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ऑब्सेसिव थिंकिंग को कैसे रोकिए?‌

यदि आप उन व्यक्तियों मे से एक हो जो ओवर थिंकिंग की वजह से निगेटिव विचारों से घिरे रहते हो या नींद डिस्टर्ब होती है, तो आप इस सिचुएशन से बाहर आने के लिए इन टिप्स फॉलो कर सकते हैं।

क्या आप उन लोगों में से एक हो जो निगेटिव थिंग्स सोचते हो?

क्या आपको ऐसा महसूस होता है कि आपके ब्रेन ने ज़िंदगी में मिले निगेटिव एक्सपीरियंस में खुद को जकड़ लिया है?

क्या आपको ऐसा लगता है कि आप अपने ही दिमाग में कैद हो गए हैं?

यदि इन सभी स्टेटमेंट्स का जवाब हां है, तो ये आर्टिकल आपके लिए ही है।

ऑब्सेसिव थिंकिंग जिसे जुनूनी सोच या बहुत ज्यादा सोचना भी कहते हैं। बुरे विचारों और इमेज पर कंट्रोल नहीं कर पाना होता है। ब्रेन इमेजिंग स्टडी संकेत करती है कि ऑब्सेसिंग थिंकिंग न्यूरोलॉजिकल डिस्फंक्शन से संबंधित है। अनजाने कारणों की वजह से यह लगातार होने लगता है। कुछ लोग जहां ऑब्सेसिंग को पहली बार महसूस करते हैं तो कुछ लोगों में इसके मल्टीपल एपिसोड होते हैं, समय के साथ स्थिति में भी खास बदलाव आते हैँ। 

चिंता में कमी करने के लिए यहां पांच टिप्स दिए गए हैं, जिन्हें आप फॉलो कर सकते हैँ :

1 अवेयरनेस बढ़ाना : 
पहला कदम आपके लिए यह है कि अपने बिहेवियर या थिंकिंग के प्रति अवेयर हो जाएं। अगली बार जब भी आप खुद को इस स्थिति में पकड़ें, तो खुद से तेज आवाज में स्टॉप कहिए।

2 नाम दें :
जब भी हम खुद को निगेटिव थिंकिंग से घिरा हुआ पाते हैं, निश्चित ही हमें डर लगता है। निगेटिव थिंकिंग और इसके पीछे के कारणों को लिखिए। जिस पल आप ऐसा करोगे, तो आप अपने इमोशन पर कंट्रोल कर सकोगे।

3 प्रेक्टिस माइंडफुलनेस :
माइंडफुलनेस एक्सरसाइज या मेडिटेशन करने से दिमाग को शांति मिलती है और आप अपनी प्रजेंट सिचुएशन पर फोकस करते हो। मेडिटेशन और मेडिटेशन शुरु करने के बारे में अधिक जानने के लिए आप इस लिंक पर क्लिक कर सकते हो।
https://www.teentalkindia.com/explore/general/importance-of-meditation-for-youth

4  एक्सेप्टेंस यानी स्वीकारना : 
एक बार अपने एंग्जाइटी के सोर्स के बारे में सोचिए। ऐसे कौन से इमोशन हैं जो आप महसूस करते हो। बिना किसी गिल्ट के खुद को महसूस करने की परमीशन दें। जैसे आप महसूस करते हैं, उसे एक्सेप्ट करें। ख़ुद से पूछिए कि आप क्या अपने बीते कल को बदल सकते हो? यदि आपका जवाब नहीं है, तब आपके लिए बेस्ट होगा कि आप इसे एक्सेप्ट करें। गहरी सांस लें और कुछ ऐसा करें जिसे करने से आपको खुशी मिले। यदि जवाब हां है, तो पहचान करें कि आप क्या कर सकते हो।

5 चिंता से ब्रेक लेने के लिए एक शेड्यूल बनाएं : 
ख़ुद पर दया करें और याद रखें कि आपको यह सब एक बार में नहीं करना है - ऐसा महसूस नहीं करना चाहिए कि यदि आप डरे हुए या चिंतित विचार रखते हैं तो आप कामयाब नहीं हुए हैं। जब आप बहुत सारे निगेटिव विचारों को महसूस करते हैं, तो अपने आप को दिन में 15-20 मिनट का ब्रेक दें, जहां आप बैठें और उन सभी चीजों को छोड़ दें, जिनके बारे में आप चिंतित हैं। यह आपको हेल्दी बाउंड्री बनाने में मदद करेगा।

यदि आप ये सब करने के बावजूद अपने निगेटिव थॉट्स पर कंट्रोल नहीं कर पा रहे हैं, तो थैरेपी लें और प्रोफेशनल एडवाइज आपके लिए हमेशा मददगार होगी।  

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डर और फोबिया अलग-अलग हैं

डर और फोबिया के बीच में अंतर यह है कि डर यानी फीयर सामान्य होता है, जबकि फोबिया असामान्य स्वरूप है।
Snigdha Teentalkindia Counsellor

