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स्किज़ोफ्रेनिआ बीमारी के लक्षण, मिथक और तथ्य

स्किज़ोफ्रेनिआ बीमारी का पता चलने पर निराश ना हो क्योंकि ऐसा नहीं है कि इसका कोई इलाज नहीं है।

लाइफस्टाइल डेस्क. स्किज़ोफ्रेनिआ एक एसी मानसिक मनोदशा है, जिसमें इंसान को वेहम होने लगता है। इस अवस्था में चीजों, लोगों और भावनाओं के संबंध में भ्रम पैदा होने लगता है। यहां तक की ये भी वेहम होने लगता है कि जो इंसान हमसे प्यार करता है वो  स्किज़ोफ्रेनिआ का शिकार है। इस बीमारी का पता चलने पर निराश ना हो क्योंकि ऐसा नहीं है कि इसका कोई इलाज नहीं है।

आपको सबसे पहले सिज़ोफ्रेनिया के शुरुआती लक्षणों के बारे में पता होना चाहिए। टीनएज बच्चों में, स्किज़ोफ्रेनिआ के लक्षण किसी व्यस्क शख्स की तरह ही होते हैं। लेकिन टीनएज में होने वाले बदलाव इन लक्षणों को दबा देते हैं।

स्किज़ोफ्रेनिआ के आम लक्षण:

  • परिवार और दोस्तों से दूरी बनाना
  • पढ़ाई से मन उचटना
  • नींद न आना
  • अवसाद ग्रस्त मनोदशा और चिड़चिड़ापन
  • टीवेशन में कमी आना
  • अजीब सा व्यवहार करना
  • टीनएज भ्रम की संभावना कम होती है। लेकिन उनकी मतिभ्रमित हो जाती है। वो उस राह पर निकल पड़ते हैं जिस पर उन्हें खतरा होता है। जैसे उन्हें अपने परिवार के साथ रहना पसंद नहीं होता है वो अकेले रहते हैं। 

यहां स्किज़ोफ्रेनिआ के बारे में कुछ सामान्य मिथक हैं:

मिथक: स्किज़ोफ्रेनिआ एक स्प्लिट पर्सनैलिटी या मल्टीपल  पर्सनैलिटी डिसऑर्डर है।

तथ्य: मल्टीपल पर्सनैलिटी डिसऑर्डर, स्किज़ोफ्रेनिआ की तुलना में बहुत कम आम है। सिज़ोफ्रेनिया वाले लोग केवल वास्तविकता से अलग हो जाते हैं। लेकिन उनमें  स्प्लिट पर्सनैलिटी जैसी कोई बात नहीं होती है।

मिथक: स्किज़ोफ्रेनिआ एक असामान्य स्थिति है।

तथ्य: स्किज़ोफ्रेनिआ असामान्य नहीं है। सिज़ोफ्रेनिया 100 में से केवल एक व्यक्ति को होता है।

मिथक: स्किज़ोफ्रेनिआ वाले लोग खतरनाक होते हैं।

तथ्य: हालांकि स्किज़ोफ्रेनिआ भ्रम पैदा करता है। इन लोगों का व्यवहार कभी-कभी उग्र हो सकता है। लेकिन स्किज़ोफ्रेनिआ वाले अधिकांश लोग न तो हिंसक होते हैं और न ही दूसरों के लिए खतरा होते हैं।

मिथक: स्किज़ोफ्रेनिआ वाले लोगों की मदद नहीं की जा सकती।

तथ्य: हालांकि इस बीमारी को ठीक होने में लंबा वक्त लगता है। लेकिन स्किज़ोफ्रेनिआ के लिए दृष्टिकोण निराशाजनक से दूर है। जब ठीक से इलाज किया जाता है, तो स्किज़ोफ्रेनिआ वाले कई लोग पूरी तरह से ठीक हो सकते हैं।

स्किज़ोफ्रेनिआ का उपचार

स्किज़ोफ्रेनिआ के सबसे प्रभावी उपचार में चिकित्सा, दवा, सामाजिक समर्थन और जीवन शैली में परिवर्तन शामिल हैं। हालांकि, कुछ आत्म-देखभाल भी हैं जो प्रभावी साबित हुई हैं।

