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Bloggers, SEO Experts, Digital Marketers: Career in New Age Media

Internet and social media have increased the scope of media and have also strengthened the prospects of jobs available in this industry
Gousiya Content Writer

Media is no longer limited to the traditional areas of radio, television, and newspaper. With the advent of Digital Segments, the scope of the media has now become more extensive than ever. New Age Media i.e. online media has now emerged as an even stronger pillar of this area, including social media platforms like Facebook, Twitter, Instagram. The rapidly growing use of the Internet has strengthened this area around the world.

Increased internet users

  • In fact, the number of internet users, which was just 48 million in 2012, has reached 500 million now and in 2017 the number of active websites on the Internet was about 1.8 billion. Clearly, communication is now moving from offline to online and due to this, career opportunities in the new areas of the media are constantly increasing.
  • In this case, if you are also looking for job prospects in the field of mass communication, it will be interesting to know about the areas of employment available in this area.

What's New Age Media

New Age Media, distinct from Traditional Media, has now emerged as a strong medium of mass communication. New Age Media refers to the availability of online content on any digital device.

In this area of ​​media, people not only play their part but can also give feedback. Websites, blogs, newsletters, email, and social media platforms are part of New Age Media.

Here are a few possibilities:

  • Due to the increasing use of the Internet, employment prospects in this area have emerged on a large scale. Today there are more than a billion users on Facebook and 241 million active accounts on Twitter.
  • Similarly, a lot of people are actively active in other mediums of social media. Looking at the popularity of these social media platforms among the people, a large number of professionals are being sought to manage them.
  • For many such rolls, there is a lot of job opportunities in social media.

Print media

About 1,05,443 newspapers are registered in the Registrar of Newspapers for India. Apart from this, 40% of growth has been witnessed in the Newspaper's Readership in the last three years. Most of these online versions of newspapers are also available where the demands of Professionals are continuous.

TV journalism

Besides the news reports in the TV sector along with the increasing news channels, there is a demand for the posts of cameramen, news editor, bulletin producer and video editor for the technical team. On the other hand, the introduction of online channels has created jobs related to New Age Media.

Public relation

Public relation is a major contributor to the promotion of a company. The stronger that a company's PR team will be, the greater the engagement of that company.

In the field of online promotion, there are many job opportunities in the form of PR Professionals.

Radio industry

  • In the last 10 years, the number of radio channels in the country has seen an increase of 120 percent. In this field, the number of times in the job of radio jockeys, producers, sound artists, voice-over artists can be seen clearly.
  • Internet and social media platforms have increased the scope of the media and strengthened the prospects of the jobs that are available here.

Here are a few profiles:


By introducing you as a professional blogger, you can conceptualize, write, edit and promote content for a corporate or personal blog. Here you can also deliver content for web articles that are published on a company or institute blog.

SEO Expert

A search engine Optimization Expert works on an organization's social media strategy so that its visibility can be increased. These professionals manage all social media platform handles of organizations, with enhancing customer and client engagement and updating them regularly with the latest information.

Digital Marketing Expert

Here we have to work with the techniques of developing online marketing strategies of the company's products, web analytics, email marketing, and search optimization. At the same time, digital marketing is also a task of converting the company's brand among more and more people.

Social Media Content Writer

They have to update the information on the official website of a client or company. In addition to managing digital content on social media platforms, there is also a provision of content for official online communication such as e-Letters, e-mailers, and newsletters.

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साइकोलॉजी आपको कॅरिअर के कई विकल्प देता है

जानिए साइकोलॉजी के फील्ड में आपके लिए क्या संभावनाएं हैं।
Gousiya Content Writer

कोई भी व्यक्ति कैसे सोचता है? या विभिन्न स्थितियों में किसी व्यक्ति का व्यवहार बदल कैसे जाता है? या किसी अजनबी से बात करते समय एक व्यक्ति असहज क्यों हो जाता है, जबकि कई लोगों को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे किससे बात कर रहे हैं?

अगर इन प्रश्नों की तलाश आपको रहती है तो निश्चित ही आपकी रुचि साइकोलॉजी में है। ऐसे में इस विषय में कॅरिअर की तलाश आपको कामयाबी की ओर ले जा सकती है। जानिए साइकोलॉजी के फील्ड में आपके लिए क्या संभावनाएं हैं।

साइकोलॉजिस्ट बनने के लिए बारहवीं में आप किसी भी स्ट्रीम को चुन सकते हैं। हालांकि आजकल बहुत-से स्कूल्स अपने करिकुलम में साइकोलॉजी को भी ऑप्शनल सब्जेक्ट के रूप में ऑफर करते हैं। इसके बारे में अपने अंदर बेसिक समझ पैदा करने के लिए आप बारहवीं कक्षा में ही मनोविज्ञान को सब्जेक्ट के रूप में अपनाएं।

