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हमें कब काउंसलिंग की ज़रूरत होती है?

जानें कि कब आपको किसी प्रोफ़ेशनल की मदद लेना चाहिए

लोग अब मेंटल हेल्थ को लेकर पहले से ज़्यादा सचेत हैं। काउंसलिंग के लिए किसी प्रोफ़ेशनल की मदद लेने में भी अब अड़चन नहीं होती है। इसी के साथ वह ज़रूरी सवाल हमारे सामने आ खड़ा होता है- हम कैसे जानें कि कब हमें किसी काउंसलर की मदद लेना चाहिए?

अलबत्ता तरह-तरह के मेंटल डिसऑर्डर के लिए अब इलाज उपलब्ध है, जिससे आपके कुछ सिम्पटम्स कम हो सकते हैं। थैरेपी की मदद से लोग अब ख़ुद ही सिम्पटम्स का इलाज करने लगे हैं। इससे उनके पास एक ऐसी स्किल आ जाती है, जो थैरेपी के ख़त्म होने पर भी जीवनभर इम्प्रूव की जा सकती हैं।

किसी तरह के मानसिक रोग का होना अब सामान्य बात है, लेकिन केवल 40 प्रतिशत लोगों को ही इससे सम्बंधित मदद मिल पाती है। जिन मनोरोगों का इलाज नहीं हो पाता, वो धीरे-धीरे हम पर दूसरे निगेटिव असर डालने लगते हैं, जैसे कि पढ़ाई या काम कर पाने में असमर्थता, रिलेशनशिप मेंटेन कर पाने में मुश्किलें, बीमारियां और कुछ मामलों में आत्महत्या तक।

जब कोई भी मानसिक रोग हमारे जीवन को प्रभावित करने लगता है तब थैरेपी की ज़रूरत होती है। थैरेपी की मदद से हम जान पाते हैं कि हम क्या फ़ील कर रहे हैं, क्यों फ़ील कर रहे हैं और इसका सामना कैसे किया जाए। थैरेपी हमें एक ऐसा सेफ़ स्पेस देती है, जिसमें हम ब्रेकअप, किसी को खोने का दु:ख या फ़ैमिली में होने वाली परेशानियों जैसी चीज़ों पर बात कर सकते हैं। लेकिन इसके साथ ही अगर किसी को फ़ोर्स करके उसे थैरेपी दी जाए तो वो इसका विरोध भी कर सकते हैं और अपने ही भले के लिए जो चीज़ें की जानी चाहिए, वो करने में उन्हें मुश्किलें पेश आ सकती हैं।

ये कुछ पॉइंटर्स हैं, जिनकी मदद से आप जान सकते हैं कि आपको किसी थैरेपिस्ट के पास जाने की ज़रूरत है या नहीं :

-आप दिन में कम से कम एक घंटा इस बारे में सोचने में बिताते हैं कि समस्या से कैसे निपटा जाए
-आप इस समस्या के कारण शर्मिंदगी महसूस करते हैं या दूसरे लोगों से कतराते हैं
-इसके कारण आपके जीवन पर बुरा असर पड़ा है
-इससे आपकी पढ़ाई, काम और रिलेशनशिप्स प्रभावित हो रहे हैं
-इस समस्या का सामना करने के लिए आपने अपने जीवन में बदलाव किए हैं या नई आदतें विकसित की हैं

नीचे कुछ फ़ीलिंग्स के बारे में बताया जा रहा है। अगर आप पाते हैं कि इनमें से कोई भी आपकी ज़िंदगी में ज़्यादा दख़ल देने लगी हैं तो उनके बुरे असर को कम करने में थैरेपी आपकी मदद कर सकती है। अगर आपको लगता है कि इन सिम्पटम्स से आपको परेशानियां हो रही हैं या वो आपको कंट्रोल करने लगे हैं तो मदद लेने का समय आ गया है।

असहायता
जब आपको लगता है कि आपके सामने इतनी चीज़ें और समस्याएं हैं कि आप उनके सामने असहाय हो गए हैं और आपके लिए आराम कर पाना या चैन की सांस ले पाना भी मुश्किल होता जा रहा है।

