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एक बुली की साइकोलॉजी

कुणाल से मिलिए, जिसे उसके क्लासमेट्स और टीचर्स द बुली कहकर बुलाते हैं। और अलबत्ता आपको भले ऐसा ना लगे, लेकिन कुणाल की भी अपनी एक कहानी है, जिसे वो हमें सुनाना चाहता है। तो आइए, सुनते हैं...

वो बदनाम लड़ाई
कभी-कभी जब मैं शब्दों में अपने इमोशंस को बयां नहीं कर पाता, तो मैं किसी को मारने लगता हूं। मुझे लगता है कि किसी को हिट करना चीज़ों का सबसे अच्छा सॉल्यूशन है। तब मैं अपनी नज़रों में ख़ुद को क्या समझता हूं? पूरी क्लास के लिए मैं बदनाम हूं। वो मुझे मुश्किलें पैदा करने वाले इंसान के नाम से जानते हैं।

लेकिन ऐसे अनेक मौक़े आए हैं, जब दूसरे किड्स ने मुझे छेड़ा है, हैरेस किया है या मेरा मज़ाक़ तक उड़ाया है। लेकिन लगता है जैसे कोई भी उन बातों को इम्पोर्टेंस ही नहीं देना चाहता। मुझे अच्छी तरह याद है, जब विक्रम और रौनक ने डांस सेशन के दौरान पूरी क्लास के सामने मेरी पैंट्स खींच दी थी, तब तो किसी ने मुझे सपोर्ट नहीं किया था। मैं शर्मिंदा हो गया था। मैं ग़ुस्से से भरा था। लेकिन जब मैंने इशान को मारा और उसे चोट लग गई तो टीचर्स और पैरेंट्स ने मुझे ख़ूब डांटा-फटकारा। लेकिन किसी ने भी मेरी कहानी जानने की कोशिश क्यों नहीं की? मैंने उसके साथ केवल इसलिए ऐसा किया, क्योकि वो भी मुझे चिढ़ा रहा था और मेरा मज़ाक़ उड़ा रहा था। लेकिन उसे मारने के बाद मेरे क्लासमैट्स के पैरेंट्स एकजुट हो गए और मुझे दो दिन के लिए स्कूल से बाहर करवा दिया गया। मुझे लगा मैं अकेला पड़ गया हूं और मुझे ठीक से समझा नहीं गया। लेकिन तब मुझे मदद मिलना शुरू हुई।

बंद दरवाज़ों के पीछे
जब मैं अपने काउंसलर से मिला, तो मैं उनसे बातें नहीं करना चाहता था। लेकिन आख़िरकार मैं समझ गया कि वो मेरा बुरा नहीं चाहते। हम हरी दीवारों वाले एक क्लासरूम में मिलते थे, जिसकी खिड़कियों से आप नारियल के बड़े पेड़ देख सकते थे। शुरू में मुझे लगा कि वो मुझे समझ नहीं पाएंगे। लेकिन धीरे-धीरे मैं उनकी कम्पनी में सेफ़ महसूस करने लगा। उन्होंने मुझे किसी चीज़ के लिए जज नहीं किया। एक समय बीतने के बाद मैं उनसे अपनी सीक्रेट बातें शेयर करने लगा। जैसे कि मैंने आज तक ये किसी को नहीं बताया था कि मुझे क्लासिकल संगीत पसंद था, या मुझे तैरना अच्छा लगता था। मैं चाहता भी नहीं था कि कोई उनके बारे में जाने। मैं एक फ़ुटबॉल कैप्टेन की तरह होना चाहता था- मज़बूत, हैंडसम और मैस्क्युलिन। वैसे भी स्कूल के सभी कूल किड्स फ़ुटबॉल में अच्छे होते हैं। मुझे पसंद है फ़ुटबॉल। मेरा सपना था कि अपने स्कूल के लिए फ़ुटबॉल मैच जीतने के बाद अपनी कमीज़ उतारूं और उसे लहराते हुए पूरी फ़ील्ड का चक्कर लगाऊं। लेकिन मेरा सिलेक्शन ही नहीं किया जाता था। मेरे पैरेंट्स भी हर चीज़ के लिए मुझे ही ब्लेम करते थे। अब मैंने उनसे बात करना ही बंद कर दिया है।

पैरेंट-टीचर पार्टनरशिप
जब से काउंसलर मेरे जीवन में आए, मैं अपने में कुछ पॉज़िटिव चेंजेस देखने लगा हूं। आज स्कूल में मेरे टीचर ने मुझे एक फ़िजटी टॉय दिया और कहा, जब मैं भी एंग्ज़ाइटी फ़ील करूं तो इससे खेलने लगूं। यह कूल था। मेरे पैरेंट्स भी अब मेरी लाइफ़ में इंट्रेस्ट लेने लगे हैं। वो मेरी कहानी सुनते हैं और मुझे ब्लेम नहीं करते। मुझे कहा गया है कि अगर मैं स्कूल में किसी स्टूडेंट को मारूंगा तो दो महीने तक फ़ुटबॉल नहीं खेल पाऊंगा। मेरे ख़याल से इसके बाद किसी को मारने के लिए मेरे पास कोई बहुत ही ज़ोरदार वजह होनी चाहिए। मुझे अपने ग़ुस्से पर क़ाबू पाने में अभी भी मुश्किल आती है, लेकिन मैं रैशनली सोचने का प्रयास करता हूं। मैं अकेला फ़ील करता हूं तो अपने कज़िन से बात करता हूं। मुझे अब भी लगता है कि मैं बहुत सारी चीज़ों में फ़िट नहीं हूं, लेकिन मैं उन चीज़ों पर फ़ोकस करने की कोशिश करता हूं, जिनमें मैं अच्छा हूं। शायद मैं इस तरह से कुछ बेहतर कर सकूंगा।

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Nishtha JunejaTeentalkindia Content Writer

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