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मिलेनियल्स के लिए 6 सबसे अच्छे गवर्नमेंट जॉब

हालांकि अच्छी सैलेरी के लिए हाईली एजुकेटेड लोग प्राइवेट जॉब्स की दिशा में जा रहे हैं, लेकिन गवर्नमेंट जॉब्स की चमक भी अभी बरक़रार है


इंडिया में लाखों लोग गवर्नमेंट जॉब्स के लिए अप्लाई करते हैं। सरकारी नौकरियों में जॉब सिक्योरिटी और वर्क-लाइफ़ बैलेंस कॉर्पोरेट जॉब्स की तुलना में कहीं बेहतर है। सरकारी नौकरी आपके रिटायरमेंट के बाद भी आपकी फ़ाइनेंशियल स्टैबिलिटी का ध्यान रखती है। इसीलिए हर साल हज़ारों उम्मीदवार सरकारी इम्तिहानों के लिए बैठते हैं। यहां हमारे टीनटॉकइंडिया एक्सपर्ट्स आपको इंडिया के हाईएस्ट पेइंग गवर्नमेंट जॉब्स के बारे में बता रहे हैं :

इंडियन फ़ॉरेन सर्विसेस (आईएफ़एस) : 
इसके लिए अधिकारियों का चयन यूपीएससी के द्वारा संचालित सिविल सर्विसेस एग्ज़ाम के माध्यम से होता है। ये डिप्लोमैट्स विदेश में अपने देश को रिप्रज़ेंट करते हैं। आईएफ़एस अफ़सरों का दो-तिहाई समय देश से बाहर ही बीतता है। वो एक देश में अधिक से अधिक तीन साल तक रह सकते हैं। उन्हें ग्रेड ए एम्प्लायी की सैलेरी और सुविधाएं मिलती हैं। फिर उन्हें यूएन द्वारा जारी किए गए कॉस्ट ऑफ़ लिविंग इंडेक्स के आधार पर अतिरिक्त भत्ता भी दिया जाता है। उनका वेतन 3 से 4 हज़ार डॉलर तक होता है। उनके बच्चों को इंटरनेशनल स्कूलों में मुफ़्त शिक्षा दी जाती है। उन्हें ऑफ़िशियल लग्ज़री कार मिलती है। मेडिकल सुविधाओं और एयर ट्रैवल का पैसा भी उन्हें नहीं चुकाना होता।

आईएएस और आईपीएस :
ये भारत के सर्वाधिक मनचाहे जॉब्स हैं। इन अफ़सरों को भांति-भांति की फ़ील्ड‌्स में काम करने का मौक़ा मिलता है और वे देश की पॉलिसी मेकिंग का एक हिस्सा होते हैं। इन्हें एंट्री लेवल पे के रूप में महंगाई भत्ते के साथ 50 हज़ार रुपया वेतन दिया जाता है। एक सरकारी गाड़ी, बड़ा बंगला और रियायती दर पर बिजली दी जाती है। विदेशी विश्वविद्यालयों में उच्चशिक्षा के लिए भी सरकार से इन्हें स्पॉन्सरशिप मिलती है।

डिफ़ेंस सर्विसेस : 
इन्हें सिविल सेवा के अधिकारियों से ज़्यादा वेतन और सुविधाएं मिलती हैं। लेकिन उनके जॉब में बहुत जोखिम और एडवेंचर होता है। इसके लिए एनडीए, सीडीएस, एएफ़सीएटी के इम्तिहान क्लीयर करना होते हैं। इन्हें एंट्री लेवल पे के रूप में महंगाई भत्ते के साथ 50 हज़ार रुपया वेतन दिया जाता है। मुफ़्त आवास, राशन और यूनिफ़ॉर्म भत्ता दिया जाता है। चाइल्ड एजुकेशन अलॉवेंस और रिटायरमेंट के बाद पेंशन दी जाती है।