साइकोलॉजी में बैचलर्स

- साइकोलॉजी में बैचलर (बीए या बीएससी) डिग्री कोर्स करना एक साइकोलॉ़जिस्ट बनने के लिए फाउंडेशन का काम करता है। इस डिग्री के दौरान एक स्टूडेंट को इस कोर्स से जुड़े सभी विषय पढ़ने को मिलते हैं, जो आपको आपकी रुचि के बारे में जानने में हेल्प करता है। इस कोर्स के दौरान स्टूडेंट्स, जनरल साइकलॉजी, क्लिनिकल साइकोलॉजी, सोशल साइकोलॉजी, डेवलपमेंट साइकोलॉजी, ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर आदि सब्जेक्ट्स का अध्ययन करते हैं। आमतौर पर साइकोलॉजी से जुड़े हुए विषयों में थ्योरिटिकल मैटर अधिक पढ़ना पड़ता है, लेकिन इसके

स्टैटिस्टिक्स सब्जेक्ट में न्यूमैरिकल एप्लिकेशंस की स्टडी भी शामिल है।

पोस्ट ग्रेजुएशन

- पोस्ट ग्रेजुएशन में एडमिशन लेने के लिए बहुत-से कॉलेज एंट्रेंस टेस्ट लेते हैं। ग्रेजुएशन में अलग सब्जेक्ट या स्ट्रीम वाले स्टूडेंट्स भी साइकोलॉजी में पोस्ट ग्रेजुएशन कर सकते हैं। इस दौरान आपको अपनी विशेषज्ञता का क्षेत्र चुनना पड़ता हैं और किसी निर्धारित टॉपिक का गहरा अध्ययन करन होता है। इस कोर्स में आपको किसी विशेषज्ञ के निर्देशन में दो से तीन महीनों का रिसर्च कार्य भी करना पड़ता है।

साइकोलॉजी क्षेत्र में अवसर

- पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद बहुत-से अवसर उपलब्ध हैं, जैसे- एनजीओ, ओल्ड एज होम्स, रिहैबिलिटेशन सेंटर आदि। इनमें काउंसलर्स की जरूरत होती है। इन समस्याओं में क्लाएंट्स के जीवन की दर्दनाक घटनाएं या रिलेशनशिप्स की समस्याएं भी शामिल होती है। इसी तरह ओल्ड एज होम्स में काउंसलर्सपरिवार जैसा माहौल बनाने की कोशिश करते हैं।

कॅरिअर के विकल्प

- साइकोलॉजी क्षेत्र में प्रैक्टिस करना चाहने वाले साइकोलॉजिस्ट्स और काउंसलर्स के लिए रिहैबिलिटेशन काउंसिल ऑफ इंडिया में रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य है। एक क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट (आरसीआई) के रूप में प्रैक्टिस करने के लिए कैंडिडेट का एमफिल होना जरूरी है।

एजुकेशन क्षेत्र में :

साइकोलॉजिस्ट्स के लिए यह अवसरों से भरा क्षेत्र है। स्कूल्स में काउंसलर्स, ट्रेनर्स, कॅरिअर काउंसलर्स आदि विभिन्न जॉब्स उपलब्ध होती हैं। एक साइकोलॉजिस्ट, स्टूडेंट्स को विभिन्न बुरे अनुभवों से उबरने और स्ट्रेस फ्री रहने में मदद करते हैं। इसके अतिरिक्त स्कूल का माहौल  सकारात्मक बनाना भी इन्हीं का काम होता है। इन क्षेत्रों में इन प्रोफेशनल्स की डिमांड सबसे अधिक होती है।

क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट :

- एमफिल कैंडिडेट्स इंडिपेंडेंट प्रैक्टिस कर सकते हैं। किसी साइकैट्रिस्ट के समान ये भी मरीजों को बहुत-सी थैरेपी देते हैं। हालांकि साइकैट्रिस्ट बनने के लिए एमबीबीएस करने के बाद पीजी में साइकैट्री सब्जेक्ट चुनना होता है। एक साइकोलॉजिस्ट मरीजों को दवाइयों के बारे में सलाह नहीं दे सकता।

ऑर्गेनाइजेशनल साइकोलॉजिस्ट :

- ये साइकोलॉजिस्ट्स, मल्टीनेशनल कंपनियों और ऑर्गेनाइजेशंस के साथ ही विभिन्न कंपनियों संस्थानों के ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट और एचआर विभाग में काम करते हैं। इन प्रोफेशनल्स का मुख्य काम उस संस्थान के कर्मचारियों की समस्याओं को सुलझाना होता है।

रिसर्च :

- यदि आप रिसर्च करना चाहते हैं, तो इस क्षेत्र में क्वालिटेटिव और क्वांटिटेटिव, दोनों तरह की रिसर्च की जा सकती है। आप इस क्षेत्र में पीएचडी भी कर सकते हैं।

यहां से करें पढ़ाई

- दिल्ली यूनिवर्सिटी

- टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज

- जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी

- अंबेडकर यूनिवर्सिटी

- पंजाब यूनिवर्सिटी

- बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी

- अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी

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