  • दोस्तों और परिवार से सामाजिक समर्थन ले
  • तनाव का प्रबंधन करें
  • नियमित रूप से व्यायाम करें
  • पूरी नींद लें
  • शराब, निकोटीन और दवाओं से बचें
  • नियमित रूप से पौष्टिक भोजन करें
  • याद रखें कि स्किज़ोफ्रेनिआ के लिए लंबे समय तक उपचार की आवश्यकता होती है, इसलिए सकारात्मक परिणाम देखने के लिए धैर्य रखना होगा।

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टीनएजर्स में पैनिक डिसऑर्डर की समस्या

पैनिक डिसऑर्डर जैसी समस्या आमतौर पर टीनएज के अंतिम पड़ाव में शुरू होती है। इसलिए समय से पहले ही इसके लक्षणें को समझना जरूरी है।
Gousiya Teentalkindia Content Writer

हर 75 में से एक इंसान पेनिक डिसऑर्डर को गंभीर समस्या के रूप में देखता है। आमतौर पर यह समस्या टीनएज (किशोरवस्था) के अंतिम पड़ाव या युवावस्था की शुरुआत में दिखाई देती है। हालांकि यह क्यों होती है, इसके कारण अब तक स्पष्ट नहीं हो पाए हैं। लेकिन हमारे जीवन में हो रहे तनावपूर्ण बदलाव और पैनिक डिसऑर्डर का गहरा संबंध है। ऐसे कई प्रमाण भी पाए गए हैं जिससे ये कहा जा सकता है कि पैनिक डिसऑर्डर जैसी समस्या 'जीन्स' के कारण भी हो सकती है। इसलिए अगर परिवार में पहले भी किसी को यह बीमारी हो चुकी है तो सतर्क रहें। ऐसी स्थिति में इसके होने की आशंका और भी बढ़ जाती है, खासकर जब आपकी लाइफ ज़्यादा तनावपूर्ण होती है।

पैनिक अटैक के मामले अक्सर अचानक डर के बढ़ने के कारण सामने आते हैं, जो बिना किसी चेतावनी के इंसान को प्रभावित करते हैं और कारण भी स्पष्ट नहीं होता। पैनिक अटैक के लक्षण है-

  • धड़कने तेज हो जाना
  • सांस लेने में दिक्कत होना, ऐसा लगना जैसे हवा कम हो रही है
  • लकवा हो जाने का डर
  • मितली, सिर दर्द, चक्कर आना
  • कांपना और पसीना आना
  • घुटन होना, सीने में दर्द होना
  • अचानक से गर्मी या अचानक ठंड लगना
  • पैर की उंगलियों में झुनझुनी होना
  • पागल हो जाने या मर जाने का डर लगना

याद रखें कि पैनिक अटैक के दौरान ऊपर दिए गए चार या इससे अधिक लक्षण दिख सकते हैं। ये लक्षण तेजी से दिखते हैं और 10 मिनट में नजर आ सकते हैं।

पैनिक अटैक का असर लम्बे समय तक रहता है। अटैक के घंटों बाद भी घबराहट और चिंता बनी रहती है। किसी भी टीनएजर्स के लिए पैनिक अटैक जैसी समस्या का सामना करना मुश्किल और डरावना साबित हो सकता है।

अगर इसका इलाज नहीं किया जाए तो यह जीवन में नकारात्मक असर छोड़ता है। यह स्कूल, सम्बंधों और आत्मसम्मान के लिए समस्या पैदा कर सकता है। कोई टीनएजर पैनिक डिसऑर्डर से जूझ रहा है इसका पता केवल क्वालिफाइड प्रोफेशनल ही लगा सकता है। एक डॉक्टर ही पैनिक डिसऑर्डर के कारणों की पहचान कर सकता है और बता सकता है कि इसका कारण डिप्रेशन या कोई दूसरी घटना तो नहीं है।

पैनिक डिसऑर्डर का इलाज संभव है और कई बेहतर थैरेपी भी अवेलेबेल हैं। एक बार इलाज के बाद, पैनिक डिसऑर्डर किसी भी स्थायी जटिलताओं का कारण नहीं बनता है। इसलिए, यदि आपको लगता है कि आपके आसपास कोई ऐसा व्यक्ति है जो ऊपर बताए गए लक्षणों से जूझ रहा है तो उसका पेशेवर विशेषज्ञ से इलाज कराएं। आप चैट या ईमेल (expert@teentalkindia.com) के माध्यम से हमारे एक्सपर्ट से बात कर सकते हैं।

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