डीआरडीओ और इसरो के वैज्ञानिक और इंजीनियर :
रिसर्च एंड डेवलपमेंट में गहरी रुचि रखने वाले युवा इंजीनियर इसके माध्यम से इंडिया की ग्रोथ स्टोरी का हिस्सा बन सकते हैं। इन संस्थानों में काम करना बहुत सम्मान का भी विषय माना जाता है। इन्हें एंट्री लेवल पे के रूप में 55-60 हज़ार रुपया वेतन दिया जाता है। घर का भाड़ा और परिवहन भत्ता दिया जाता है। हर छठे महीने बोनस दिया जाता है।

पीएसयू जॉब :
किसी पीएसयू में जाने का सबसे अच्छा तरीक़ा है गेट का इम्तिहान। कॉर्पोरेट जॉब्स पसंद नहीं करने वाले इंजीनियर्स भेल, एचसीएल, आईओसीएल, ओएनजीसी, एचपी जैसे कम्पनियां चुन सकते हैं। उनकी अनुमानित सीटीसी महंगाई भत्ता सहित 10 से 12 लाख सालाना होती है। इसके अलावा कम्पनी अकोमोडेशन या एचआरए दिया जाता है, प्लांट बेस्ट लोकेशन के लिए स्पेशल कम्पेनसेटरी ऑफ़ दिया जाता है, शिफ़्टिंग के लिए भी अलॉवेंस दिया जाता है।

गवर्नमेंट कॉलेज में लेक्चरर या प्रोफ़ेसर :
पढ़ाने की नौकरी बहुत शांतिपूर्ण होती है। इसमें आपको बहुत अच्छा लाइफ़-वर्क बैलेंस मिलता है और अपनी छुटि्टयों का मज़ा लेने का भरपूर समय भी प्राप्त होता है। आईआईटी, एनआईटी जैसे इंस्टिट्यूट्स ज़्यादा पैसा देते हैं। असिस्टेंट प्रोफ़ेसर को एंट्री लेवल पे के रूप में 40-50 हज़ार रुपया वेतन दिया जाता है। मेडिकल सुविधाएं, अकोमोडेशन, लैपटॉप अलॉवेंस दिया जाता है। पीएचडी डिग्रीधारकों को ज़्यादा वेतन मिलता है। किसी टेक्निकल कॉलेज में एक असिस्टेंट प्रोफ़ेसर को इनिशियल सैलेरी के रूप में 75000-80000 रुपया दिया जाता है।

अगर आप आर्थिक रूप से सुरक्षित और स्थायित्व से भरा जीवन चाहते हैं तो सरकारी नौकरी सबसे बेहतर विकल्प है। लेकिन ये जॉब पाने के लिए आपको कॉम्पीटिटिव एग्ज़ाम में जमकर तैयारी करना होती है। बेहतर होगा इसके लिए टीन एज से ही शुरुआत कर दें। 

अगर आपके पास कोई और कॅरियर सम्बंधी सवाल हैं, तो https://www.teentalkindia.com/contact-us पर हमारे टीनटॉकइंडिया एक्सपर्ट से सम्पर्क करें।

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ग्रुप डिस्कशन को कैसे क्रैक करें

आप अपनी कम्युनिकेशन से अच्छा इम्प्रेशन बना सकते हैं।
Ritika SrivastavaTeentalkindia Counsellor

कम्यूनिकेशन स्किल जिंदगी के हर पड़ाव पर काम आती है, खासतौर पर कॉर्पोरेट जॉब और हायर एजुकेशन में। दरअसल पहला इम्प्रेशन ही लास्ट इम्प्रेशन होता है। जिस तरह से आप बात करते हैं वो बताता है कि आप आगे चलकर किस तरह के प्रोफेशन का हिस्सा बन सकते हैं। ग्रुप डिस्कशन (जीडी) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसका इस्तेमाल ज्यादातर कॉर्पोरेट, यूनिवर्सिटीज और बड़े ऑर्गेनाइजेशन्स में किया जाता है। ये पार्टिसिपेंट्स की कम्युनिकेशन स्किल को परखने का एक तरीका होता है। यहां हम आपको बता रहे हैं अपनी कम्युनिकेशन से अच्छा इम्प्रेशन बना सकते हैं।



जीडी में किस तरह की स्किल्स को परखा जाता है-

दूसरों के साथ बात करते वक्त आप कितने अच्छे हैं?

