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आर्किटेक्ट से आर्टिस्ट बनीं स्नेहल पाटिल आर्ट से एंग्ज़ाइटी दूर करने में मदद करती हैं

बॉम्बे ड्रॉइंग रूम स्नेहल द्वारा संचालित मुम्बई स्थित एक ग्रुप है, जिसका उद्देश्य है पेंटिंग पार्टीज़ करके तनाव को दूर भगाना।

बाल्मी में रविवार की दोपहर को लगभग दो घंटे के लिए मैं रोज़ाना के जीवन की एंग्ज़ायटी को भूल गई थी। एक चाक़ू लेकर और एक ख़ाली कैनवास को गोदकर मैंने एक के बाद एक अपनी सारी चिंताओं को दूर भगा दिया। पेंटिंग ने मुझे बांधे रखा। जब फ़ाइनल पीस तैयार हुआ, वह शांति देता हुआ महसूस हुआ और इसका सारा श्रेय स्नेहल द्वारा ऑर्गेनाइज़्ड पेंटिंग पार्टी को जाता है।

हमारे एप्रॉन पहनने से पहले, स्नेहल ने यह सुनिश्चित किया कि वे हमसे किसी मास्टरपीस की उम्मीद नहीं कर रही हैं। उन्होंने हमसे यह भी कहा कि हमें किसी से भी अपने काम को कम्पेयर नहीं करना है।

‘हर व्यक्ति अपना आर्ट पीस बनाता है, जिस तरह हर व्यक्ति अपने आप में अनोखा होता है।' यह सुनना भर ही कई लोगों के लिए अपने माथे से चिंता की लकीर मिटाने के लिए प्रेरित करने वाला साबित हुआ है। इस वादे के साथ कि किसी भी व्यक्ति को जज नहीं किया जाएगा और कुछ नया बनाने के एक्साइटमेंट के साथ सबने यह शुरू किया।

प्रोफ़ेशन से आर्किटेक्ट और अपनी चॉइस से ख़ुद से सीखी हुई आर्टिस्ट स्नेहल ने 2015 में इस आइडिया पर एक पेंटिंग पार्टी रखी जब उन्होंने अपने दोस्तों को डिनर पर बुलाया था। अच्छे खाने और म्यूज़िक के साथ उन सभी ने पेंटिंग की। इसके बाद, बॉम्बे ड्रॉइंग रूप की स्थापना इस विचार के साथ हुई कि आर्ट सभी के लिए है।

स्नेहल याद करती हैं कि उन्हें हमेशा से ही आर्ट से प्यार था। उनका कहना है, ‘यह अपने दबे हुए टेंशन को एक्सप्रेस करने का एक आउटलेट है।' अब, वे रेस्तरां और बार में पार्टी कंडक्ट करवाने के अलावा, वे कॉर्पोरेट और प्राइवेट इवेंट में सेशन भी लेती हैं।

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Khubi Amin AhmedTeentalkindia Content Writer

टीनटॉक की तरह ही #SplatterSpeak भी एक इवेंट था, जिसका लक्ष्य था एक सुरक्षित और नॉनजजमेंटल प्लेटफॉर्म देना, जहां लोग खुलकर अपनी तकलीफ और मानसिक बीमारियों के बारे बात कर सकें और कठिनाईयों को स्वीकार कर सकें। 

भावनात्मक बीमारियों से जूझ रहे लोगों को यह सब करने से  नज़र न आने वाला आराम मिल सकता है। व्यक्ति अपनी भावनात्मक उथल-पुथल को छुपाने का विकल्प चुन लेता है, क्योंकि उस मुद्दे के बारे में बात करने से जो डर लगता है, उसकी वजह से ही वह परेशान होता है। मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याओं को पहचानना और उनके बारे में कहना मुश्किल होता है, इससे ये मुददे हम पर जीत हासिल कर लेते हैं, जिससे हम हार जाते हैं।     

इस जीती जागती कहानी को समझ रही थीं संचना कृष्णन। उन्होंने 10 अक्टूबर को वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे के दिन देश के तीन शहरों में #SplatterSpeak नामक एक कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया। इसे मेंटल हेल्थ के दिखाई न देने वाले म़ुद्दों के ख़िलाफ लड़ने के लिए मनाना का निश्चय किया। अवंतिका माथुर समेत कई आर्टिस्ट्स ने एक साथ आकर इस इवेंट को क्रिएट किया। इस इवेंट में आर्ट की मदद थैरेपेटिक टूल के रूप में की गई, जिससे भावनात्मक तकलीफों से बाहर लाने का प्रयास किया जा रहा था।  

