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फ्रस्ट्रेशन का सामना कैसे करें

सभी को ग़ुस्सा आता है और फ्रस्ट्रेशन इसी का इमोशनल रिएक्शन है। इसलिए यह तो मुमकिन नहीं कि हम पूरी तरह से फ्रस्ट्रेशन से बच जाएं। लेकिन इसका सामना करने के कुछ तरीक़े ज़रूर हैं

फ्रस्ट्रेशन को इग्नोर करना मुश्किल है। ख़ासतौर पर तब, जब आप टीनएजर हों और आप पर स्कूल, दोस्तों, फ़ैमिली और हॉर्मोन्स का प्रेशर हो। अपने पैरेंट्स की अथॉरिटी से दबाव में रहना, डेटिंग और दोस्ती के अनुभवों से हर्ट होना और आने वाले कल को लेकर कुछ भी साफ़ नहीं होना- ये चीज़ें फ्रस्ट्रेशन को जन्म देती हैं। लेकिन गनीमत है कि इसका सामना करने के उपाय मौजूद हैं।

भागें नहीं
जब भी आपको लगे कि आपके साथ कुछ भी सही नहीं हो रहा है, तो बैठें, रिलैक्स करें और चीज़ों को क़रीब से देखें। अपने फ्रस्ट्रेशन से कभी दूर भागने की कोशिश मत कीजिए। इस बात को शांत मन से स्वीकार कर लीजिए कि आप डिप्रेस्ड हैं।

बातें करें
जब आप फ्रस्ट्रेशन फ़ील कर रहे हों तो किसी क़रीबी से बातें करना आपको बेहतर महसूस करा सकता है और उससे आपको एक नया नज़रिया भी मिल सकता है। अगर ऐसा न हो सके तो आपको अपनी फ़ीलिंग्स को लिख डालना चाहिए और उसे बार-बार पढ़ना चाहिए, ताकि आप यह जान सकें कि चीज़ों को बदलने के लिए आप कुछ कर सकते हैं या नहीं।

जाने दीजिए
आपके लिए यह समझना भी ज़रूरी है कि कुछ चीज़ें आपके नियंत्रण में नहीं हैं। इसलिए समझदारी इसी में है कि उन्हें चुपचाप स्वीकार कर लें और उनको लेकर ख़ुद को तक़लीफ़ ना दें।

अपना फ़ोकस बदलें
जैसा कि हम जानते हैं, ग़ुस्से और फ्रस्ट्रेशन का चोली-दामन का साथ होता है। इसलिए ग़ुस्से की भनक लगते ही अपना फ़ोकस बदलने की कोशिश कीजिए। छोटी लेकन डिमांडिंग एक्टिविटीज़ पर ध्यान लगाइए। मिसाल के तौर पर, वॉक पर चले जाइए या घर में साफ़-सफाई कीजिए, जिसे आप बहुत दिनों से टाल रहे थे, कुछ अच्छा पका लीजिए, कुछ भी ऐसा कीजिए, जो आपका ध्यान भटका सके।

ख़ुद को पहचानें
एक लिस्ट बनाकर उसमें अपनी छोटी-बड़ी क़ामयाबियों का लेखा-जोखा लिखें। जब आपको मालूम होगा कि अतीत में आप क़ामयाब हुए हैं तो इससे आपके सिर से फ्रस्ट्रेशन का बोझ कम हो जाएगा।

एक बात हमेशा याद रखें - ज़िंदगी में कभी ना कभी फ्रस्ट्रेशन का सामना करना नॉर्मल है, लेकिन आपको कभी अपने फ्रस्ट्रेशन को ख़ुद पर हावी नहीं होने देना चाहिए। अपने ग़ुस्से की लगाम कसिए और जितना सम्भव हो सकता है, पॉज़िटिव बने रहिए।
 

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पब्लिक फ़ियर पर क़ाबू पाने के तरीक़े

सोशल एंग्ज़ाइटी और पब्लिक फ़ियर क्या है?
Nishtha JunejaTeentalkindia Content Writer

पब्लिक स्पीकिंग का डर एंग्ज़ाइटी का कॉमन फ़ॉर्म है, जिसमें थोड़ी-सी नर्वसनेस से लेकर पैरेलाइज़ कर देने वाला डर और पैनिक हो सकता है। 

इस डर से जूझ रहे लोग पब्लिक स्पीकिंग सिचुएशन से पूरी तरह बचते हैं, या वे हाथ हिलाते हुए या कांपती हुई आवाज़ के साथ इससे जूझते रहते हैं। लेकिन तैयारी और परसिस्टेंस के साथ, कोई भी व्यक्ति इस डर पर क़ाबू पा सकता है।

कुछ स्थितियों में नर्वसनेस या एंग्ज़ाइटी सामान्य है, और पब्लिक स्पीकिंग भी कोई एक्सेप्शन नहीं है। इसे परफ़ॉर्मेंस एंग्ज़ाइटी के तौर पर जाना जाता है, दूसरे उदाहरणों में स्टेज से डर, टेस्ट एंग्ज़ाइटी और राइटर्स ब्लॉक शामिल हैं। लेकिन जिन लोगों को गम्भीर परफ़ॉर्मेंस एंग्ज़ाइटी होती है, जिसमें दूसरी सोशल सिचुएशन में ख़ास तौर पर एंग्ज़ाइटी शामिल है, उन्हें सोशल एंग्ज़ायटी डिसऑर्डर हो सकता है। यदि आप अपने डर को प्रैक्टिस से क़ाबू नहीं कर पा रहे हैं तो आपको प्रोफ़ेशनल हेल्प लेनी चाहिए।

आप पब्लिक फ़ियर को कैसे कंट्रोल कर सकते हैं:

1. अपने टॉपिक को अच्छे से समझें। आप जितने अच्छे से अपने विषय को समझेंगे उतनी ही कम ग़लतियां बोलने में करेंगे।
2. आप जो कुछ भी प्रज़ेंट करना चाहते हैं, जिसमें कोई प्रॉप, ऑडियो या वीडियो एड शामिल हो, तो अपनी प्लानिंग उसी के अनुसार ऑर्गेनाइज़ करें। यदि सम्भव हो तो, जहां आप बोलने वाले हैं उस जगह पर जाकर अपने प्रज़ेंटेशन से पहले वहां मौजूद चीज़ों को देख आइए।
3. अपने पूरे प्रज़ेंटेशन की कई बार प्रैक्टिस करें। प्रज़ेंटेशन का एक वीडियो भी बना लें ताकि आप उसे देखकर स्वयं में सुधार की गुंजाइश समझ पाएं।
4. पोडियम पर जाने से पहले और स्पीच के दौरान गहरी सांस लें।
5. अपने मटेरियल पर फ़ोकस करें न कि ऑडियंस पर। लोग मुख्यत: नई जानकारी पर ध्यान देते हैं न कि इस पर कि उसे कैसे प्रज़ेंट किया गया है।
6. यदि कोई साइलेंस मोमेंट आ जाए तो उससे घबराएं नहीं। भले ही वह लम्बा हो जाए, यदि आप कुछ कहने से पहले थोड़ा रुकेंगे तो आपकी ऑडियंस ज़्यादा माइंड नहीं करेगी। बस धीमी और गहरी सांस लीजिए।
7. अपने प्रज़ेंटेशन या स्पीच के ख़त्म होते ही अपनी सक्सेस के लिए ख़ुद की पीठ थपथपाइए। ग़लतियां सभी से होती हैं। अपनी स्किल्स को इंप्रूव करने के लिए अपनी उस ग़लती को देखें जिसे आपने अवसर में बदल लिया।

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