आप एक समूह के भीतर कैसे व्यवहार और बातचीत करते हैं?

क्या आप खुले विचारों वाले व्यक्ति हैं?

आपमें सुनने का कौशल है या नहीं?

आप अपने विचार कैसे रखते हैं?

टीम को लीड करने की क्वालिटी

चीजों को समझने और टॉपिक की नॉलेज।

एटीड्यूड और आत्मविश्वास।


कैसी होती है जीडी की प्रक्रिया
पहल करें: फैक्ट्स और आंकड़ों के साथ विषय की पूरी जानकारी होना ही काफी नहीं है। कम से कम विषय की बुनियादी जानकारी भी अच्छी होनी चाहिए। अपनी स्पीच को दिलचस्प बनाने के लिए, आप एक उदाहरण के साथ शुरू कर सकते हैं जो टॉपिक को समझाने में मदद करे।

लीड करें: हो सकता है जीडी में कई बार ऐसा हो कि आपको टॉपिक जानकारी ना हो। ऐसे में अन्य लोगों की बात ध्यान से सुनें और समझें। फिर खुद को एक बार चर्चा से जोड़ें और कोशिश करें की आप जीडी को लीड करें।

चीजों को छोटा करें: जिस भी टॉपिक पर चर्चा हो रही हो उसे छोटे-छोटे में पॉइन्ट्स में समझाएं। पॉइन्ट्स भी वही बनाएं जिनसे टॉपिक का पूरा सारांश समझ आ रहा हो।

GD क्रैक करने के नियम:
1) अपीरियंस: फॉर्मल कपड़े पहनें। खुद को इस तरह से रखें कि जो भी देखे आपकी तारीफ करे।
2) आई कांटेक्ट करें: आपका आत्मविश्वास आपकी आंखों में दिखता है। इसलिए चर्चा के दौरान अन्य लोगों से आई कॉन्टैक्ट करें।
3) डॉमिनेट करने से बचें: हमेशा याद रखें कि चर्चा एक लड़ाई नहीं है। इसलिए किसी भी विषय में खुद को शांत रखें और किसी पर भी हावी ना हों।
4) दखल देने से बचें: किसी से बात करते समय बीच में टोकें नहीं। हर किसी के पास अपनी सोच है। हर एक का सम्मान करें।
5) विचारों और आवाज को स्पष्ट रखें: हमेशा अपनी आवाज को स्पष्ट रखें। इसके साथ ही अपने विचारों को भी स्पष्ट रूप से रखें।
6) टॉपिक से ना भटकें: अपने विचार रखते वक्त विषय से ना भटकें।
 
जीडी तीन प्रकार का होता है:
1) विषय आधारित जीडी: ये किसी खास टॉपिक पर आधिरित हो सकता है। जैसे "कैसे प्लास्टिक धरती को नुकसान पहुंचा रही है।"
2) केस-आधारित जीडी: ये किसी भी केस स्टडी पर आधारित हो सकता है, जो असल जिंदगी में स्थिति को दिखाता हो। इसमें ग्रुप को पहले से रिसर्च वर्क दिया जाता है और इसकी तैयारी के लिए कुछ समय भी दिया जाता है। ग्रुप को स्टडी समझना होता है और हल करने के लिए समाधान ढूंढना होता है।
3) आर्टिकल बेस्ड जीडी: इस तरह के जीडी में उम्मीदवारों को आर्टिकल दिया जाता है। यह राजनीति, खेल, टेक्नोलॉजी से जुड़ा हुआ सकता है। उम्मीदवारों को चर्चा के लिए समय दिया जाता है। इससे पता लगाया जाता है कि उम्मीदवार अपने आस-पास होने वाली चीजों को लेकर कितने अवेयर है।
ग्रुप डिस्कशन एमबीए और दूसरे कॉम्पिटीटिव एग्जाम्स में कराया जाता है, ये अपनी नॉलेज को बताने का एक बेहतरीन तरीका होता है।

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