हर कोई अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए अलग-अलग भाषा का उपयोग करता है। मैंने कई क्लाइंट्स को देखा है, जो सामान्य डर या फीयर का वर्णन करने के लिए "फोबिया" शब्द का उपयोग करते हैं क्योंकि वे डर और फोबिया के बीच का अंतर नहीं समझते हैं।

डर और फोबिया लगभग एक जैसे होते हैं। डर एक वास्तविक या महसूस हो रहे खतरे की एक भावनात्मक प्रतिक्रिया है, जबकि फोबिया एक बेवजह का भय है, इसमें नुकसान की संभावना नहीं होती हैं।

डर हर किसी की ज़िंदगी का सामान्य और हेल्दी हिस्सा है। ऐसी स्थिति जो आपके लिए नुकसानदायक हो उसमें प्रवेश करने को लेकर सतर्क करता है और उन खराब स्थिति से बाहर कैसे आना है, जो आपके लिए अच्छी नहीं हैं उसमें भी मदद करता है।

हालांकि, फोबिया सामान्य से डर को ऐसी नासमझी में बदल देता है जो आपके दिमाग पर नियंत्रण कर लेता है। कुछ लोग ऐसे होते हैं जिन्हें पता होता है कि वे फोबिया से ग्रस्त हैं और यह भी जान लेते हैं कि उनका डर बेवजह है उसके बावजूद भी वे इस पर कोई नियंत्रण नहीं कर पाते हैं।

जब  चिंता का मेंटल और फिजिकल असर रोजाना की ज़िंदगी में होने लगता है, तो डर फोबिया बन सकता है। 

जो व्यक्ति किसी तरह के फोबिया से ग्रस्त होता है, उसे धड़कन तेज होने, सांस लेने में तकलीफ, पसीना अधिक आने की समस्या होती है, उसे फोबिक स्थिति से तुरंत बाहर आने की जरूरत होती है, और कभी-कभी ऐसे व्यक्ति को मरने का भी डर लगने लगता है।
 

फियर और फोबिया के लिए प्रतिक्रियाएं कैसे अलग हैं :

यह एक सामान्य स्थिति से समझ सकते हैं, जैसे : “रूही जो कि एयरोप्लेन में बैठने से डरती है” 

अगर आपको किसी चीज से डर लगता है, तो आप हमेशा उस चीज या उस स्थिति में जाने से डरते हो। इसलिए रूही जो हमेशा प्लेन में बैठने में चिंतित होती है, कई बार वह इस चिंता को महसूस करने से बचने के लिए दवाई लेती है या कई बार वह फ्लाइट में बैठने से पहले वह अपने ट्रैवलिंग के डर को मैनेज करने के लिए बहुत सारा पानी पीती हैं। वह फ्लाइट के अलावा दूसरे किसी ट्रांसपोर्ट के विकल्प को ट्रैवल के लिए प्राथमिकता देती हैं, मगर जब फ्लाइट  में ट्रैवल करना ज़रूरी होता है, तो वह सावधानियों को बरतती है।


 यह स्थिति अलग हो सकती है, यदि रुही को फ्लाइट में सफर का फोबिया है। तब यह प्रतिक्रिया बहुत तीव्र हेगी। रुही को यदि हल्का फोबिया है तो फ्लाइट में बैठने पर पसीने से तरबतर हो सकती है, डर की वजह से रो सकती है और घबराहट की वजह से डर सकती है। ट्रैवल का पूरा अनुभव ही खराब हो सकता है।

   यदि रुही को गंभीर फोबिया है तो वह फ्लाइट में बैठने में बिलकुल असमर्थ होगी। अगर उसे फ्लाइट में सफर करना है और ट्रांसपोर्टेशन का कोई दूसरा विकल्प नहीं है तो वह अपना ट्रिप और वैकेशन भी कैंसल कर देगी। ऐसे में वह एयरपोर्ट पर अपने परिवार के किसी भी सदस्य या दोस्त को लेने या छोड़ने में असमर्थ हो सकती है। वह आकाश में उड़ने वाले एयरोप्लेन के शोर से भी परेशान हो सकती है।

कैसे मदद करें :

फोबिया में हर व्यक्ति में अलग-अलग लक्षण नज़र आते हैं और इसलिए इसे वह ख़ुद नहीं पहचान सकता है। यहां इस आर्टिकल में हमने इसे लेकर कुछ गाइडलाइन पर चर्चा की है, ताकि आप यह तय कर सकें कि आपको कब मदद लेनी है। यहां लक्षण पर्सन टू पर्सन अलग-अलग हो सकते हैं।

इसे पढ़ने के बाद यदि आपको लगता है कि आपको फोबिया है, तो प्लीज़ मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल से मदद लीजिए या फिर साइकोलॉजिस्ट या साइकेट्रिस्ट से मदद ले। ये सही ढंग से पहचानने और ट्रीटमेंट में आपको मदद करेंगे।

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