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मैथ्स की टेंशन का सामना करना

हाल के दिनों में ऐसे अनेक केसेस सामने आए हैं, जिनमें स्टूडेंट्स ने एग्ज़ाम के प्रेशर के चलते अपनी जान दे दी। इसमें भी मैथ्स के पेपर को लेकर देखा गया डर सबसे ज़्यादा था।

क्या आप एक ऐसे स्टूडेंट हैं, जो मैथ्स का टेस्ट देने की बात से ही घबरा जाते हैं? क्या आपको लगता है कि आपके पास मैथ्स को समझने लायक़ दिमाग़ ही नहीं हे? क्या आप मैथ्स से जुड़ी एक्टिविटीज़ या क्लासेस को अवॉइड करते हैं? यदि ऐसा है तो आप मैथ्स एंग्ज़ाइटी का सामना कर रहे हैं।

मैथ्स एंग्ज़ाइटी घबराहट की एक ऐसी फ़ीलिंग है, जो मैथ्स को समझने की अपनी क्षमता पर शक़ करने वालों में पाई जाती है। उन्हें लगता है कि जिस भी एक्टिविटी में मैथ्स हो, उसे वे कर ही नहीं सकते। मैथ्स एंग्ज़ाइटी एक इंटेलेक्चुअल से ज़्यादा इमोशनल समस्या है, लेकिन चूंकि यह मैथ्स को समझने की हमारी क्षमता को प्रभावित करती है, इसलिए यह एक इंटेलेक्चुअल समस्या भी बन जाती है।

ऐसा क्यों होता है?
मैथ्स एंग्ज़ाइटी का कोई एक कारण नहीं है। अकसर यह किसी स्टूडेंट के अतीत में मैथ्स से जुड़ी शर्मिंदा करने वाली घटनाओं का नतीजा हो सकती है। इस कारण स्टूडेंट को यह लगने लगता है कि वह मैथ्स को समझ ही नहीं सकता। इसका असर उसके रिज़ल्ट्स पर पढ़ता है। इस समस्या का सामना करने के लिए अपने तरीक़े अपनाए जा सकते हैं।

1. मैथ्स के बेसिक प्रिंसिपल्स और मैथड्स समझना और याद करना

अतीत में हुए निगेटिव अनुभवों के कारण बहुत सारे स्टूडेंट्स एरिथमैटिक और उसमें भी ख़ासतौर पर मल्टिप्लिकेशंस और फ्रैक्शंस की बुनियादी समझ नहीं बना पाते हैं। चूंकि मैथ्स में सिम्पल कॉन्सेप्ट्स के आधार पर क्यूमूलेटिव तरीक़े से जटिल कॉन्सेप्ट्स बनाए जाते हैं, इसलिए स्टूडेंट का पुख़्ता एरिथमेटिक फ़ाउंडेशन होना बहुत ज़रूरी है। इसके बिना उसके लिए हायर मैथ्स को सीख पाना बहुत ही मुश्किल हो जाता है। ऐसे में मैथ्स एंग्ज़ाइटी को कम करने के लिए एरिथमैटिक का एक छोटा-सा कोर्स बहुत ज़रूरी हो जाता है।

2. अपनी सोच, फ़ीलिंग्स और एक्शन को लेकर सचेत रहना

मैथ्स एंग्ज़ाइटी अलग-अलग लोगों पर अलग-अलग तरह से असर करती है। इसलिए जब आपका सामना इससे हो तो अपने और अपनी परिस्थितियों के बारे में पूरी अवेयरनेस ज़रूरी है। अगर ऐसा है, तभी आप अपने दिमाग़ में आने वाले बेतुके विचारों और फ़ीलिंग्स को बदलकर उनकी जगह पॉज़िटिव और वास्तविक विचार ला सकते हैं।

3. मैथ्स की वोकेब सीखना

स्टूडेंट्स की एक बड़ी समस्या यह होता है कि वे मैथ्स की वोकेबुलरी और उसके टर्म्स को समझ नहीं पाते हैं। दूसरे विषयों में जैसे शब्दों का इस्तेमाल होता है, उनकी तुलना में मैथ्स में बहुत ही अलग शब्दों का प्रयोग किया जाता है। मिसाल के तौर पर फ़ैक्टर जैसे शब्द को ही देख लीजिए। इससे बचने के लिए गणित की भाषा सीखनी ज़रूरी है।

4. एंग्ज़ायटी मैनेजमेंट की तकनीकें सीखना

5. मैथ्स को लेकर एक पॉज़िटिव एटिट्यूड बनाने पर काम करना 

6. पॉज़िटिव सेल्फ़-टॉक सीखना

किसी शांत जगह पर जाकर बैठिए और अगर आपके मन में कोई सवाल हों तो पूछिए। क्लास के बाद या ब्रेक के दौरान अपने टीचर से मदद मांगने में झिझक मत कीजिए। क्लास में डिस्कस होने से पहले टेक्स्टबुक मटैरियल पढ़िए और क्लास के बाद कवर किए गए मटैरियल को रिव्यू कीजिए। लगातार प्रैक्टिव और रिव्यू से ही आप मैथ्स में क़ामयाबी हासिल कर सकते हैं।
 