#SplatterSpeak इवेंट ने लोगों को आगे बढ़ने के लिए एक आर्टिस्टिक स्पेस ओपन कर दिया है और यहां लोग अपनी भावनात्मक स्थिति के बारे में भी खुल़कर बात कर पा रहे रहे हैं। एक व्यक्ति ने जैसे ही अपनी कहानी कही, आर्टिस्ट ने स्टोरी को बॉडी आर्ट के रूप में प्रस्तुत कर दिया। इस तरह, मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याओं के लिए फिजिकल स्पेस को मान्यता देने से तकलीफ को गर्व के साथ स्वीकार करने की कोशिश पीड़ितों ने की। 

बॉडी पेंटिंग के पीछे का विचार रंगों से खेलना या उसकी खूबसूरती को दिखाना नहीं है बल्कि आपकी बॉडी को आपके मेंटल और इमोशनल स्टेट को प्रदर्शित करने के लिए कैनवास बनाना था, इसने इस फैक्ट के प्रति लोगों में जागरूकता को फैलाने के लिए एक मंच दिया है, कि कई बार व्यक्ति के इमोशनल हेल्थ के बारे में आंखें बहुत कुछ कह देती हैं। इससे लोगों को अपने मेंटल हेल्थ से जुड़े मुद्दों को मन से बाहर लाने, उन्हें बिना किसी डर या शर्म के स्वीकार करने में मदद करता है। उम्मीद है कि हम लोगों को मेंटल हेल्थ से जुड़े मुद्दों को गर्व के साथ लोगों के सामने रखने और बिना किसी जजमेंट के डर के मैनेज करने के लिए प्रोत्साहित करने में कामयाब रहे।”

"स्प्लटर स्पीक इवेंट अनुभव से कहीं ज्यादा है, क्योंकि इसमें अर्थ भी था। आर्ट एक ऐसी भाषा है जिसके बारे में हर किसी की अपनी समझ है। एक ऐसी भाषा जहां आप उस धारणा को रोकते या नियंत्रित नहीं करते हैं, जहां कोई भी अपने विचारों को अपना मानता है। कला उन तरीकों से बोलती है जो  उपचार की तरह काम करती है, यही वह चीज है जो कला को एक स्तर तक इतना शुद्ध, इतना पर्सनल और इतना पब्लिकली बना देता है कि लोग मतेभेद भी खुलकर स्वीकार कर लेते हैँ, बल्कि उनका जश्न भी मिलकर मनाते हैं।”  अवंतिका माथुर, आर्टिस्ट

आर्ट को उपचार में भी प्रयोग किया जाता है, इसके कई चिकित्सीय लाभ  भी हैं लेकिन बॉडी पेंटिंग किस तरह के मुद्दे को देखने में मदद करती है? इसके बारे में  अवंतिका ने डिप्रेशन से पीड़ित एक लड़की की पेंटिंग बनाने के अनुभव को हमसे साझा करते हुए बताया कि, “मैंने इस इवेंट में बहुत सारे लोगों की पेंटिंग बनाई लेकिन इस लड़की की कहानी मुझे अब भी याद है। वह खुद डिप्रेशन से जूझ रही थी, इसलिए उसने डिप्रेशन से निपटने वाले लोगों के लिए एक हेल्पलाइन पर काम करना शुरू कर दिया; एक हेल्पलाइन जहां लोगों को सुना जा सकता है, जहां वे बिना किसी डर के बात कर सकते हैं या उन्हें समझा जा सकता है।”

"मैंने उसकी बॉडी पर एक चाबी की पेंटिंग बनाई, क्योंकि उसने डिप्रेशन की चैन को खोलने की चाबी पाई थी जिसमें वह ख़ुद भी बंद थी। एक चाबी जो खुद का प्रतिनिधित्व करती है, वैसे ही वह भी चाबी बनना चाहती थी, अपने जैसे उन सभी लोगों के लिए जो डिप्रेशन के दरवाजे में बंद थे। एक चाबी, क्योंकि ऐसा कोई दरवाजा नहीं है जिसे ख़ोला नहीं जा सकता है, ऐसा कोई इंसान नहीं है, जिसकी मदद नहीं की जा सकती है। वह अपने जवाब ख़ुद तलाशती थी और उसी तरह दूसरों की मदद भी करना चाहती थी,  यह चाबी आज़ादी का प्रतिनिधित्व करती है - आज़ादी डिप्रेशन के चंगुल से निकालने के लिए,  जवाब खोजने के लिए और जो कुछ भी दिमाग  में कैद हो उससे मुक्ति मिले।”

अवंतिका माथुर ने निष्कर्ष निकाला कि  वह डिप्रेशन और उदासी की अन्य कहानियों के बारे में सुनना चाहती हैं।

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