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All about Rote Learning

Rote learning is something that cannot be omitted from the educational system as it has its own benefits. Also, it is not ideal in all scenarios. Let's see the advantages and disadvantages of Rote Learning
Snigdha Counsellor

While studying, we tend to apply a bunch of techniques to prepare for our examinations. One prominent technique that is followed by many is Rote Learning.

Rote learning is defined as a memorizing technique which is based on repetition. The idea is to repeat something over and over till it is completely documented in the brain for later retrieval. We all have applied Rote learning in our life knowingly or unknowingly. During childhood, we applied Rote learning while memorizing alphabets, numbers, rhymes, days, months, multiplication tables and spelling words. In high school, we applied it while memorizing the formulas of chemical elements, or the formulas in mathematics.

Parents and teachers tend to recommend children to memorize things in their childhood years and gradually it becomes a habit. However one simply learns better if he/she understands the concept behind it.

Recently new techniques like associative learning, meta-cognition, and critical thinking have been replacing the Rote learning technique.

Our Teentalkindia Experts shared the advantages and disadvantages of Rote Learning.

Advantages

-A fast and easy way of memorizing and recalling things.

-In Rote learning, the memorized data is stored in our memory, we can use that data as and when we need it.

-Adapting and using this technique will help in doing advance problem-solving.

-Beneficial for children in memorizing alphabets, numbers, etc.

-There are children with special needs who can only use Rote learning.

-It is also helpful in learning foreign languages.

-This technique helps to build the foundation which can be used in learning and understanding advanced concepts.

-It doesn’t require referring to any extra sources.

-It helps in storing our knowledge quantitatively.

 

Disadvantages

-There is a chance of forgetting things if we stopped using it for a long time.

-Things are memorized by repetition so people won’t pay much attention in understanding the facts.

-There is less chance of recalling it without understanding it.

-This technique doesn’t support critical thinking and problem-solving skills.

-It doesn’t give a chance to understand the concepts behind the memorization.

Rote learning is something that cannot be omitted or dismissed from the educational system as it has its own benefits. Also, it is not ideal in all scenarios. However, it can be clubbed with other learning techniques like conceptual or meaningful learning which also gives an option of critical thinking while providing all the facts. It will give us a more fruitful result if we use it with other learning techniques.

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टीनएजर्स कैसे पढ़ाई के साथ हॉबीज फॉलो करें ?

आसान टिप्स के जरिए पढ़ाई के साथ शौक को भी रखे जारी
Richa DubeyContent Writer

टीनएज में पढ़ाई के साथ अपनी हॉबीज को बनाएं रखना भी एक अहम काम है। यहां हम आपको कुछ टिप्स दे रहे हैं जिनकी मदद से आप पढ़ाई के साथ-साथ अपनी हॉबीज को भी अच्छी तरह से फॉलो कर सकेंगे।


टीनएज में बच्चे शारीरिक और मानसिक बदलाव से गुजरते हैं। इस आर्टिकल के जरिए हम टीनएज बच्चों की उलझनों को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं। दरअसल इस उम्र में बच्चे अपनी जिंदगी के अहम मोड़ से भी गुजरते हैं, जब उन्हें अपने शौक और पढ़ाई में से किसी एक को चुनना होता है। पढ़ाई जहां एक तरफ अच्छे मार्क्स लाने और अपने करिअर को सही दिशा देने के लिए जरूरी है। ठीक उसी तरह हॉबीज पर्सनालिटी को निखारने मदद करती है। इसके अलावा ये करिअर का एक अन्य विकल्प भी हो सकती है। हर किसी की हॉबीज अलग-अलग होती हैं। पढ़ाई के साथ अपनी हॉबी से जुड़े रहना लाइफ को अलग तरह से आगे बढ़ने में करता है।
यहां कुछ टिप्स हैं जिनकी मदद से आप पढ़ाई के साथ अपनी हॉबी से जुड़े रहेंगे।
लक्षय तय करिए और प्लान बनाइए
नॉर्मन विंसेंट पील का एक फेमस कथन है- 'हर सफल व्यक्ति को अपना लक्ष्य पता होता है। सफलता तब तक नहीं मिलती है जब तक ये ना पता कि जीवन में हमें कहां जना है और क्या हासिल करना है।'
ये बिलकुल सही कहा गया है- अगर आपके पास लक्ष्य नहीं हैं तो आप सफल नहीं हो सकते हैं। इसलिए सबसे लक्ष्य निर्धारित करें और अपने शौक को समय जरूर दें। इसके बाद आप आसानी से पढ़ाई के साथ अपने शौक के लिए समय निकाल पाएंगे।
आप उन लोगों के साथ वक्त बिताएं जिनकी हॉबीज आपकी तरह हैं
अपनी हॉबी को बनाएं रखने के लिए इसे लेकर ज्यादा तनाव ना लें। क्योंकि हॉबीज हमेशा ही तनाव को कम करती है। अपनी हॉबी को जारी रखने के लिए परिवार और दोस्तों के साथ इसे आगे बढ़ाएं। इसके बाद क्लब या क्लासेस ज्वाइन करें।
अपनी हॉबी से जुड़े सोशल मीडिया ग्रुप ज्वाइन करें और प्रोफेशनल लोगों को फॉलो करें
खुद को डीमोटीवेट होने से बचाना बहुत जरूरी है। फील्ड प्रोफेशनल्स डीमोटीवेट होने से बचाते हैं। किसी भी चीज की शुरुआत करने पर आप उसमें एक दम नए होते हैं, तो पर्फेक्ट होने का तो सवाल ही नहीं उठता है। ऐसे में प्रोफेशनल्स को फॉलो करना लक्षय हासिल करने में मदद करता है।
प्रोटेक्शन रखना अच्छी बात है, लेकिन ये इतनी भी जरूरी नहीं है
शुरुआत में दिक्कतें महसूस होंगी। क्योंकि आपको पढ़ाई के साथ हॉबी को जारी रखने की आदत नहीं हैं, लेकिन खुद को थोड़ा वक्त देने के बाद ये काफी आसान लगने लगेगा। अंत में यही कहना हैं कि आपको खुद पर किसी भी तरह का प्रेशर फील करने की जरूरत नहीं है। पढ़ाई के साथ हॉबीज को जारी रखना आपकी पर्सनालिटी को निखारने के लिए ये बेहद जरूरी है। आप हॉबीज और पढ़ाई को साथ में लेकर चलिए, इससे करिअर चुनते वक्त आपको परेशानी नहीं होगी। अपनी स्किल्स को सुधारने के लिए अपने परिवार और दोस्तों से उनकी राय जरूर लें। इसके अलावा खुद का आंकलन भी करें।

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