थकान
यह एक फ़िज़िकल सिम्पटम है, जो अकसर किसी मेंटल हेल्थ सम्बंधी समस्या के कारण सामने आता है। थकान के कारण आप सामान्य से अधिक समय तक सोते रह सकते हैं या सुबह बिस्तर से उठने में मुश्किल का अनुभव कर सकते हैं।

ग़ुस्सा
कभी-कभी किसी बात पर ग़ुस्सा कर बैठना या आवेश में आ जाना सामान्य बात है। लेकिन जब यह ग़ुस्सा वायलेंट हो जाए, नुक़सान पहुंचाने वाले एक्शन्स की ओर ले जाए, या जब आप हमेशा ख़ुद को झल्लाहट से भरा महसूस करें, तो आपके लिए मदद लेना ज़रूरी हो जाता है।

डर
लोग एगोराफ़ोबिया जैसे डर से परेशान हो सकते हैं। इसमें उन्हें लगता है कि वे किसी जगह फंस गए हैं और इसकी वजह से वे पैनिक अटैक का सामना करने लगते हैं। कुछ लोग तो इसके चलते घर से बाहर निकलने पाने में भी ख़ुद को लाचार महसूस करने लगते हैं।

बेचैनी
समय-समय पर चीज़ों को लेकर चिंता करना साधारण बात है, लेकिन जब आपका पूरा दिन चिंता में कटने लगे, इससे आपको बेचैनी और घबराहट जैसे फ़िज़िकल सिम्पटम्स महसूस होने लगें, तब इसका सामना करने के लिए थैरेपी मददगार साबित हो सकती है।

निराशा
नाउम्मीद हो जाना या यह महसूस करने लगना कि अब आपका कोई फ़्यूचर नहीं बचा है- यह भी डिप्रेशन या इस जैसे किसी मेंटल डिसऑर्डर का लक्षण है।

अकेलापन
मेंटल हेल्थ से जूझ रहे अनेक लोग अकेले रहने पर ही अच्छा महसूस करते हैं। लेकिन जब आप लोगों की मौजूदगी में बुरा महसूस करने लगें तो इस परेशानी को समझने और उसका इलाज करने में थैरेपी आपकी मदद कर सकती है।
 

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8 काम करना, जब आपका दिन खराब हो

कुछ उपयोगी टिप्स जो आपके बुरे दिन को अच्छा बना देंगी
Gousiya Teentalkindia Content Writer

हम सभी अपनी ज़िंदगी में ऐसे दिनों से होकर गुज़रे हैं, जब हमें लगता है कि कुछ भी ठीक नहीं हो रहा है। हमने जो भी सोचा था, वैसा कुछ नहीं हो पा रहा है। कोई भी हमें प्यार नहीं करता और किसी को हमारी परवाह नहीं है। हमारा दिल बैठ जाता है। दिन ख़त्म होते-होते हम हताश हो जाते हैं। और अगर आप टीनएजर हैं, तब तो आपकी फ़ीलिंग्स और नाज़ुक होती हैं, और इसीलिए उन्हें केयर के साथ हैंडल करना ज़रूरी हो जाता है। एक टीनएजर की ज़िंदगी इमोशंस, ड्रामा, फ़ीलिंग्स और आइडियाज़ से भरी होती है, इसलिए भी एक बुरे दिन से सामना होने पर वो अपने को औरों से ज़्यादा मुश्किल में पाते हैं।

हक़ीक़त यही है कि हम सभी के साथ यह होता है, लेकिन हममें से सभी को और विशेषकर टीनएजर्स को पता नहीं होता कि इसका सामना कैसे करें। लेकिन टीनएज एक ऐसा समय है, जब आपको पॉज़िटिव चीज़ों पर ज़्यादा फ़ोकस करना चाहिए और निगेटिव चीज़ों पर कम, ताकि आगे भी यही आदत हमेशा बनी रहे। अगर आप टीनएजर हैं और अपने बुरे दिन को अच्छा बनाना चाहते हैं, तो ये कुछ टिप्स आपके लिए मददगार साबित होंगी :

