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सेल्स के क्षेत्र में बेहतर करियर बनाने में मददगार हो सकती हैं ये स्किल

सेल्स का सबसे बढ़िया तरीका ज्यादा से ज्यादा लोगों से जुड़ना और उनकी जरूरतों को समझना है। इसके बाद ही आप ग्राहकों के सामने अपने उत्पाद की उपयोगिता को सिद्ध कर पाएंगे।

किसी की भी कंपनी में सेल्स का काम देखने वाले प्रोफेशनल तय किए गए टार्गेट पूरा करते हैं, जो कमाई का बड़ा जरिया होता है। ये प्रोफेशनल आमतौर पर प्रोडक्ट की बिक्री के लिए तैयार की गई रणनीति पर काम करते हैं। हालांकि कई बार सेल्स और मार्केटिंग को एक ही मान लिया जाता है, लेकिन ये दोनों बिल्कुल ही अलग हैं और इसे लेकर भ्रमित नहीं होना चाहिए। सेल्स के क्षेत्र में काम करने वाले प्रोफेशनल फील्ड में काम करते हैं और टार्गेट पूरा करने का काम करते हैं, जबकि मार्केटिंग के क्षेत्र में काम करने वाले प्रोफेशनल क्रिएटिव तरीकों का उपयोग कर रणनीति तैयार करने का काम करते हैं।

ये कुछ स्किल हैं, जो बेहतर सेल्समैन बनने में मदद कर सकती हैं। 

प्रभावित करने की क्षमता 

- सेल्स के क्षेत्र में बेहतर करियर बनाने के लिए आपको हमेशा दिए गए टार्गेट पूरा करना जरूरी है। इसके अलावा यदि आप और भी अच्छा करते हैं, तो यह आपके लिए फायदेमंद होगा। 
- इसके लिए आपको अपने ग्राहक को प्रभावित करना होता और प्रोडक्ट पर यकीन करवाना होता है। हालांकि यह आसान काम नहीं है। यहीं अपनी बातों और तर्कों के माध्यम से प्रभावित करने की क्षमता काम आती है। 
- इसमें कम्युनिकेशन स्किल की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। इसका सबसे बढ़िया तरीका ज्यादा से ज्यादा लोगों से जुड़ना और उनकी जरूरतों को समझना है। 
- इसके बाद ही आप ग्राहकों के सामने अपने उत्पाद की उपयोगिता को सिद्ध कर पाएंगे। अपने उत्पाद को लोगों के समक्ष समस्या के हल के रूप में प्रस्तुत करने की जरूरत होती है।

ग्राहक की मानसिकता समझना 

- सेल्समैन के लिए ग्राहक को समझना जरूरी है। यह जानना आवश्यक है कि जिस प्रोडक्ट की मार्केटिंग आप कर रहे हैं, उसे लेकर ग्राहक की क्या राय है। 
- क्षेत्र, भाषा, आयु के आधार पर ग्राहकों की सोच अलग-अलग हो सकती है। उनकी प्राथमिकता को समझ कर प्रभावी तरीके से अपनी बात रख पाएंगे। 

डेटा जुटाना और इसके आधार पर रणनीति तैयार करना 

- कई कंपनीयां सेल्स में बढ़ोतरी करने और अपना विस्तार करने के लिए टेक्नोलॉजी की मदद ले रही हैं। ऐसे में सेल्स टीम को विभिन्न टेक्नोलॉजी जैसे साआरएम सॉफ्टवेयर, आईटी स्किल, एक्सेल और पावर पॉइंट के बारे में पता होना चाहिए। इसके लिए अलावा सेल्स के लिए उपयोग होने वाले अलग-अलग तरीकों के बारे में भी जानकारी महत्वपूर्ण होती है। इससे सेल्स मैन को आगे की रणनीति बनाने में मदद मिलती है। 
- आमतौर पर सेल्समैन के दिन की शुरुआत टार्गेट लिस्ट तैयार करने और मार्केट के नए ट्रेंड के बारे में पता लगाने से होती है। सेल्समैन की टीम मीटिंग कर आगे की योजना तैयार करती है और इसके बाद विभिन्न क्लाइंट या ग्राहक से जुड़ने के काम में लग जाती है।
-  वे फोन और ईमेल के माध्यम से कॉन्टेक्ट करते हैं और उन्हें प्रोडक्ट या सर्विस खरीदने के लिए पिच करते हैं। इसके बाद वे अपने मैनेजर को दिनभर की सेल्स और प्रक्रिया के बारे में जानकारी देते हैं। सेल्स टार्गेट पूरा करने का जुनून ही सेल्समैन को बेहतर करियर बनाने में मदद करता है।

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कॉमर्शियल पायलट बनकर पहुंच सकते हैं नई ऊंचाइयों पर

कॅरिअर का यह ऑप्शन अपनाना चाहते हैं तो बारहवीं में मैथ्स, फिजिक्स और केमिस्ट्री पढ़ने होंगे।

