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एथिकल हैकिंग : नए ज़माने का नया कॅरियर

आज एथिकल हैकर्स सॉफ़्टवेयर इंजीनियर्स से ज़्यादा पैसा कमा रहे हैं

इस साल की हैकर वन की रिपोर्ट के मुताबिक़, भारतीय हैकर्स सॉफ़्टवेयर इंजीनियर्स की तुलना में एक साल में 2.7 गुना पैसा कमा रहे हैं। इनमें भी टॉप हैकर्स या हंटर्स तो 16 गुना तक अधिक कमा रहे हैं। हैकर वन पर रजिस्टर्ड 1.6 मिलियन हैकर्स में से 23% भारतीय हैं। दिसम्बर 2017 में, पूरी दुनिया में साइबर सिक्योरिटी सम्बंधी 72,000 भूलें पाई गई थीं, जिनसे एथिकल हैकर्स ने 23.5 मिलियन डॉलर्स कमाए। इनमें से भी 1.8 मिलियन इंडियन प्रोफ़ेशनल्स की जेब में गए।

नैसोकॉम के मुताबिक़, वर्ष 2022 तक 60 लाख प्रोफ़ेशनल्स की ज़रूरत साइबरसिक्योरिटी में होगी। ज़ाहिर है पिछले कुछ सालों में जैसे साइबर क्राइम बढ़े हैं, उसी गति से प्रोफ़ेशनल एथिकल हैकर्स की मांग भी बढ़ी है। सरकारी हो या ग़ैरसरकारी, हर संस्थान को अपने ऑनलाइन डेटा की सुरक्षा करनी है। अनेक बड़ी कम्पनियां इस क्षेत्र में बिग बाउंटी प्रोग्राम्स संचालित करती हैं। ये प्रोग्राम्स बग्स की खोज करने वाले एथिकल हैकर्स का इनाम होते हैं।

आज बग हंटिंग एथिकल हैकिंग के ज़रिए पैसा कमाने का बड़ा ज़रिया बनकर सामने आई है। मिसाल के तौर पर, फ़ेसबुक कम से कम 500 डॉलर प्रति बग देता है, जबकि आप इसकी मदद से 25,000 डॉलर्स तक कमा सकते हैं। यही कारण है कि युवाओं के बीच एक कॅरियर ऑप्शन के रूप में एथिकल हैकिंग अपनी जगह बनाती जा रही है। आज देश में अनेक सफल एथिकल हैकर्स हैं। आनंद प्रकाश उनमें से एक हैं। 25 साल की उम्र में आनंद ने फ़ेसबुक, गूगल, ड्रॉपबॉक्स, ईबे, पेपाल, ट्विटर जैसी कम्पनियों की सिक्योरिटी में चूक को हाईलाइट किया है। आनंद प्रकाश 2017 में फ़ोर्ब्स मैगज़ीन की अंडर 30 लिस्ट में भी आ चुके हैं। उनसे एक छोटी-सी बातचीत :

-आपके द्वारा बड़ी कम्पनियों में खोजे गए बग्स के बारे में बताइए।
-फ़ेसबुक के लिए मैंने 90 से ज़्यादा बग्स रिमूव किए हैं, और वो भी फ़ेसबुक पर अकाउंट बनाए बिना। एक बग तो ऐसा मिला था, जो यूज़र्स के मैसेजेस और क्रेडिट कार्ड इंफ़ॉर्मेशंस प्राप्त कर सकता था। इसके अलावा मैंने एक और ऐसा सिक्योरिटी लूपहोल खोजा, जिसकी मदद से कोई यूज़र पूरी ज़िंदगी उबर टैक्सी की मुफ़्त में सैर कर सकता था। इसी तरह एक बार मैंने ज़मैटो के  62.5 मिलियन यूज़र्स को हैक होने से बचाया। 

-हैकिंग के लिए क्या चीज़ें ध्यान रखी जानी चाहिए?
-स्टूडेंट्स को किसी कम्पनी के एप्प या वेबसाइट पर इल्लीगल फ़िशिंग से बचना चाहिए। कई बार कोडिंग सीखने के बाद स्टूडेंट्स ग़ैरक़ानूनी ढंग से किसी वेबसाइट को हैक करने की कोशिश करते हैं। इसके लिए उन्हें सज़ा भी हो सकती है। जब तक हमें बिग बाउंटी प्रोग्राम ना ऑफ़र किया जाए, हमें फ़िशिंग और हैकिंग से बचना चाहिए।

-इस फ़ील्ड में कैसे कॅरियर बनाएं?
-अगर आपको कोडिंग लैंग्वेज जैसे एचटीएमएल, पीएचपी, जावा स्क्रिप्ट का नॉलेज है तो आप एथिकल हैकिंग में कॅरियर बना सकते हैं। इसके लिए कोडिंग की बेसिक अंडरस्टैंडिंग ज़रूरी है। इसके अलावा आप बिग बाउंटी प्रोग्राम्स के ज़रिए बड़ी कम्पनियों की वेबसाइट की सुरक्षा का काम भी कर सकते हैं।

-जॉब स्कोप क्या है?
-हर कम्पनी अपने कस्टमर्स के डेटा की सुरक्षा के लिए एथिकल हैकर्स को जॉब देती है। आज देश में एथिकल हैकर्स की जितनी ज़रूरत है, उसको देखते हुए उनकी संख्या बहुत कम है। दूसरी तरफ़ डेटा सिक्योरिटी काउंसिल ऑफ़ इंडिया के मुताबिक़ वर्ष 2025 तक देश का साइबरसिक्योरिटी मार्केट 35 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा। तब तो बहुत संख्या में एथिकल हैकर्स की मांग होगी।