1. अपने प्रति उदार रहें

टीनएजर्स के साथ अकसर ऐसा होता है कि जब चीज़ें उनके नियंत्रण में नहीं रह जातीं तो वो इसके लिए ख़ुद को ही दोषी ठहराने लगते हैं। लेकिन एक टीनएजर के रूप में आपको ख़ुद के प्रति अधिक उदार होना पड़ेगा। आप अपने आसपास होने वाली सभी चीज़ों को कंट्रोल नहीं कर सकते, लेकिन किसी चीज़ पर क्या रिएक्शन देना है और उसके बारे में क्या महसूस करना है, इसे आप ज़रूर कंट्रोल कर सकते हैं।

2. अपने लिए कुछ अच्छा पकाइए

नहीं, मैकडॉनल्ड्स वाला हैप्पी मील नहीं, बल्कि अपने लिए कोई ऐसा कम्फ़र्ट फ़ूड पकाइए, जिससे आपको ख़ुशी मिले। टीनएजर होने के नाते आपको चॉकलेट्स, क्रीमी पास्ता, वैफ़ल्स वग़ैरह की क्रैविंग होगी। तो जब भी आपको लगे कि आपका दिन बुरा जा रहा है तो अपने को इन चीज़ों से ट्रीट कीजिए।

3. एक छोटा-सा लक्ष्य बनाकर उसे हासिल करें

अपने लिए एक छोटा-सा गोल सेट करें, जिसे आप दिन ख़त्म होने से पहले पूरा कर सकें। यह कुछ भी सिम्पल-सा लक्ष्य हो सकता है, जैसे कि डिशेस वॉश करना, अपना कमरा साफ़ करना, लॉन्ड्री करना वग़ैरह। जब हम वो चीज़ें कर लेते हैं, जिन्हें करने का हमने निश्चय किया था तो इससे हमें अच्छा महसूस होता है।

4. किसी के प्रति अच्छा व्यवहार करें

रिसर्चेस बताती हैं कि जब हम किसी के प्रति अच्छा व्यवहार करते हैं तो हम इससे बेहतर महसूस करते हैं। आप कुछ भी कर सकते हैं, जैसे घर में सभी के लिए कुछ पकाना, अपने डिस्टैंट फ्रेंड को एक मैसेज भेजना, या घर के कामों में फ़ैमिली के किसी मेम्बर की मदद करना।

5. एक ग्रैटिट्यूड जर्नल बनाएं

हम सभी में कुछ ना कुछ अच्छी बातें होती हैं। हमें हमेशा अपने उन गुणों को याद रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो सके तो एक ग्रैटिट्यूड जर्नल बनाकर उसे अपने कमरे में ऐसी जगह लगाएं, जहां आप उसे लगातार देख सकें। आप हमारे एक्सपर्ट्स के द्वारा बनाए गए ग्रैटिट्यूड जर्नल को मुफ़्त में डाउनलोड भी कर सकते हैं।

6. यह भी गुज़र जाएगा

हमेशा ख़ुद को याद दिलाते रहें कि “यह भी गुज़र जाएगा।” चाहें तो इस कथन को अपने अंदाज़ में नए सिरे से गढ़ें और ख़ुद को लगातार उसकी याद दिलाते रहें।

7. नींद ख़राब ना करें

जब आपका दिन बुरा हो तो उस दिन जल्दी सो जाना चाहिए। उस पर अपनी नींद ख़राब करने का कोई फ़ायदा नहीं। अच्छी नींद नहीं ले पाने के कारण भी हम कई बार चिड़चिड़े हो जाते हैं। एक रात अच्छे से सोएं और अगले दिन ताज़ादम होकर जागें।

8. कॉमेडी देखें

वो कहते हैं ना कि हंसी से बड़ी दवाई कोई और नहीं है। इसलिए कोई फ़नी मूवी, टीवी शो या यूट्यूब वीडियो देखिए और अपने दिमाग़ को हर तरह के तनाव से फ्री कर लीजिए।

टीनएजर्स को ख़ुश और एनर्जी से भरा रहने के लिए मेडिटेशन और एक्सरसाइज़ पर भी ध्यान देना चाहिए। जब हम टीनएज में ही बुरे दिन को अच्छा बना लेने की आदत डाल लेते हैं तो आगे चलकर हम किसी भी मुश्किल का सामना करने के लिए भी ख़ुद को तैयार कर रहे होते हैं।
 

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