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स्किज़ोफ्रेनिआ बीमारी के लक्षण, मिथक और तथ्य

स्किज़ोफ्रेनिआ बीमारी का पता चलने पर निराश ना हो क्योंकि ऐसा नहीं है कि इसका कोई इलाज नहीं है।
Gousiya Teentalkindia Content Writer

लाइफस्टाइल डेस्क. स्किज़ोफ्रेनिआ एक एसी मानसिक मनोदशा है, जिसमें इंसान को वेहम होने लगता है। इस अवस्था में चीजों, लोगों और भावनाओं के संबंध में भ्रम पैदा होने लगता है। यहां तक की ये भी वेहम होने लगता है कि जो इंसान हमसे प्यार करता है वो  स्किज़ोफ्रेनिआ का शिकार है। इस बीमारी का पता चलने पर निराश ना हो क्योंकि ऐसा नहीं है कि इसका कोई इलाज नहीं है।

आपको सबसे पहले सिज़ोफ्रेनिया के शुरुआती लक्षणों के बारे में पता होना चाहिए। टीनएज बच्चों में, स्किज़ोफ्रेनिआ के लक्षण किसी व्यस्क शख्स की तरह ही होते हैं। लेकिन टीनएज में होने वाले बदलाव इन लक्षणों को दबा देते हैं।

स्किज़ोफ्रेनिआ के आम लक्षण:

  • परिवार और दोस्तों से दूरी बनाना
  • पढ़ाई से मन उचटना
  • नींद न आना
  • अवसाद ग्रस्त मनोदशा और चिड़चिड़ापन
  • टीवेशन में कमी आना
  • अजीब सा व्यवहार करना
  • टीनएज भ्रम की संभावना कम होती है। लेकिन उनकी मतिभ्रमित हो जाती है। वो उस राह पर निकल पड़ते हैं जिस पर उन्हें खतरा होता है। जैसे उन्हें अपने परिवार के साथ रहना पसंद नहीं होता है वो अकेले रहते हैं। 

यहां स्किज़ोफ्रेनिआ के बारे में कुछ सामान्य मिथक हैं:

मिथक: स्किज़ोफ्रेनिआ एक स्प्लिट पर्सनैलिटी या मल्टीपल  पर्सनैलिटी डिसऑर्डर है।

तथ्य: मल्टीपल पर्सनैलिटी डिसऑर्डर, स्किज़ोफ्रेनिआ की तुलना में बहुत कम आम है। सिज़ोफ्रेनिया वाले लोग केवल वास्तविकता से अलग हो जाते हैं। लेकिन उनमें  स्प्लिट पर्सनैलिटी जैसी कोई बात नहीं होती है।

मिथक: स्किज़ोफ्रेनिआ एक असामान्य स्थिति है।

तथ्य: स्किज़ोफ्रेनिआ असामान्य नहीं है। सिज़ोफ्रेनिया 100 में से केवल एक व्यक्ति को होता है।

मिथक: स्किज़ोफ्रेनिआ वाले लोग खतरनाक होते हैं।

तथ्य: हालांकि स्किज़ोफ्रेनिआ भ्रम पैदा करता है। इन लोगों का व्यवहार कभी-कभी उग्र हो सकता है। लेकिन स्किज़ोफ्रेनिआ वाले अधिकांश लोग न तो हिंसक होते हैं और न ही दूसरों के लिए खतरा होते हैं।

मिथक: स्किज़ोफ्रेनिआ वाले लोगों की मदद नहीं की जा सकती।

तथ्य: हालांकि इस बीमारी को ठीक होने में लंबा वक्त लगता है। लेकिन स्किज़ोफ्रेनिआ के लिए दृष्टिकोण निराशाजनक से दूर है। जब ठीक से इलाज किया जाता है, तो स्किज़ोफ्रेनिआ वाले कई लोग पूरी तरह से ठीक हो सकते हैं।

स्किज़ोफ्रेनिआ का उपचार

स्किज़ोफ्रेनिआ के सबसे प्रभावी उपचार में चिकित्सा, दवा, सामाजिक समर्थन और जीवन शैली में परिवर्तन शामिल हैं। हालांकि, कुछ आत्म-देखभाल भी हैं जो प्रभावी साबित हुई हैं।

  • दोस्तों और परिवार से सामाजिक समर्थन ले
  • तनाव का प्रबंधन करें
  • नियमित रूप से व्यायाम करें
  • पूरी नींद लें
  • शराब, निकोटीन और दवाओं से बचें
  • नियमित रूप से पौष्टिक भोजन करें
  • याद रखें कि स्किज़ोफ्रेनिआ के लिए लंबे समय तक उपचार की आवश्यकता होती है, इसलिए सकारात्मक परिणाम देखने के लिए धैर्य रखना होगा।

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