-बेस्ट कोर्सेस?
-इसके लिए आप बी-टेक (साइबर सिक्योरिटी और फ़ोरेंसिक), साइबर फ़ोरेंसिक और इंफ़ॉर्मेशन सिक्योरिटी में एम-एससी की डिग्री ले सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए आप टीनटॉक इंडिया के एक्सपर्ट से चैट कर सकते हैं या expert@teentalkindia.com को ईमेल लिख सकते हैं।

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आपके कॅरियर को नए डाइमेंशन देने के लिए वोकेशनल कोर्सेस

वोकेशनल कोर्सेस स्टूडेंट्स को स्पेशल स्किल्स तो सिखाते ही हैं, उनमें आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की ललक भी पैदा करते हैं
Gousiya Teentalkindia Content Writer

हमारे देश में बेरोज़गारी एक बड़ी समस्या है। इसमें पीछे मुख्य कारण यह है कि लोगों के पास ज़्यादा स्किल्स नहीं हैं। इसके लिए भारत सरकार ने स्किल इंडिया कैम्पेन चलाया है, जिसके तहत लोगों को कुछ स्किल्स में प्रशिक्षित किया जा रहा है। बहुत सारे राज्यों में वोकेशनल कोर्सेस नौवीं और दसवीं क्लास से अवेलेबल रहते हैं। इनमें स्टूडेंट्स को स्पेशल स्किल्स तो सिखाए ही जाते हैं, उनमें आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की ललक भी पैदा की जाती है।

वोकेशनल कोर्स क्या है
वोकेशनल कोर्स में स्टूडेंट्स को किसी फ़ील्ड के ट्रेंड्स के बारे में बताया जाता है। यह सुनिश्चित किया जाता है कि पार्टिसिपैंट्स को जो स्किल्स सिखाई जा रही हैं, उनमें उनको महारत हासिल हो सके। आज देश में अनेक सरकारी और प्राइवेट संस्थाएं युवाओं में वोकेशनल कोर्सेस के बारे में अवेयरनेस फैला रही हैं। इनकी मदद से जॉब पाना आसान होता है।

वोकेशनल कोर्स अनेक फ़ील्ड्स के होते हैं, जैसे हेल्थकेयर, ग्राफ़िक डिज़ाइनिंग, वेब डिज़ाइनिंग, फ़ूड टेक्नोलॉजी, कॉस्मेटोलॉजी। ये ऑटोमोटिव रिपेयर, प्लम्बिंग, एयर कंडीशनिंग जैसे तकनीकी कार्यों का भी प्रशिक्षण देते हैं।

एलिजिबिलिटी
दसवीं से ग्रैजुएट तक की शिक्षा पाने वाला कोई भी इनके लिए ट्राय कर सकता है। ऐसे भी कोर्सेस हैं, जिनमें दसवीं पास नहीं करने वाला भी अप्लाई कर सकता है। अलग-अलग एजुकेशन बैकग्राउंड के लोगों के लिए अलग कोर्सेस हैं।

कुछ पॉपुलर वोकेशनल कोर्सेस :

डिप्लोमा इन ग्राफ़िक डिज़ाइनिंग / वेब डिज़ाइनिंग : ये कोर्स उन स्टूडेंट्स के लिए परफ़ेक्ट है, जो क्रिएटिव हैं। यह अनेक प्राइवेट इंस्टिट्यूट्स में उपलब्ध है। 

होटल मैनेजमेंट : कुकिंग और सर्विंग फ़ूड में इंट्रेस्टेड लोगों को यह ट्राय करना चाहिए। साथ ही हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट में दिलचस्पी लेने वालों के लिए भी इसमें अवसर हैं। अनेक सरकारी और निजी कॉलेज इसमें लॉन्ग और शॉर्ट टर्म कोर्सेस ऑफ़र करते हैं।

टूरिज़्म : यह फ़ील्ड इंडिया में तेज़ी से उभर रही है और अब यह एक इंडस्ट्री का रूप ले चुकी है। इसमें आपको ट्रैवल करने का भी मौक़ा मिलेगा। इसमें आप डिप्लोमा या डिग्री कोर्स कर सकते हैं।

वोकेशनल कोर्सेस में डिप्लोमा 

टेलीकम्युनिकेशन
कम्प्यूटर साइंस
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग
कैटरिंग मैनेजमेंट

इन वोकेशनल कोर्सेस में सर्टिफ़िकेट कोर्स

ब्यूटी कल्चर
हेयर डिज़ाइन
हाउसकीपिंग
क्लिनिक न्यूट्रिशन
कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन
ऑफ़िस मैनेजमेंट

वोकेशनल कोर्सेस करने के फ़ायदे

ये आपको प्रैक्टिकलिटी सिखाते हैं
ये देश में स्किल्ड लोगों की तादाद बढ़ाते हैं
ये किसी विषय के नॉलेज के साथ ही क्रिएटिविटी भी बढ़ाते हैं
इन्हें करने के बाद जॉब मिलने की सम्भावना बढ़ जाती है

वोकेशनल कोर्सेस देने वाले कॉलेज

अब्दुल कलाम इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजिकल साइंस
फ़ोन : 087452 57350
http://www.akits.ac.in/

इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट, देहरादून
फ़ोन : 070601 30567
http://www.itmddn.com/

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