी या बुख़ार हो तो तुरंत अपने डॉक्टर से जांच कराकर कोविड-19 का टेस्ट करा लें। ये लक्षण होने का ये मतलब नहीं है कि आपको कोविड-19 होगा ही, फिर भी जांच कराने में कोई हर्ज नहीं है।

  • अपनी फ़ीलिंग्स शेयर कीजिए

दोस्तों से मुलाक़ातें हो नहीं पा रहीं, एग्ज़ाम्स कैंसल हो रहे और चारों तरफ़ से निगेटिव ख़बरों का हमला हो रहा है। इसे बर्दाश्त करना आसान नहीं है। फिर भी मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि अपनी फ़ीलिंग्स और भावनाओं को व्यक्त करने के बहुत पॉज़िटिव परिणाम होते हैं। इससे तनाव घट सकता है और बड़े सदमों का सामना करने के लिए हम बेहतर स्थिति में रहते हैं। जब हम शेयर करते हैं, तो हम आगे बढ़ते हैं। हम तरह-तरह के नए विचार सीखते हैं। इससे हम यह भी समझ पाते हैं कि हम इन समस्याओं का सामना करने वाले अकेले नहीं हैं।

तो ऐसी स्थिति में आप अपने दोस्तों और प्रियजनों से सम्पर्क कर सकते हैं और वॉइस या वीडियो कॉल के ज़रिये उनसे कनेक्ट हो सकते हैं।

  • एक रूटीन बनाएं और फ़ॉलो करें

जब हमारे आसपास होने वाली हर चीज़ नई और चौंकाने वाली हो, तब एक रूटीन बनाकर उसका पालन करने से हमें यह अहसास हो सकता है कि चीज़ें हमारे नियंत्रण में हैं। हमारा दिमाग़ अपने रोज़मर्रा को कामों को समय पर ख़त्म करने पर फ़ोकस हो जाता है। इससे हम नकारात्मक भावनाओं से भी बचे रहते हैं।

  • कोई फ़न एक्टिविटी शुरू कीजिए

जब सब तरफ़ इतनी निगेटिविटी फैली हो और लोग घरों में रहना मुश्किल पा रहे हों तब कोई ना कोई फ़न एक्टिविटी हमें ख़ुश बने रहने में मदद करती है। इसमें सोशल मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है। आज लोग टिक-टॉक चैलेंजेस ले रहे हैं, इंस्टाग्राम स्टोरीज़ पर गेम्स खेल रहे हैं, सोशल मीडिया पर अंताक्षरी खेल रहे हैं, ऑनलाइन वर्कआउट वीडियो बना रहे हैं या मेक-अप ट्यूटोरियल ले रहे हैं। वे अपने दोस्तों और फ़ॉलोअर्स से अपने रोज़मर्रा की चीज़ें शेयर कर रहे हैं। इससे उन्हें अकेलेपन का अहसास नहीं होता है।

  • ख़ुद को प्यार करें 

अगर हम ख़ुद से प्यार करते हैं तो ज़िंदगी में अच्छे फ़ैसले ले पाते हैं। स्टूडेंट्स के रूप में आप सभी अपनी पढ़ाई, स्कूल, कोचिंग और एग्ज़ाम्स की तैयारियों में बिज़ी होंगे, लेकिन अब आपको घर पर रहना पड़ रहा है। लेकिन आप इस समय का इस्तेमाल अपनी हॉबीज़ पूरी करने के लिए कर सकते हैं। आप एक नई हॉबी भी खोज सकते हैं। आप दोस्तों के साथ ऑनलाइन गेम्स खेल सकते हैं, अपने पेड़-पौधों का ख़याल रख सकते हैं, कोई म्यूज़िकल इंस्ट्रूमेंट बजाना सीख सकते हैं या कोई नई भाषा ऑनलाइन कोर्सेस की मदद से सीख सकते हैं। आप उन मूवीज़ और शोज़ को भी देख सकते हैं, जिन्हें पहले मिस कर दिया था। या और कुछ नहीं तो आप केवल शांति से बैठकर मेडिटेशन या रिलैक्स कर सकते हैं और चुनौती भरे समय के लिए ऊर्जा जुटा सकते हैं।
 

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