भारत में एविएशन इंडस्ट्री 18.5 प्रतिशत की अप्रत्याशित दर से बढ़ रही है, साथ ही आगामी 15 से 20 वर्षों में सरकार भी 200 नए एयरपोर्ट तैयार करने की योजना बना रही है। इसका सीधा-सा मतलब है कि इस क्षेत्र में रोजगार के अभी बहुत-से विकल्पों की संभावनाएं बाकी हैं। इस क्षेत्र के सबसे अधिक पे-रोल वाले जॉब्स में कॉमर्शियल पायलट भी शामिल है। यह एक आकर्षक कॅरिअर होने के साथ ही प्रॉमिसिंग ऑप्शन भी है।

एक लाइसेंसशुदा कॉमर्शियल पायलट को एयरक्राफ्ट उड़ाने के लिए भुगतान किया जाता है। हालांकि जरूरी नहीं  कि एक कॉमर्शियल पायलट, एयरलाइन पायलट के रूप में ही काम करे, बल्कि वे कार्गो पायलट, टूर पायलट या बैककंट्री पायलट की भूमिकाएं भी निभा सकते हैं। इसके साथ ही फ्लाइट इंस्ट्रक्टर्स, फेरी या ग्लाइडर टो पायलट जैसे रोल्स भी इनके लिए ही उपलब्ध होते हैं।

कैसे बन सकते हैं पायलट
- कॉमर्शियल पायलट किसी एयरलाइन के लिए विशेष एयरक्राफ्ट उड़ाने की योग्यता रखते हैं। इसके लिए लाइसेंस की आवश्यकता पड़ती है। भारत में डायरेक्ट्रेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए), नागरिक उड्डयन मंत्रालय के तहत नागरिक उड्डयन के लिए सरकारी रेगुलेटरी बॉडी है, जो यह लाइसेंस जारी करती है। एविएशन क्षेत्र को कॅरिअर के रूप में अपनाने के लिए आपके पास बारहवीं क्लास में फिजिक्स, मैथ्स और केमिस्ट्री के साथ साइंस स्ट्रीम होनी आवश्यक है। स्टूडेंट पायलट लाइसेंस के लिए कैंडिडेट्स की उम्र कम से कम 16 साल होनी जरूरी है, वहीं प्राइवेट पायलट लाइसेंस के लिए यह कम से कम 17 साल है। कॉमर्शियल पायलट लाइसेंस 18 वर्ष से कम उम्र के कैंडिडेट्स को नहीं दिया जा सकता।

दो स्टेप में पूरी होती है प्रक्रिया

स्टेप 1
- सबसे पहले आपको किसी फ्लाइंग स्कूल से एविएशन में बीएससी करनी होगी। इस कोर्स में एडमिशन के लिए आपको इस प्रक्रिया से गुजरना होगा- 

लिखित परीक्षा : 10+2 स्टडी मटीरियल पर आधारित इस परीक्षा में इंग्लिश, मैथ्स, फिजिक्स और रीजनिंग शामिल किए जाते हैं।

पायलट एप्टीट्यूड टेस्ट :
- यह टेस्ट एयर रेगुलेशन, एयर नेविगेशन, एविएशन, मीटियरोलॉजी, एयरक्राफ्ट और इंजन नॉलेज जैसे विषयोंपर आपकी पकड़कितनी है, यह जांचने के लिए लिया जाता है।

पर्सनल इंटरव्यू और डीजीसीए मेडिकल एग्जाम :
लिखित परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवारों को मेडिकल एग्जाम प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जिसका आयोजन डीजीसीए की ओर से किया जाता है।

स्टेप 2
स्टूडेंट पायलट लाइसेंस प्राप्त करना :
यह लाइसेंस प्राप्त करने के लिए आपको एंट्रेंस एग्जाम और ओरल टेस्ट देने पड़ते हैं। ये एग्जाम्स एविएशन स्कूल के चीफ इंस्ट्रक्टर या डीजीसीए के प्रतिनिधि की ओर से आयोजित किए जाते हैं। यह लाइसेंस प्राप्त करने के बाद आप फ्लाइंग ट्रेंनिंग का हिस्सा बन सकते हैं, साथ ही यह लाइसेंस आपको ग्लाइडर्सपर फ्लाइट टेक ऑफ करने या फ्लाइंग क्लब्स से मान्यता प्राप्त छोटे प्लेन्स उड़ाने की योग्यता प्रदान करता है। कैंडिडेट्स ध्यान रखें कि कोर्स कम्प्लीट करने के साथ ही एक कॉमर्शियल पायलट के लिए कम से कम 250 घंटे की फ्लाइट भी कम्प्लीट हो जाना जरूरी है, क्योंकि इतनी उड़ान पूरी करने के बाद ही आप कॉमर्शियल पायलट लाइसेंस के लिए अप्लाई कर सकते है।

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